शुगर की बीमारी के लक्षण (DIABETES SYMPTOMS IN HINDI )

यह लेख शुगर की विमारी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से लिखी गई है। इसके अंतर्गत आप शुगर की बीमारी के लक्षण (DIABETES SYMPTOMS IN HINDI ) से संबंधित निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर जान सकेंगे।

डाइअबीटीज़ क्या है, डायबिटीज के प्रकार में टाइप 1 डायबिटीज तथा टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण क्या हैं।, डायबिटीज टेस्ट में एएफपीजी टेस्ट, पीपीबीएस टेस्ट और एचबीए-1सी टेस्ट क्या होता है। प्री-डायबिटीज़ किसे कहा जाता है। इसे कैसे कंट्रोल में रख सकते हैं।

शुगर की बीमारी के लक्षण - DIABETES SYMPTOMS IN HINDI
शुगर की बीमारी के लक्षण – DIABETES SYMPTOMS IN HINDI

भारत में भी तेजी से शुगर रोगी की संख्या बढ़ती जा रही है। इसीलिए यह जरूरी है की शुगर के बारे में विशेष रूप में जानकारी प्राप्त किया जाय। तो सबसे पहले जानते हैं –

डाइअबीटीज़ क्या है – madhumeh kya hai in Hindi

शरीर में किसी खास हार्मोन की कमी के कारण जब ग्लूकोज(शुगर) का शरीर के कोशिका में जमा न होकर, खून में इकट्ठा होने लगता है। तब खून में गलूकोज (शुगर) का लेवल बढ़ जाता है। इससे शरीर पर शुगर की बीमारी के लक्षण दिखाई पड़ने लगते हैं।

अतः खून में ग्लूकोज अर्थात शुगर की मात्रा का बढ़ने से मधुमेह के लक्षण(Sugar ke Lakshan ) उत्पन्न हो जाते हैं। जिसे समान्य भाषा में डाइअबीटीज़ कहा जाता है। इस बीमारी को कई नामों से जाना जाता है जैसे Diabetes, मधुमेह, चीनी की विमारी, शुगर के रोग, डाइअबीटीज़ इत्यादि।

डायबिटीज के प्रकार – Type of diabetes in hindi

अब शुगर की बीमारी के लक्षण समझने से पहले इसके प्रकार के बारें में जानेंगे। अगर आप डाइअबीटीज़ से ग्रसित हैं तो आपको किस तरह की डाइअबीटीज़ है। इसके बारें में भी आप जान सकेंगे।

डॉक्टरों के मुतावीक डायबिटीज दो तरह की होती है टाइप 1 डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज। यदपि दोनो टाइप के शुगर की बीमारी के लक्षण में शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम हो जाती है और ब्लड शुगर का लेवल बढ़ जाता है।

टाइप 1 डायबिटीज क्या है – Type 1 diabetes in Hindi

टाइप 1 डायबिटीज में शरीर के अंदर इंसुलिन क निर्माण नहीं होता है इसे इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज भी कहा जाता है। टाइप 1 डायबिटीज बहुत ही छोटे उम्र में या जन्मजात व्यक्ति में भी हो सकती है। इसमें इंसुलिन बनना बंद हो जाता है।

इस प्रकार का डायबिटीज ज्यादातर आनुवंशिक कारणों से हो सकता है। बच्चों में शुगर के लक्षण होने पर इस रोग को जुवेनाइल डाइबीटीज(बचपन का मधुमेह) भी कहा जाता है। यद्पि यह डाइअबीटीज़ वयस्क में भी हो सकता है।

टाइप 2 डायबिटीज– typs 2 diabetes in hindi

इस डाइअबीटीज़ के लिए खराब लाइफ स्टाइल को सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना जाता है। टाइप 2 डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन का बनना कम हो जाता है। जिसके कारण ग्लूकोज सेल्स में पहुच नहीं पाता है। इस कारण ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है।

टाइप 2 डायबिटीज कई कारण से हो सकते हैं जिसमें नींद की कमी, खराब लाइफ स्टाइल, हाइपरटेंशन, मोटापा इत्यादि शामिल है। आजकल खराब लाइफ स्टाइल के कारण महिलाओं में शुगर के लक्षण बढ़ते जा रहे हैं।

साथ ही आनुवांशिक कारण से भी टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है। इसीलिए मोटापा पर नियंत्रण, संतुलित आहार का सेवन, समुचित व्यायाम, और पर्याप्त नींद के द्वारा इस प्रकार के diabetes को नियंत्रित किया जा सकता है।

जानें शुगर की बीमारी के लक्षण (DIABETES SYMPTOMS IN HINDI )

डाइअबीटीज़ के रोगी को देखते ही शुगर की बीमारी के लक्षण से आप परिचित हो जायेंगे। चोट लगने पर वह स्थान नीला पड़ जाता है अथवा घाव हो जाते है। उनका घाव देर से ठीक होता है। आईये जानते हैं दोनों टाइप के शुगर की बीमारी के लक्षण को समझें

टाइप 1 मधुमेह के लक्षण (Type 1 diabetes symptoms in hindi)

टाइप 1 डायबिटीज के रोगी को अत्यधिक प्यास का लगना, बार-बार पेशाब का आना, ज्यादा भूख का लगना, आँखों का धुंधलापन इत्यादि कई लक्षण मालूम पड़ता है। इसके साथ मधुमेह के लक्षणों में नींद का काम आना, दिल के धड़कन तेज रहना, वजन घटना जैसी समस्या हो सकती है।

मधुमेह टाइप 2 के लक्षण (Type 2 diabetes symptoms in hindi )

बार बार पेशाब आना

टाइप 2  डायबिटीज के लक्षण में रोगी को बार-बार मूत्र का त्याग करना(खासकर रात के बक्त) पड़ता है। रोगी के पेशाब में शुगर के लक्षण का पता आसानी से लगाया जा सकता है।

मधुमेह के रोगी को बार बार पेशाब आना, पैसाव के बाद पैसाव के स्थान पर चींटी का जमा होना इसके लक्षण हैं। यूरिन में शुगर के लक्षण का पता शुगर टेस्ट से आसानी से लगाया जा सकता है।

साथ ही सामान्य से अधिक प्यास का लगना, हमेशा थकान और सुस्ती का अनुभव होना, सिरदर्द, दृष्टि का धुंधलापन शामिल भी इसके लक्षण हो सकते हैं।

इसके अलाबा मधुमेह के लक्षण में मोटापा, घाव या कट जाने पर  देरी से ठीक होना, खाने के थोड़े समय के बाद ही भूख का अनुभव होना, पैरों में दर्द, त्वचा में संक्रमण आती कई लक्षण पैदा हो जाते है।

शुगर लेवल कम होने के लक्षण (Symptoms Of Low Blood Sugar Level)

शरीर में शुगर लेवल कम होने के लक्षण भी शुगर रोगी में दिखाई पड़ता है। उनके शुगर बहुत कम हो जाने पर बेहोशी जैसी हालत हो सकती हैं। इससे बचने के लिए नियमित रूप से ब्लड शुगर की मात्रा की जांच करवाते रहना चाहिये।

हाई ब्लड शुगर लेवल के लक्षण ( Symptoms Of High Blood Sugar Level )

इसमें मरीजों को बार-बार पेशाब आना, प्यास का ज्यादा लगना, थकान व कमजोरी का अनुभव होना, हाथ पैड सुन्न पड़ना, नजर कमजोर होना, स्वभाव चिरचिरा होना शामिल है।

डाइअबीटीज़ का पता कैसे लगाएं – Diabetes test

जांच के कई तरीके से Sugar ke Lakshan का पता लगाया जाता है। यहाँ कुछ प्रमुख तरीके का वर्णन किया गया है जिससे शरीर में आसानी से शुगर के लेवल को पता किया जा सकता है।

फ़ासस्टिग प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट (aFPG TEST)

(नाश्ता के पहले किया जाने वाला टेस्ट )

यह test भूखे पेट की जाती है। खाना खाने के कम से कम 8 घंटों के बाद ही इस टेस्ट का नतीजा सही आता है। अतः यह एफ़पीजी टेस्ट सुबह के नाश्ते से पहले खाली पेट किया जाता है। इस टेस्ट में रोगी के उंगली के सिरे या बांह से ब्लड निकालकर टेस्ट किया जाता है।

पोस्टप्रेंडियल ब्लड शुगर टेस्ट ( PPBS TEST )

(नाश्ता के कम से कम 2 घंटे बाद किया जाने वाला टेस्ट )

पोस्टप्रेंडियल ब्लड शुगर टेस्ट नाश्ता के बाद किया जाता है। यह टेस्ट आमतौर पर एएफपीजी टेस्ट के बाद सुबह नाश्ता के कम से कम दो घंटे बाद किया जाता है।

एचबीए1सी टेस्ट: diabetes in Hindi

अगर शरीर में शुगर की बीमारी के लक्षण दिखाई पड़े तो यह टेस्ट सबसे बेहतर माना जाता है। इसे एचबीए1सी टेस्ट के नाम से जाना जाता है।

शुगर लेवल का पता एकदम लगाने के लिए एचबीए1सी टेस्ट सबसे सटीक तरीका माना जाता है। इस टेस्ट के द्वारा पिछले 2-3 महीने में ख़ून में ग्लूकोज (शुगर) का औसत मात्रा का पता लगाया जाता है।

नार्मल शुगर लेवल कितना होना चाहिए

अगर हम एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में नॉर्मल शुगर लेवल की बात करें तो एक इसकी मात्रा आमतौर पर भूखे पेट 70-110 के बीच होनी चाहिये। जबकि खाना खाने के 2 घण्टे बाद इसकी मात्रा बढ़कर 110-140 के बीच तक होना चाहिए है।

एफ़पीजी टेस्ट से पता चलता है कि खाने के पहले रोगी के ख़ून में ग्लूकोज की कितनी मात्रा है। इस टेस्ट में अगर ब्लड में शुगर की मात्रा 100 के रेंज में तो सामान्य, 100-125 के रेंज को प्री-डाइअबीटीज़ और 126 से ज्यादा को डाइअबीटीज़ के श्रेणी में रखा जाता है।

प्री-डायबिटीज़ क्या है

यह शुगर के विमारी की पूर्वावस्था कह सकते हैं। यदपि कुछ रिसर्चर्स के अनुसार अगर आपका एफ़पीजी 91-99 के रेंज में है, तो आपको सचेत होने की जरूरत है। यह प्री-टाइप 2 डायबिटीज़ होने का संकेत हो सकता है।

अगर ए1सी जांच के नतीजे 5.7% से कम है तो शुगर कंट्रोल समझा जा सकता है। अगर टेस्ट के नतीजे 5.7% से 6.4% की रेंज में हैं तो यह प्री- डाईबेटिस के लक्षण को दर्शाता है और सचेत होने का समय है। लेकिन टेस्ट के नतीजे अगर 6.5% या उससे ज़्यादा हैं, तो डायबिटीज़ की निशानी है।

इस टेस्ट में अगर ब्लड में शुगर की मात्रा 140 के रेंज में तो सामान्य, 140-199 के रेंज को पूर्व मधुमेह के लक्षण और 200 से ज्यादा को डाइअबीटीज़ के श्रेणी में रखा जाता है।

डायबिटीज के लक्षण और निदान

डायबिटीज के लक्षण और उपाय में हम सबसे ज्यादा इंसुलिन का नाम सुनते हैं। शरीर में इंसुलिन की कमी से ग्लूकोज शरीर के कोशिका के बजाय ब्लड में जाम होने लगता है।

जिससे शरीर में शुगर की बीमारी के लक्षण (DIABETES SYMPTOMS IN HINDI ) दिखाई पड़ने लगते हैं और रोगी डायबिटीज का शिकार हो जाता है।

डाइअबीटीज़ के इलाज में इंसुलिन की भूमिका

हम इनर्जी प्राप्ति के लिए भोजन ग्रहण करते है। शरीर में भोजन के पाचन के बाद उनसे निकली ग्लूकोज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। इस दौरान इंसुलिन की अहम भूमिका होती है। अतः पहले हम इंसुलिन के बारें में समझते हैं। इं

सुलिन क्या होता है। इंसुलिन मानव शरीर के अंतर्गत अगनाश्य या पैनक्रियाज नामक ग्रन्थि में बनने वाला एक तरह का हार्मोन है। इंसुलिन ही शरीर में ग्लूकोज के लेवल को नियंत्रित करता है। इंसुलिन की मदद से शरीर में बनने बाली ग्लूकोज शरीर के सेल्स में स्टोर हो जाता है।

चूंकि टाइप 1 डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन बनता ही नहीं है या बनना बंद हो जाता है। इसीलिए रोगी को टाइम से इंसुलिन का इंजेक्शन दिया जाता है। जिससे शरीर में ग्लूकोज की मात्रा कंट्रोल में रह सके।

दूसरे टाइप के डायबिटीज के मरीज अपने डायबिटीज को खान -पान और लाइफ स्टाइल में बदलाव के द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए प्रतिदिन व्यायाम जरूरी है।

Ayurvedic medicine for diabetes in Hindi – वैसे तो बाजार में डाइअबीटीज़ के ढेर सारे आयुर्वेदिक दवा उपलबद्ध है। लेकिन यहाँ कुछ प्रमुख आयुर्वेदिक दवा का वर्णन किया गया है जो शुगर में कारगर माना गया है।

इसमें मधुनशिनी वटी सबसे प्रसिद्ध मानी जाती है। इसके अलाबा जामुन, आंवला और करेला जूस भी फायदेमंद है।

शुगर की बीमारी के लक्षण - DIABETES SYMPTOMS IN HINDI
शुगर की बीमारी के लक्षण – DIABETES SYMPTOMS IN HINDI

डिस्क्लैमर (Disclaimer)

उपरोक्त शुगर की बीमारी का इलाज सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से लिखी गयी है। इसमें वर्णित किसी भी औषधि और तरीके के प्रयोग किसी योग्य चिकित्सक के सलाह के बाद ही करें।

डायबिटीज या शुगर की बीमारी के लक्षण ( DIABETES SYMPTOMS IN HINDI ) पर यह लेख जरूर अच्छा लगा होगा अपने सुझाव से जरूर अवगत करायें।

इन्हें भी पढ़ें – कोरोना वायरस क्या हैं। तथा COVID-19 का फूल फॉर्म क्या है।

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