about Makar sankranti in Hindi essay – मकर संक्राति की सम्पूर्ण जानकारी

about Makar Sankranti In Hindi – हिन्दू समुदाय के लिए मकर संक्रांति इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

इसमें कोई संशय नहीं है कि हमारा देश भारत त्योहारों का देश है। कहते है कि इस पावन भूमि पर देवता भी जन्म लेने के लिए तरसते हैं। मकर संक्रांति का त्योहार लौकिक के साथ-साथ शास्त्रीय भी है।

यह ऋषि और कृषि दोनो पर्व है। यह त्योहार अलग-अलग नामों से सम्पूर्ण भारत में मनाया जाता है। बचपन से हम देखते आये हैं कि मकर संक्रांति पर तिल के लड्डू खूब बनाये और खाये जाते हैं।

लेकिन क्यों ? मकर संक्रांति के साथ तिल का क्या संबंध है। यह कम ही लोगों को पता है। मकर संक्रांति का पतंगों के त्यौहार के रूप में भी पहचान है। इस दिन आसमान रंग बिरंगी पतंगों से भर जाता है।

प्रयागराज में कुम्भ मेले की शुरुआत  मकर संक्रांति दिन से होती है। लोकआस्था का महापर्व छठ पूजा कि तरह मकर संक्रांति भी सूर्योपासना का एक त्यौहार है।

मकर संक्रांति का त्यौहार हमलोग हर साल मानते हैं। लेकिन इसे क्यों मनाया जाता है ? इसके पीछे का विज्ञान क्या है, पौराणिक मान्यतायें क्या है,

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यहाँ हम यह भी जानेगे कि गंगा धरती पर क्यों उत्तरी ?  क्यों गंगा महाराज भगीरथ का अनुसरण करती हुई, कपिल मुनि के आश्रम होते हुए सागर में समा गयी। गंगासागर में प्रतिवर्ष मकर संक्रांति के दिन क्यों लाखों लोग स्नान करते है ?

इन सारे सवालों का जबाव आपको About Makar Sankranti In Hindi Essay, Information And Story शीर्षक वाले इस लेख में मिलेगा।

Table of Contents

मकर संक्रांति का मतलव किया है ? (About Makar Sankranti In Hindi Essay, Information And Story)

सूर्य का एक राशि से दूसरे राशि में प्रवेश करने की क्रिया संक्रांति कहलाता है। मकर संक्रांति का अर्थ होता है, सूर्य का मकर राशि में संक्रमण यानि  प्रवेश करना। 

इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में संक्रमण करती है।  इसीलिए इस संक्रांति को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है।  जिसे हिंदू धर्म में किसी मंगल कार्य के शुरुआत के लिए सबसे शुभ दिन माना गया है।

यह प्रतिवर्ष 14 या 15 जनबरी को मनाया जाता है क्यों

Makar Sankranti in Hindi
About Makar Sankranti In Hindi
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Makar sankranti Information in Hindi

भारत में हर त्यौहार कि कुछ खास पहचान है। मकर संक्रांति भी उन खास त्योहारों में आता है जिनकी अपनी अलग पहचान है। यह भारत का एक मात्र त्यौहार है जिसकी तिथि हर वर्ष पहले से निर्धारित होती है। 

मकर संक्रांति का उत्सव प्रतिवर्ष 14 जनबरी को मनाया जाता है। मकर संक्रांति का त्यौहार पूर्ण रूपेण सूर्य के घूर्णन गति पर निर्भर  है। प्रतिवर्ष सूर्य का मकर राशि में प्रवेश कुछ मिनट के देरी से होता है।

इसलिए इसका समय थोड़ा थोड़ा आगे बढ़ता रहता है। फलतः एक निश्चित समय अंतराल के बाद इस त्योहार की तिथि एक दिन आगे बढ़ जाती है। इसीलिए यह किसी-किसी वर्ष 14 जनवरी के बदले 15 जनबरी को मनाया जाता है।

दक्षिणायन एबं उत्तरायण काल क्या होता है?

मकर संक्रांति के दिन  सूर्य दक्षिणायन को छोड़ कर उत्तरायण में प्रवेश करता है। यही कारण है कि मकर संक्रांति को गुजरात में उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है।सूर्य जब छः महीने दक्षिणायन में होती है तो उस कालखंड को देवताओं की रात्री का समय होता है। 

उसी प्रकार उतरायण के छ: माह का काल  देवताओं के दिन कहा जाता है।चूँकि मकर संक्रांति के दिन ही सूर्य दक्षिणायन से उतरायण में प्रवेश करता है।  शास्त्रों के अनुसार देवताओं के दिनों की गणना इसी दिन से ही शुरू होती है।

•     उत्तरायण का  समय काल     – 14   जनबरी से लेकर   13  जुलाई तक होती है।

•     दक्षिणायन का समय काल  – 14   जुलाई से लेकर    13 जनवरी तक होती है।

सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश के साथ ही धीरे-धीरे सर्दी कम होने लगती है। रातें छोटी व दिन बड़े होने के कारण मौसम में बदलाव शुरू हो जाता है। इस दिन से वातबरण के तापमान में धीरे धीरे बढ़ोतरी शुरू हो जाती है।

प्राणियों में नई ऊर्जा का संचार शुरू हो जाता है। लोग पवित्र नदियों में स्नान के साथ ढोल नगारे, गायन, नृत्य,और पतंग बाजी  जैसे विभिन्न क्रिया कलापों के साथ इस त्यौहार का भरपूर मजा लेते हैं।

मकर संक्रांति क्यों मनाते है- history ABOUT Makar Sankranti iN HINDI

मकर संक्रांति का त्यौहार हिन्दू सम्प्रदाय के द्वारा मनाये जाने वाला महत्पूर्ण त्योहारों में से एक है।  मकर संक्रांति के अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान, दान व  तर्पण का विशेष महत्व है।

हिन्दू समुदाय के लोग मकर संक्रांति की शुरुआत सुबह पवित्र नदियों में स्नान के साथ करते है। उसके बाद सूर्य भगवान कि आराधना के साथ दान पुण्य करते है। मकर संक्रांति  के अवसर पर गंगा स्नान ज्यादा पुण्य प्रदायक माना गया है।

इस दिन काफी संख्या में लोग हरिद्वार, प्रयागराज, गंगासागर में पवित्र गंगा स्नान के लिए जाते हैं। हिन्दू धर्म शास्त्र में मकर संक्रांति के दिन किया जाने वाला स्नान, दान, तर्पण आदि जैसे कार्यों का विशेष महत्व दिया गया है।

शास्त्रों के अनुसार इस दिन स्नान, दान, तप के फलसरूप मनुष्य जन्म जन्मांतर के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है।

किसानों के लिए कृषि पर्व – about makar sankranti in Hindi essay

वैसे तो इसे हिन्दुओं के खास त्योहारों के रूप में जाना जाता है।  लेकिन भारत के कुछ अन्य समुदाय के लोग भी इसे अति आनंद और उत्साह के साथ मानते है। चूँकि भारत एक कृषि प्रधान देश है। इसीलिए इस  त्यौहार को फसल से भी जोड़ कर देखा जाता है। 

यह त्यौहार तब मनाया जाता है जब खरीफ फसल के कटाई के बाद खेत में रबी की फसल लहराने लगती है। मकर संक्रांति का महत्व किसानों से बेहतर कौन जान सकता है। तभी तो यह त्यौहार फसलों और किसानों के त्योहार के नाम से भी जाना जाता है।

इस त्योहार के दौरान किसानों में खास  प्रसन्नता और उत्साह देखने को मिलता है। कुछ अन्य जगहों  पर भी इस दिन किसान बैलों को सजा कर उसकी पूजा करते है। क्योंकि बैल हमेशा से उनके कृषि कार्य में सहायक रहा है।

इस दिन किसान खरीफ कि अच्छी पैदावार के लिए भगवान को धन्यवाद देते हैं। इसके साथ ही आने वाली रबी की अच्छी फसलों के लिए भगवान से कामना करते हैं।

Makar Sankranti in Hindi
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पौराणिक बातें – about makar sankranti in hindi essay

जब सूर्य देव ने नाराजगी त्याग कर अपने पुत्र शनि मिले – makar sankranti story in Hindi

एक पौराणिक मान्यता के अनुसार सूर्य देव अपने पुत्र शनि से किसी कारण से नाराज हो गए थे। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव ने नाराजगी का भाव त्याग कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर गए।

शनि देव ने अपने पिता सूर्य देव कि पूजा काले तिल से की। फलतः भगवान सूर्य ने शनि को उनका दूसरा घर मकर प्रदान किया। चूँकि इस दिन से शनिदेव मकर राशि के स्वामी बने। 

अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है। इस पर्व को पिता और पुत्र के मधुर संबंध से भी जोड़ कर देखा जाता है। 

बिश्व प्रसिद्ध कुम्भ मेले कि शुरुआत मकर संक्रांति के दिन से ही होती है। कुम्भ मेला का आयोजन भारत के चार प्रमुख स्थान प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन, नासिक  में प्रत्येक 12 वर्षों के अंतराल पर  होता है।

मकर संक्रांति के दिन पितरों का महत्व है क्यों ? Makar Sankranti information in Hindi

गंगा पुत्र भीष्म का स्वेच्छा से प्राण त्याग !

मकर संक्रांति के दिन पितरों का तर्पण के पीछे मुख्य रूप से दो पौराणिक कथा प्रसिद्ध है। महाभारत के अनुसार गंगा पुत्र भीष्म को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। कहते हैं कि उत्तरायण काल में मोक्ष का मार्ग सुगम होता है।

मकर संक्रांति के दिन जब सूर्य की गति उत्तरायण हो गयी तभी स्वेच्छा से उन्होंने अपने प्राण त्यागे। उनका श्राद्ध कर्म भी उत्तरायण में सम्पन हुआ। उसी समय से मकर संक्रांति के दिन पितरों के तर्पण कि परम्परा प्रचलित है। इन बातों से पता चलता है कि Makar sankranti अति प्रचीन काल से है।

अध्यात्म के दृष्टिकोण सेMakar Sankranti story in Hindi

मकर संक्रांति के दिन ही गंगा जी, राजा भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में मिली थीं। इस तरह कपिल मुनि के आश्रम के पास पड़ी भगीरथ के पूर्वजों कि अस्थि गंगा जी में मिलती हुए सागर में समा गयी।

जिस स्थान पर गंगा जी का सागर के साथ मिलन हुआ वह स्थान गंगासागर के नाम से प्रसिद्ध है। महाराज भगीरथ ने इस दिन गंगा सागर में अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया था। 

इस तरह राजा भगीरथ के पूर्वजों को मोक्ष कि प्राप्ति हुई। तभी से गंगासागर में  लाखों कि  संख्या में लोग मकर संक्रांति के दिन स्नान कर अपने पितरों का तर्पण करते हैं। 

मकर संक्रांति के अवसर पर तिल  के सेवन  किया जाता है क्यों ?

तिल का महत्त्व आध्यात्म के दृष्टिकोण से importance of till during Makar Sankranti in Hindi

एक पौराणिक कथा के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव नाराजगी का भाव त्याग कर अपने पुत्र शनि से मिलने उसके घर गये । शनि देव ने अपने पिता सूर्य देव को खुश करने के लिए उनकी पूजा काले तिल से की।

कहते हैं कि शनि देव को तिल की वजह से ही उनके पिता, घर और सुख की प्राप्ति हुई। तभी से इस अवसर पर सूर्य देव की पूजा के साथ तिल का बड़ा महत्व माना जाता है।

शनि महाराज ने सूर्य देव कि पूजा सिर्फ काले तिल से कि क्यों ? जानने के लिए लिंक पर क्लिक करें।

विज्ञान के दृष्टि से  तिल का महत्त्व

मकर संक्रान्ति के मौकै पर तिल और गुड़ से कई तरह के मिष्ठान  बनाने और खाने की परंपरा प्रचलित है।इस मौके पर  तिल और गुड़ से निर्मित मिष्ठान जैसे गजक, लड्डू, तिलकुट इत्यादि खाये जाते हैं।

यह सिर्फ खाने में ही स्वादिष्ट नहीं होती है बल्कि यह अत्यधिक पौष्टिक तत्व से भी भरपूर होते हैं।मकर संक्रांति के अवसर पर तिल  के सेवन  को विज्ञान से जोड़ कर भी देखा  जा सकता है।  तिल के सेवन के पीछे प्रवल वैज्ञानिक आधार है।

तिल  में तेल की प्रचुर मात्रा होती है। इसमें आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, वसा और विटामिन प्रचुर मात्रा में मौजूद पाए जाते हैं। तिल गर्म तासीर की होती है। 

इसका सेवन सर्दी के मौसम में शरीर को आवश्यक  उष्णता प्रदान करती है। यही कारण है कि मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ का लड्डू खाने का प्रचलन है।

भारत के विभिन्य राज्यों में – about Makar Sankranti in Hindi essay

भारत के अलग अलग भूभागों में यह त्यौहार भले ही विभिन्य नामों व् रीती रिवाजों के साथ मनाई जाती हो।लेकिन मकसद सबका एक ही है। 

आइये जानते है कि  भारत के बिभिन राज्यों में मकर संक्रांति का महत्व कितना है।  तथा यहाँ के लोग इस त्यौहार को किस नाम से जानते और कैसे मानते हैं ।  

उत्तरप्रदेश : उत्तर प्रदेश में इस त्योहार को खिचड़ी पर्व के नाम से जाना जाता है।  इस दिन खिचड़ी खाने और दान करने कि परम्परा है।

मकर संक्रांति के दिन पवित्र गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है।  इस कारण से उत्तर प्रदेश में इस पर्व को दान के पर्व के नाम से भी जानते हैं। 

इस दिन से प्रयागराज में गंगा जमुना और सरस्वती के संगम पर विशाल माघ मेले का आयोजन होता है। मकर संक्रांति के दिन प्रयागराज में संगम तट पर चले जाइये। वहॉं मकर संक्रांति के महत्व अपनी आखों से देख सकते हैं।

विहार व् झारखंड में मकर संक्रांति :  विहार एवं झारखण्ड में इस त्यौहार को सकरांत के नाम से जाना जाता है।  विहार व् झारखण्ड के लोग सुबह गंगा जैसी पाबन नदियों में डुबकी लगाकर इस त्यौहार की शुरुआत करते है। 

तत्पश्चात सूर्य की आराधना करते है। इस दिन यहाँ के लोग स्नान के बाद  दही चुरा व् तिल  की मिठाई का सेवन करते हैं।  कुछ जगह पर लोग इसे खिचड़ी पर्व के नाम से पुकारते है और इस दिन खिचड़ी का सेवन करते है। 

पश्चिम बंगाल में मकर संक्रांति: पश्चिम बंगाल में इस त्यौहार को पौष संक्रांति या पौष पर्व के नाम से जाना जाता है।  पौष पर्व पर भी खास व्यंजन तैयार किए जाते हैं, जैसे पुली पिट्ठा, खीर पुली पिट्ठा आदि।

इस त्यौहार के मौके पर पवित्र स्नान के पश्चात तिल दान करने की प्रथा है। पश्चिम बंगाल के 24 दक्षिण परगना जिले में सागर द्वीप अबस्थित है। इसी स्थल पर गंगा नदी सागर में मिलती है।

जिस कारण यह स्थान गंगासागर के नाम से प्रसिद्ध है। हर वर्ष मकर संक्रांति के दिन देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु गंगासागर में स्नान करते है। ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगासागर में स्नान से मोक्ष का मार्ग सुगम होता है।    

पंजाब और हरियाणा :   पंजाब और हरियाणा में मकर संक्रांति को माघी के नाम  जानते हैं। यहाँ मकर संक्रांति का महत्व कितना है, किस तरह से यहाँ के लोग मकर संक्रांति को मानते हैं आइये जानते हैं।

मकर संक्रांति के ठीक एक दिन पहले ‘लोहिड़ी’  मनाया जाता है।  लोहड़ी के शाम को सूर्यास्त के बाद घर के बाहर लकड़ी जमा कर उसमें आग लगाया जाता है। उस जलते हुए आग के चारो ओर लोग इकट्ठा होकर भांगड़ा  करते और लोहिड़ी लोकगीत गाते हैं। 

इसके साथ ही तिल ,मूंगफली, तिलकुट और मक्की के भुने हुए दाने आदि कि आग में आहुति दी  जाती है।  यह त्यौहार नवजात बच्‍चे और नई-नवेली दुल्‍हनों के लिए बेहद खास होता है। सभी एक-दूसरे को लोहड़ी कि वधाईयॉं देते हैं। 

सभी लोग आपस में गजक, मुगफली, तिल की मिठाइयॉँ आदि मिल बाँट कर खाते हैं। इस अवसर पर पंजाब के मुक्तसर में हर वर्ष माघी मेला का भव्य आयोजन होता है।

लोहिड़ी क्यों और कैसे मनाते हैं विस्तार से जानने के लिए क्लिक करें।

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गुजरात :  मकर संक्रांति के दिन सूर्य की गति दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर आरंभ होती है।  इसीलिये  गुजरात में मकर संक्रांति को  उत्तरायण  नाम से जाना जाता है। गुजरात के लोगों के लिए मकर संक्रांति का दिन बेहद शुभ माना जाता है।

इस दिन बड़ों के साथ बच्चों में भी काफी खास उत्साह देखने को मिलता है।  बच्चे इस दिन बेरोक-टोक मौज-मस्ती करते हुए पतंगबाजी का मजा लेते है। 

क्योंकि गुजरात में मकर  संक्रांति को पतंग उत्सव के लिए भी जाना जाता है। मकर संक्रांति के पावन पर्व के अबसर पर गुजरात पतंगबाजी के लिए प्रसिद्ध है।

गुजरात में मकर संक्रांति के दिन आकाश में एक अद्भुत  नजारा नजर आता है। आसमान अलग अलग आकर एबं डिजाइन वाली रंग बिरंगी पतंगों से भर जाता है। 

यहाँ कि पतंगबाजी दुनियॉं भर में प्रसिद्ध है।  गुजरात में इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव का आयोजन किया जाता है।  इस महोत्सव में दुनियाँ भर के लोग गुजरात आकर पतंगबाजी का आनंद लेते हैं।

Makar Sankranti in Hindi
about Makar Sankranti in Hindi – मकर संक्रांति पर अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव
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महाराष्ट्र में मकर संक्रांति : महाराष्ट्र में इस के दिन महिलाएं आपस में  तिल और गुड़  बांटते हुए “तिल गुड़ ध्या आणि गोड़ गोड़ बोला” बोलती हैं।

जिसका अर्थ होता है तिल गुड़ लो और गुड़ की तरह मीठा बोलो, ऐसा इसीलिए किया जाता है ताकि संबंधों में मधुरता बनी रहे। इसके साथ महाराष्‍ट्र में इस दिन खास तरह का हलवा खाने और बांटने की परंपरा है।

इसके आलावा महाराष्ट्र में मकर संक्रांति के दिन सभी विवाहित महिलाएँ अपनी पहली संक्रान्ति पर कपास, तेल, नमक, गुड़, तिल, रोली आदि चीजें अन्य सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं।  

तमिलनाडु में मकर संक्रांति : दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में इस त्यौहार को पोंगल के नाम से जाना जाता है।  सूर्य देव को अन्न और समृद्धि प्रदान करेने वाला देवता माना गया है।

अच्छी फसल के लिए सूर्य देवता के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए यह त्यौहार चार दिन तक मनाया जाता है।  हर दिन पोंगल के अलग अलग नाम होते हैं।

पहला दिन – भोगी पोंगल —जो देवराज इन्द्र को समर्पित हैं,

दूसरा दिन – सूर्य पोंगल  –  इस पोंगल के दिन महिलायें खुले आँगन में मिट्टी के बर्तन में एक विशेष प्रकार की खीर तैयार करती हैं।  उसके बाद उस खीर को सूर्य देव को चढ़ाकर, प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

तीसरा दिन -मट्टू पोंगल – यहाँ के मान्यता के अनुसार भगवान भोले शंकर के बैल का  नाम मट्टू है।  जिसे भोले  शंकर ने मानव कल्याण के लिए धरती पर भेजे हैं। इस दिन बैलों को खूब सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। 

चौथा दिन – कन्या पोंगल – इस दिन घर खूब को सजाया जाता है. घर के मुख्य  द्वार पर महिलायें मनमोहक रंगोली बनती हैं।  तमिलनाडु में इस दिन जालु कट्टु का खेल का भी आयोजन किया जाता है।  यह काफी प्रसिद्ध खेल है जिसमें इंसानों को बैलों के साथ लड़ाया जाता है। 

यह बहुत ही साहस पूर्ण और जोखिम भरा खेल है। यह खेल तमिलनाडु के संस्कृति ले जुड़ा हुआ  है।  ऐसा माना जाता है की इस खेल का इतिहास लगभग 2000 साल पुराना है। इसके अलाबा भारत के अन्य राज्यों में भी यह त्यौहार अलग-अलग नामों के साथ मानते हैं।

दुनियॉं के अन्य देशों में भी मकर संक्रांति

भारत कि तरह दुनियॉं के कुछ अन्य देशों में भी मकर संक्रांति है। भारत के पड़ोसी देशों में भी मकर संक्रांति का त्यौहार बहुत धूम धाम से मनाया जाता है।  आइये एक नजर डालते हैं। 

हिमालय के तराई में बसा नेपाल में भी यह अलग अलग  रीति-रिवाजों द्वारा बहुत ही भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया जाता है। नेपाल में मकर संक्रांति को माघे-संक्रान्ति या माघी के नाम से जानते है।

नेपाल में विशेषकर थारू समुदाय के लोगों के बीच Makar sankranti ka importance सबसे अधिक है। थारू समुदाय के लोगों का यह सबसे प्रमुख त्यैाहार है। यहाँ भी मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष महत्त्व है।

नेपाल में इस त्यौहार को फसलों एवं किसानों के साथ जोड़ कर देखा जाता है। इस दिन किसान अपनी अच्छी फसल के लिये सूर्य देव को धन्यवाद  देते है।

पाकिस्ता के सिंध प्रांत में मकर संक्रांति के त्यौहार को  ‘तिरमूरी’ या उत्तरायण के नाम से जाना जाता है। क्योंकि इसी दिन से सूर्य की उत्तरायण गति प्रारम्भ होती है। इस दिन लोग अपनी शादी शुदा पुत्री के घर शगुन के रूप में तिल का बना लड्डू भेजते हैं।

बंगलादेश के लोग इस त्यौहार को पौष संक्रांति के नाम से जानते है।  इस त्यौहार के दिन लोग स्नान के बाद तिल का दान करते हैं। श्रीलंका में मकर संक्रांति त्यौहार को तमिलनाडु के तरह पोंगल के नाम से मनाया जाता है। 

इसके अलाबा दुनियॉं के अन्य देशों में भी प्रवासी भारतीय के द्वारा मकर संक्रांति बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है। भले ही दुनियों के किसी भी देश में जाकर बस गये हों,

उपसंहार – about Makar Sankranti In Hindi

आजकल इस दिन लोग मोबाइल के द्वारा  एक दूसरे को बधाई संदेश और शुभकामनाएं भेजते हैं। अगर आप भी मकर संक्रांति के खास मौके पर अपने परिजनों को बधाई संदेश भेजना चाहते हैं तो नीचे दिए संदेशों को क्लिक कर सकते हैं।  

इसी के साथ Makar sankranti की ढेरों सारी शुभकामनाएं ! About Makar Sankranti in Hindi में विशेष जानने के लिए इस् लिंक पर click कर जान सकते हैं।

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