About mother teresa in hindi essay – मदर टेरेसा

About Mother Teresa In Hindi Essay – मदर टेरेसा का जीवन परिचय

मदर टेरेसा (Mother Teresa In Hindi ) एक प्रख्यात नाम जिन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवन को गरीबो और जरुरतमंदो की सेवा में समर्पित कर दिया।अल्बानिया में जन्मी और भारत में पली-बढ़ी मदर टेरेसा ने गरीबों और असहाय लोगों के लिए जो किया वह अपने आप में अभूतपूर्व है।

वह एक रोमन कैथोलिक सन्यासिनी थी और भगवान (God ) पर उन्हें अट्टू आस्था थी। मदर टेरेसा को मिशनरीज ऑफ चैरिटी की संस्थापक मानी जाती है। उन्होंने भारत के कलकत्ता में सन 1950 ईस्वी में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की नींव रखी।

Mother Teresa In Hindi में हम जानेंगे की कैसे उन्होंने अपने अथक प्रयास से कई समाजसेवी संस्थाओ की नीव रखी। सन 1979 ईस्वी में मदर टेरेसा को विश्व का सवसे बड़ा पुरस्कार, शांति के क्षेत्र में नोवेल पुरस्कार से अलंकृत किया गया। 

आइये About Mother Teresa In Hindi Essay शीर्षक के इस लेख के माध्यम से मदर टेरेसा के जीवन के बारें में विस्तार से जानते हैं।

मदर टेरेसा  के बारें में संक्षिप्त झलक – About Mother Teresa In Hindi Essay

  • नाम : अगनेस गोंझा बोयाजिजू’
  • जन्म : 27 अगस्त, 1910 युगोस्लाविया।
  • पिता : निकोला बोयाजु।
  • माता : द्राना बोयाजु।
  • मृत्यु : 5 सितम्बर, 1997
  • सम्मान व पुरस्कार – शांति का नोवेल पुरस्कार
About Mother Teresa In Hindi Essay - मदर टेरेसा का जीवन परिचय
About Mother Teresa In Hindi Essay – मदर टेरेसा का जीवन परिचय

मदर टेरेसा का सम्पूर्ण जीवन परिचय – About Mother Teresa In Hindi

भारत की महान संत मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 ईस्वी को मेसिडोनिया गणराज्य की वर्तमान राजधानी स्कॉप्जे में हुआ था। उनके पिता का नाम निकोला बोयाजू जो पेशे से एक साधारण व्यवसायी थे।

उनकी माता का नाम द्राना बोयाजू थी। मदर टेरेसा के बचपन का असली नाम ‘अगनेस गोंझा बोयाजिजू’ था। अलबेनियन भाषा में गोंझा का अर्थ होता है:- फूल की कली।  मदर टेरेसा अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं।

बचपन से ही वह सुशील व परिश्रमी थी। मदर टेरेसा की उम्र जब महज 8 साल की थी तब उनके पिता का निधन हो गया। उसके बाद उनकी लालन-पालन की जिम्मेदारी उनकी माता द्राना बोयाजू ने बखूबी निभाया।

सन 1934 ईस्वी में उनका परिवार स्कोप्जे से अल्बानिया के तिराना में चले गए। मदर टेरेसा को पढ़ाई के साथ गायन में भी गहरी रुचि थी। बचपन से ही वह पास के चर्च में गायन करती।

मात्र 12 साल की उम्र आते-आते उन्हें आभाष हो गया की वह उम्र भर अपने जीवन को मानवता की सेवा में समर्पित कर देगी। यही कारण था की मात्र 18 साल की उम्र में उन्होंने नन बनने का फैसला किया। 

वह सिस्टर्स ऑफ़ लोरेटो’ में शामिल होने के लिए घर से निकल पड़ी। इस प्रकार वे ‘सिस्टर्स ऑफ़ लोरेटो’ में शामिल होकर मानवता की सेवा में लग गयी।

भारत आने के पहले उन्होंने आयरलेंड जाकर अंग्रेजी का ज्ञान प्राप्त किया। क्योंकि भारत में ‘सिस्टर्स ऑफ़ लोरेटो’ अंग्रेजी माध्यम से ही शिक्षा प्रदान करती थी।

भारत आगमन

About Mother Teresa In Hindi Essay

वह सन 1929 में भारत आई और फिर यहीं की होकर रह गयी। भारत आकर वह खूबसूरत हिल स्टेशन दार्जिलिंग के पास सेंट टेरेसा स्कूल में अध्यापन का काम करने लगी। वहीं पर उन्होंने बंगाला भाषा का ज्ञान प्राप्त किया।

तत्पश्चात मदर टेरेसा ने पटना के होली फैमिली हॉस्पिटल में नर्सिंग में प्रशिक्षण प्राप्त की। मदर टेरेसा अदम्य ऊर्जा की धनी थी, लगातार कड़ी मेहनत और असहाय की सेवा ही उनका परम धर्म बन गया।

उन्होंने पारंपरिक वस्त्रों का परित्याग कर नीली किनारी वाली साड़ी अर्थात भारतीय परिधान को अपना लिया और मानवता की सेवा के लिए अपने को समर्पित कर दिया। मदर टेरेसा को सन 1931 ईस्वी में प्रथम वार सन्यासिनी की उपाधि मिली थी।

इसके पदवी के बाद उन्होंने अपना मूल नाम अग्नेसे गोंकशी बोंजशियु से बदलकर ‘टेरेसा’ रख लिया। मदर टेरेसा ने 1944 में सेंट मेरी स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर सेवा करने के लिए अपने को समर्पित कर दिया।

असहाय, कोढ़ी, वृद्ध और गरीब बच्चों के लिए मदर टेरेसा God (ईश्वर) एक अवतार बन कर आई। उनका मानना था, “जख्म भरने वाले हाथ प्रार्थना करने वाले होंठ से कहीं ज्यादा पावन होते हैं।“ इस कारण उन्हें दुनियाँ में नई पहचान मिली और समस्त विश्व में मदर टेरेसा के साथ मशहूर हो गयी।

मानवता को ही अपना धर्म बनाया।

विडिओ मदर टेरेसा

भारत आकर उन्होंने अपने आप को दीन-दुखियों, तिरस्कृत और लाचार लोगों की सेवा में लगा दिया। मदर टेरेसा ने उन्हें एक मां के समान स्नेह दिया और उनकी सेवा की। जिन रोग ग्रस्त वयक्ति के नजदीक जाने से लोग हिचकिचाते थे।

जिन्हें समाज ने तिरस्कृत कर दिया था। लोग जिन्हें घृणा के भाव से देखते थे। मदर टेरेसा ने न सिर्फ उनके नजदीक गयी बल्कि उनकी मातृवत रूप में सेवा की। उनके जीवन का एक ही मकसद था मानव सेवा।

मदर टेरेसा अपने जीवन का ज्यादातर समय गरीब लोगों की मदद करने में बिताया। गरीबों और लाचार की सेवा के लिए वह सड़कों पर नंगे पैर चल पड़ती और लगातार कड़ी मेहनत से परहेज नहीं करती।

सन 1948 ईस्वी में मदर टेरेसा ने बच्चों को शिक्षा प्रदान के लिए स्कूल की स्थापना की। सन 1948 ईस्वी में उन्होंने स्वेच्छा से भारत की नागरिकता ग्रहण की। उन्होंने मानव कल्याण के लिए ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ की स्थापना की।

रोमन कैथोलिक चर्च ने 7 अक्टूबर 1950 को मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ को मान्यता प्रदान की। मदर टेरेसा के जीवनकाल में ही उनकी मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी का लगातार विस्तार होता गया।

उनकी मृत्यु के समय तक यह मिशनरीज़ करीव 123 देशों में 610 केंद्रों के माध्यम से अपना सेवा प्रदान करने लगी। इनकी मिशनरीज केंद्रों के द्वारा सन 1996  ईस्वी तक लगभग 120 से ज्यादा  देशों में 700 से ऊपर आश्रम गृह गृह खोले गये।

इसमें करीब 5 लाख लोगों की सेवा की जाने लगी। इसके साथ उन्होंने ‘निर्मल हृदय’ आश्रम की स्थापना की। इस आश्रम का मुख्य उद्देश्य

बीमारी से पीड़ित रोगियों की सेवा करना था। उन्होंने अनाथ और बेघर बच्चों की सेवा व सहायता के लिए ‘निर्मला शिशु भवन’ आश्रम की भी स्थापना की।

सम्मान व पुरस्कार  About Mother Teresa In Hindi

  • मदर टेरेसा जीवन प्रयत्न गरीबों की सेवा में लगी रही। उनकी अतुलनीय सेवाओं के लिये कई पुरस्कारों एवं सम्मानों से उन्हें अलंकृत किया गया।
  • भारत सरकार ने सन 1962 ईस्वी में उन्हें पदम श्री के सम्मान से सम्मानित किया।
  • सन 1979 को मदर टेरेसा को लोक कल्याण के कार्यों में अद्भुत योगदान के लिए बिश्व प्रसिद्ध शांति का नोबल पुरस्कार प्रदान किया गया। 
  • सन 1980 ईस्वी में भारत सरकार ने उन्हें भारत का का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से अलंकृत किया।
  • मदर टेरेसा को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा डी-लिट की उपाधि से सम्मानित किया।
  • सन 1988 ईस्वी में ब्रिटेन के द्वारा मदर टेरेसा को Year of the British Empire  के सम्मान से सम्मानित किया गया।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका के कैथोलिक विश्वविद्यालय द्वारा उन्हे डोक्टोरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया।
  • सन 1931 ईस्वी में मदर टेरेसा को पोप-जॉन तेइसवें का शांति पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • मदर टेरेसा को 09 सितम्बर 2016 ईस्वी में पोप फ्रांसिस द्वारा वेटिकन सिटी में संत की उपाधि प्रदान किया गया।
  • जिस मातृभाव से उन्होंने असहाय और गरीबों की सेवा की वह अद्वितीय है। उसके जनसेवा भाव को देखते हुए पोप जॉन पाल द्वितीय ने मदर टेरेसा को रोम में  19 अक्टूबर 2003 ईस्वी को ‘धन्य’ घोषित किया गया।

मदर टेरेसा की मृत्यु

About Mother Teresa In Hindi Essay - मदर टेरेसा
About Mother Teresa In Hindi Essay – मदर टेरेसा

मदर टेरेसा का बढ़ती उम्र के साथ उनका सेहत भी बिगड़ने लगा। सन 1983 ईस्वी में 73 वर्ष की उम्र में उन्हें पहली बार हार्ट अटैक आया। उस समय वह पॉप जॉनपॉल द्वितीय से मिलने रोम गयी थीं।

कहते हैं की 16 वर्ष के बाद वर्ष 1989 ईस्वी में उन्हें दूसरी बार दिल का दौरा पड़ा। मदर टेरेसा ने 13 मार्च 1997 को ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ के मुख्य पद से अपने को अलग कर ली।

मदर टेरेसा का 5 सितंबर 1997 ईस्वी को कलकता में निधन हो गया। उनकी मृत्यु तक उनकी ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ में 4,000 सिस्टर और 300 से ज़्यादा अन्य सहयोगी संस्था विश्व के 123 देशों में अपना सेवा दे रही थीं।

इन्हें भी पढ़ें – राजाराम मोहनराय जीवन परिचय

उपसंहार – conclusion

मदर टेरेसा मानवता की प्रतिमूर्ति थी। घरती पर ऐसे महान व्यक्ति का यदाकदा ही जन्म होता है। दोस्तों About Mother Teresa In Hindi Essay शीर्षक वाला यह लेख आपको कैसा लगा अपने सुझाव से जरूर अवगत करायें।

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