हरगोविंद खुराना का जीवन परिचय – Dr Hargobind Khorana Biography in Hindi

हरगोविंद खुराना (Scientist dr. hargobind khorana biography in hindi) की गिनती भारत के महान वैज्ञानिक में की जाती है। जीव विज्ञान के क्षेत्र में उनके आविष्कार नें उन्हें विश्व के महान वैज्ञानिक की श्रेणी में ला खड़ा कर दिया।

हरगोविन्द खुराना ने सर्वप्रथम DNA पर से प्रदा उठाया था। उन्होंने डी.एन. तथा आर.एन.ए. को संश्लेषित तरीकों से निर्माण करने की खोज की। विज्ञान की दुनियाँ में उनका नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। उन्होंने विश्व पटल पर भारत का नाम ऊँचा किया।

विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया गया। जीन इंजीनियरिंग की नींव रखने में उनका अहम योगदान माना जाता है। जीवनभर वे विज्ञान की सेवा करते रहे।

DR HARGOBIND KHORANA BIOGRAPHY IN HINDI - हरगोविंद खुराना का जीवन परिचय
हरगोविंद खुराना का जीवन परिचय – Dr Hargobind Khorana Biography in Hindi
By अनजान – http://history.nih.gov/exhibits/nirenberg/HS7_nobel.htm, Public Domain, https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=18398673

अपने जीवनकाल में उनके  400 से भी ज्यादा शोधपत्र प्रकाशित हुए। वे पहले वैज्ञानिक हुए जिन्होंने प्रोटीन संश्लेषण में न्यूक्लिटाइड की भूमिका का प्रदर्शन किया। आईए जानते हैं हरगोविंद खुराना का जीवन परिचय – Dr Hargobind Khorana Biography in Hindi विस्तार से।

हरगोविंद खुराना का जन्म (Birth of hargobind khorana in hindi)

महान वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना का जन्म अखंड भारत के पंजाव प्रांत में 9 जनवरी सन 1922 में हुआ था। इस महान वैज्ञानिक का बचपन अपने ही गाँव पंजाब के राजपुर में बीता। आजादी के बाद यह स्थान पाकिस्तान में चला गया।

हरगोविंद खुराना के पिता एक पटवारी का काम करते थे। खुराना साहब अपने पाँच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। बचपन में ही डॉ खुराना जी के पिता की मृत्यु हो गयी। पिता की मृत्यु के बाद उनके बड़े भाई ने उनका देख-भाल किया।

हरगोबिन्द खुराना की शिक्षा दीक्षा (H.G. KHURANA )

इनकी प्रारम्भिक शिक्षा गाँव में ही सम्पन्न हुई। बचपन से ही हरगोविंद खुराना पढ़ने में बहुत तेज थे। अपने कुशाग्र बुद्धि के कारण उन्होंने कई छात्रवृत्तियाँ भी प्राप्त की। डॉ खुराना ने उच्च शिक्षा लाहौर के डी ए वी कालेज से प्राप्त की।

उन्होंने लाहौर के डी ए वी कालेज से बी ए प्रथम श्रेणि से पास किया। उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वे इंगलेंड चले गये। इंगलेंड के मैनचेस्टर विश्वविद्यालय से इन्होंने प्रोफेसर रॉजर जे.एस. बियर के संरक्षण में पी-एच.डी. की डिग्री प्राप्त की।

पी-एच.डी. की डिग्री के बाद वे सन 1948 में भारत वापस आ गये। यहाँ वे नोकरी की तलाश में लग गये। आगे har gobind khorana biography in Hindi में उनके पारिवारिक जीवन के बारें में जानेंगे।

पारिवारिक जीवन (dr hargobind khorana ka jeevan parichay )

अब हम हरगोविंद खुराना के जीवन परिचय में (Dr Hargobind Khorana Biography in Hindi) में उनके पारिवारिक जीवन के बारे में जानेंगे। उनकी शादी सन 1952 में स्विट्जरलैंड मूल की एक महिला वैज्ञानिक से हुआ।

डॉ खुराना की पत्नी का नाम एस्थर एलिजाबेथ सिब्लर थी। उनका दाम्पत्य जीवन बड़ा ही सुखद रहा। डॉ खुराना की पत्नी अपने पति के मनोभावों को समझती थीं। उन्हें तीन संतान हुई जिनके नाम जूलिया एलिज़ाबेथ, एमिली और डेव रॉय था। बाद में खुराना साहब ने अमेरिका की नागरिकता ग्रहण कर ली।

करियर की तलाश

इंगलेंड से पी एच डी हासिल करने के बाद अपने देश भारत आये। यहाँ पर उन्होंने नौकरी करनी चाही। इसके लिए उन्होंने वंगलुरु दिल्ली सहित कई संस्थानों में अर्जी दी। लेकिन कहीं से भी उनके मन मुताबिक पद का ऑफर नहीं आया।

इस कारण उन्हें थोड़ी निराशा हुई। गुस्सा होकर वे दुबारा इंगलेंड चले गए। वहाँ वे 1952 तक केंब्रिज विश्वविद्यालय में लार्ड अलेक्‍जेंडर टाड के साथ काम किया। तत्पश्चात उन्हें  कनाडा से बुलावा आया। 

आनुवाँशिकी के क्षेत्र में शोध कार्य Har gobind Khorana contribution

सन 1952 ईस्वी में डॉ हरगोविंद खोराना, इंगलेंड से कनाडा चले गये। कनाडा में उन्हें  कोलम्बिया विश्‍विद्यालय में जैव रसायन शास्त्र के विभागाध्‍यक्ष के पद पर नियुक्ति हुई। कनाडा में भी उन्होंने अपना अनुसंधान जारी रखा।

उन्होंने आनुवाँशिकी के क्षेत्र में अनुसंधान किये और सफल रहे। उनकी खोज बिभिन्न कई प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हुआ। इस प्रकार वे अपने शोध के कारण पूरे विश्व में प्रसिद्ध हो गये। 

उन्होंने अमरीका में प्रसिद्ध वैज्ञानिक नारेन बर्ग के साथ कृत्रिम जीवन पर शोध किया। इन्होंने डी.एन.ए. और आर.एन.ए. को कृत्रिम तरीके से विकसित करने विधि की खोज की।

इस खोज से डी.एन.ए की संरचना को समझने में मदद मिली। साथ ही इस खोज के कारण कई पैतृक विमारी का निदान संभव हो सका।

सम्मान व पुरस्कार

जीवविज्ञान के क्षेत्र में अपने शोध कार्यों के कारण डॉ खुराना को ऑर्गेनिक कैमिस्ट्री ग्रुप ऑफ कामनवेल्थ रिसर्च औरगेनाइजेशन का अध्यक्ष चुना गया था।

हरगोविन्द खुराना को 1950 के दशक में भारत में कोई ढंग की नौकरी नहीं मिली। लेकिन जब वे पूरे विश्व में प्रसिद्ध हो गये। तब सन् 1969 ईस्वी में भारत आगमन पर उनका भव्य स्वागत किया गया था।

डॉ खुराना को पंजाब विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टर ऑफ साइंस की मानक उपाधि प्रदान की गई। उन्हें प्रोफेसर इंस्टीट्युट ऑफ पब्लिक सर्विस’ कनाडा द्वारा सन 1960 में स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। उन्हें कनाडा के ‘मर्क एवार्ड’ से भी अलंकृत किया गया।

नोबेल पुरस्कार (Why Did Dr Hargobind Khorana Got Nobel Prize )

सन 1968 ईस्वी में उन्हें चिकित्सा विज्ञानं के क्षेत्र में विश्व का सबसे बड़ा सम्मान नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया। भारत सरकार द्वारा डा हरगोविंद खुराना को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

आगे चलकर उन्हें डैनी हैनमैन पुरस्‍कार से भी सम्मानित किया गया। सन 1968 ईस्वी में इन्हें लॉस्‍कर फेडरेशन पुरस्‍कार तथा लूसिया ग्रास हारी विट्ज पुरस्‍कार से पुरस्कृत किया गया।

डॉ हरगोविन्द खुराना की मृत्यु (Death of Dr Hargobind Khorana)

अपने सम्पूर्ण जीवन को डॉ हरगोविंद खुराना ने विज्ञान के लिए समर्पित कर दिया। महान वैज्ञानिक डॉ हरगोविन्द खुराना का 89 वर्ष की उम्र में 9 नवम्‍बर 2011 को अमेरिका में निधन हो गया।

पाठकगण हरगोविंद खुराना का जीवन परिचय – Dr Hargobind Khorana Biography in Hindi  आपको कैसी लगी अपने राय से जरूर अवगत करायें।

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