Garuda Purana amazing brief all 2 parts – Garud Puran

Garuda Purana सनातन धर्म का पवित्र ग्रंथ माना जाता है। कुल अठारह महापुराणों में Garuda Purana का अपना विशेष महत्व है। Garud Puran भगवान विष्णु को समर्पित है। इस पुराण में विष्णु भक्ति का विशेष रूप से वर्णन मिलता है।

मृत्यु के वाद कर्मों के अनुसार जीव को स्वर्ग या नरक की प्राप्ति होती है। मनुष्य के परलोक में जाने के बाद कर्मों के अनुसार स्वर्ग का सुख या नरक की यातना को भुगतना पड़ता है। मृत्यु के वाद स्वर्ग का सुख या नरक का भोग किस प्रकार भोगना है, इसका विस्तृत विवेचन Garuda Purana मे दिया गया है।

Garuda Purana – Garud Puran in Hind
Garud Puran – Image source by social media

मौत से पहले और उसके बाद की स्थिति के बारे में Garud Puran में विस्तारपूर्वक बताया गया है। चौरासी लाख योनियाँ के बारें में जो सूना जाता है उसका भी जिक्र इस Garuda Purana में उपलबद्ध है।

यह संसार नश्वर है, इसका विश्लेषण Garuda Purana में मिलता है। इसके अलावा Garuda Purana में इहलोक और परलोक का भी जिक्र किया गया है। इसमें जन-जन्मांतर के बंधन से मुक्ति पाकर वैकुंठ प्राप्ति के बारें में भी वर्णन मिलता है।

इसका नाम क्यों Garuda Purana पड़ा।

Garuda Purana – Garud Puran in Hind
भगवान विष्णु – Image source social media

वास्तव में Garud Puran, विष्णु भगवान द्वारा गरुड को दिए गये ज्ञानमय उपदेश का विवेचन है। भगवान विष्णु का वाहन Garud को माना जाता है। कहते हैं की एक वार Garud ji ने भगवान विष्णु से जन्म-मरण से छुटकारा के मार्ग, स्वर्ग, नरक, मृत्यु और मोक्ष से संबंधित गूढ प्रश्न के उत्तर जानने की जिज्ञासा प्रकट की।

भगवान विष्णु ने Garud ji की जिज्ञासा शांत करने के लिए इन गूढ रहस्यों पर से पर्दा उठाया। चूंकि Garud ji के प्रयास से ही भगवान विष्णु के श्री मुख से आत्मा-परमात्मा, जीवन मरण जैसे गूढ व हितकारी वचन प्रकट हुए। इसलिए इस पुराण को Garud Puran के नाम से जाना गया।

Garud Puran के भाग

Garud Puran मुख्यतः 2 खंडों में विभाजित है। पूर्वखंड (आचार खंड ), उत्तरखंड (धर्म काण्ड -प्रेत कल्प )

पूर्वखंड (आचार खंड )

इसके पहले भाग में भगवान विष्णु की भक्ति की विस्तृत विवेचन किया गया है। हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार मृत्यु पश्चात ‘गरूड़ पुराण’ के श्रवण का शुभ माना गया है।

इसमें भक्ति ज्ञान, वैराग्य, सदाचार एवं निष्काम कर्म की महिमा, यज्ञ, दान, ताप, तीर्थसेवन, देव पूजन, आदि वर्णन है। इसके साथ इसमे व्याकरण, छंद, ज्योतिष , आयुर्वेद, रत्न सार , नीति सार का उल्लेख है।

Garud Puran में 19000 (उन्नीस हजार) श्लोक माने जाते है। Garud Puran के 3 भागों में से दो भाग मुख्य हैं- पूर्वखण्ड तथा उत्तरखण्ड। पूर्वखण्ड में कुल 229 अध्याय हैं।

उत्तरखंड (धर्म काण्ड -प्रेत खंड )

Garuda Purana – Garud Puran in Hind
मृत्यु के वाद गरुड़ पुराण में वर्णित आत्मा की गति
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Garud Puran के उत्तरखंड में प्रेतकल्प का विशेष रूप से वर्णन किया गया है। इसमें मृत्यु का स्वरूप, मरनासन व्यक्ति की अवस्था, तथा उनके कल्याण के लिए अंतिम समय में किए जाने वाले कृत्य का विधान है।

गरुड़ पुराण के पाठन या श्रवण से यह ज्ञात होता है की मृत्यु पश्चात परलोक में जाने के वाद आत्मा को किस अपने कर्मों के अनुसार स्वर्गीय सुख अथवा नारकीय यातनाएं भोगता है। इसके अलावा जन्म-जन्मांतर से मुक्ति का मार्ग भी Garuda Purana में वर्णित है।

Garud Puran के इस खंड में मृत्यु के बाद श्राद्ध क्रम एवं पिंडदान के साथ पापों से प्रयश्चित का मार्ग बताया गया है। स्वर्ग,नरक और प्रभु के परमधाम बैकुंठ का वर्णन भी गरुर पुराण में ही निहित है। इसके साथ इसमें धर्म काम व मोक्ष के वारें में बताया गया है।

Garuda Purana का महत्व

Garuda Purana – Garud Puran in Hind
गरुड़ जी

कहते हैं की कश्यप ऋषि ने इस इस महापुराण का श्रवण कर गारुड़ी विद्या हासिल कर ली। इस गारुड़ी विद्या के बल से उसने एक जले हुए वृक्ष को हरा भरा कर दिया। गरुड जी इस विद्या के द्वारा कई प्राणियों की रक्षा की।

गरुड़ पुराण का महत्व सनातन धर्म में सर्वोपरी होने के बावजूद आम जन इसके विषय बस्तु से अनजान हैं। Garuda Purana का पठन-पाठन व श्रावण यश आरोग्य तथा लक्ष्मी प्रदायक माना गया है। कहते हैं की जो मनुष्य एकाग्रचित होकर Garuda Purana का पाठ करता है।

उसे धर्म काम व मोक्ष तीनों की प्राप्ति संभव है। Garuda Purana को शास्त्र-सम्मत पुराण माना गया है। माना जाता है की इस पुराण के मात्र एक श्लोक के पाठ से भी शत्रु का विनाश संभव है।

Garuda Purana का पाठ आकाल मृत्यु के भय को खत्म करता है। जैसे देवों में जनार्दन, शस्त्रों में सुदर्शन चक्र वैसे ही पुराणों में Garud Puran को श्रेष्ट माना गया है।

गरुड़ पुराण कथा – Garud Puran katha

Garuda Purana में वर्णित कथा के अनुसार प्राचीन काल में पक्षीराज गरुड ने भगवान विष्णु की घोर तपस्या की। फलस्वरूप भगवान विष्णु उनके तपस्या से खुश होकर Garud ji वरदान मांगने को कहा। Garud ji ने कर वद्ध प्रार्थना कर भगवान विष्णु से वरदान मांगे।  हे प्रभु मेरी माता विनीता को नागों ने दासी बना लिया है।

इसीलिए मुझे वरदान दें की मेरे अंदर विषों को शमन करने की शक्ति आ जाय। ताकि में नागों का विदीर्ण कर अपने माता को उनकी दासता से मुक्त करा सकूँ। इसके साथ मुझे अपना वाहन बनाने के साथ पुराण रचनाकार हो सकूँ ऐसा ही वर दें। भगवान विष्णु ने कहा तथा अस्तु।

भगवान विष्णु ने Garud ji को वरदान देते हुए कहा की आप सर्वशक्ति सम्पन होकर मेरे वाहन होंगे। साथ ही विषों के शमन करने की शक्ति आपके अंदर मौजूद होगी। मेरे ही कृपा से तुम, मेरे ही महात्म का वर्णन करने वाली पुराण संहिता का प्रणयन करेंगे।

इस कारण तुम्हारा नाम Garuda Purana के नाम से जगत प्रसिद्ध होगी। भगवान द्वारा यह वरदान दिए जाने के वाद कश्यप ऋषि के आग्रह पर Garud ji ने इसे कश्यप ऋषि को सुनाया।

इस पुराण से संबंधित ज्ञान सवसे पहले ब्रह्माजी भगवान विष्णु से सुनी। ब्रह्मा जी ने इस ज्ञान को महर्षि वेद व्यास को दिया था। व्यासजी से यह ज्ञान सूतजी के पास गया। सुतजी से यह ज्ञान शौनक ऋषि-मुनियों तक आया।

Garuda Purana से जुड़ी कुछ रोचक बातें।

  • Garuda Purana के अनुसार सत्य के पालन से ही धर्म की रक्षा होती है। सतत अभ्यास से विद्या की रक्षा होती है।
  • Garuda Purana के अनुसार शुद्धि दो प्रकार की होती है। पहली बाहरी शुद्धि और दूसरी आंतरिक शुद्धि। जल व मिट्टी से की जाने वाली शुद्धि बाहरी शुद्धि कहलाती है। जबकि भावों की शुद्धि को आंतरिक शुद्धि माना गया है।
  • Garuda Puranaमें वर्णित तथ्य के आधार पर जलदान से तृप्ति, अन्न दान से अक्षय सुख और तिल दान से अभीष्ट संतान की प्राप्ति होती है।

उपसंहार – Conclusion

सभी प्राचीन ग्रंथों में व्रत, अनुष्ठान, दान, एवं श्राद्ध क्रम के लिए पर्युक्त मूल श्लोक Garuda purana से ही संदर्भित है। Garud puran में जीवन के कई गूढ रहस्य पर से पर्दा हटाया गया है। इस पुराण का श्रवण मृत्यु पश्चात सद्गति प्रदायक माना गया है। इसमें मृत्यु पश्चात जीवों के गति का वर्णन है।

Garuda Purana में, मृत्यु के पहले तथा उसके बाद की अवस्था के बारे में विस्तृत विवेचन मिलता है। भगवान श्री हरी की भक्ति और उनके परम ज्ञान पर आधारित Garud Puran प्रत्येक व्यक्ति अवश्य पढ़ना चाहिए।

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vishnu avtar

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