Patna Golghar History Hindi – पटना के गोलघर के बारें में सम्पूर्ण जानकारी

गोलघर बिहार के राजधानी पटना की पहचान है। वैसे तो पटना का इतिहास काफी पुराना है। यहॉं अनेकों दर्शनीय स्थल हैं, जो हमेशा से ही पर्यटक का ध्यान अपनी ओर खिचता रहा है।

लेकिन गोलघर हमेशा से एतिहासिक धरोहर के रूप में पटना को गौरान्वित करती रही है। पटना का गोलघर ब्रिटिश भारत में अंग्रेजों द्वारा निर्मित एक एतिहासिक स्थल है। गोलघर का निर्माण भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल वॉरेन हेस्टिंग के समय में हुआ।

Patna Golghar History Hindi - पटना के गोलघर का इतिहास
Patna Golghar History Hindi – पटना के गोलघर का इतिहास

अपने भव्य ऊंचाई के कारण इसका स्थान पटना की सबसे प्रसिद्ध स्मारक में है। इस कारण पटना का गोलघर पर्यटक का मुखय आकर्षण का केंद्र है।

इस लेख हम आगे यह भी जानेंगे की पटना का गोलघर कब और क्यों बनाया गया था। इसके बनाने के पीछे क्या उद्देश्य था। साथ ही हम इस इमारत के वास्तुकार, निर्माण और संरचना के बारें में जानकारी प्राप्त करेंगे।

इसका नाम गोलघर क्यों पड़ा – Patna Golghar History Hindi

गोल का मतलब होता है गोलाई लिए हुए और घर का मतलब तो आप जानते ही हैं। अर्थात गोलघर का आशय ऐसे घर से हैं जो गोलाकार में बना हो।

इस प्रकार गोल घेरा में निर्मित अपने अद्भुत संरचना के कारण ही इसका नाम गोलघर पड़ा। इस ऐतिहासिक बिल्डिंग की संरचना अनुपम और आर्कषक है। यही कारण है की इसे देखने दूर-दूर से पर्यटक पटना आते हैं।

Patna Golghar History Hindi – पटना के गोलघर का इतिहास

बनावट और संरचना

इस विशाल इमारत की खास बात यह हैं की इसके निर्माण में पिलर का इस्तेमाल नहीं किया गया है। बिना किसी पिलर के बने होने के कारण इसकी दीवार की मोटाई 3.6 रखी गयी है।

इसका आधार 125 मीटर है जो इस भव्य इमारत को संतुलित और मजबूती प्रदान करती है। बाहर से गोलघर गुंबद की संरचना की तरह दिखाई पड़ता है।

गुम्बदनुमा आकृति के कारण लोग गोलघर की तुलना मो-आदिल शाह के मकबरे से भी करते हैं। गोलघर की ऊंचाई लगभग 95 फीट है। गोलघर के निर्माण में ईंटों का उपयोग किया गया है।

परंतु इस शीर्ष भाग में ईंटों की जगह पत्थर का प्रयोग मिलता है। जिसके मध्य में एक छेद(whole) बनाया गया था। वर्तमान में इस छिद्र को बंद करा दिया गया है। गोलघर में 145 सीढ़ियां हैं जो गोलघर के ऊपर चढ़ने के लिए चारों ओर घुमावदार आकर में निर्मित है। 

गोलघर के वास्तुकार

गोलघर के वास्तुकार ब्रिटिश इंजिनियर कैप्टन जान गार्स्टिन को माना जाता है। जिन्होंने इसका डिजाइन तैयार किया था। करीब 125 मीटर आधार और 29 मीटर की ऊंचाई वाले गोलघर के निर्माण कार्य 20 जनवरी 1784 ईस्वी में प्रारंभ हुआ था।

इसके बनने में लगभग 30 महीने का बक्त लगा और 20 जुलाई सन 1786 में बनकर तैयार हो गया। कहते हैं की इस पर बने सीढ़ियाँ के द्वारा मजदूर अनाज की बोरी लेकर गोलघर के शीर्ष पर जाते और शीर्ष पर बने छिद्र मे अनाज डाल कर दूसरी तरफ से नीचे वापस आते थे।

गोलघर बनाने के पीछे का उद्देश्य

गोलघर के निर्माण के पीछे अंग्रेजों की दूरगामी सोच थी। बात सन 1770 की है, भारत में भीषण अकाल पड़ा जिसमें बिहार और बंगाल के ज्यादा प्रभावित हुआ था। इस त्रासदी में एक करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी थी।

Patna Golghar History Hindi - पटना के गोलघर का इतिहास
Image credit – hi.wikipedia.org

उसके बाद भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल वॉरेन हेस्टिंग के दिमाग में इस इमारत के निर्माण की बात आयी। इस प्रकार पटना में गोलघर का निर्माण 1786 ईस्वी में हुआ। अतः पटना में गोलघर के संस्थापक वॉरेन हेस्टिंग को माना जा सकता है।

उन्होंने सन 1770 ईस्वी जैसी भयंकर अकाल से सामना हेतु इसका निर्माण करवाया। इस प्रकार उन्होंने गोलघर का निर्माण सैनिकों के लिए अनाज भंडारण के लिये किया था।

गोलघर में अनाज भंडारण की क्षमता

कहते हैं की गोलघर की अनाज भंडारण क्षमता करीब 1,40,000 टन की हैं। लेकिन कहा जाता है की निर्माण के समय में कुछ गलती के कारण इस कभी पूरा नहीं भरा गया। क्योंकि गोलघर के दरवाजे अंदर की तरफ खुलते हैं।

गोलघर में पूरी क्षमता तक अनाज भंडारण के बाद इसके दरवाजे खोलने में दिक्कत होती थी। आजादी के बाद सन 1999 ईस्वी तक इस इमारत का उपयोग अनाज भंडारण के लिए होता था। लेकिन अब इस बंद कर दिया गया।

सरकार ने सन 1979 ईस्वी में गोलघर को संरक्षित स्मारक के लिस्ट में शामिल किया है। इसके रख-रखाव के ऊपर सरकार बहुत ध्यान दे रही है।

गोलघर पटना की पहचान

यह स्थान पटना के प्रसिद्ध गाँधी मैदान के पश्चिम भाग में अवस्थित है। अपनी भव्य ऊंचाई के कारण एक समय इसका नाम पटना की सबसे ऊंची बिल्डिंग में होता था। गोलघर के ऊपर चढ़ने के लिए सीढ़ियाँ निर्मित है।

इन्हीं सीढ़ियों के द्वारा चलकर दर्शक नीचे से गोलघर के ऊपरी सतह पर जा सकते हैं। पर्यटक 95 फीट ऊंची इस गोलघर के ऊपरी सतह पर चढ़कर गंगा नदी सहित पूरे पटना का मनमोहक दृश्य देख सकते थे।

हालांकि इसके आसपास अब ऊंची-ऊंची भवन का निर्माण हो गया है। लेकिन अभी भी इस स्थल की प्रसिद्धि काम नहीं हुई है और गोलघर पटना की पहचान बनी हुई है।

गोलघर की एक खास बात यह है की इसके अंदर एक बार आवाज लगाने पर कहते हैं की 27 बार प्रतिध्वनित होती है।

गोलघर के पास लगे लेजर शो का आनंद

सरकार ने इस 300 साल पुराने स्मारक के देखरेख के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। पर्यटक को आकर्षित करने के लिए इस एतिहासिक इमारत के पास पार्क विकसित किया गया है।

शाम के बक्त कलर लाइट और फव्वारे के बीच लेजर शो का आनंद लिया जा सकता है। जहाँ शाम के छः बजे से लेकर 8 बजे तक लाइट एंड साउंड शो चलता है।

इस लेजर शो (लाइट एंड साउंड शो) के द्वारा patna golghar history hindi में बताया जाता है।इसमें बिहार का स्वर्णिम इतिहास, मगध साम्राज्य का अखंड भारत के बारें में दिखाया जाता है।

इसमें आर्यभट्ट, चाणक्य, चन्द्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक के महान कार्य का दर्शाया जाता है। इसके साथ शेरशाह सूरी के समय का बिहार, सासाराम में स्थित उनकी कब्र, पटलीपुत्र से पटना बनने की कहानी सुनाई जाती है।

इस लेजर शो के बाद गोलघर में पर्यटक के आने के संख्या में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। दोस्तों अगर आप patna golghar history hindi के बारें में जानकारी चाहते हैं तो यह लेख आपको मदद कर सकता है।

इन्हें भी पढ़ें – बिहार के 11 प्रसिद्ध पर्यटन स्थल

पटना में गोलघर के संस्थापक कौन है?

पटना के गोलघर के संस्थापक भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग को कहा जा सकता है। क्योंकि उन्होंने ही भयंकर आकाल से सबक लेते हुए ब्रिटिश फौज के अनाज भंडारण के लिए इसका निर्माण 1786 में कराया था।

पटना का गोलघर में कितना सीढ़ी है?

पटना का गोलघर में 142 सीढ़ी है, इसकी खास बात ही की 29 मीटर ऊँचे गोलघर के निर्माण में पिलर का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

गोलघर में क्या रखा जाता है?

गोलघर का निर्माण अंग्रेजों ने अनाज भंडारण के लिए किया था। इसकी अनाज भंडारण क्षमता 140000 टन की है। लेकिन वर्तमान में गोलघर में कुछ नहीं रखा जाता है। अब यह राष्ट्रीय स्मारक के रूप में एक पर्यटन स्थल है।

पटना का पूरा नाम क्या है?

पटना का नाम वहाँ स्थित प्रसिद्ध पाटन देवी के नाम पर रखा गया है। वैसे पटना का प्राचीन समय में पुष्पपुरी, कुसुमपुर और पाटलिपुत्र के नाम से भी जानते थे। माता भगवती को समर्पित बड़ी पाटन और छोटी पाटन देवी मंदिर पटना का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है।

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