Shiv Puran – Shiv Shankar Bhagwan ke 12 jayotirling

Shiv Puran in Hindi –  शिव पुराण Shankar Bhagwan को समर्पित हिन्दू समुदाय का पवित्र धर्मग्रंथ है। Shiv Puran में Shiv Shankar के महत्ता और उनके जीवन से जुड़ी हुई बिभिन घटनाओं क वर्णन मिलता है।

Shiv Puran - Shiv Shankar Bhagwan
भगवान शिव और माता पार्वती पुत्र गणेश के साथ
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इसमें Shiv Shankar और पार्वती विवाह, गणेश और कार्तिक की के रूप में पुत्र की उत्पत्ति, और कैलाश पर्बत पर उनके वास करने की चर्चा की गई है।

इस प्रकार Shiv Puran में शिव महिमा और शिव भक्ति के बारे में विस्तार से बताया गया है। यह ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखी गयी। इसी Shiv Puran में Shiv Shankar के सहस्र नाम की भी चर्चा की गयी है।  

कुल 18 पुराणों में 6 पुराण Shankar Bhagwan को समर्पित है। इन सभी पुराणों में Shiv Puran का महत्व विशेष रूप से माना गया है। जिसमें उन्हें योगीराज, तपस्वी  और करुणा का अवतार बताया गया है। Shiv Shankar सहज ही प्रसन्न होने और त्वरित फल देने वाले देवों के देव महादेव के रूप में जाने जाते हैं।

शैव भक्तों के लिए Shiv Puran गीता से कम नहीं है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग का वर्णन भी इस ग्रंथ में उपलव्ध है। Shankar Bhagwan की आराधना मूर्ति और ज्योतिर्लिंग, दोनो रूपों में की जाती है। शिव पुराणों के अनुसार Shiv Shankar जहाँ-जहाँ प्रकट हुए हैं, उस जगह पर उनकी पूजा ज्योतिर्लिंग के रूप में की जाती है।

Shiv Puran में Shiv Shankar Bhagwan की महिमा का जिक्र

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Shiv Puran सनातन धर्म के लोगों के लिए पवित्र ग्रंथ है। हिन्दू धर्म के मान्यता के अनुसार Shiv Puran in Hindi का पाठ करने से सर्व मनोकामनाएं सिद्ध होती हैं। जैसे की हम जानते हैं की Shiv Puran में  शिव के महिमा का बखान किया गया।

कहते हैं की Shiv Puran in Hindi का सच्ची आस्था और पूर्ण श्रद्धा से पाठ करने से निःसंतान को संतान की प्राप्ति होती है। वैवाहिक जीवन से जुड़ी सारी अर्चन दूर होकर जीवन में खुशहाली आती है। इसके पाठ से मनुष्य के सारे कष्ट दूर हो जाते है।

इस प्रकार Shiv Puran मानव के समस्त पाप को हरने वाला एवं मोक्ष परदायक माना गया है। Shiv Puran in Hindi के पठन-पाठन से मन Shiv Shankar की भक्ति में लीन हो जाता है और अंत में Shankar Bhagwan के परमधाम की प्राप्ति होती है।

सावन के महीने में, सोमवार के दिन और महाशिवरात्रि के अवसर पर Shiv Puran in Hindi का पाठ करने से भोले शंकर अति प्रसन्न होते हैं। इस दौरान इच्छित फल प्राप्ति के लिए पूरी विधि विधान से Shiv Puran Hindi का पाठ करना चाहिए।

Shiv Puran in hindi – संक्षिप्त विश्लेषण

Shankar Bhagwan के लीलाओं एवं कथाओं का Shiv Puran में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही Shiv Puran में Shiv Shankar की पूजा व आराधना का भी विस्तारित रूप में वर्णन है। इस पुराण में भगवान शिव के विभिन अवतारों के साथ 12 ज्योतिर्लिंगों का विशद् वर्णन दिया गया है।

Shiv Puran में करीव पचीस हजार श्लोक वर्णित है। यह ग्रंथ मुख्य रूप से 6 संहिता में विभक्त है। इन संहिता के नाम हैं – विद्येश्वर संहिता, रुद्र संहिता,  कोटिरुद्र संहिता, उमा संहिता, कैलास और वायु संहिता।  

1. विद्येश्वर संहिता : Shiv Puran के इस संहिता में महा शिवरात्रि व्रत, ओंकार का महत्त्व, शिवलिंग की पूजा विधि का विस्तार से उल्लेख किया गया। है। इसके साथ इसमें रुद्राक्ष के महत्व को भी दर्शाया गया है।

2. रुद्र संहिता– रुद्र संहिता में Shankar Bhagwan का जीवन-चरित्र उल्लेख किया गया है। इसमें पार्वती विवाह, कार्तिकेय और गणेश का जन्म, पृथ्वी परिक्रमा की कथा आदि का विस्तार से उल्लेख है।

3. कोटिरुद्र संहिताShiv Puran के इसी संहिता में Shiv Shankar के बारह ज्योतिर्लिंगों का वर्णन मिलता है। इसी पुराण मे भगवान शिव के सहस्त्र नामों का भी जिक्र मिलता है। इसकी चर्चा नीचे दी गयी है। कृपया आप इस लेख को एक वार पूरा पढ़ें।

4. उमा संहिता – इसमें शिव पार्वती के कथा का सविस्तर से वर्णन किया गया है। उमा संहिता  में ही देवी पार्वती के लीलाओं का उल्लेख किया गया है।  Shiv Puran के इस संहिता में Shiv Shankar के अर्द्धनारीश्वर स्वरूप का भी वर्णन मिलता है।

5. कैलास संहिता – इस संहिता में ओंकार के महत्व का वर्णन है। इसके साथ इसमें योग का विस्तार से उल्लेख मिलता है।

6. वायु संहिता– यह संहिता दो भाग में विभक्त है। पूर्व और उत्तर। इन दोनों भागों में मोक्ष के लिए शिव की आराधना, योग और शिव-ध्यान का महत्व को समझाया गया है।

शिव पुराण में वर्णित है 12 ज्योतिर्लिंग – Shiv Shankar Bhagwan

Shiv Puran - Shiv Shankar Bhagwan
शिव पुराण में वर्णित है 12 ज्योतिर्लिंग की कथा
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भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग का वर्णन Shiv Puran के कोटिरुद्र संहिता में वर्णित है। ये बारह शिव लिंग अति प्राचीन हैं। कहते हैं की इसमें Shiv Shankar का साक्षात वास है। भारत वर्ष में इस 12 ज्योतिर्लिंग के पूजन का विशेष महत्व है। इन 12 ज्योतिर्लिंग के नाम इस प्रकार हैं।

1- सोमनाथ ज्योतिर्लिंग -भारत के गुजरात में स्थित यह ज्योतिर्लिंग सबसे प्राचीन माना जाता है। शिवपुराण के आधार इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना स्वयं चंद्र भगवान ने की थी। जिस Shankar Bhagwan ने उन्हें अपने मस्तक पर धारण कर लिया।

2 – मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग– यह ज्योतिर्लिंग भारत के आन्ध्र प्रदेश राज्य के श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित है।

3- महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग – यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन नगरी में स्थित है।

4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग – ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में इंदौर के पास स्थित है। ऊं के आकार होने के कारण इसे ओंकारेश्वर नाम से जाना जाता है।

5 – केदारनाथ ज्योतिर्लिंग – यह ज्योतिर्लिंग भी Shiv Shankar के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में आता है। जो उत्तराखंड में स्थित है।

6 – भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग – यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पूणे के पास सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है।

7 – काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग – उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित Shiv Shankar के ज्योतिर्लिंग का खास महत्व है।

8 – त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग – यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित है।

9 – वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग – यह स्थान झारखण्ड राज्य के देवघर में स्थित है।

10 – नागेश्वर ज्योतिर्लिंग – यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के द्वारिका में स्थित है।

Shiv Puran - Shiv Shankar Bhagwan
shiv puran में वर्णित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग
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11- रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग – यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामेश्वरम में स्थित है।

12 – घृष्णेश्वर मन्दिर ज्योतिर्लिंग – यह महाराष्ट्र के दौलताबाद के पास स्थित है। है।

इस प्रकार हमने Shankar Bhagwan के 12 ज्योतिर्लिंग के नामों का संक्षेप में वर्णन किया है। Shiv Shankar के 12 ज्योतिर्लिंग के बारे में विस्तार से जानने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें।  

Shiv Puran में Shiv Shankar Bhagwan की सहस्त्र नामों का वर्णन

Shiv Puran के कोटिरुद्र संहिता में ही भगवान विष्णु द्वारा प्रदत भगवान शंकर के सहस्त्र नामों का उल्लेख मिलता है। भगवान शिव के 108 नाम हैं – (Shiv puran in Hindi )

1. शिव 2. महेश्वर 3. शंभू  4. शशिशेखर 5. जटाधर 6. वामदेव 7. महादेव 8. कपर्दी   9. शंकर (Shankar Bhagwan  ) 10. नीललोहित 11. शूलपाणी  12. खटवांगी 13. विष्णुवल्लभ  14. शिपिविष्ट  15. अंबिकानाथ  

16. श्रीकण्ठ 17. भक्तवत्सल 18. भव 19. शर्व  20. त्रिलोकेश  21. शितिकण्ठ 22. शिवाप्रिय  23. उग्र 24. कपाली 25. कामारी 26. सुरसूदन 27. गंगाधर 28. ललाटाक्ष 29. महाकाल 30. कृपानिधि

31. भीम 32. परशुहस्त 33. मृगपाणी 34. पिनाकी 35. कैलाशवासी 36. कवची 37. कठोर 38. त्रिपुरांतक 39. वृषांक 40. वृषभारूढ़ 41. भस्मोद्धूलितविग्रह 42. सामप्रिय 43. स्वरमयी 44. त्रयीमूर्ति 45. अनीश्वर

46. सर्वज्ञ 47. परमात्मा 48. सोमसूर्याग्निलोचन 49. हवि 50. जगद्गुरू

Shiv puran in Hindi – इसके साथ Shiv Shankar के नाम हैं।

51. दिगम्बर 52. पंचवक्त्र  53. सदाशिव 54. विश्वेश्वर  55. वीरभद्र 56. गणनाथ 57. प्रजापति   58. हिरण्यरेता 59. दुर्धुर्ष 60. गिरीश 61. सोम 62. अनघ 63. भुजंगभूषण 64. भर्ग 65. गिरिधन्वा

66. यज्ञमय 67. कृत्तिवासा 68. पुराराति 69. भगवान् 70. प्रमथाधिप 71. मृत्युंजय 72. सूक्ष्मतनु  73. परमेश्वर  74. गिरिप्रिय   75. व्योमकेश 76.  महासेनजनक 77. चारुविक्रम  78. रूद्   79. भूतपति

80. स्थाणु 81. अहिर्बुध्न्य 82. पशुपति  83. अष्टमूर्ति  84. अनेकात्मा 85. सात्त्विक  86. शुद्धविग्रह  87. शाश्वत 88. खण्डपरशु 89. अज 90. पाशविमोचन 91. मृड 92. गिरिश्वर 93. देव 94. विरूपाक्ष

95. अव्यय 96. हरि 97. अनंत 98. अव्यग्र 99. दक्षाध्वरहर 100. पूषदन्तभित् 101. भगनेत्रभिद्   102. अव्यक्त 103-सहस्राक्ष 104. सहस्रपाद 105. अपवर्गप्रद 106. अनंत 107. तारक 108. जगद्व्यापी

उपसंहार – Conclusion

Shiv Puran in Hindi का पाठ के लिए सावन का महिना और सोमवार का दिन शुभ माना गया है। Shankar Bhagwan के आराधना के लिए यह समय सवसे अच्छा होता है

कहते हैं की इस दिन Shiv Shankar की आराधना से चंद्रमा का कायाकल्प हो गया था। और भगवान शिव ने खुश होकर उन्हें अपने जटाओं में स्थान दिया। हम सबों को Shiv Puran का श्रवण करना चाहिए।

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