Vishnu bhagwan ke dashavatar ki 10 famous katha

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Dashavatar में जानिये Vishnu bhagwan की 10 प्रसिद्ध अवतार के बारें में 

Vishnu bhagwan के dashavatar में हम जानेंगे श्री हरि के अवतार की सम्पूर्ण कहानी। साथ ही हम जानेंगे की श्री हरि को विष्णु क्यों कहते हैं। विष्णु का मतलब क्या है। उन्हें नारायण क्यों कहा जाता है, साथ ही हम जानेंगे की उनके नाम हरि का क्या मतलव है।

भगवान विष्णु के dashavatar की चर्चा पुराणों में मिलती है। जिनमें उनका 9 अवतार हो चुका है। यहॉं हम विष्णु मंत्र के महत्व और विष्णु आराधना के बारें भी चर्चा करेंगे। तो चलिए पहले हम जानते हैं की भगवान विष्णु कौन हैं।

भगवान विष्णु संक्षिप्त परिचय – Vishnu bhagwan

Vishnu Bhagwan Ke Dashavatar
Vishnu Bhagwan with his wife Lakshmi ji
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सनातन धर्म के मान्यताओं के अनुसार त्रिदेव में Vishnu bhagwan को जगत के पालनहार माने जाते हैं। Dashavatar के द्वारा श्री हरि ने धर्म की रक्षा के लिए बार-बार इस धरा पर अवतरण लिया। Vishnu bhagwan के हजारों नाम हैं।

चतुर्भुज धारी Vishnu bhagwan श्याम वर्ण के हैं। इनका वाहन गरुड़ को माना जाता है। Vishnu bhagwan अपने हाथों में शंख, चक्र, गदा और पदम धारण करते है। इनका निवास क्षीर सागर माना गया है। जहॉं वे शेषनाग की शैया पर लक्ष्मी जी के साथ सदा विराजमान रहते हैं।

Vishnu bhagwan का अमोघ अस्त्र सुदर्शन चक्र कहलाता है। Vishnu bhagwan अपने dashavatar में सतयुग से लेकर अवतक 9 बार अवतार ले चुके है। उनके dashavatar का 10 वां अवतार कलयुग के अंत में कल्कि के रूप में होना बाकी है।

भगवान के नाम, विष्णु, नारायण और श्री हरी का मतलव

नारायण का मतलव  

जल को नीर या नर के नाम से भी जाना जाता है। Vishnu bhagwan का शेषनाग की शैया पर जल में निवास है। जल अर्थात नीर में निवास करने के कारण ही Vishnu bhagwan का नाम नारायण हुआ। यही कारण है की Vishnu bhagwan को उनके भक्त नारायण कहकर पुकारते हैं।

भगवान के नाम श्री हरी का मतलव

पुराणों में विष्णु भगवान को श्री हरी भी कहा गया है। हरी का मतलव होता है हरण करने वाला। विष्णु भगवान जगत के पालन har हैं। वे अपने भक्तों की पीड़ा को तुरंत हर लेते हैं अर्थात दूर कर देते है।

अपने dashavatar के क्रम में उन्होंने अवतार लेकर पापियों का सर्वनाश किया, धर्म की रक्षा की और अपने भक्त के दुखों का हरण किया। यही कारण है की Vishnu bhagwan को श्री हरी भी कहा जाता है।

उन्हें विष्णु क्यों कहते है।

अव हम जानेंगे की विष्णु का क्या मतलब है और श्री हरी को विष्णु क्यों कहा जाता हो। विष्णु अर्थात जो ब्रह्मांड के कण-कण में निवास करता हो, यानी जिसका विश्व के प्रत्येक अनु में वास हो वही तो विष्णु है।

आइये एक पौराणिक कथा के द्वारा Vishnu के मतलब को जानते हैं। जब विष्णु जी अपने dashavatar में नर सिंह रूप में अवतार लिया था। जब हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद से पूछा की तुम्हारा विष्णु कहाँ है। तब प्रह्लाद ने सहज भाव में उत्तर दिया की वे तो ब्रह्मांड के कण-कण में विराजमान हैं। वे हर जगह और हर बस्तु में मौजूद है।

तब असुर राज हिरण्यकश्यप ने पूछा की क्या तेरा विष्णु इस खंभे में भी है तब प्रह्लाद ने जवाव दिया हाँ। हिरण्यकश्यप ने खंभे में एक लात मारा और उस खंभे से Vishnu bhagwan नर सिंह रूप में प्रकट हुए। इस बात से सिद्ध होता है की विश्व के हर अनु में निवास के कारण हो वे विष्णु कहलाये।

Vishnu bhagwan के Dashavatar का वर्णन  

पुराणों के अनुसार अधर्म के विनाश और धर्म की रक्षा के लिए Vishnu bhagwan ने प्रत्येक युग में अवतार लिया है। जो विष्णु भगवान के Dashavatar के नाम से जाना जाता है। Dashavatar के क्रम में जब जब God Vishnu ने अवतार लिए लक्ष्मी जी भी उनके साथ इस धरा पर अवतरित हुई।

वैसे तो सतयुग से लेकर कलियुग तक इनके 24 अवतार माने गए हैं, जिनमें से उनके Dashavatar की प्रमुखता से चर्चा की जाती है। भगवान बिष्णु के ये अवतार ही हिन्दू धर्म में ‘ Dashavatar ‘ के रूप में प्रसिद्ध है।

1. मत्स्य अवतार – Matsya Avatar

Vishnu Bhagwan Ke Dashavatar
मत्स्य अवतार
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पुराणों में वर्णित तथ्यों के आधार पर जगत का पालनहार Vishnu bhagwan ने सतयुग में सृष्टि का प्रलय से रक्षा हेतु मछली के रूप में अवतार लिया था। इसीलिए Vishnu bhagwan के Dashavatar का पहला अवतार मत्स्यावतार के नाम से जाना जाता है।

मतस्य पुराण में राजा सत्यव्रत और Vishnu bhagwan की कथा का उलेसख मिलता है। मत्स्यपुराण में वर्णित कथा के अनुसार प्रलय काल में Vishnu bhagwan ने मछली का रूप धारण का राजा सत्यव्रत सहित सप्त ऋषियों, औषधिओं, प्राणियों और वेदों की रक्षा की थी।

पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार Vishnu bhagwan ने प्रलय से पहले ही राजा सत्यव्रत को दर्शन देकर कहा था की सात दिन बाद प्रलय आएगा। उस समय मेरी प्रेरणा से एक विशाल नाव आयेगी। प्रलय काल में तुम सप्त ऋषियों, औषधियों, बीजों व प्राणियों के सूक्ष्म शरीर को लेकर उस नाव में सवार हो जाना।

जब मैं मतस्य के रूप में तुम्हारे पास आऊँगा तब तुम नाव को मेरे सींग से बांध देना। इस प्रकार में प्रलय से रक्षा कर पार लगाऊँगा। प्रलय के वक्त राजा ने ठीक वैसा ही किया। इसके साथ ही Vishnu bhagwan ने राजा सत्यव्रत को तत्व ज्ञान से अवगत कराया। उनका उपदेश मतस्य पुराण में वर्णित है।

2. कच्छप अवतार या कूर्म अवतार – KURMA AVATAR

पुराणों में समुन्द्र मंथन की कथा मिलती है। कहते हैं की जब महर्षि दुर्वासा के श्राप से इन्द्र सहित सारे देवता श्री हीन हो गये थे। तव Vishnu bhagwan ने समुन्द्र मंथन कर अमृत प्राप्ति का प्रस्ताव दिया। ताकि उसका पान कर देवता अमर हो जायें।

तब सारे  देवता और असुरों ने मिलकर मिलकर समुन्द्र मंथन किया। जिसमें मंदराचल पर्वत को मथनी और नागराज वासुकि को नेति बनाया गया था। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार सागर मंथन के बक्त Vishnu bhagwan ने Dashavatar के दूसरे अवतार में कछुए के रूप में प्रकट हुए।

कहते हैं की कच्छप अवतार लेकर श्री हरी ने मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया था। जिसके कारण समुद्र मंथन में आसानी हुई। समुन्द्र मंथन में हलाहल और अमृत सहित 14 रत्नों की प्राप्ति हुई। Vishnu bhagwan के इस अवतार को कूर्म अथवा कच्छप अवतार के नाम से जाना जाता है।

3. वराह अवतार – varaha avatar

पुराणों के अनुसार हिरण्याक्ष और हिरण्यकाश्यप दोनो भाई थे। असुरहिरण्याक्ष ने भगवान ब्रह्मा की घोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न कर लिया। ब्रह्मा जी प्रसन्न होकर बोले मांगों क्या मांगते हो। हिरण्याक्ष ने उत्तर दिया भगवान मुझे वरदान दीजिए की युद्ध में हमें कोई न मार सके।

तव ब्रह्मा जी तथास्तु कहकर ब्रह्मलोक चले गये। उन्होंने इन्द्र को पराजित कर इन्द्र लोक पर अधिकार कर लिया। अपने को अजर, अमर और अविनाशी समझने लगा। वे देवताओं के शत्रु थे। पृथ्वी पर यज्ञ होते रहने से धरती का वाताबरण शुद्ध रहता था जिससे देवताओं को बल मिलता था।

एक दिन हिरण्याक्ष ने ब्रह्मांड से पृथ्वी चुराकर समुद्र के अंदर अर्थात रसातल में छिपा दिया था। इससे देवता लोग श्रीहीन होने लगे और भगवान बिष्णु के पास जाकर संकट से उबारने की विनती की। तब Vishnu bhagwan ने दशावतर के तीसरे अवतार में ब्रह्मा जी के नासिका से बराह का रूप लेकर अवतरित हुए।

विष्णु भगवान ने बराह अवतार लेकर समुद्र के अतल गहराई में जाकर पृथ्वी को ढूढना शुरू किया। उन्होंने अपनी थूथनी की मदद से पृथ्वी को ढूढ निकाला और पृथ्वी को अपने दांतों पर धारण कर सागर से बाहर ले आए। असुर हिरण्याक्ष ने Vishnu bhagwan का विरोध किया।

लंबे लड़ाई के पश्चात उन्होंने असुर हिरण्याक्ष का वध कर दिया। उन्होंने अपने खुरों से जल को स्तंभित कर पृथ्वी को दुबारा जल पर स्थापित किया। असुर हिरण्याक्ष के वध के बाद देवताओं ने फूल बरसाये।

4. नृसिंह अवतार या नरसिंह अवतार — Narsingha Avatar

Vishnu Bhagwan Ke Dashavatar
भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार
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अपने भाई हिरण्याक्ष के मृत्यु के बाद उसका भाई हिरण्यकश्यप अत्यंत क्रोधित हो गया। उन्होंने इसका बदला Vishnu bhagwan सहित सभी देवता से लेने का प्रण लिया। हिरण्यकश्यप Vishnu bhagwan को अपना परम शत्रु समझने लगे।

उन्होंने ब्रह्मा जी की तपस्या से देव, दानव, मानव और पशु-पक्षी सहित किसी भी प्राणी द्वारा मारे नहीं जाने का आशीर्वाद प्राप्त कर लिया। इसके साथ उन्होंने आशीर्वाद प्राप्ति किया की वह दिन, रात, सुवह,-शाम, अस्त्र-शस्त्र किसी भी चीज के द्वारा नहीं मारा जा सकेगा।

उनका पुत्र प्रह्लाद Vishnu bhagwan का परम भक्त निकला। हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद को हर तरह से Vishnu bhagwan की भक्ति से रोकने की कोशिश की। सारी कोशिस नकाम होने के बाद उन्होंने अपने पुत्र को कई वार जान से मारने का प्रयास किया।

अंतोगत्वा Vishnu bhagwan को अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए Dashavatar के इस क्रम में नरसिंह अवतार लिया। अपने नरसिंह स्वरूप में उन्होंने बड़े—बड़े नख के माध्यम से असुर राज हिरण्यकश्यप का वध किया था। इस प्रकार हिरण्यकश्यप अस्त्र-शस्त्र से नहीं बल्कि नाखूनों के द्वारा मार गया।

5. वामन अवतार—  Vamana Avatara

यह Vishnu bhagwan के Dashavatar में पाँचवा अवतार कहलाता है। भगवात पुराण के अनुसारविष्णु भगवान ने राजाबलि से देवताओं की रक्षा के लिए वामन अवतार लिया था। कहते हैं की एक बार प्रह्लाद के पौत्र राजाबलि ने शक्ति अर्जन के लिए अनेकों यज्ञ किये थे।

यज्ञ से घबराकर देवताओं ने Vishnu bhagwan से सहायता मांगी। जिस कारण विष्णु भगवान को वामन अवतार लेना पड़ा। वामन रूपी ब्राह्मण का रूप धारण कर वे यज्ञ स्थल पर पहुच गये। उन्होंने राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांग की।

राजा वाली ने बहुत ही मामूली दान समझ दान देने का संकल्प ले लिया। यधपि उनके गुरु रोकने की चेष्टा की लेकिन तब तक राजा बलि संकल्प ले चुके थे। तब वामन रूपी Vishnu bhagwan ने अपना विशाल स्वरूप करते हुये एक पग में धरती तथा दूसरे में स्वर्ग नाप लिया। तब तक राजा बाली समझ चुके थे।

उन्होंने तीसरे पग के लिए अपना सिर आगे कर दिया। इस प्रकार राजा बलि का मान मर्दन हो गया। Vishnu bhagwan राजा बलि के दानशीलता से अति खुश हुए और उन्हें पाताललोक का स्वामी बना दिया। पाताल में बलि ने Vishnu bhagwan को सदा अपने सम्मुख रहने का वचन ले लिया।

6. परशुराम अवतार— Parshuram Avatar

प्रभु के Dashavatar में से एक परशुराम अवतार भी माना जाता है। परशुराम अवतार Vishnu bhagwan का 6 वां अवतार कहा गया है। त्रेता युग में महिष्मती नगरी पर कार्तवीर्य अर्जुन नामक शक्तिशाली राजा राज्य करता था। राजा को 100 भुजायें थी जिस कारण वे सहस्त्रबाहु के नाम से जाने जाते थे।

उन्होंने तपस्या के बल पर ढेर सारी शक्ति को अर्जित कर लि। वह अत्यंत ही दुराचारी और अभिमानी हो गया। शक्ति के मद में चूर होकर वे अपने शक्ति का दुरुपयोग करने लगे।

हरिवंशपुराण के एक कथा के अनुसार, ऋषि आपव ने राजा सहस्त्रबाहु को क्रोध में आकार श्राप दिया था। उन्होंने सहस्त्रबाहु से कहा की एक दिन Vishnu bhagwan अवतार लेकर तुम्हें और तुम्हारे समस्त क्षत्रिय वंश का सर्वनाश करेंगे।

इस प्रकार सहस्त्रबाहु के शक्ति के दुरुपयोग को रोकने और पाप को धरती से खत्म करने के लिए विष्णु भगवान ने परशुराम के रूप में अवतार लिया। Vishnu bhagwan ने भार्गव कुल में महर्षि जमदग्रि के घर उनके पत्नी रेणुका के गर्भ से जन्म लिया।

भगवान परशुराम अपने पांचों भाई में सवसे छोटे थे। जब सहस्त्रबाहु के द्वारा उनके गाय को जबरन उठवा लिया। उनके पिता महर्षि जमदग्रि की हत्या कर दी गयी। फलतः परशुराम जी ने सहस्त्रबाहु के 100 हाथों को काट कर उनका वध कर दिया। उसके बाद वे एक-एक दुराचारी क्षत्रियों का सर्वनाश कर दिया।

7. राम अवतार — रामवातार

Vishnu Bhagwan Ke Dashavatar
भगवान विष्णु के रामावतर
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त्रेतायुग में Vishnu bhagwan के रामावतर से हर हिन्दू समुदाय के लोग परिचित हैं।  भगवान विष्णु के Dashavatar में भगवान राम का अवतार प्रसिद्ध है। भगवान राम का जन्म महाराज अयोध्या नरेश दशरथ के घर कौशल्या के गर्भ से हुया था। चार भाई में राम सवसे बड़े थे।

उन्होंने सीता स्वयंवर में शिव धनुष को तोड़कर सीता से विवाह किया। अपने पिता की आज्ञा मानकर उन्हें चौदह बर्ष का बनवास जाना पड़ा। बनवास के समय उनकी भार्या सीता  और अनुज लक्ष्मण हमेशा साथ थे। बनवास के दौरन उन्होंने कई असुरों का सर्वनाश किया।

बनवास के क्रम में जब अहंकारी रावण ने माता सीता का हरण कर लिया। तब भगवान राम ने वानर सेना की मदद से रामसेतु का निर्माण किया। इस दौरान उनके परम भक्त हनुमान जी ने उनका भरपूर साथ दिया। इस प्रकार भगवान राम वानर सेना की मदद से लंका पर चढ़ाई किये।

राम और रावण के बीच कई दिनों तक भयंकर युद्ध चला। अंत में भगवान राम ने पापी रावण का वध कर धरती को उसके अत्याचार से मुक्त कर धर्म की स्थापना की। भगवान राम हमेशा मर्यादा से बंधे रहे इस कारण वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। हिन्दू समुदाय के लोगों का भगवान राम के प्रति असीम आस्था है।

8. कृष्ण अवतार – KRISHNA AVATAR

Vishnu Bhagwan Ke Dashavatar
कृष्ण अवतार
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भारत वर्ष में शायद ही कोई आदमी होगा जो भगवान कृष्ण और राम के नाम से परिचित न हो। कहते हैं की भगवान राम 14 कलाओं से युक्त थे इसीलिए वे पुरुषों में उत्तम अर्थात पुरुषोतम कहलाये। जबकि श्री कृष्ण को16 कलाओं से पूर्ण माना गया है।

इसीलिए उन्हें देवों में उत्तम देवोत्तम की संज्ञा दी गयी है। Vishnu bhagwan के सभी अवतारों में कृष्णा अवतार को श्रेष्ठ माना गया है। Dashavatar में भगवान कृष्ण को God Vishnu का पूर्णावतार माना गया है।

माता देवकी और पिता वासुदेव के पुत्र के रूप में कंश के कारागार में उनका जन्म हुया था। Vishnu bhagwan ने कृष्ण अवतार में बाल लीलाएं, कई असुरों का वध, महाभारत में अर्जुन को गीता का उपदेश, जरासंघ का वध इत्यादि कई कृत्य का अंजाम दिए।

भगवान श्री कृष्ण, विराट स्वरूप तथा बहु-आयामी व्यक्तित्व के धनी थे। इनके विराट स्वरूप की व्याख्या करना सूर्य को दीप दिखाने के समान है। भगवान Shri Krishna Ji के जीवन में कर्म की हमेशा निरंतरता नजर आती है। उनके जीवन में कभी भी निशक्रियता नहीं दिखाई दिया।

जन्म के साथ ही Shri Krishna Ji का जीवन हमेशा सक्रिय रहा। जिसे इन उदाहरण से आसानी से समझा जा सकता है।  उनका जन्मे लेते ही जेल कर दरवाजा खुल जाना, अंधेरी रात में मूसलाधार बारिश के बीच गोकुल जाना। वचपन में ही कई रकक्षों को वध करना, एसे कई उदाहरण है।

जो उन्हें अवतारी दिव्य पुरुष के रूप में सिद्ध करती हैं। इसीलिए Dashavatar में भगवान Shri Krishna Ji को सोलह कलाओं से युक्त पूर्ण अवतारी माना जाता है। 

उनके द्वारा की गयी वाल-लीला हो या कुरुक्षेत्र के मैदान में दिया हुआ गीता का उपदेश। हर दृष्टि से उन्होंने समाज को नया दृष्टिकोण दिया। भगवान Shri Krishna Ji परम ज्ञानी थे, उन्होनें कुरुक्षेत्र में गीता के उपदेश के माध्यम से आत्मा और परमात्मा जैसे गूढ रहस्य पर से पर्दा उठाया।

9. बुद्ध अवतार – buddha avatar

हिन्दू धर्म ग्रंथों के आधार पर भगवान बुद्ध को Vishnu bhagwan के Dashavatar में 9 वां अवतार माना गया है। परंतु पुराणों में जिस भगवान बुद्ध की चर्चा की गयी है उनका जन्म गया के नजदीक कीकट में बताया जाता है। पुराणों में वर्णित बुद्धावतार के कथा के अनुसार उनके पिता का नाम अजन बताया गया है।

राज्य की कामना से जब असुरों ने भगवान इन्द्र से साम्राज्य स्थिर रहने का उपाय पूछा। तब इन्द्रदेव ने उन्हें बताया कि सुस्थिर शासन के लिए यज्ञ एवं वेद विहित आचरण जरूरी है। कहते हैं की इस कारण असुर का वैदिक आचरण और यज्ञ की तरफ झुकाव होने लगा।

जिससे उनकी शक्ति में बढ़ोतरी होने लगी। असुरों की बढ़ती शक्ति से घबड़ाकर सभी देवगण  Vishnu bhagwan के शरण में गये। इस कारण Vishnu bhagwan ने देवताओं के हितों की रक्षा के लिए बुद्ध अवतार लिया। भगवान बुद्ध ने असुरों से कहा कि यज्ञ करना पाप है।

यज्ञ की ज्वाला में कितने ही जीव-जन्तु जलकर मर जाते हैं। भगवान बुद्ध के उपदेश से असुर प्रभावित होकर यज्ञ व वैदिक आचरण का अनुसरण करना छोड़ दिया। जिससे उनकी शक्ति क्षीण होने लगी। फलतः देवताओं ने असुरों पर चढ़ाई कर अपना राज्य वापस पाया।

10. कल्कि अवतार – KALKI AVATAR

पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार कलयुग में Vishnu bhagwan का कल्कि रूप में अवतार होगा। यह dashavatar का अंतिम अवतार होगा, Vishnu bhagwan का कल्कि अवतार कलियुग के अंत में होगा।

भगवान राम को 14 कलाओं से युक्त, श्री कृष्ण को 16 कलाओं से युक्त माना गया है। लेकिन कलयुग में Vishnu bhagwan का कल्कि रूप में अवतार 64 कलाओं से युक्त होगा।

पुराणों में वर्णन मिलता है की dashavatar का अंतिम अवतार अर्थात कल्कि अवतार, शंभल नामक स्थान पर विष्णुयशा नामक तपस्वी ब्राह्मण के घर में होगा। वे देवदत्त नामक घोड़े पर सवार होकर जगत से समस्त पापियों का संहार कर धर्म का फिर से स्थापना कर सतयुग का आरंभ करेंगे।

Vishnu stutiVishnu bhagwan का प्रिय मंत्र, अस्त्र व आराधना दिवस 

Vishnu bhagwan की आराधना के लिए हर महीने की एकादशी तिथि को शुभ माना जाता है। इसके साथ ही Vishnu bhagwan की पूजा अनंत चतुर्दशी को विशेष रूप से किया जाता है। Vishnu Bhagwan के dashavatar में इसका सम्पूर्ण विवेचन है।

पीला रंग Vishnu bhagwan को प्रिय माना जाता है। वे खुद पीला वस्त्र धारण करते हैं। इसीलिए Vishnu bhagwan को पीताम्बर धारी भी कहा जाता है। गुरुवार का दिन विष्णु भगवान का प्रिय दिवस है। इस दिन Vishnu bhagwan की पूजा पीले वस्त्र पहन कर करना चाहिए।

इनके पूजा में पीली चीज़ों का उपयोग शुभ माना जाता है, जैसे पीले फूल और केला इत्यादि। केले के पेड़ में Vishnu bhagwan का बास माना गया है। इसलिए महिलायें गुरुवार के दिन पीला वस्त्र धारण कर केले के पेड़ के पास पूजा करती है।

Vishnu mantra व महत्व

विष्णु के परम धाम को वैकुंठ कहा जाता है। विष्णु के उपासक वैष्णव कहलाते हैं। Vishnu bhagwan के प्रिय मंत्र जिसका वर्णन Dashavatar में भी मिलता है। इस मंत्र के जाप से ध्रुव और प्रह्लाद को Vishnu bhagwan के परमधाम की प्राप्ति हुई। ये मंत्र हैं।

“ॐ नमो भगवते वासुदेबाय नमः”।

इसके अलाबा किसी शुभ प्रोयोजन के समय भवन विष्णु को आह्वान करने के लिए निम्नलिखित मंत्रों का उच्चारण किया जाता हो।

“मंगलम भगवान विष्णु:, मंगलम गरणध्वज: । मंगलम पुण्डरी काक्ष:, मङ्गलाय तनो हरी:”

conclusion – उपसंहार

Vishnu bhagwan ने dashavatar के विभिन स्वरूपों के माध्यम से हमेशा से जगत का कल्याण किया। विष्णु भगवान dashavatar के माध्यम से दुराचारियों का अंत कर जगत में धर्म की स्थापना की। जीवन-मरण और आत्मा परमात्मा जैसे रहस्य से अवगत कराया। श्री हरी को कोटी-कोटी नमन।

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