why we celebrate holi in hindi – होली क्यों मनाते हैं ?

Why We Celebrate Holi In Hindi – होली क्यों मनाते हैं ?

होली एक ऐसा त्योहार है जिसे भारत में सभी धर्मों के लोग अति उत्साह और मस्ती के साथ मनाते हैं। यह festival हमेशा से एकता सदभावना और भाई चारे का सन्देश देता रहा है।

रंगों का त्योहार होली ,भारत और नेपाल के प्रमुख त्योहारों में एक है। यद्यपि Holi festival दक्षिण भारत में उतना लोकप्रिय त्योहार नहीं है। लेकिन पुरे उत्तर भारत में यह  बहुत ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है।

आज हम Why we celebrate Holi In Hindi – होली क्यों मनायी जाती है। इसी पर विस्तार से चर्चा करेंगे ? होली का उत्सव कहीं डोलयात्रा या वसंत उत्सव के रूप में भी जाना जाता है।

वैसे तो holi हिन्दू समुदाय का प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। लेकिन अन्य समुदाय के लोग भी बढ़-चढ़कर रंगों के इस त्योहार में हिस्सा लेते हैं। मुग़ल बादशाह अकबर भी Holi festival को अपनी प्रजा के साथ बहुत ही सदभाव के साथ मानते थे।

ऋषियों कि भूमि भारत आस्था और त्योहारों का देश है। भारतवर्ष में शायद ही कोई महीना होगा, जिस महीने कोई त्योहार न हो। भारत में विभिन्य धर्मों के द्वारा नाना प्रकार के उत्सव मनाये जाते हैं।

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इन उत्सवों में होली(Holi), बैसाखी, दशहरा, दीपावली, रामनवमी, मुहर्रम, रमजान, ईद, गुड फ्राइडे प्रमुख है। इसमें Holi festival मस्ती, एकता, उमंग और उत्साह का प्रतीक माना जाता है।

तो आइये Why We Celebrate Holi In Hindi के माध्यम से होली के बारें गहराई से समझते हैं।

मनाने का समय – details Why We Celebrate Holi In Hindi

Holi festival शरद ऋतू के समापन और गीष्म ऋतू के आगमन के मध्य  मनाते हैं । इस समय वसंत ऋतू अपने यौवन पर होती है।  प्रकृति चारों ओर  रंग विरंगे फूलों और हरियाली से अपनी अदभुत छटा बिखेर रही होती है।

आमों के पेड़ पर लदे मंजरों से आती हुई भीनी-भीनी खुशबु मन को सरोवर कर रही होती है। नवोदित हरितम पतियों के ओट से निकलती कोयल कुक वहुत ही न्यारी होती है।

मधुवन में भमरों के  मधुर गुंजन से पूरा बातावरण संगीतमय हो जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार होली का उत्सव फाल्गुन पूर्णिमा के अगले दिन मनाया जाता है।

फाल्गुन पूर्णिमा के रात्रि को होलिका दहन होता है। उसके ठीक अगले दिन सुवह से ही लोग एक दूसरे को होली(Holi)कि शुभकामना भरे सन्देश भेजना शुरू कर देते है।

हिंदी नवबर्ष का पहला दिन होता है होली

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार होली का त्योहार फ़ाल्गुन मास के पूर्णिमा के अगले दिन यानि चैत्र प्रतिपदा को मनाया जाता है। हिंदी पंचांग के अनुसार, हिंदी नवबर्ष का पहला महीना चैत्र होता है।

Why We Celebrate Holi In Hindi - होली क्यों मनाते हैं ?
होली का आनंद लेते लोग – Image by Pashminu Mansukhani from Pixabay

भले हम आज पाश्चात्य देशों से प्रभावित होकर अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार एक जनवरी को नया साल मनाते हैं। लेकिन अगर भारतीय परिपेक्ष से देखें तो चैत्र मास के पहले दिन से हिन्दू नवबर्ष की शुरुआत होती है। 

इस तरह रंगों के त्योहार होली Holi festival के द्वारा हिंदी नवबर्ष का स्वागत किया जाता है। सारे  तीरथ बार-बार गंगासागर एक हर क्यों ? जानने के लिए क्लिक करें।

रंगो का त्योहार होली कैसे मनाई जाती है।

जैसा की हम जानते हैं कि Holi festival फाल्गुन मास के पूर्णमासी होलिका दहन के साथ शुरू होता है।दो दिन तक चलने वाला यह उत्सव पूर्णमासी के अगले दिन रंगोत्सव के साथ समाप्त होती है।

यह त्योहार हर वर्ष प्रायः अंग्रेजी के मार्च महीने में आता है। Why We Celebrate Holi In Hindi केअंतर्गत हम दोनो दिनों के बारें में जानते हैं।

पहला दिन – Holika Dahan

होलिका दहन किसी सार्वजानिक स्थान पर किया जाता है। जहॉं पहले से लकड़ी,गोबर के उपलों आदि को इकट्ठा किया जाता है। होलीका दहन के लिय समय निर्धारित होता है।

पंचांग के अनुसार निर्धारित समय पर होलिका दहन के लिए जमा किये गए लकड़ी में आग लगते हैं। इस प्रकार लोग लोग ढोल-मजीरा के साथ नाचते गाते हुए होलिका दहन कि विधान को पूरा किया जाता है।

इस अवसर पर होली (Holi) का पारम्परिक गीत फाग गाया जाता है। लोग जलती हुई आग कि परिक्रमा कर,अग्नि देवता से अपनी मनोवांक्षित इच्छा पूर्ति हेतु प्रार्थना करते हैं।

किसान होलिका दहन (Holika dahan) की अग्नि का  परिक्रमा करते हुए भगवान से अच्छी फसल कि कामना करते हैं। होलिका दहन क्यों मनाया जाता है। होलिका दहन से जुडी हैं पौराणिक कथायें क्या हैं, आइये जानते हैं।

दूसरा दिन रंगों का त्योहार होली(Festival of Holi)

होलिका दहन के अगले दिन Holi festival मनाया जाता है। इस दिन लोग सभी द्वेष-भाव भूलकर एक दूसरे से गले मिलते हैं। होली के दिन लोग मंडली बनाकर झुंडो में सड़क पर निकलते हैं और एक दूसरे को रंग और अबीर लगते है।

इस दिन अपनों से बड़े के पैर पर गुलाल भी ड़ालकर उनका आशीर्वाद लेने की परम्परा प्रचलित है।होली एक हर्षोल्लासपूर्ण मनाया जाने वाला एक सामुदायिक त्योहार है।

इस दिन होली खेलने के लिए महिलाएं सलवार कमीज और पुरुष सफ़ेद ‘कुर्ता पायजामा पहनते हैं। इस दिन चारों तरफ ढोलक और मजीरा की आवाजें सुनाई देती है। होली के गीतों से सारा वातावरण गुंजायमान हो उठता है। 

सभी आयु वर्ग के हाथ में अबीर और ‘गुलाल’ के साथ एक दूसरे को होली का मुबारकबाद देते हैं। वे एक दूसरे पर रंगों से भरी पिचकारियों मारते हैं। लोग बड़े-बड़े ड्रम में रंग घोलकर रखते हैं।

इस प्रकार एक दूसरे को रंगो से सरोबोर कर देते हैं। कभी-कभी, वे कीचड़ उछाल कर इस उत्सव का मज़ा लेते हैं। शाम में लोग अपने मित्रों और रिश्तेदारों के घर जाकर उनसे गले मिलते हैं।

एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर होली की शुभकामनायें देते है। इस दिन घर में आये मेहमान का स्वागत भी रंग और अबीर के साथ किया जाता है। 

होली के दिन लोग एक दूसरे में मुँह पर काली मोबिल या नहीं छूटने वाली केमिकल लगा देते है। इन चीजों का उपयोग होली के अवसर पर कभी भी नहीं करना चाहिए। लोग होली के अवसर पर भाँग की ठंडाई और भाँग की गोली खाते हैं।

कुछ लोग मौज-मस्ती के नाम पर रंगों के जगह  नाली का कीचड़ और गोबर का प्रयोग करते हैं। इस कृत्य से द्वारा वे होली के माहौल को बिगाड़ने की चेष्टा करते हैं।

इस अवसर पर लोग भांग मिले हुए ठंडाई पीकर मदमस्त होकर होली खेलते हैं। होली खेलते समय रिश्तों और मर्यादों का जरूर ख्याल रखना चाहिए।

सब एक स्वर में गाते हैं बुरा न मानो होली है। भांग के नशे में मदमस्त होकर सभी झूमते हैं और रंग और गुलाल एक-दूसरे पर लगाते हैं। इस दिन सारे गिले-शिकबे भुलाकर एक दुसरे के गले मिलते हैं।

बच्चों के लिए खास होती है होली- 

रंगों का त्योहार होली बच्चे के लिए भी वेहद खास होता है। हो भी क्यों न,क्योंकि इस दिन उन्हें बिना रोक-टोक दिन भर मौज मस्ती करने कि आजादी जो मिल जाती है। 

बच्चे रंगीन पानी के गुब्बारे भरते हैं और एक दूसरे के ऊपर फेंकते हैं। वे पिचकारी में रंग भरकर एक दूसरे पर रंग डालते है।  अपने दोस्तों के टोली में रंगों से नहाकर, दिन भर खूब मस्ती करते है।

आजकल बाजार में इस अवसर पर बच्चों के लिए अलग-अलग डिजाइन वाली पिचकारी उपलब्ध होती है।होली के एक दिन पहले ही बच्चे अपने माता-पिता के साथ बाजार जाते है।

वहॉं वे अपनी पसंद कि पिचकारी,बैलून,रंग और गुलाल  खरीद लाते हैं। इस तरह बड़ो के साथ-साथ बच्चे भी Holi festival का खूब आनंद उढ़ाते हैं।

होली पर खास पकवान

भारत में कुछ खास पकवानों का भी किसी न किसी त्योहारों के साथ संबंध होता है। जैसे कि मकर संक्रांति के मौके पर, तिल एबं शक्कर से बनाई हुई लड्डू ,तिलकुट,गजक आदि व्यंजन प्रसिद्ध हैं।

उसी तरह होली के मौके पर मिठाई,गुझिया ,पुवा आदि बनाये और खाये जाते हैं।

होली से जुड़ि पौराणिक कथायें

पहला, इसी दिन दैत्यराज हरिण्याकश्यप ने भक्त प्रहलाद को अपनी बहन होलिका द्वारा  जलाकर मारने का प्रयास किया।

दूसरा, इस दिन भगवान शिव ने रति के पति कामदेव को भस्म करने के बाद पुनर्जीवित किया था।

तीसरा – इस दिन कृष्ण ने पूतना नामक राक्षशी का वध किया था। चौथा, मान्यता है कि इसी दिन कृष्ण भगवान ने ब्रज में सबसे पहले राधा के संग होली खेली थी। 

होली के दिन हुआ था कामदेव का पुनर्जन्म

होली उत्सव से जुडी एक पौराणिक कथा के अनुसार पार्वती, भगवान शिव से विवाह करना चाहती थीं। उस समय भगवान शंकर कैलाश पर्वत पर वर्षों से अपने तपस्या में लीन थे।

उन्होंने इंद्र देव से भगवान शिव की तपस्या भंग करने के लिए  सहायता मांगी। इंद्र ने कामदेव को इस कार्य कि जिम्मेदारी दी।  कामदेव ने अपनी माया से सम्पूर्ण वातावरण में वसंत का प्रभाव पैदा कर दिया।

सम्पूर्ण जगत कामदेव के माया से काममोहित हो गए लेकिन भगवान शिव पर इसका कोई असर नहीं हुआ। कामदेव के लाख कोशिस के बाद भी जब भोले शंकर ने अपनी आखें नहीं खोली।

तब जाकर कामदेव ने शिव के ऊपर पुष्पवान चला दिए। जिससे तपस्या में लीन भगवान शिव ने क्रोध में आकर तीसरा नेत्र खोल दिया। भगवान शिव के तीसरे नेत्र के खुलने से कामदेव जलकर भस्म हो गये।

कामदेव के भस्म होने के पश्चात् उनकी पत्नी रति भगवान शिव के सामने घोर विलाप करने लगी। उन्होंने भगवान शिव से अपने पति को जीवित करने के लिए निवेदन की।

कहते है की भगवान शिव की कृपा से कामदेव अगले दिन जीवित हो गए। सारे जगत में फिर से उत्साह का वातावरण कायम हो गया। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन कामदेव के भस्म होने के कारण होली जलाई जाती है।

इसके next day कामदेव के जीवित होने की खुशी में रंगोत्सव का त्योहार मनाया जाता है। इस प्रकार पौराणिक समय से ही वसंतोत्सव और होली मनाने की परंपरा चली आ रही है।

 वाल-कृष्ण द्वारा पूतना नामक राक्षशी का वध

होली को भगवान श्रीकृष्ण के साथ भी जोड़कर देखा जाता है। जहॉं इस त्योहार को श्री कृष्ण और राधा के प्रेम के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। वहीं,पौराणिक कविदंती के अनुसार,श्री कृष्ण ने इसी दिन पूतना का संघार किया था।

कंस को जव यह पता चला की उसको मारने वाला जन्म ले चुका है और वह वाल-कृष्ण रूप में गोकुल में मौजूद है।  तब उन्होंने कृष्ण को मारने  के लिए पूतना नामक राक्षसी को गोकुल भेजा।

पूतना स्तनपान के बहाने वाल श्रीकृष्ण को विषपान कराकर मार देना चाहती थी। लेकिन कन्हैया उसकी हकीकत को समझ गए। उन्होंने दुग्धपान के बहाने ही पूतना का ही वध कर दिया।

इस प्रकार कृष्ण के  सकुशल रहने और पूतना के मरने की खुशी में पुरे नंदगांव में रंगोत्सव मनाया गया था। कहते हैं कि तभी से होली का त्योहार मनाया जाता है।

होलिका दहन-Holika dahan से जुडी हैं भक्त प्रहलाद की कहानी

हिन्दू समुदाय में होलीका दहन से जुड़ी भक्त प्रहलाद कि कथा प्रसिद्ध है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार असुर राज हिरण्यकश्यप अत्यंत अभिमानी राजा था। 

हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रहलाद को विष्णु भगवान की पूजा करने से रोकता है। भगवान विष्णु में अट्टु आस्था रखने वाले भक्त प्रह्लाद को कई विधि से मारने का प्रयास करता है।

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होलीका दहन की तैयारी – By https://www.flickr.com/photos/wonker-commons.wikimedia.org

लेकिन वह हर बार प्रहलाद को मारने में विफल हो जाता है। अंत में, असुर राज हिरण्यकश्यप अपने बहन होलिका द्वारा प्रह्लाद को जला कर मारने का आदेश देता है।

होलिका को एक फायर फ्रूफ चादर के कारण आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका प्रहलाद को आग के ढेर में लड़के के साथ बैठती है। हालाँकि राजकुमार प्रह्लाद भगवान विष्णु कि कृपा से बच जाता है।

इसी घटना की याद में हर साल फाल्गुन पूर्णमासी को होलिका दहन कि परम्परा प्रचलित है। इस प्रकार होलिका दहन बुराई पर अच्छाई के विजय के प्रतिक का रूप में हर साल मनाया जाता है।

इसके साथ ही होलिका दहन से सन्देश प्राप्त होता है। भक्त-वत्सल्य भगवान अपने भक्त की रक्षा के लिए भगवान सदा उपस्थित रहते हैं। भक्त प्रहलाद आग में क्यों नहीं जला जानने के लिए क्लिक करें।

होली का इतिहास- about Holi in hindi

रंगों का त्योहार होली मनाने के बारे में की कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं ।  होली श्री कृष्ण के निश्छल प्रेम को दर्शाता है जिसे उन्होंने राधा और उनकी गोपियों के साथ व्यक्त किया था।

कहते हैं कि कृष्ण भगवान ने सबसे पहले राधा रानी के साथ ब्रज में ही होली खेली थी। ब्रज की होली पूरी दुनिया में मशहूर है। इस अवसर पर देश बिदेश से लोग ब्रज की होली देखने के लिए आते हैं।

आज बिरज में होरी रे रसिया, आप यह गीत जरूर सुने होंगे। होली के अवसर पर घर-घर में इस तरह के होली मधुर संगीत सुनाई परते हैं।

ब्रज में होली के अवसर पर चारों तरफ प्रेम और भक्ति के रंग बिखरे दिखाई देते हैं। इस आधुनिक समय में भी ब्रज में खेली जाने वाली होली में प्राकृतिक रंगों का उपयोग होता है।

लठमार होली- holi festival in hindi

लठमार होली का आयोजन कृष्ण की नगरी नंदगॉंव एवं राधा के गांव बरसाना में होली के अवसर पर किया जाता है। यह स्थान भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा के पास स्थित है।

कहा जाता है की श्री कृष्ण जव होली के अवसर पर राधा संग होली खेलने बरसाने गए थे। तव गोपियों चिढ़कर लाठी मारकर सारे ग्वाल-वालों से पीछा छुड़ाई थी।

इसी परम्परा को कायम रखते हुए नंदगाँव के गोप हर साल होली खेलने बरसाना आते हैं। यहाँ जब नंदगांव के गोप बरसाने की महिलायें पर रंग डालती हैं।

तव परम्परा के अनुसार यहां की महिलाएं नंदगॉंव  के गोपों को लाठी मारती हैं।  चूँकि इस अवसर पर महिलाओं के द्वारा लाठी हंसी-खुशी के माहौल में मारा जाता है।  इसीलिए यह दृश्य देखने में बड़ा ही मनमोहक लगता है।

इस तरह लोग रंग भरी पिचकारियों से बरसते रंगों एवं हवा में उड़ते गुलाल के बीच मदमस्त हो जाते हैं। लठमार होली का आयोजन राधा रानी मंदिर के बिशाल प्रांगन में किया जाता है।

दुनियॉं भर से लाखों की संख्या में लोग लठमार होली को देखने बरसाने आते हैं। इस दौरान पूरा वातावरण राधा और कृष्ण के जयकारा से गूंज उठता है। इसी तरह अगले दिन बरसाना से लोग नंदगाँव में होली खेलने के लिए जाते हैं।

भारत में होली-How Holi celebrated in India

भारत के अलग-अलग राज्यों में होली विभिन्न रूप और परंपरा के साथ मनाई जाती है। आगे हम जानेंगे कि भारत के अलग-अलग राज्यों में Holi festival किस तरह से मनाया जाता है।

Why We Celebrate Holi In Hindi - होली क्यों मनाते हैं ?
मथुरा में होली – By Narender9 – commons.wikimedia.org

हरियाणा : हरियाणा में Holi festival को होली, दुलंडी या धुलैंडी के नाम से भी जाना जाता है। हरियाणा में होली के अवसर पर जब पुरुष महिलायें पर रंग डालती है। तब महिलायें के द्वारा पुरुषों को खास तरह से तैयार कपड़े के कौड़े मारने का रिवाज है।  

बिहार एबं झारखंड : यहाँ Holi festival को फगुवा के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ फागुन पूर्णिमा के दिन घुल खेल अर्थात धूल और कीचड़ से होली खेली जाती है। तथा रात में होलिका दहन की रस्म को पुरे विधि विधान के साथ मानते है।

होलिका दहन के लिए लकड़ी का विशाल ढेर जमा कर जलाया जाता है। होलिका दहन के आलाव में गेहूँ और चना पौधा सहित डालकर अग्नि देव से प्रार्थना की जाती है।

पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में भी होली का स्वरूप पूर्णतया उत्साह और उमंग से परिपूर्ण होता है। होली के अवसर पर बंगाल में दोल जात्रा निकाली जाती है।  इस दिन,पालकी को सुसज्जित कर चैतन्य महाप्रभु कि शोभायात्रा निकाली जाती है।

पुरुष एबं महिलायें अपने पारम्परिक पोशाक में  शंख बजाते हुए कीर्तन गाती हैं तथा श्री कृष्णा और राधा रानी की पूजा करती हैं।

राजस्थान: राजस्थान में भी Holi festival बहुत ही हर्षौल्लास के साथ मनाया जाता है। होली के अवसर पर जैसलमेर पैलेस को इंद्रधनुषी रंगों में सजाया जाता है। 

रंग भरी पिचकारियों द्वारा निकले रंगों से सरावोर राजस्थान के लोग इन रंगों में मदमस्त हो जाते हैं। लोक गीतों से सारा वातबरण गुंजायमान हो जाता है।

उत्तरप्रदेश : उत्तरप्रदेश के मथुरा, वृंदावन, नंदगांव और बरसाने का Holi festival जगत प्रसिद्ध है। भगवान श्री कृष्ण का घर  नंदगांव था जवकि राधा रानी की बरसाने। 

इन्ही स्थानों पर श्री कृष्णा राधा और गोपियों के साथ रास लीला रचाते थे। इन जगहों पर होली के दौरान श्रीकृष्णा के निस्चल प्रेम का एक जीवंत एहसास का अनुभव होता है।

पंजाब: सिख समुदाय के द्वारा यह त्योहार ‘होला मोहल्ला’ के रूप में जाना जाता है। इस अवसर पर  सिक्खों के सबसे पवित्र धर्मस्थल, श्री आनन्दपुर साहिब में विशाल मेले का आयोजन होता है। 

सिख समुदाय के लोग भी Festival of Holi को वहुत ही धूम-धाम से मनाते है। 

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ : मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी Festival of Holi का खास महत्त्व है। छत्तीसगढ़ के आदिवासियों समुदाय भी होली अपने खास अन्दाज में मानते हैं।

इस त्योहार को यहाँ होरी के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ होलिका दहन के  दूसरे दिन धुलैंडी मनाते हैं तत्पश्चात रंग पंचमी मनायी जाती है। 

महाराष्ट्र और गोवा : Holi festival को  महाराष्ट्र में ‘रंग पंचमी’ और ‘फाल्गुन पूर्णिमा’ के नाम से जाना जाता है। गोवा के लोग इस त्योहार को शिमगा  कहते हैं।

यहाँ के लोग होली के मौके पर हाथ में अबीर व् गुलाल लेकर झुण्ड बनाकर निकलते हैं। तथा सभी एक दूसरे को अबीर व् गुलाल लगाकर होली की शुभ कामना देते हैं। 

ओडिशा – पश्चिम बंगाल की तरह ओडिशा में Holi को ‘बसंत उत्सव’ एबं  ‘डोल पूर्णिमा’ के नाम से जानते हैं।

नार्थ ईस्ट के राज्यों में होली : भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी होली की धूम रहती है। असम, मणिपुर, त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश में भी होली उत्साह और उमंग से मानते हैं। मणिपुर में इसे योशांग कहते हैं।

इसके अलावा भारत के अन्य राज्यों में भी Festival of Holi बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है। उत्तराखंड और हिमाचल में होली पर भिन्न प्रकार के संगीत समारोह का आयोजन भी किया जाता है।

विदेशों में होली का त्योहार- Holi Festival in outside India

इसके अलावा Holi festival दुनियॉं के कई देशों में बड़े ही उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। इन देशों में मॉरिशस, नेपाल,अमेरिका, इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया  का नाम प्रमुख है।

Why We Celebrate Holi In Hindi - होली क्यों मनाते हैं ?
अमेरिका में होली – By Steven Gerner -commons.wikimedia.org

प्रवासी भारतीय दुनियॉं के किसी देश में गये, लेकिन अपने पुरातन संस्कृति को नहीं भूले।

उपसंहारWhy We Celebrate Holi In Hindi

होली का त्योहार प्रेम, सद्‌भावना और भाईचारे का त्योहार है। यह त्योहार हमारी संस्कृतिक विरासत है। आपसी सहयोग और भाईचारे के द्वारा होली के पवित्रता को नष्ट होने से बचाया जा सकता है।

आजकल होली के अवसर पर भांग की ठंढाई की जगह शराब का प्रचलन हो गया है। शराब की नशा में धुत होकर कुछ असामाजिक तत्व होली पर हंगामा करते हैं। 

हमें ऐसी चीजों से बचना चाहिए तथा इस अवसर पर हंगामा खड़ा करने वाले असामाजिक तत्वों पर ध्यान रहना चाहिए ताकि होली कि मूल भावना कलुषित न हो।

दोस्तों Why We Celebrate Holi In Hindi – होली क्यों मनाते हैं, शीर्षक के अंदर लिखा गया यह लेख कैसा लगा अपने सुझाव से अवगत जरूर करायें।

अगर आप  essay on holi in hindi या importance of holi festival in hindi के बारें जानना चाहते हैं तो यह लेख आपको जरूर मदद कर सकता है।

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