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Why We Celebrate Makar Sankranti In Hindi Language – मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है, मकर संक्रांति का महत्व

मकर संक्रांति नववर्ष के आगमन के बाद भारत में मनाया जाने वाला पहला त्योहार है।  जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का पावन उत्सव को मनाया जाता है।  पराणिक कथाओं से लगता है कि मकर संक्रांति का इतिहास सदियों पुराणा है। 

भारत के लोग ऋतुओं के  परिवर्तन  को बहुत ही उमंग और आस्था साथ मनाते हैं। मकर संक्रांति ऐसा ही एक उत्सव है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं इसके पीछे करना है की यह तिथि सौर कैलेंडर के अनुसार निर्धारित होती है।

बच्चों के लिए भी मकर संक्रांति विशेष होता है।  बच्चे इस दिन बेरोक-टोक रंग बिरंगी पतंग लेकर हवा में उड़ाते है। पूरा आकाश रंग बिरंगी पतंगों से सतरंगी हो जाता है।  कहीं-कहीं बड़े स्तरों पर पतंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है।

इस त्योहार को कुछ खास पकवानों से भी जोड़ कर देखा जाता है।  इस दिन तिल और गुड़ के लड्डू, गजक, तिलकुट इत्यादि प्रसाद के रूप में चढाने और खाने का प्रचलन है। 

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है इन हिंदी (Why We Celebrate Makar Sankranti In Hindi Language )में आगे हम इस त्योहार के महत्व के वारें विस्तार से जानेंगे। हमे आशा है मकर संक्रांति पर लिखा गया कुछ लाइन आपको जरूर पसंद आएगा।

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मकर संक्रांति के दिन क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए? Sankranthi Festival In Hindi

यह सूर्य की उत्तर-मकर राशि की ओर यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन जहां स्त्रियां अपनी सुहाग की रक्षा की हेतु सूर्य देव की आराधना करती हैं।  वहीं बड़े बुजुर्ग इस पर्व को अध्यात्म से जोड़कर देखते हैं। मकर संक्रांति के दिन किसकी पूजा की जाती है?

मकर संक्रांति के दिन पवित्र स्नान के बाद भगवान भास्कर की पूजा की जाती है । लोग जन्म जन्मांतर के बंधन से मुक्त होने की उनसे कामना करते हैं।क्योंकि इस दिन स्नान, दान, तर्पण आदि जैसे कार्यों के लिए काफी महत्पूर्ण माना गया है।

• इस दिन सूर्योदय से एक या दो घंटे पहले जग जाना चाहिए। स्नान के पश्चात  जल और फूलों के साथ उगते सूर्य देव की पूजा करने के लिए तैयार रहें।

सूर्य देव  के उदय हो जाने पर गायत्री मंत्र का जाप करते हुए हाथ जोड़कर प्रार्थना करें। इस प्रकार सूर्य से बुद्धि और ज्ञान की प्रार्थना करें।

• तिल और गुड़ के लड्डू तथा अन्य मिठाई तैयार करें। इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मिल बाँट कर ग्रहण करें।

• इसके साथ ही मकर संक्रांति के दिन जरूरतमंदों को उपयोगी वस्तुएं दानकर पुण्य अर्जित करें। Holka dahan के बारे में जानने के लिए लिंक क्लिक करें ।

संक्रांति का अर्थ – why makar sankranti is celebrated in hindi

ज्योतिषीय रूप से, मकर का अर्थ ‘मकर’ राशि और ‘संक्रांति ‘ का परिवर्तन से है। यह सूर्य का धनु को छोड़कर  मकर राशि में संक्रमण है। भौगोलिक भाषा  में, इसे ‘विंटर सोलस्टाइस’ कहते हैं।

इस दिन से, देश भर में सर्द हवाओं के बाद मौसम गर्म और सुखद होना शुरू हो जाता है। सूर्य के द्वारा राशि में परिवर्तन ही संक्रांति कहलाता है।

अर्थात जब सूर्य एक राशि को छोड़कर दूसरे राशि में प्रवेश करती है तब यह घटना संक्रांति के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति शब्द का उदगम भी यहीं से हुआ है।

जब सूर्य अपनी वार्षिक घूर्णन गति के दौरान धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में संक्रमण करती है। तब इसे हिन्दू पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति कहते हैं।

जानिए क्या है मकर संक्रांति – Why We Celebrate Makar Sankranti In Hindi Language

जैसा की हम जानते है की कुल बारह राशियाँ होती है।  ज्योतिष्य गणना और चन्द्रमा की घूर्णन गति के आधार पर जैसे महीने को दो भाग में बाँट कर देखा जाता है  शुक्ल पक्ष एबं कृष्ण पक्ष।

ठीक उसी प्रकार सूर्य की वार्षिक गति को  भी दो भाग में बाँट कर देखा जाता है। दक्षिणायन एबं उत्तरायण।  सूर्य छः माह दक्षिणी गोलार्ध में रहती है जिसे दक्षिणायन और छः  माह उत्तरी गोलार्ध में जिसे उत्तरायण कहते है। 

सूर्य  जब पृथ्बी के दक्षिणी गोलार्ध में होती है तब यह क्रमशः कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृशिचक और धनु राशि से होकर गुजरती है।  ठीक उसी प्रकार सूर्य जब पृथ्बी के उत्तरी गोलार्ध में होती है तब यह मकर, कुम्भ, मीन मेष, वृषभ और धनु राशि से होकर गुजरती है।

इस प्रकार हर महीने  किसी एक राशि की संक्रांति  होती है। आइये हम जानते हैं  कि  किस महीने में कौन सी संक्रांति होती है।

जनवरी मकर संक्रांति सूर्य जब धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करती है
फरवरी कुम्भ संक्रांति सूर्य जब मकर राशि से कुंभ में प्रवेश करती है
मार्च- मीन संक्रांति कुम्भ राशि से जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करती है
अप्रेल- मेष Sankranti सूर्य का मीन राशि से मेष राशि में जब संक्रमण होता है। 
मई- वृषभ संक्रांति सूर्य जब मेष राशि से बृषभ राशि में प्रवेश करती है। 
जून- मिथुन संक्रांति सूर्य का वृषभ से मिथुन राशि में प्रवेश करने पर  
जुलाई- कर्क संक्रांति  सूर्य का मिथुन से कर्क राशि में प्रवेश करने पर होता है
अगस्त- सिंह संक्रांति सूर्य कर्क राशि से सिंह राशि में संक्रमण करती है।
सितम्बर कन्या संक्रांति सूर्य जब सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करती है।
अक्टूबर तुला Sankranti सूर्य जब कन्या राशि से तुला राशि में प्रवेश करती है।
नबम्बर वृश्चिक संक्रांति   सूर्य जब तुला राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश करती है 

संक्रांति का यह चक्र जनवरी से दिसम्बर तक चलते रहता है। ऊपर बर्णित सूर्य की कुल 12 संक्रांति में सिर्फ चार संक्रांति मेष, तुला, कर्क और मकर राशी कि संक्रांति महत्वपूर्ण मानी गई है। 

मकर संक्रांति का आध्यात्मिक महत्व – WHY WE CELEBRATE MAKAR SANKRANTI IN HINDI LANGUAGE

मकर संक्रांति एक ऐसा शुभ दिन जो किसी मंगल कार्यों के आरंभ करने के लिए सर्बोत्तम माना गया है। मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व तो है ही लेकिन आध्यात्मिक महत्व का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है।

भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति के दिन स्वेच्छा से अपना प्राण त्यागा

महाभारत की कथा के अनुसार भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था।  महाभारत के लड़ाई में अर्जुन के बाणों से बुरी तरह आहात होने के बाबजूद बाणों की सैया पर वे लम्बे समय तक पड़े  रहे। 

अगर वे चाहते तो अपनी इच्छानुसार मृत्यु को वरण कर सकते थे  लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके दो कारण थे। पहला कि वे महाभारत कि लड़ाई के परिणाम जाने बिना प्राण त्यागने के पक्ष में नहीं थे।

क्योंकि वे मरने से पहले हस्तिनापुर की राजगद्दी को सुरक्षित  देखना चाहते थे। और दूसरा कारण  था वे जन्म जन्मांतर के बंधन से मुक्ति होकर परमधाम यानि मोक्ष को प्राप्त करना।

उन्हें यह मालूम था दक्षिणायन काल की तुलना में उत्तरायण काल में शरीर त्याग करने से मोक्ष का मार्ग सुगम होता है।

जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश कर गया। वैदिक साहित्य के अनुसार दक्षिणायन को पितृयान यानि देवताओं कि  रात्रि तथा उत्तरायण को देवयान यानि देवतओं का दिन कहा गया है।

यही कारण था की भीष्म पितामह जैसे महारथी भी मोक्ष की कामना लिए Makar Sankranti के दिन अपना मृत्यु का दिन चुना था।  

महाराजा भगीरथ ने इसी दिन गंगा को धरती पर उतारा और अपने पुर्वजों को मुक्ति दिलाई ?

पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों  के उद्धार के लिए गंगा को पृथ्बी पर उतारा। कहते हैं कि गंगा स्वर्ग से उतरने के बाद हिमालय पर्वत के रास्ते गंगासागर नामक स्थान पर सागर में समाविस्ट हो गयी।

इस प्रकार राजा भगीरथ के 60 हजार पूर्वजों कि अस्थियों गंगा जी में मिलती हुई सागर में समाहित हो गयी। इस प्रकार राजा भगीरथ ने अपने साठ हजार पुर्वजों को सदगति दिलाई। कैसे महाराजा भगीरथ ने अपने साठ हजार पुर्वजों को मुक्ति दिलाई विशेष जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।

कुम्भ मेले का प्रारंभ मकर संक्रांति के दिन से ही होती है

पौराणिक कथा के अनुसार देवताओं एवं दानवों ने मिलकर समुन्द्र मंथन किया था।  समुन्द्र मंथन के फलसरूप चौदह प्रकार के रत्नों निकले ।  लेकिन इन सब में जो सबसे बहुमूल्य चीज निकला, वह था “अमृत से भरा कलश” । 

अमृत प्राप्ति के लिए देवताओं और दानवों के बीच निरन्तर संघर्ष हुआ।  दानव अमृत कलश लेकर आगे आगे भाग रहे थे और  देवगण उनका पीछा करते हुए छीनने का प्रयास कर रहे थे। 

इस संघर्ष के दौरान पृथ्वी के चार स्थानों (प्रयागराज , हरिद्वार, उज्जैन, नासिक) पर अमृत कलश से अमृत की कुछ बूंदें छलक कर गिरी थीं। तभी से प्रत्येक 12 वर्षों के अंतराल पर इन स्थानों पर पाबन कुम्भ मेला का आयोजन होता है।

कहते है की जब जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करता था, अर्थात मकर संक्रांति के दिन ही दानव, देवताओं के पकड़ में आते थे।  यही कारण है की कुम्भ मेले का  पहला स्नान की शुरुआत मकर संक्रांति के दिन होती है।

मकर संक्रांति के दिन गंगासागर, गंगा और गंगा जैसी अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है।

मकर संक्रांति का त्योहार हिन्दू सम्प्रदाय के द्वारा मनाये जाने वाला महत्पूर्ण त्योहारों में से एक है।  मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान व  तर्पण का विशेष महत्व माना गया है।

हिन्दू समुदाय के लोग मकर संक्रांति की शुरुआत सुबह पवित्र नदियों में स्नान के साथ करते है। तत्पश्चात सूर्य भगवान कि आराधना के साथ दान पुण्य करते है।

इसीलिए हिन्दू धर्म शास्त्र में मकर संक्रांति के दिन किया जाने वाला स्नान, दान, तर्पण आदि जैसे कार्यों का विशेष महत्व दिया गया है। कहते हैं इस दिन स्नान, दान, तप से मनुष्य जन्म जन्मांतर के बंधन से मुक्त हो जाता है।

मकर संक्रांति के दिन पितरों के तर्पण का भी विशेष महत्व है। गंगासागर में इस दिन लाखों श्रद्धालु आस्था कि डुवकी लगाकर मोक्ष कामना लिए अपने पितरों का तर्पण करते हैं।

विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति – how and Why We Celebrate Makar Sankranti In Hindi Language in all over India

मकर संक्रांति का त्योहार आर्यों के अस्तित्व में आने के बाद से मनाया जाता है। यह त्योहार देश भर में विभिन्न नामों और परम्परओं के साथ में मनाया जाता है।

उत्तरप्रदेश : उत्तरप्रदेश में इसे ‘खिचड़ी’ के नाम से जाना जाता है। इस दिन  लाखों भक्त प्रयागराज के संगम में पवित्र डुबकी लगाते हैं।  जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती की पवित्र नदियाँ एक साथ बहती हैं।

पश्चिम बंगाल: इस दिन, कोलकाता के पास वंगाल की खाड़ी  में गंगा सागर में विशाल मेले का आनंद लिया जाता है।

बिहार – यहाँ इस त्योहार को खिचड़ी पर्व भी कहते हैं। बिहार में मकर संक्रांति बड़े ही धूम-धाम से मनाई जाती है

तमिलनाडु : तमिलनाडु में इसे ‘पोंगल’ कहा जाता है। पोंगल का मतलब है दूध के एक बर्तन में उबले हुए चावल का उभार। यह किसानों  के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है। जब वे अपनी फसलों की कटाई का आनंद लेते हैं। 

आंध्र प्रदेश : तेलुगु में इसे ‘पेड्डा पांडुगा’ यानी एक बड़ा त्योहार कहते हैं। यह  पूरे चार दिनों के तक फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

महाराष्ट्र : महाराष्ट्र के लोग इस त्योहार को सबसे अधिक प्यार करता है। इस अवसर पर  ‘तिल-गुलस’ और तिल पोलिस, तिल के बीज, गुड़ और तिल के तेल (तिल) से लड्डू वनाये जाते हैं।

इस दिन, लोग एक-दूसरे को मराठी में ‘तिल गुल घिया, भगवान भगवान बोला’ कहकर अभिवादन करते हैं। हिंदी में इसका मतलब है ‘इन तिलगुल्लों को स्वीकार करो और मीठे बोल बोलेा।

गुजरात:  गुजराती इस दिन को उपहारों के आदान-प्रदान के साथ मनाते हैं। पतंग उड़ाने का त्योहार बहुत बड़े व्यपक तौर से किया जाता है।  जहाँ विभिन  आकृतियों और आकारों की पतंगों को आकाश में उड़ाया जाता है।

मकर संक्रांति के मेरे इस लेख पर यदि कोई सुझाव देना चाहते है तो comments में जाकर सुझाव दे सकते हैं। इसी के साथ Happy Makar Sankranti 2021 in advance.

दोस्तों Why We Celebrate Makar Sankranti In Hindi Language शीर्षक वाला यह लेख कैसा लगा अपने सुझाव से अवगत करायें।

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