तुलसीदास का जीवन परिचय – biography of tulsidas in hindi

तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य रामचरितमानस एक प्रसिद्ध धर्म ग्रंथ हैं। तुलसी दास जी अवधि और ब्रजभाषा दोनो में निपुण थे। इसके साथ वे हिन्दी और संस्कृत के भी विद्वान थे। उनकी गिनती भारत के महान कवि और संत के रूप में की जाती है।

तुलसीदास का जीवन परिचय - BIOGRAPHY OF TULSIDAS IN HINDI
तुलसीदास का जीवन परिचय – BIOGRAPHY OF TULSIDAS IN HINDI

तुलसी दास जी ने राम और शिव की भक्ति के विभेद को दूर कर शैव और वैष्णव समुदाय के बीच समन्वय प्रस्तुत किया। तुलसी दास जी ने ईश्वर, जीव और माया के बारें में अपने स्पष्ट विचार रखे हैं। कुछ लोग उन्हें रामायण के रचियाता महर्षि बाल्मीकि के अवतार मानते थे।

उनके द्वारा रचित महाकाव्य रामचरितमानस के कारण रामायण का पाठ घर-घर में प्रसिद्ध हुआ। कहते हैं की चित्रकूट के घाट पर हनुमान जी तुलसीदास जी को दर्शन दिए थे। तो दोस्तों आइये शुरू करते हैं तुलसीदास का जीवन परिचय विस्तार से : –

तुलसीदास का जीवन परिचय संक्षेप में – Tulsidas biography In Hindi

  • जन्म वर्ष – 1554 ईस्वी, राजापुर
  • बचपन का नाम – रामबोला
  • गुरु – बाबा नरहरी दास
  • माता पिता – माता का नाम हुलसी और पिता का नाम आत्माराम दुवे
  • शिक्षा दीक्ष – बाबा नरहरी दास के सनिध्य में
  • पत्नी का नाम – रत्नावली
  • प्रमुख रचना – रामचरितमानस, दोहावली, कवितावली, विनय पत्रिका आदि,

तुलसीदास का जन्म

तुलसी दास जी के जनस्थान, जन्म की तारीख और उनके जीवन को लेकर विद्वानों में मतांतर है। तुलसी दास जी महान मुगल बादशाह अकबर के समकालीन थे। कुछ विद्वानों ने उनकी जन्म तिथि सन 1589 ईस्वी में मानी है।

जबकि तुलसी चरित और गोसाई चरित के अनुसार उनकी जन्म तिथि 1554 ईस्वी मानी जाती है। उनके जन्म-काल और जन्म-स्थान को लेकर बेनीमाधबदास जी का यह दोहा लोकप्रिय है।

पंद्रह सौ चववन विषे तरणि तनुजा तीर । श्रावण शुक्ला सप्तमी तुलसी घरयो शरीर ।।

Tulsidas In Hindi तुलसीदास जी का जीवन परिचय

विद्वानों का कहना है की तुलसीदास जी का जन्म यमुना के तट पर स्थित राजापुर नामक स्थान पर सन 1554 ईस्वी में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष सप्तमी को हुआ था।

तुलसीदास का बचपन

तुलसीदास जी के बचपन का नाम रामबोला था। उनके माता का नाम हुलसी और पिता का नाम आत्माराम दुबे था। वे ब्राह्मण कुल में पैदा हुए थे। उनके घर की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी। बचपन में उनके माता पिता किसी महामारी के चपेट में आ गये।

अतः बाल्यावस्था में ही उनके सर से माता-पिता का साया उठ गया। उन्होंने अपनी रचना कवितावली में इस बाद का जिक्र इस प्रकार किया है।

मातु पिता जग ज्याई तज्यो, विधि हूँ न लिखी कछु भाल भलाई।

कविदंती यह भी है की तुलसीदास जी का जन्म, मूल नक्षत्र में हुआ था। जब तुलसीदास जी का जन्म हुआ तब इनके मुह में जन्म से ही पूरे दाँत थे। इस कारण इनके माता पिता डर गए और अशुभ जानकार इनको कहीं छोड़ आए।

जिस कारण संत नरहरिदास द्वारा इनका लालन-पालन हुआ। इन्हीं के संरक्षण में तुलसीदास जी नें ज्ञान और भक्ति की दीक्षा प्राप्त की।

परंतु रहीम जी के दोहे से ऐसा लगता है की तुलसीदास जी को अपने माता-पिता का सुख कुछ समय के लिए मिला था।

सूरतीय नरतीय नागतीय, अस चाहत सब कोय। गोद लिए हुलसी फिरे, तुलसी सो सूत होय।

Tulsidas In Hindi तुलसीदास जी का जीवन परिचय

तुलसीदास जी की शिक्षा-दीक्षा व उनके गुरु

माता-पिता की आकस्मिक मृत्यु के बाद बालक रामबोला अनाथ होकर भटकने लगा। बालक रामबोला को नरहरीदास का सहारा मिला, उन्होंने तुलसीदास जी को अपना शिष्य बना लिया। उनकी शिक्षा-दीक्षा बाबा नरहरीदास जी के संरक्षण में हुआ।

इस प्रकार तुलसीदास जी बाबा नरहरीदास के पास रहकर शस्त्रों का अध्ययन किया। बचपन से ही वहुत ही मेधावी थे। एक बार वे जो सुन लेते उन्हें पूरी तरह याद हो जाता था।

तुलसीदास जी का विवाह

शास्त्र के अध्ययन के बाद वे अपने गुरु नरहरीदास जी के साथ कासी चले गए। उनका विवाह महेवा ग्राम के दीनबंधु पाठक की विदुषी कन्या रत्नावली के साथ सम्पन हुआ था। वैवाहिक जीवन के कुछ दिन बाद वे पत्नी प्रेम में अधिक आसक्त हो गये।

एक समय की बात है तुलसी दास जी की पत्नी मायके चली गयी थी। पत्नी की विरक्ति तुलसीदास जी को खटकने लगी। पत्नी के प्रेम के वशीभूत होकर वे पत्नी से मिलने रात में ही ससुराल चले गये।

कहते हैं की ससुराल में वे रात को सांप को रस्सी समझ और उसकी सहायता से पत्नी के कक्ष में पहुच गये। अंधेरी रात में इस तरह अपने पति को आने से, रत्नावली ने तुलसीदास जी को खूब फटकार लगाई।

पत्नी से फटकार

उन्होंने अपने पति तुलसीदास जी से कहा जितना प्रेम आप अस्थि चर्म के इस शरीर से मेरे साथ करते हैं। अगर इतना प्रेम प्रभु श्री राम से होता तो आपका उद्धार हो जाता। उन्होंने अपने पति से कहा –

लाज न लागत आपको दौरे आयहू साथ, धिग -धिग ऐसे प्रेम को कहा कहों मैं नाथ ।। अस्थि चरममय देह मम तमें जैसी प्रीत, होती जो श्रीराम मह, होती न तौ भवभीती ।।

Tulsidas In Hindi तुलसीदास जी का जीवन परिचय

पत्नी की फटकार और उनकी बात को सुनकर तुलसीदास जी की मानो आंखे खुल गयी। उनकी पत्नी ने उन्हें आत्म ज्ञान से जो अवगत करा दिया था। पत्नी की फटकार ने उनका जीवन को नई दिशा दे दी। उन्होंने जीवन से वैराग्य लेकर गृह त्याग कर दिया।

भगवान श्री राम का दर्शन

अनेक तीर्थ स्थानों में भटकने के बाद वे  चित्रकूट पहुँचकर राम भक्ति में लीन हो गये। कहते हैं की इस चित्रकूट के घाट पर उन्हें भगवान राम ने हनुमान जी के सहयोग से दर्शन दिए थे।

इन घटनाओं का वर्णन उनके द्वारा रचित गीतावली में किया गया है। बाद में उन्होंने अयोध्या के तुलसी चौरा नामक स्थान पर रामचरित मानस की रचना की और कासी में आकर उन्हें पूरा किया। तत्पश्चात वे और कई रचनाएं की।

तुलसीदास की रचनाएँ

तुलसीदास जी ने अनेक रचनायें की जिसमें रामचरितमानस, कवितावली, विनयपत्रिका, दोहावली, पार्वती मंगल, कृष्ण गीतावली और जानकी मंगल आदि प्रमुख हैं। आईये संक्षेप में Tulsidas ke dohe और उनके द्वारा रचित रचनाओं के बारें में जानते हैं।

रामचरितमानस और विनयपत्रिका तुलसीदास जी द्वारा रचित सबसे उत्कृष्ट रचनाओं में से है। रामचरितमानस का अंग्रेजी और कई अन्य भाषाओं में अनुबाद भी हो चुका है। महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने रामचरितमानस के बालकाण्ड का खड़ीबोली में अनुबाद किया था।

तुलसी की रचना की भाषा व शैली

जैसा की हम जानते हैं की तुलसीदास जी का ब्रज और अवधि भाषा दोनो पर सामन अधिकार था। तुलसीदास जी की भाषा में बुन्देली, फारसी और अरबी, राजस्थानी, भोजपुरी शब्द देखने को मिलते हैं।

तुलसीदास जी ने अपनी रचनाओं में उस दौरान प्रचलित सभी शैली का प्रयोग किया है। रामचरितमानस में जहॉं उन्होंने दोहा चौपाई शैली का प्रयोग किया है वहीं उन्होंने विनय पत्रिका की रचना गीतात्मक शैली में की है। इसके साथ ही कवितावली की रचना कथात्मक शैली में की गयी है।

छंदों और अलंकारों का प्रयोग

उन्होंने अपनी रचनाओं में बड़ी ही कुशलता पूर्वक छंदों और अलंकारों का प्रयोग किया है। यही कारण ही की इनकी रचना का प्रसार जन जन तक हो गया। इसके अलाबा उन्होंने अपनी रचनाओ में दोहा, चौपाई, सवैया, सोरठा कुंडलियाँ आदि छंदों को प्रयोग खूब किया है।

उनकी रचना में अलंकार के रूप में यमक, श्लेषादी, उपमा, अनुप्रास आदि मुख्य हैं। इस प्रकार तुलसीदास जी के कविता में भाव तथा कला दोनों पक्ष का समावेश है। उनकी कविता में सभी रसों की धारा प्रवाहित दिखाई देती है।

तुलसीदास जी का निधन – Tulsidas In Hindi

उनकी मृत्यु 125 वर्ष की अवस्था में सन 1627 ईस्वी में श्रावण शुक्ल सप्तमी को गंगा के अस्सी घाट पर हुई।  उनके देहावसान के बारें में जो दोहा प्रसिद्ध है इस प्रकार हैं –

संवत सोलह सौ असी, असी गण के तीर, श्रावण कृष्णा तीज शनि, तुलसी तज्यो शरीर ।।

Tulsidas In Hindi तुलसीदास जी का जीवन परिचय

गोस्वामी तुलसीदास हिन्दू साहित्य के अद्वितीय कवि थे। हिन्दी साहित्य में योगदान के लिए हमेशा  वे याद किए जायेंगे। दोस्तों हिन्दी के ‘अद्वितीय कवि’ तुलसीदास का जीवन परिचय शीर्षक वाला यह लेख आपको कैसा लगा अपने सुझाव से जरूर अवगत करायें

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