अमर जवान ज्योति का इतिहास | history of amar jawan jyoti in hindi information

अमर जवान ज्योति का इतिहास | history of amar jawan jyoti in hindi information

अमर जवान ज्योति का इतिहास | history of amar jawan jyoti in hindi information

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अमर जवान ज्योति का इतिहास – History of Amar Jawan jyoti in hindi information

अमर जवान ज्योति का इतिहास तथा इसकी लौ को भारत के नए National War Memorial के लौ के साथ विलय के बारे में जानने से पहले इंडिया गेट का इतिहास भी जानना जरूरी है।

इससे पहले अमर जवान ज्योति, इंडिया गेट पर पिछले 50 साल से जल रही थी। जिसे 21 जनवरी 2022 को भारतीय युद्ध स्मारक (राष्ट्रीय वॉर मेमोरियल – National War Memorial) की ज्योति में विलय कर दिया गया।

अमर जवान ज्योति के लौ को पूरे सैन्य सम्मान के साथ इंडिया गेट के नजदीक निर्मित राष्ट्रीय वॉर मेमोरियल के लौ के साथ हमेशा के लिए मिला दिया गया है। यह क्षण पूरे भारतवासी के लिए बहुत ही गौरवपूर्ण है।

इंडिया गेट का निर्माण अंग्रेजों ने 1930 के दशक में करवाया था। अंग्रेजों ने नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन के ठीक सामने इंडिया गेट का निर्माण करवाया। जिसमें 1300 से अधिक ब्रिटिश और भारतीय सेना के नाम अंकित हैं।

अमर जवान ज्योति का इतिहास | HISTORY OF AMAR JAWAN JYOTI IN HINDI INFORMATION
Photo by shalender kumar on Pexels.com

उन्होंने इसका निर्माण 1914 से 1918 तक प्रथम विश्व युद्ध में और 1919 में तीसरे एंग्लो-अफगान युद्ध में शहीद हुए 80 हजार से ज्यादा भारतीय सैनिक के याद में कराया था।

जिन्होंने ब्रिटिश सेना की तरफ से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। इंडिया गेट के वास्तुकार एडविन लुटियन थे। इसकी आधारशिला 921 में रखी गई जो करीब 10 साल बाद सन 1931 में बनकर तैयार हुआ।

जिसे उस बक्त के भारत के वायसराय लॉर्ड इर्विन ने 1931 में उद्घाटन किया था। इसी इंडिया गेट के नीचे सन 1972 में अमर जवान ज्योति की स्थापना की गई।

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इंडिया गेट का इतिहास और सम्पूर्ण जानकारी

अमर जवान ज्योति के बारे में जानकारी – amar jawan jyoti information in hindi

इंडिया गेट पर स्थित अमर जवान ज्योति की देखभाल तीनों सेना के जवान द्वारा किया जाता था। अमर जवान ज्योति स्थल पर 24 घंटे थलसेना, वायुसेना और नौसेना के जवान का पहरा रहता है। साथ ही यहां तीनों सेनाओं के झंडे भी हमेशा लहराते रहते हैं।

हर वर्ष 26 जनवरी के अवसर पर गणतंत्र दिवस परेड से ठीक पहले राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के प्रमुख का आगमन होता है। अमर जवान ज्योति स्थल पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद गणतंत्र दिवस परेड शुरू होता है।

अमर जवान ज्योति का इतिहास | HISTORY OF AMAR JAWAN JYOTI IN HINDI INFORMATION
अमर जवान ज्योति का इतिहास और जानकारी

हम अमर जवान ज्योति का इतिहास जानने से पहले Amar jawan jyoti kahan sthit hai yah kya hai इस जानते हैं साथ ही अमर जवान ज्योति का क्या महत्व है उसे भी जानेंगे।

अमर जवान ज्योति क्या है – Amar Jawan Jyoti kya hai in Hindi

अमर जवान ज्योति की मशाल को 26 जनवरी 1972 को प्रज्वलित की गई। दरअसल अमर जवान ज्योति सन 1971 की लड़ाई के बाद देश के लिए जान को कुर्बान करने वाले अमर शहीद सैनिकों को श्रदांजलि देने हेतु जलाई गई।

यह अमर जवान ज्योति हमारे वीर जवानों के वीरगाथा की अद्भुत निशानी है।

अमर जवान ज्योति कहां पर है

अमर जवान ज्योति भारत की राजधानी नई दिल्ली में इंडिया गेट के ठीक नीचे स्थित था। इसके मशाल 26 जनवरी 1972 को जलाई गई थी। तब से लेकर 21 जनवरी 2022 तक यह इंडिया गेट के नीचे ही जलती रही।

लेकिन अब इसे 21 जनवरी 22 को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक स्थल के लौ के साथ विलय कर दिया गया। बता दे की राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण भारत सरकार ने आजादी के बाद देश के लिए अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले वीर जवानों के स्मृति में कराया है। जिसमें आजादी के बाद भारत के 25 हजार शहीद सैनिकों के नाम दर्ज हैं।

अमर जवान ज्योति की हिस्ट्री – Amar Jawan Jyoti History

अमर जवान ज्योति का इतिहास सन 1971 के भारत और पाकिस्तान की लड़ाई के बाद शुरू होती है। इस युद्ध में पाकिस्तान के 1 लाख के करीब सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था।

करीब 13 दिनों तक चली इस लड़ाई में करीब 3,843 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। उन अमर शहीदों की स्मृति में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी ने अमर ज्योति को प्रज्वलित करने का निर्णय लिया।

इस प्रकार 26 जनवरी 1972 के दिन इंडिया गेट के नीचे अमर जवान ज्योति जलाया गया। जिसे 21 जनवरी 22 को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के लौ के साथ विलय किया गया।

अमर जवान ज्योति का निर्माण – india gate Amar Jawan Jyoti History in Hindi

इंडिया गेट के नीचे काले मार्बल से एक स्मारक बना हुआ है। इस स्मारक पर बड़े शब्दों में अमर जवान लिखा हुआ है। इस स्मारक के ऊपर एक राइफल उल्टा कर रखा गया है। जिस पर सेना का एक हेलमेट रखा हुआ है।

इसी के बगल में अमर जवान ज्योति की मशाल पिछले 5 दसक से जल रही थी। पहले यह मशाल एलपीजी से जलती थी। लेकिन बाद में इसमें CNG का प्रयोग होने लगा था। जिसे सरकार ने 2022 में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के लौ के साथ विलय कर दिया गया।

अमर जवान ज्योति का महत्व – significance of amar jawan jyoti

भारत में इंडिया गेट के ठीक नीचे अमर जवान ज्योति की स्थापना युद्ध में शहीद भारतीय सैनिकों के यादगार में किया गया था। अमर जवान ज्योति 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए अमर जवान के बलिदान और भारत की जीत की निशानी है।

इस युद्ध में भारत की सेना ने इतिहासिक जीत हासिल की और पाकिस्तान के 90 हजार से अधिक सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

अमर जवान ज्योति का इतिहास और इनसे जुड़ी रोचक बातें – Important fact about Amar Jawan Jyoti in HIndi

  • अमर जवान ज्योति की स्थानपा 1971 के भारत पाक युद्ध के बाद हुई थी।
  • इस स्मारक की स्थापना का श्रेय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को जाता है।
  • अमर जवान ज्योति की लौ की जलने की शुरुआत 26 जनवरी 1972 से हुई थी।
  • अमर जवान ज्योति की सबसे बड़ी बात यह है कि इसकी एक लौ को कभी बुझने नहीं दिया जाता।
  • सन 1972 से ही अमर जवान ज्योति की ये लौ लगातार जल रही है।
  • अमर जवान ज्योति स्मारक 4.5 मीटर चौड़ा और 1.29 मीटर ऊंचा काला संगमर्मरसे बना है।
  • इस स्मारक के चारों तरफ सुनहरे और साफ अक्षर में ‘अमर जवान‘ अंकित है।
  • इसके ठीक बगल में एक सेल्फ-लोडिंग राइफल के बैरल पर एक सैनिक का हेलमेट रखा है।
  • अमर जवान ज्योति की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसकी एक लौ हमेशा जलती रहती है।
  • तब से लेकर 21 जनवरी 2022 तक यह इंडिया गेट के नीचे ही जलता रहा।
  • इस अब भारतीय युद्ध स्मारक लौ के साथ मर्ज कर दिया गया।

अमर जवान ज्योति की लौ का राष्ट्रीय युद्ध स्मारक लौ के साथ विलय

सन 1972 में शुरू हुआ अमर जवान ज्योति की मशाल 21 जनवरी 2022 तक इंडिया गेट के नीचे जलती रही। लेकिन अब इंडिया गेट पर स्थापित अमर जवान ज्योति के इस मशाल की लौ नेशनल वॉर मेमोरियल की लौ में मिला दिया जायेगा।

अमर जवान ज्योति का इतिहास | HISTORY OF AMAR JAWAN JYOTI IN HINDI INFORMATION
अमर जवान ज्योति के लौ का राष्ट्रीय युद्ध स्मारक लौ के साथ विलय

हालांकि कई विपक्ष की पार्टियों ने आरोप लगाया की पिछले 5 दशकों से जल रही अमर जवान ज्योति की मशाल को सरकार द्वारा बुझाया जा रहा है।

लेकिन सरकार की तरफ से सफाई आई की अमर जवान ज्योति की लौ को बुझाया नहीं जा रहा है, बल्कि इसकी लौ को नेशनल वॉर मेमोरियल की लौ के साथ मर्ज किया जा रहा है।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल )

नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण स्वतंत्र भारत में देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले वीर जवानों की स्मृति में निर्मित है। नई दिल्ली के इंडिया गेट के पास ही स्थित इस स्मारक का निर्माण कार्य जनवरी 2019 में पूरा हुआ।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी 2019 को किया था। इसमें आजादी के बाद विभिन्न लड़ाई और ऑपरेशन में शहीद जवानों के नाम अंकित हैं।

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इंडिया गेट के नीचे लगेगी नेता जी की प्रतिमा

इंडिया गेट के पास अब नेताजी सुभाषचंद्र बोस की ग्रेनाइट से बनी भव्य प्रतिमा लगाई जाएगी। नेताजी सुभाष बोस की 125वीं जयंती पर उनके सम्मान में सरकार ने यह फैसला किया है। नेताजी की प्रतिमा उसी जगह पर लगाई जाएगी जहाँ कभी जार्ज पंचम की प्रतिमा लगी होती थी।

अमर जवान ज्योति का इतिहास | HISTORY OF AMAR JAWAN JYOTI IN HINDI INFORMATION
इंडिया गेट के पास लगेगी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा

आपको अमर जवान ज्योति का इतिहास (HISTORY OF AMAR JAWAN JYOTI IN HINDI) जरूर अच्छी लगी होगी, अपने कमेंट्स से अवगत कराएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q.अमर ज्योति क्यों जलती रहती है? The Amar Jawan Jyoti Burns In Memory Of

अमर जवान ज्योति 1971 के युद्ध में शहीद हुए भारत ए सेना की यादगार में जलायी गई थी। पहले इसे जलाने के लिए LPG और बाद में CNG को उपयोग किया जाने लगा।

q. अमर जवान ज्योति पर क्या लिखा है?

अमर जवान ज्योति इंडिया गेट के ठीक नीचे काले मार्वल से निर्मित है। अमर जवान ज्योति पर बड़े अक्षरों में अमर जवान लिखा हुआ है।

Q. अमर जवान ज्योति से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?

अमर जवान ज्योति से हमें क्या प्रेरणा मिलती है की देश के इन वीर जवानों की तरह ही अगर देश को जरूरत पड़े तो देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने में भी पीछे नहीं हटना चाहिए।

बाहरी कड़ियाँ (External links)

इंडिया गेट पर लगातार 50 सालों तक कैसे जलती रही अमर जवान ज्‍योति

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