बुलन्द दरवाज़ा का इतिहास और रोचक जानकारी – Buland Darwaza History In Hindi

बुलन्द दरवाज़ा का इतिहास और रोचक जानकारी – Buland Darwaza History In Hindi

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बुलन्द दरवाजा का इतिहास और जानकारीBuland Darwaza History in Hindi –

बुलंद दरवाजा (Buland Darwaza ) जैसा की नाम से ही प्रतीत होता है, बुलंद का मतलव ऊँचा या महान से है और दरवाजा का मतलव द्वार, अर्थात बुलंद दरवाजा का मतलब है सबसे ऊँचा द्वारा या दरवाजा।

अपने नाम के अर्थ को सार्थक करता यह भारत का सबसे ऊंचा दरवाजा है। भारत का यह प्रसिद्ध स्मारक, विश्व का सबसे बडा़ प्रवेश द्वार (दरवाजा) कहलाता है।

बुलन्द दरवाजा का इतिहास महान बादशाह अकबर के वैभवशाली साम्राज्य का जीता जागता प्रमाण को व्यक्त करता है। भारत का सबसे ऊंचा दरवाजा

इस इतिहासिक बुलंद दरवाजा फतेहपुर सीकरी में स्थित है जिसकी दूरी आगरा से महज 43 किमी है। इस लेख के माध्यम से हम जानेंगे की दुनियाँ के सबसे ऊंचे दरवाजा बुलंद दरवाजा के निर्माण के पीछे अकबर की क्या मनसा थी।

मुगल बादशाह अकबर ने इसका निर्माण क्यों और कब कराया था। यह विशाल और भव्य स्मारक वास्तुकला की दृष्टि से पारसी तथा मुगल शैली का अद्भुत सम्मिश्रण है।

यूनेस्को ने भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित इस स्मारक को विश्व धरोहर के सूची में सम्मिलित किया है। दोस्तों आइये जानते हैं बुलंद दरवाजा का इतिहास ( Buland Darwaza History in Hindi ) के वारें में विस्तार से :-

Buland Darwaza: दुनिया का सबसे बड़ा दरवाजा है ‘बुलंद दरवाजा’, जानें इतिहास और रोचक तथ्‍य

निर्माण वर्ष – सन 1602 ईस्वी
स्थान – आगरा से 43 किमी दूर फतेहपुर सीकरी
निर्माता – बादशाह अकबर
शैली – मुगल एवं फारसी
बुलंद दरवाज़ा की ऊंचाई – लगभग 54 मीटर
बुलंद दरवाजा की ऊंचाई– 35 मीटर

बुलन्द दरवाज़ा का इतिहास : Buland Darwaza History in Hindi

बुलंद दरवाजा उत्तर प्रदेश राज्य में आगरा शहर के पास फतेहपुर सीकरी में स्थित है। बुलंद दरवाजा (highest gateway in India) फतेहपुर सीकरी स्थित किले का मुख्य द्वार है। कभी यह स्थान मुगल साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी।

Buland Darwaza History In Hindi - बुलन्द दरवाज़ा का इतिहास
बुलंद दरवाजा

बुलंद दरवाजा का निर्माण कब हुआ

दुनियाँ के सबसे ऊंचे इस दरवाजा का निर्माण महान मुगल बादशाह अकबर के द्वारा कराया गया। सम्राट अकबर द्वारा बुलंद दरवाजा का निर्माण 1602 ईस्वी में हुआ। क्या आप जानते हैं की बुलंद दरवाजा क्यों बनवाया गया।

अकबर ने फतेहपुर सीकरी में बुलंद दरवाजा का निर्माण किस उपलक्ष में किया था

कहते हैं की मुगल बादशाह अकबर ने इस दरवाजा का निर्माण गुजरात विजय के प्रतीक के रूप में किया था। इसके प्रवेश द्वार के पूर्वी-तोरण पर फारसी भाषा में शिलालेख है। यह शिलालेख 1601 में दक्कन पर बादशाह अकबर के विजय का अभिलेख है।

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फतेहपुर सीकरी का बुलंद दरवाजा 15 मंजिला है। यह भव्य स्मारक बादशाह अकबर की महानता और उनके बैभवशाली साम्राज्य को बयान कर रहा है। बुलंद दरवाजा को देखकर महान सम्राट अकबर के महानता का अंदाज सहज ही लगया जा सकता है।

यहाँ सन 1571 ईस्वी से लेकर 1585 ईस्वी तक मुग़ल साम्राज्य की राजधानी थी। सन 1605 ईस्वी में जब अकबर की मृत्यु हुई तव तक उनका साम्राज्य अफगानिस्तान से लेकर बंगाल तक तथा हिमालय की तराई से लेकर दक्षिण के नर्मदा नदी तक फैल चुका था।

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बुलंद दरवाजा बनावट और संरचना – buland darwaza architecture

सम्राट अकबर द्वारा निर्मित इस दरवाजा की उचाई 54 मीटर और चौराई 35 मीटर के लगभग है। 42 सीढ़ियों के ऊपर स्थित बुलन्द दरवाज़ा अपनी स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है।

बुलंद दरवाजा निर्माण में प्रयुक्त विशिष्ट सामग्री

इस दरवाजा के निर्माण में लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है। सफेद और काले संगमरमर इसमें इस प्रकार से इस्तेमाल किया गया है की इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा देता है।

वास्तुकला के दृष्टि से यह स्मारक बेहद भव्य और आकर्षक है। इस दरवाजा को मुगल और पर्शियन शैली के अनुसार बनाया गया है। अपनी भव्यता और सुंदरता के कारण यह प्रतिदिन हजारों पर्यटक को अपनी ओर आकर्षित करता है।

मीनारों और गुंबदों से सुशोभित इस दरवाजा का आकार समअष्टकोणीय है। दरवाजे के स्तंभों पर और दरवाजे के आगे कुरान की आयतें अंकित की हुई हैं।

बुलंद दरवाजे़ के तोरण पर बाइबिल से संबंधित कुछ पंक्तियाँ अंकित है। जो अकबर के धार्मिक सहिष्णुता को दर्शाता है। इन पंक्तियाँ में लिखा गया है की

यह संसार एक पुल के तरह है, इस पर से गुज़रो जरूर, लेकिन इस पर कोई घर मत बनाओ,

जो व्यक्ति एक दिन की आशा रखता है वह चिरकाल तक की भी आशा रख सकता है, जबकि यह संसार कुछ घंटे भर के लिये ही है, इसलिये अपना समय परमेश्वर के प्रार्थना में बिताओ।

Buland Darwaza History In Hindi - बुलन्द दरवाज़ा का इतिहास
बुलंद दरवाजा में प्रवेश के बाद जामा मस्जिद का दृश्य (buland darwaza in hindi )

बुलंद दरवाजा के आलवा शेख सलीम चिश्ती की दरगाह आदि इमारतें भी अकबर कालीन फारसी वास्तुकला का प्रतीक है।

बुलंद दरवाजे से जुड़े रोचक तथ्य – Interesting Facts Buland Darwaza history In Hindi

  • बुलंद दरवाज़े का निर्माण 1602 ईस्वी में बादशाह अकबर ने गुजरात जीत की याद में बनाया था।
  • ‘विश्व का सबसे ऊंचा दरवाजा’ buland darwaza फतेहपुर सीकरी के किले का दक्षिण का मुखय द्वार है।
  • बलुआ पत्थर से निर्मित इस दरवाजा के अंदरूनी भाग संगमरमर से सजा हुआ है।
  • दरवाज़े में उस बक्त के विशाल किवाड़ अभी भी मौजूद है।
  • इसी दरवाज़े से होकर जामा मस्जिद और शेख सलीम की दरगाह तक पहुंचा जा सकता है।
  • कहा जाता है की बुलंद दरवाजा के निर्माण में 12 वर्ष का समय लगा था।
  • बुलंद दरवाज़ा ऊंचाई जमीन से करीब 280 फिट ऊंची है।
  • बुलंद दरवाजे के नजदीक खुदाई के दौरान एक सुरंग का पता चला जो किले के बाहर की तरफ निकलती है।
BULAND DARWAZA HISTORY IN HINDI - बुलन्द दरवाज़ा का इतिहास
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बुलंद दरवाजा के नजदीक प्रमुख पर्यटन स्थल – Tourist Places information Nearby Buland Darwaza In Hindi

यदि आप बुलंद दरवाजा के आसपास के दर्शनीय स्थानों के बारे में जानना और घूमना चाहते हैं। तो आपको buland darwaza in hindi जरूर पूरा पढ़ना चाहिए।

बुलंद दरवाजा के आसपास पर्यटकों के देखने के लिए कई जगह मौजूद हैं। बुलंद दरवाजा के बारे में कुछ और जानते हैं।

पांचाल महल

परसियन शैली में निर्मित पांचाल महल फतेहपुर सीकरी में जोधाबाई महल के पास स्थित एक ऐतिहासिक महल है।

जोधा बाई का रौजा

बुलंद दरवाजा के निकट स्थित ‘जोधा बाई का रौजा‘ एक ऐतिहासिक स्थान हैं। जिसे अकबर ने अपनी राजपूत रानी जोधा बाई के लिए बनबाया था।

Buland Darwaza History In Hindi - बुलन्द दरवाज़ा का इतिहास
जोधा बाई का रौजा (बुलंद दरवाजा के पास )

बीरबल भवन

बुलंद दरवाजा के पास स्थित अकबर के नौ रत्नों में से एक बीरबल के भवन को देखा जा सकता है।

कैसे पहुंचे – How to reach Buland Darwaza in hindi

जैसा की हम लोग जानते हैं की बुलंद दरवाज उत्तर प्रदेश के आगरा के पास फतेहपुर सीकरी में स्थित हैं। आगरा जो विश्व प्रसिद्ध ताजमहल से लिए प्रसिद्ध है, रेल, सड़क और वायु मार्ग द्वारा देश के हर हिस्से से जुड़ा हुआ है।

आप देश के किसी भी कोने से रेल, सड़क और वायु मार्ग द्वारा आगरा पहुँच कर, आसानी से बुलंद दरवाजा फतेहपुर सीकरी किले तक जाया जा सकता है।  

घूमने का उपयुक्त समय

उत्तर प्रदेश द्वारा संरक्षित इस इमारत में प्रवेश के लिए कुछ शुल्क चुकाना पड़ता है। इसके खुलने का समय सुबह 7 बजे से लेकर शाम के साथ बजे तक है।

इस स्थल पर भ्रमण का उपयुक्त समय फरवरी से अप्रेल तक अच्छा रहता है। क्योंकि इस दौरान न ही यहाँ ज्यादा सर्दी होती है और न ही अत्यधिक गर्मी।

जननें योग्य बातें (FAQ)

अकबर ने बुलंद दरवाजा कब और क्यों बनवाया?

महान मुगल सम्राट अकबर ने बुलंद दरवाजा सन 1602 ईस्वी के आसपास बनवाया। बुलंद दरवाजा का निर्माण उन्होंने गुजरात पर जीत की खुशी में बनवाया।

विश्व का सबसे बड़ा दरवाजा कौन सा है?

अकबर द्वारा निर्मित आगरा के फतेहपुर में स्थित बुलंद दरवाजा विश्व का सबसे बड़ा दरवाजा है। जिस विश्व प्रसिद्ध संस्था यूनेस्को ने विश्व विरासत की सूची में शामिल किया।

गुजरात विजय की याद में अकबर ने किसका निर्माण कराया?

गुजरात विजय के उपलक्ष्य में मुगल सम्राट अकबर ने आगरा के पास फतेहपुर सिकरी में बुलंद दरवाजा का निर्माण कराया था।

भारत का सबसे ऊंचा प्रवेश द्वार कौनसा है?

आगरा के पास अकबर द्वारा निर्मित बुलंद दरवाजा भारत का सबसे ऊंचा प्रवेश द्वार है। यह दरवाजा 42 से युक्त है जिसकी ऊंचाई करीव 54 मीटर और चौड़ाई 35 मीटर है।

Q. बुलंद दरवाजा कहां स्थित है – buland darwaza kahan sthit hai

Ans. – इतिहासिक बुलंद दरवाजा आगरा से 40 किलो मीटर दूर फतेहपुर सीकरी में स्थित है।

Q. दुनियाँ का सबसे बड़ा दरवाजा किसने बनवाया – buland darwaza kisne banaya

Ans. – बुलंद दरवाजा का निर्माण सम्राट अकबर ने गुजरात विजय के स्मृति में बनवाया था।

Q. दुनियाँ का सबसे बड़ा द्वार buland darwaza kab bana

Ans.– बुलंद दरवाजा 1602 ईस्वी में बना।

Q. बुलंद दरवाजा की उपलक्ष में बना था buland darwaza kis uplaksh mein banaya gaya tha

Ans.– बुलंद दरवाजा अकबर ने गुजरात विजय की याद स्वरूप फतेहपुर सीकरी में बनाया था।

Q. अकबर द्वारा निर्मित प्रार्थना घर का क्या नाम था? Ans. अकबर द्वारा निर्मित प्रार्थना घर का नाम ‘इवादत खाना’ था

अंत में

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Amit

Amit

मैं अमित कुमार, “Hindi info world” वेबसाइट के सह-संस्थापक और लेखक हूँ। मैं एक स्नातकोत्तर हूँ. मुझे बहुमूल्य जानकारी लिखना और साझा करना पसंद है। आपका हमारी वेबसाइट https://nikhilbharat.com पर स्वागत है।

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