इंदिरा गांधी का जीवन परिचय | indira gandhi biography in hindi

इंदिरा गांधी का जीवन परिचय | indira gandhi biography in hindi

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Indira Gandhi Former Prime Minister of India in hindi

इंदिरा गांधी का जीवन परिचय | indira gandhi biography in hindi

भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जीवन परिचय काफी रोचक पुर्ण हैं। इंदु से लेकर इंदिरा और फिर भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री बनने तक का उनका लंबा सफर अत्यंत ही प्रेरणादायक रहा है।

भारत के शसक्त प्रधानमंत्री में से एक तथा आयरन लेडी के नाम से मशहूर श्रीमती इंदिरा गांधी महिला सशक्तिकरण की मिसाल थी। लालबहादुर शास्त्री के आकस्मिक निधन के बाद श्रीमती इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री सन 1966 ईस्वी में बनी

अपने उच्च नेतृत्व क्षमता के बल पर उन्होंने देश का भली भांति नेतृत्व किया। इस प्रकार वे दूसरे कार्यकाल अर्थात सन 1977 ईस्वी तक इस पद पर लगातार आसीन रही।

इंदिरा गांधी का जीवन परिचय | Indira gandhi biography in hindi
इंदिरा गांधी का जीवन परिचय | Indira gandhi biography in hindi

उसके बाद सन 1980 ईस्वी में फिर से देश की बागडोर उनके हाथ में आया। इंदिरा गांधी को राजनीतिक नेतृत्व की क्षमता उनके पिता पंडित जवाहर लाल नेहरू से विरासत में मिली थी।

इंदिरा गाँधी ने विश्व पटल पर भारत का नाम ऊँचा किया। उनका नाम विश्व में भारत की एक सशक्त महिला के रूप में ली जाती है। उनके प्रधानमंत्री रहते भारत ने विकास के कई आयाम को स्थापित करने में सफल हुए थे।

उन्होंने दुनियाँ के नजरों में भारत की छवि को एक शसक्त राष्ट्र के रूप में उजागर किया। इंदिरा गांधी की जीवनी वाले इस लेख में श्रीमती इंदिरा गांधी का जन्म और मृत्यु, शादी, राजनीतिक जीवन और उनकी राजनीतिक हत्या के वारें में संक्षेप में जानते हैं।

श्रीमती इंदिरा गांधी जीवन परिचय इन हिंदी – Biography of Indira Gandhi In Hindi

श्रीमती इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 को प्रयागराज में उनके आवास आनंद भवन में हुआ था। भारत के प्रथम प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी की माता का नाम कमला नेहरू थी।

कमला नेहरू दिल्ली के एक कौल परिवार से आती थी तथा वे एक सुशील और सभ्य महिला थी। देश की आजादी में उन्होंने बढ़ चढ़कर भाग लिया। बचपन में इंदिरा गांधी को इंदु के नाम से पुकारा जाता था।

इंदिरा जी के पिता जवाहर लाल नेहरू एक प्रसिद्ध विद्वान, राजनेता और स्वतंत्रता आंदोलन के सक्रिय सदस्य थे। साथ ही उनके दादा मोतीलाल नेहरू अपने समय के प्रसिद्ध वकील और स्वतंत्रता सेनानी थे। वे अपने माता पिता की इकलौती संतान थी।

इंदिरा गांधी का असली नाम इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू (Indira Priyadarshini Nehru ) था। कहते हैं की इंदिरा नाम उनके दादा मोतीलाल नेहरू ने रखा था। उनका ऐसा मानना था की पोती के रूप में उनके धर लक्ष्मी आई है।

वे शुरू से ही अपने माता पिता को आजादी की लड़ाई में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए देखती आई थी। इस कारण बचपन से ही उनके अंदर देशप्रेम की भावना प्रबल थी।

उन्होंने अपनी आँखों से भारत में विदेशी वस्तु के बहिसकर और उनकी होली जलते हुए देखी थी। कहते हैं की उन्होंने विदेशी वस्तु का बहिष्कार मात्र 5 वर्ष की अवस्था में ही इंगलेंड में बनी अपनी प्यारी गुड़िया को जला कर किया था।

जब उनकी उम्र 12 वर्ष की थी तब इंदिरा गाँधी ने देश की आजादी के लिए बच्चों को मिलकर वानर सेना का गठन किया था। उस वानर सेना (vanar sena ) का नेतृत्व उन्होंने खुद किया। जिसमें धीरे-धीरे साठ हजार के करीव बच्चे शामिल हो गये थे।

बानर सेना का गठन उन्होंने महाकाव्य रामायण से प्रभावित होकर किया था। क्योंकि बानर सेना के द्वारा ही भगवान राम लंका पर विजय हासिल की थी। इससे पता चलता है की बचपन से ही उनके अंदर देशप्रेम और अदम्य साहस कूट-कूट कर भरा था।

इंदिरा गाँधी की शिक्षा-दीक्षा

इंदिरा गांधी ने पुणे के विद्यालय से मेट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की। उसके बाद उनका दाखिला पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में कर दिया गया। शांतिनिकेतन में शिक्षा ग्रहण करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए स्विट्जरलैंड और लंदन गयी।

जहॉं उनकी शिक्षा सोमेरविल्ले कॉलेज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में हुई।

इंदिरा जी का विवाह और पारिवारिक जीवन

इंदिरा गांधी के पति का नाम फिरोज गांधी था। अपने अध्यापन के बाद वे सक्रिय रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्य बन गयी। कहते हैं की उसी दौरान उनकी मुलाकात फिरोज (Feroze gandhi) से हुई।

उस बक्त फिरोज गांधी एक पत्रकार और भारतीय युवा कांग्रेस के सदस्य थे। सन 1941 ईस्वी में इंदिरा ने फिरोज के साथ शादी कर ली हालांकि इस शादी से जवाहर लाल नेहरू खुश नहीं थे। इंदिरा गांधी के दो बच्चे थे

उनके बड़े वेटे का नाम राजीव गाँधी था जो आगे चलकर भारत का प्रधानमंत्री बना। राजीव गांधी भारत का प्रधानमंत्री बनने से पहले एक पायलट थे। उनके दूसरे बेटे का नाम संजय गाँधी (sanjay gandhi ) था जो इंदिरा जी के राजकाज में सहयोग देते थे।

संजय गांधी की मृत्यु नई दिल्ली में विमान क्रेश में मृत्यु हो गई। श्रीमती सोनिया गाँधी और मेनका गाँधी उनकी पुत्र वधू हैं। राहुल गांधी, बरुन गांधी और प्रियंका गांधी उनकी पोते और पोतियाँ हैं।

इंदिरा गांधी को गांधी सरनेम कैसे मिला

श्रीमती इंदिरा गांधी के बारे में कहा जाता है की उनकी शादी से पिता जवाहर लाल नेहरू खुश नहीं थे। क्योंकि उस बक्त अन्तर्जातीय विवाह सार्बजनिक रूप से पसंद नहीं किया जाता था। दरअसल फिरोज गांधी (Feroze Gandhi) पारसी धर्म से आते थे, जबकि इंदिरा गांधी हिन्दू ब्राह्मण थी।

इस कारण से सार्बजनिक तौर पर जब इस शादी की चर्चा और निंदा होने लगी। तब महात्मा गांधी ने नव दंपति को आशीर्वाद देने के लिए लोगों और मीडिया को आमंत्रित किया। इस प्रकार गांधी जी ने सार्बजनिक रूप से इस शादी का समर्थन कर लोगों को शांत किया।

उन्होंने इंदिरा और फिरोज से राजनीतिक छवि बनाए रखने और लोगों के गुस्से को कम करने के लिए अपने नाम के साथ गांधी जोड़ने का सुझाव दिया। कहते हैं की तभी से उनका नाम इंदिरा से इंदिरा गांधी और उनके पति का नाम फिरोज से फिरोज गांधी हुआ।

बाद में फिरोज गांधी से उनके मतभेद हो गए। दोनों अलग अलग रहने लगे। यधपी फिरोज गांधी के अंतिम समय में इंदिरा गांधी उनके साथ थी।

इंदिरा गाँधी का राजनीतिक सफर

दादा मोतीलाल नेहरू, पिता जवाहर लाल नेहरू, माता कमला नेहरू सभी प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। जवाहर लाल नेहरु एक कुशल राजनेता थे जो आजादी के बाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने।

इस कारण श्रीमती इंदिरा गांधी के लिए राजनीति में कदम रखना कोई मुश्किल और आश्चर्यजनक बात नहीं था। जब 1951 में फिरोज गांधी राइबरेली से चुनाव से चुनाव लड़ रहे थे। उस बक्त भी श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपने पति फिरोज गांधी के लिए कई चुनावी सभाएं की।

सन 1959 में इंदिरा गांधी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गयी। उनके पति फिरोज गांधी की मृत्यु 8 सितम्बर 1960 को हार्ट अटैक से हो गई।

27 मई 1964 ईस्वी को उनके पिता जवाहर लाल नेहरु की मृत्यु के बाद प्रथम बार लोकसभा का चुनाव लड़ी और विजयी रही। उन्हें लाल बहादुर शास्त्री के नेतृत्व में गठित सरकार में मंत्री पद दिया गया।

अपने राजनीतिक कैरियर में इन्दिरा गाँधी वर्ष 1966 से लेकर लगातार 3 बार भारत गणराज्य की प्रधानमन्त्री पद पर आसीन रही।

बीच में कुछ दिन तक विपक्ष की भूमिका में रहने के बाद चौथी बार 1980 में देश की बागडोर अपने हाथ में ली तथा 1984 में उनकी राजनैतिक हत्या तक वे इस पद पर बनी रहीं।

भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री (first woman prime minister of India)

जब लाल बहादुर शास्त्री जी का ताशकंद में अचानक 11 जनवरी 1966 को निधन हो गया। तब देश में अंतरिम चुनाव हुए तब इंदिरा गांधी को सर्वसम्मति से देश का प्रधान मंत्री चुन लिया गया।

इंदिरा गांधी का योगदान – information about indira gandhi in hindi

श्रीमती इंदिरा गांधी ने भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश के 14 सबसे बड़े बैंकों का 1969 ईस्वी में राष्ट्रीयकरण किया। उन्होंने देश में खाद्य समस्या को दूर करने, परिवार नियोजन, शिक्षा के क्षेत्र में कई रचनात्मक कदम उठाए।

उन्होंने 1974 में पोखरण में परमाणु परीक्षण के द्वारा एक सबल और विकास के मार्ग पर तेज गति से अग्रसर भारत से दुनियाँ को अवगत कराया।

बांग्लादेश की आजादी में भूमिका

सन 1971 में पश्चिम पाकिस्तान ने पूर्वी पाकिस्तान के स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलने के लिए हिंसात्मक रूप अपना लिया। लाखों शरणार्थियों अपने जान बचाने के लिए भारत में प्रवेश करना शुरू कर दिया।

इन शरणार्थियों के कारण देश के अंदर संसाधनों की कमी होने लगी और देश के अंदर भी राजनीतिक दबाब काफी बढ गया। पश्चिमी पाकिस्तान के सेना के द्वारा पूर्वी पाकिस्तान के आम नागरिक पर अत्यचार शुरू कर दिए।

जिनमें हिन्दुओं को प्रमुखता से निशान बनाया जा रहा था। फलसरूप, करीव 10 मिलियन पूर्व पाकिस्तानी नागरिक अपने देश छोड़कर भारत में शरण लेने को मजबूर हो गई।

इस स्थिति से निपटने के लिए इंदिरा गांधी ने पश्चिमी पाकिस्तान के खिलाफ आगामी लीग के द्वारा स्वतंत्रता के संघर्ष को समर्थन देने का फैसला किया। उधर चीन, पाकिस्तान को हथियार का सप्लाई कर रहा था।

अमेरिका के राष्ट्रपति निक्सन ने भी 9 दिसम्बर को यूएस के जलपोतों को भारत की ओर रवाना कर दिया। लेकिन भारत को रूस का सहयोग मिला और 16 दिसम्बर को पाकिस्तानी सेना ने भारत के समक्ष आत्म-समर्पण कर दिया।

इस प्रकार पूर्वी पाकिस्तान का नाम बदलकर एक नये देश का जन्म हुआ जिसका नाम बांग्लादेश रखा गया।

पाकिस्तान के विरुद्ध कड़े फैसले और 1971 के युद्ध में भारत की विजय ने श्रीमती गांधी को एक ससक्त राजनेता की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया।

किसी व्यक्ति अथवा किसी देश के दबाब में झुके बगैर, बेबाक फैसला लेने के कारण इंदिरा गांधी की पहचान आयरन लेडी के रूप में होने लगी।

आपातकाल लागू करना emergency in india

सन 1971 में सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव में के इंदिरा गांधी ने विपक्षी पार्टी के अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी राजनारायण को हराया था। लेकिन राजनारायण ने इंदिरा गांधी के इस जीत को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

उन्होंने इंदिरा गांधी पर लोकसभा चुनाव के दौरान सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग और धांधली का आरोप लगाया। केस कोर्ट में चलने लगा। उधर दूसरी तरफ 1971 के भारत और पाकिस्तान युद्ध के बाद भारत की मुद्रास्फीति लगातार बढ़ती जा रही थी।

देश की अर्थव्यवस्था की हालत खराव होती जा रही थी साथ ही दिन-प्रतिदिन भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा था। गरीबी बढ़ने के कारण विपक्ष गरीबी हताओं के नारे बुलंद कर रहे थे।

इसी समय गुजरात चुनाव में कांग्रेस पार्टी को भारी पराजय का सामना करना पड़ा। आंदोलन जोर पकड़ते जा रहा था। उस दौरान इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसला ने आग में घी का काम किया।

कोर्ट ने 1971 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी द्वारा सरकारी मिशनरी के दुरुपयोग का आरोप सही पाया। फलतः कोर्ट ने इतिहासिक फैसला देते हुए चुनाव के चार साल बाद 12 जून, 1975 को इंदिरा गांधी के चुनाव परिणाम को निरस्त घोषित कर दिया।

उन्होंने राजनारायण सिंह को चुनाव में विजयी घोषित कर दिया गया। साथ ही कोर्ट ने इंदिरा गांधी पर 6 साल के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध भी लगा दिया।

हालाँकि श्रीमती इंदिरा गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील का हवाला देकर अपने पद से इस्तीफा देने से इंकार कर दिया। इस बात से विपक्षी पार्टी और जनता में रोष बढ़ता जा रहा था।

विपक्षी पार्टी ने 1975 ईस्वी में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। कहते हैं की इन सब बातों से इंदिरा गांधी असहज हो गई थी। दिन प्रतिदिन आंतरिक स्थितियाँ अनियंत्रित होती जा रही थी।

फलतः इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति से स्वीकृति लेकर देश में 26 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा कर दी। आपातकाल लागू करने की वजह अनियंत्रित आंतरिक स्थितियाँ बताई गई।

आपातकाल (emergency) की घोषणा होते ही नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को खत्म कर दिया गया। इस दौरान प्रेस की स्वतंत्रता छिन ली गयी। उनके बड़े बड़े राजनीतिक विरोधी सहित लाखों लोगों को जेल में डाल दिया गया।

पहली बार विपक्ष की भूमिका में

उस दौरान समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण ने इसका खुलकर विरोध किया। उन्होंने छात्रों, किसानों और आम-जन को संगठित कर इंदिरा गांधी के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। फलतः जयप्रकाश नारायण बाबू को भी गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया।

सन 1977 में जब आपातकाल हटाई गयी और चुनाव हुए तब इंदिरा गांधी को हार का सामना करना पड़ा। उनकी सत्ता छिन गई और वे पहली बार विपक्ष की भूमिका में आयी।

जनता पार्टी की सरकार बनी लेकिन यह सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी। सन 1980 में फिर से चुनाव हुए और एक बार फिर इंदिरा गांधी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की। इस प्रकार देश की सत्ता की बागडोर फिर से उनके हाथ मे आ गयी।

इंदिरा जी द्वारा ऑपरेशन ब्लू स्टार का आदेश

सन 1981 में एक सिख आतंकवादी समूह द्वारा अलग राज्य “खालिस्तान” की मांग जोरों पर था। यह पूरा आंदोलन का नेतृव खालिस्तान समर्थक भिंडरावाले कर रहे थे।

इस अलगाववादी संगठन ने आतंकवादी की तरह पाकिस्तान की सह पर सिखों के पवित्र स्थल अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर को अपने कब्जे में ले लिया। वहाँ उन्होंने ढेर सारे गोले और बंदूक जमा कर कुछ श्रद्धालु को भी अपने कब्जे में ले लिया।

भारत सरकार ने उन्हें हथियार डाल सरेंडर करने को कहा। लेकिन बात नहीं बनी। फलतः इंदिरा जी के नेतृत्व वाली सरकार ने स्वर्ण मंदिर को आतंकवादियों से मुक्त कराने का आदेश दिया।

परिणाम स्वरूप भारतीय सेना से स्वर्णमंदिर को घेर कर कारवाई शुरू कर दी। लेकिन आतंकवादियों ने इतने असलाह और गोला बारूद इकट्ठे कर लिए थे की जिसका अंदाजा सेना को भी नहीं था।

स्वर्ण मंदिर परिसर में छुपे हुए आतंकवादी और सेना के बीच गोलीबारी शुरू हो गई। लेकिन आतंकवादियों द्वारा जबरदस्त गोली बारी को आसानी से रोक पाना मुश्किल था।

फलतः सेना को अपने बख़तरबंद गाड़ियों और टैंकों को इस्तेमाल का निर्णय लेना पड़ा। हालांकि भारतीय सेना के सामने स्वर्णमन्दिर को बिना क्षति पहुचाए करबाई करना एक चुनौती भरा काम था।

5 जून 1984 को दोनों तरफ से भयंकर गोली बारी हुई। अंतोगत्वा सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहद 3 से 6 जून तक कारवाई करते हुए टैंक और भारी तोपखाने के मदद से सवर्ण मंदिर को आतंकवादियों से मुक्त कराया गया।

इस करबाई में स्वर्ण मंदिर को कोई क्षति नहीं पहुचाई गई। लेकिन मदिर परिसर के कुछ भवन जरूर क्षति ग्रस्त हुए। इस करबाई के दौरण 80 से ज्यादा जवानों ने अपनी जान गंवाई तथा आतंकवादियों सहित सैकड़ों लोग मारे गए।

इस दौरान कुछ निर्दोष लोगों के मारे जाने के कारण सरकार की नींद भी हुई। दूसरी तरफ मंदिर परिसर में टैंक और भारी तोपखाने के प्रवेश के आदेश के कारण इंदिरा गांधी से कुछ सिख समुदाय नाराज हो गए।

इंदिरा गांधी हत्याकांड – Indira Gandhi Death In Hindi

इसी क्रम मे इंदिरा गांधी के सिख बॉडीगार्ड सतवंत सिंह और वेअंत सिंह थे। हालांकि खुफिया बिभाग के सूचना के आधार पर उनके दोनों अंगरक्षक को तकताल बदलने की सलाह भी डी गई।

लेकिन इंदिरा जी ने सोचा की इससे सिख समुदाय में उनके प्रति नाराजगी और बढ़ जाएगी। फलतः उन्होंने अपने सिख अंगरक्षक को बदलने से मना कर दिया। लेकिन 31 अक्टूबर को साढ़े नौ बजे के करीब वही हुआ जिसका अंदाजा श्रीमती गांधी को भी नहीं था।

उनके दोनों सिख अंगरक्षक सतवन्त सिंह और बेअंत सिंह ने 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा जी के शरीर को गोलियों से छलनी कर दिया।

फलतः इंदिरा गांधी की मृत्यु 31 अक्टूबर 1984 को नई दिल्ली के सफदरगंज रोड स्थित उनके आवास पर सुबह 9:29 बजे गोली लगने से हो गई। हालांकि बाद में उनके दोनों अंगरक्षक को फांसी की सजा दे डी गई।

इंदिरा गांधी की समाधि नई दिल्ली में है। इनका समाधि स्थल शक्ति स्थल के नाम से प्रसिद्ध है। इंदिरा गांधी पुण्यतिथि 31 अक्टूबर को हर साल मनाया जाता है, इस दिन उनके समाधि स्थल पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया जाता है।

इंदिरा गांधी जी के यादगार में – 10 lines on indira gandhi in hindi

नई दिल्ली में उनके आवास को म्यूजियम का रूप दिया गया हैं, जो इंदिरा गांधी मेमोरियल म्यूजियम के नाम से प्रसिद्ध है।

देश की राजधानी दिल्ली के पालम अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा का नाम भी बदल कर Indira Gandhi international airport रखा गया। उसके नाम पर अनेकों विश्वविध्यालय और शिक्षण संस्थान की स्थापना की गई।

  • इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी indira gandhi national open university(IGNOU),
  • इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी (अमरकंटक),
  • इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (रायपुर)i, ndira gandhi stadium
  • टेक्निकल कॉलेज जैसे इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेवलपमेंट रिसर्च(मुम्बई),
  • इंदिरा गाँधी ट्रेनिंग कॉलेज, इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी,
  • इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस,
  • इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेंटल साइंस

सम्मान व पुरस्कार – Honours and Awards information of indira gandhi in hindi

  • उन्हें 1971 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
  • सन 1972 में उन्हें मेक्सिकन अवार्ड, बांग्लादेश को आज़ाद करवाने के लिए दिया गया था।
  • उन्हें नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा 1976 में हिंदी में साहित्य वाचस्पति का अवार्ड प्रदान किया गया।
  • इसके अलाबा Times मैगजीन ने उन्हें दुनियाँ के 100 ताकतवर महिलाओं की सूची में स्थान दिया।
  • इंदिरा गांधी को सन 1953 में अमेरिका में मदर्स अवार्ड प्रदान किया गया।
  • बेहतर डिप्लोमेसी के लिए इसल्बेला डी’एस्टे अवार्ड ऑफ़ इटली (Islbella d’Este Award of Italy) प्रदान किया गया।
  • इंदिरा गांधी येल यूनिवर्सिटी द्वारा होलैंड मेमोरियल प्राइज भी प्रदान किया गया।

आपको इंदिरा गांधी का जीवन परिचय (INDIRA GANDHI BIOGRAPHY IN HINDI ) शीर्षक वाला यह इंदिरा गांधी के बारें में story जरूर अच्छी लगी होगी।

इन्हें भी पढ़ें – राजकुमारी अमृत कौर की जीवनी

कमला नेहरू का जीवन परिचय

इंदिरा गांधी किसकी बेटी थी ?

श्रीमती इंदिरा गांधी भारत के प्रथम प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल की बेटी थी।

इंदिरा गांधी का जन्म कब हुआ था ?

श्रीमती गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 को हुआ था।

इंदिरा गांधी के कितने बेटे थे ?

इंदिरा गांधी के दो बेटे थे, उनके बड़े बेटे का नाम संजय गांधी और छोटे बेटे का नाम राजीव गांधी था।

इंदिरा गांधी की हत्या कब हुई ?

इंदिरा गांधी की हत्या 31 अक्टूबर 1984 को उनके बॉडीगार्ड के द्वारा हुई थी।

इंदिरा गांधी का पति कौन था ?

इंदिरा गांधी के पति का नाम फिरोज गांधी था।

बाहरी कड़ियाँ (External links)

indira gandhi wikipedia in hindi /

Smt. Indira Gandhi | Prime Minister of India

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