डॉ विक्रम साराभाई का जीवन परिचय (Dr Vikram Sarabhai Biography In Hindi)

डॉ विक्रम साराभाई का जीवन परिचय, कौन है, जीवनी, खोज, कार्य, मृत्यु, पुरस्कार, अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक, लव स्टोरी (Vikram Sarabhai Biography in Hindi) (Wife, Family, Son, Death Cause, Love Story)

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डॉ. विक्रम अंबालाल साराभाई भारत के महान अंतरिक्ष  वैज्ञानिक थे। अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को विश्व पटल पर पहचान दिलाने में उनका अहम योगदान रहा है। डॉ. विक्रम साराभाई को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है।

अपने जीवन को अंतरिक्ष विज्ञान के लिए समर्पित करने वाले इस महान वैज्ञानिक ने अनेकों अनुसंधान किए और शोध पत्र तैयार किया। उनके प्रयास का प्रतिफल है की आज भारत अंतरिक्ष  विज्ञान के क्षेत्र में तेजी से प्रगति करते हुए  चाँद पर पहुचने का प्रयास कर रहा है।

उनके नाम पर विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित है। जहाँ से रॉकेट, प्रक्षेपण यान सहित  कृत्रिम उपग्रहों का निर्माण तथा तकनीक विकसित किया जाता है। थुबा और श्रीहरिकोटा में राकेट प्रक्षेपण केंद्र की स्थापना उन्हीं के निर्देशन में हुआ था।

डॉ विक्रम साराभाई की जीवनी - Vikram Sarabhai Biography In Hindi
डॉ विक्रम साराभाई की जीवनी – Vikram Sarabhai Biography In Hindi

विक्रम साराभाई ने ही ISRO की स्थापना की थी। उसी के बदोलत आज हमारा देश भारत अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नई मुकाम को हासिल कर चुका है। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

विक्रम साराभाई कई भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी से भी प्रभावित थे। इन स्वतंत्रता सेनानी में महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू, जवाहर लाल नेहरू, सरोजनी नायडू प्रमुख थे।

डॉ विक्रम साराभाई जयंती 12 अगस्त को प्रतिवर्ष ‘अंतरिक्ष विज्ञान दिवस’ के रूप में मनाई जाती है। आइए जानते हैं उनकी जीवनी –

भारत में ‘अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक’ डॉ विक्रम साराभाई के बारे में

पूरा नाम विक्रम अंबालाल साराभाई
उप नाम भारतीय अंतिरक्ष प्रोग्राम के जनक
जन्म तिथि 12 अगस्त 1919
प्रसिद्धि एक वैज्ञानिक के रूप में
पिता का नाम अम्बालाल साराभाई
माता का नाम सरला देवी
पत्नी का नाम मृणालिनी साराभाई
निधन 30 दिसंबर 1971
मृत्यु का कारण दिल का दौरा
राष्ट्रीयता भारतीय

डॉ विक्रम साराभाई का जीवन परिचय – Vikram Sarabhai Biography In Hindi

भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई का जन्म 12 अगस्त सन 1919 ईस्वी में गुजरात के अहमदाबाद में हुआ था। भारत में उनके जन्म दिवस 12 अगस्त को हर साल ‘अंतरिक्ष विज्ञान दिवस‘ के रूप में मनाया जाता है।

विक्रम साराभाई के पिता का नाम अम्बालाल साराभाई और माता का नाम सरला देवी थी। उनका परिवार एक समृद्ध उद्योगपति घराने से आता था। उनके पिता का अहमदाबाद के अलाबा देश के कई और भी शहरों में कारोवार चलता था।

विक्रम अंबालाल साराभाई शिक्षा-दीक्षा – Vikram Sarabhai education

डॉ. साराभाई की प्रारंभीक शिक्षा दीक्षा अहमदाबाद में ही हुई थे। सन् 1938 में सारा भाई उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड चले गए। इंगलेंड के कैंब्रिज कालेज से उन्होंने भौतिक विज्ञान में उच्च शिक्षा ग्रहण की। लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध छिड़ जाने के कारण उन्हें अपने देश वापस आना पड़ा।

भारत वापस आने के बाद डॉ. साराभाई ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बंगलौर में अपना शोध करने लगे। वहाँ उनका परिचय महान वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर वेंकटरमण और डॉ. होमी जहाँगीर भाभा से हुआ।

विक्रम साराभाई रात दिन अपने अनुसंधान में जुट गए। इस प्रकार एक समय आया जब वे  डॉ. चंद्रशेखर वेंकटरमण और डॉ. होमी जहाँगीर भाभा की तरह विश्व प्रसिद्ध हो गये।

विक्रम साराभाई पारिवारिक जीवन Vikram sarabhai family

विक्रम साराभाई का विवाह सन 1942 ईस्वी में  चेन्नई में सम्पन हुआ था। डॉ विक्रम साराभाई की पत्नी का नाम मृणालिनी साराभाई थी। मृणालिनी अपने समय की प्रसिद्ध क्लासिकल नृत्यांगना थी।

विक्रम साराभाई को दो बच्चे थे। उनके नाम ‘कार्तिकेय साराभाई’ तथा ‘मल्लिका साराभाई’ था। उनकी संतान मल्लिका साराभाई भी आगे जाकर प्रसिद्ध नृत्यांगना हुई। कहा जाता है की उनकी पत्नी मृणालिनी के साथ उनका बाद में विच्छेद हो गया तथा डॉक्टर कमला चौधरी के संग उनके प्रेम संबंध की चर्चा रही।

डॉ विक्रम साराभाई का भारत के वैज्ञानिक विकास में योगदान

द्वितीय विश्व युद्ध के समाप्त होने के बाद वे फिर इंगलेंड गये। वहाँ उन्होंने लंदन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय के सेंट जॉन कॉलेज से ‘डॉक्टर ऑफ साइंस’ की उपाधि ग्रहण की। तत्पश्चात डॉ. विक्रम साराभाई अपने देश भारत लौट आए।

भारत वापस आने के बाद डॉ. विक्रम साराभाई ने देश में कई संस्थानों की नीव रखी। आइये जानते हैं इनके द्वारा स्थापित संस्थानों के बारें में :-

इसरो की(ISRO) स्थापना  किसने की

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation) अर्थात  इसरो की स्थापना विक्रम साराभाई ने की। रूसी स्पुतनिक के लॉन्च के बाद डॉ साराभाई के दिमाग में इसरो की स्थापना का विचार आया।

उस बक्त देश की माली हालत कुछ खास नहीं थी क्योंकि देश कुछ वर्ष पहले ही आजाद हुआ था। उस बक्त इतने बड़े कार्य के लिये सरकार को मनाना आसान नहीं था।

लेकिन उन्होंने अंतरिक्ष कार्यक्रम का महत्व को समझाते हुए सरकार को राजी किया। उनके कोशिस के कारण ही 15 अगस्त 1969 में इसरो की स्थापना संभव हो सकी थी।

भारतीय राष्ट्रीय समिति (INCOSPAR) की स्थापना

विक्रम साराभाई की अध्यक्षता में भारत में अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भारतीय राष्ट्रीय समिति (INCOSPAR) की स्थापना की। उसके बाद राकेट लांचिंग हेतु Thiruvananthapuram के थुम्बा (Thumba ) नामक स्थान की चयन किया गया।

भारत का यह स्थान भू-चुबंकीय मध्यरेखा के पास है। इसी बात का ध्यान में रखते हुए उन्होंने तिरुअनंतपुरम के पास थुम्बा में भारत का पहला Rocket launching station स्थापित किया गया। उनके इस कार्य में भारत के महान वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा (Dr. Homi Jahangir Bhabha) का उन्हें साथ मिला।

अन्य संस्थान की नीव

इसरो और पीआरएल के अलावा डॉ साराभाई ने देश में कई अन्य संस्थानों की भी स्थापना की। उनके द्वारा स्थापित कुछ अन्य संस्थान के नाम इस प्रकार हैं।

  • भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), अहमदाबाद
  • परिवर्ती ऊर्जा साइक्लोट्रॉन परियोजना, कलकत्ता
  • भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), अहमदाबाद
  • कला प्रदर्शन के लिए दर्पण अकादमी, अहमदाबाद
  • अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, अहमदाबाद
  • फास्टर ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (एफबीटीआर), कलपक्कम
  • विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम
  • भारतीय इलेक्ट्रॉनकी निगम लिमिटेड (ईसीआईएल), हैदराबाद
  • भारतीय यूरेनियम निगम लिमिटेड (यूसीआईएल), जादुगुडा, बिहार
  • कम्यूनिटी साइंस सेंटर, अहमदाबाद

विक्रम साराभाई के आविष्कार व खोज

विक्रम साराभाई ने कॉस्मिक किरणों (Cosmic Ray) के बारे में अहम खोज की। ‘कॉस्मिक किरणों’ को(Cosmic Ray)  ब्रह्मांडीय अथवा अंतरिक्ष किरणें के नाम से भी जाना जाता है। अंतरिक्ष विज्ञान के साथ-साथ उन्होंने कॉस्मिक किरणों (Cosmic Ray) पर भी कई अनुसंधान किए।

अपने अनुसंधान के क्रम में वे इन किरणों पर शोध करने के लिए हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों का भी दौरा किया। इसके साथ वे ‘मौसम अनुमान केंद्र’ में जाकर भी अपने अनुसंधान के लिए काम करते।

इस प्रकार उन्होंने इस किरण से जुड़ी हुई बहुत ही महत्वपूर्ण बातों से लोगों को अवगत कराया। उन्होंने पता लगाया की कॉस्मिक किरणों में बदलाव क्यों कैसे और किन स्थितियों में होता है। उनकी खोजों में यह सबसे महत्त्वपूर्ण खोज थी।

इसके पहले कॉस्मिक रे (Cosmic Ray) को समझ पान बहुत ही मुस्किल था। लेकिन डॉ. साराभाई ने इन किरणों का केबल अध्ययन ही नहीं किया बल्कि इनकी बारीकी से भी दुनियाँ को अवगत कराया।

विक्रम साराभाई सम्मान व पुरस्कार

विज्ञान के प्रति उनकी उत्कृष्ट सेवाओं तथा महान उपलब्धि के लिए उन्हें सन 1962 में शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

भारत सरकर ने उनके योगदान को देखते हुए सन 1966 में उन्हें ‘पद्मभूषण तथा सन 1972 में ‘पद्मविभूषण से अलंकृत किया। इन अलाबा कई देशी व बिदेशी इंस्टीट्यूट और  सोसाइटी ने उन्हें अपना  ‘फैलो’(सदस्य ) बनाकर उन्हें सम्मानित किया।

उनके सम्मान में ही थुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लाँचिंग स्टेशन (Thumba Equatorial Rocket Launching Station) का नाम परिवर्तित कर विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र (Vikram Sarabhai Space Centre) रखा गया।

कई संस्थान इस महान अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के सम्मान में विभिन्न पुरस्कार से लोगों को सम्मानित करती है। उनके सम्मान में दिये जाने वाले कुछ पुरस्कार इस प्रकार हैं।

विक्रम साराभाई पत्रकारिता पुरस्कार

यह पुरस्कार अंतरिक्ष विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए पत्रकारों को प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार की घोषणा इसरो (ISSRO) के द्वारा प्रदान किया जाता है।

इसरो ने अंतरिक्ष विज्ञान, अनुप्रयोगों और अनुसंधान के क्षेत्र में सक्रिय योगदान देने वाले पत्रकारों को पहचानने और पुरस्कृत करने के लिए अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान में “विक्रम साराभाई पत्रकारिता पुरस्कार” की घोषणा की है।

विक्रम साराभाई की मृत्यु (Vikram Sarabhai death )

भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. साराभाई की मृत्यु 30 दिसंबर 1971 को केरल के तिरुवनंतपुरम के पास कोवलम में हुआ। मात्र 52 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक के कारण वे दुनियाँ को छोड़कर चले गये।

डॉ विक्रम साराभाई के दूरगामी सोच का परिणाम

उनके दूरगामी सोच का परिणाम था की भारत सन 1975 में अपने प्रथम उपग्रह आर्यभट्ट का सफल परिक्षेपण कर सका। उन्ही के देन के फलस्वरूप आज भारत दूसरे देश का भी उपग्रह लांच करने में सफल रहा है। आपने विक्रम लेंडर का नाम जरूर सूना होगा।

जिसका चाँद की सतह पर पहुचने के मात्र 2 की मी पहले इसरो से संपर्क टूट गया था। इस लेंडर का नाम महान भारतीय वैज्ञानिक विक्रम अंबालाल साराभाई के नाम पर ही रखा गया था। विक्रम लेंडर का संपर्क भले ही टूट गया हो लेकिन भारतीय वैज्ञानिक का हौसला नहीं टूटा है।

निष्कर्ष (Conclusion)

लेकिन अंतरिक्ष विज्ञान और कस्मिक किरणों से जुड़ी उनके महती योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। विक्रम साराभाई हमेशा से देश के युवाओं को प्रेरित करते रहते थे।

आज वे हमारे बीच नहीं रहे लेकिन उनकी खोज हमेशा उनकी याद को ताजा करती रहेगी। हमें आशा है की डॉ विक्रम साराभाई का जीवन परिचय (Vikram Sarabhai Biography In Hindi ) शीर्षक वाला यह लेख आपको जरूर पसंद आया होगा।

F.A.Q

  1. प्रश्न-विक्रम साराभाई कौन थे ?

    उत्तर – विक्रम साराभाई को भारतीय अंतिरक्ष प्रोग्राम का जनक कहा जाता है। वे एक महान अंतरिक्ष वैज्ञानिक थे।

  2. प्रश्न-विक्रम साराभाई का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

    उत्तर – विक्रम साराभाई का जन्म 12 अगस्त 1919 को अहमदाबाद में हुआ था।

  3. प्रश्न-विक्रम साराभाई के पिता कौन थे ?

    उत्तर -उनके पिता का नाम अंबालाल साराभाई था जो एक भौतिक और खगोल विज्ञानी थे।

  4. प्रश्न-विक्रम साराभाई की माता कौन थी ?

    उत्तर – उनकी माता जी का नाम सरला देवी साराभाई थी।

  5. प्रश्न-डॉ विक्रम साराभाई की पत्नी का नाम क्या था ?

    उत्तर- विक्रम साराभाई की पत्नी का नाम मृणालिनी साराभाई थी।

  6. प्रश्न-विक्रम साराभाई के कितने बच्चे है ?

    उत्तर- उन्हें दो लड़के और एक लड़की थी।

  7. प्रश्न-विक्रम साराभाई की मृत्यु कब हुई ?

    उत्तर- विक्रम साराभाई की मृत्यु 30 दिसंबर 1971 में हुई।

  8. प्रश्न-विक्रम साराभाई की मृत्यु किस महल में हुई थी?

    उत्तर-डॉ. साराभाई की मृत्यु तिरुवनंतपुरम के पास कोवलम में 30 दिसंबर 1971 को हुई थी।

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