वैज्ञानिक के. सिवन की जीवनी | K Sivan Biography in Hindi jivani

वैज्ञानिक के. सिवन की जीवनी | K SIVAN BIOGRAPHY IN HINDI JIVANI

वैज्ञानिक के. सिवन की जीवनी | K Sivan Biography in Hindi jivani

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अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. सिवन की जीवनी – K Sivan Biography in Hindi jivani

डॉ के. सिवन (Kailasavadivoo Sivan) भारत के प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक हैं। कहते हैं की सफलता किसी की मोहताज नहीं होती इस बात का साफ उदाहरण वैज्ञानिक के सिवान की जीवनी से मिलता है।

एक गरीब किसान परिवार में जन्म लेकर अपनी कड़ी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर उन्होंने इसरो के चेयरमैन तक का सफर तय किया। सफलता के शिखर पर पहुँच कर भी dr k sivan सादगीपूर्ण जीवन में यकीन रखते हैं।

डॉ शिवन् को अंतरिक्ष कार्यक्रम से संबंधित क्रायोजेनिक इंजन को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। आज उनकी पहचान “रॉकेट मैन” के रूप में हो चुकी है। वर्तमान में वे इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेसन (ISRO) के चेयरमेन हैं।

अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. सिवन की जीवनी - K Sivan Biography in Hindi jivani
अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. सिवन की जीवनी – K Sivan Biography in Hindi jivani

इसके पहले वे विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक के पद को भी सुशोभित कर चुके हैं। इनके मार्गदर्शन में इसरो ने सफलता के कई मुकाम हासिल कीया।

इनका नाम उस बक्त और सुर्खियों में आया जब भारत ने उनकी अगुआई में चंद्रयान 2 को लॉन्च किया था। इसरो के अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल 2021 में समाप्त होने वाला था।

लेकिन भारत सरकार ने उनके योगदान को देखते हुए उनके कार्यकाल को बढ़ा दिया है। अव वे जनवरी 2022 तक इसरो के प्रमुख बने रहेंगे।

इस लेख में वैज्ञानिक के. सिवन की जीवनी, योगदान, पुरस्कार और सम्मान की चर्चा विस्तार से की गई है। तो चलते हैंअंतरिक्ष वैज्ञानिक के. सिवन की जीवनी (K. Sivan Biography Hindi ) संक्षेप में जानते हैं।के सिवान का प्रारम्भिक

वैज्ञानिक के. सिवन का प्रारंभिक जीवन

वैज्ञानिक के. सिवन का जन्म 14 अप्रैल 1957 को तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिला स्थित मेला सरक्कलविलाई नामक स्थान पर हुआ था। अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. सिवन का पूरा नाम कैलासवादिवु सिवन है।

आपके माताजी का चेलमल्ल  और पिता का नाम कैलासावदीवु हैं। एक गरीब किसान परिवार में जन्में डॉ के सिवम ने बड़ी मुस्किल से अपनी पढ़ाई पूरी की। कहा जाता है जब उनके पास स्कूल की फीस भरने के पैसे नहीं होते थे।

तब वे फल बेचकर अपना फीस की रकम जमा करते थे। इस प्रकार उनका प्रारम्भिक जीवन बड़ा ही संघर्षपूर्ण रहा।

पारिवारिक जीवन

परिवार में उनके माता पिता के अलावा पत्नी और दो बच्चे हैं। आपके पत्नी का नाम मालती सिवान है। आपके बड़े वेटे का नाम सिद्धार्थ और छोटे का सुशांत है।

शिक्षा-दीक्षा

डॉ के. सिवन की प्रारंभीक शिक्षा गाँव के ही सरकारी पाठशाला से हुई। प्रारम्भिक शिक्षा तमिल भाषा में प्राप्त काने के बाद आगे की शिक्षा के लिए उनका नामांकन कॉलेज में हो गया।

डॉ सिवान ने Madurai University के अंतर्गत नागेरकोयल के एसटी हिंदू कॉलेज से गणित में स्नातक की डिग्री हासिल की। उसके बाद वे मद्रास चले गए वहाँ उन्होंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पूरी की।

सन 1980 में एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा पूरी करने का बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसिज बंगलुरु से स्नातकोत्तर(M.E.) की डिग्री प्राप्त की। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शोध करते हुए आपने आईआईटी बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री पाई।

करियर

सन 1982 में स्नातकोतर के बाद डॉ सिवन ने इसरो से अपनी कैरियर की शुरुआत की। 29 अक्टूबर 1982 को डॉ सिवान विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र से जुड़ गए।

यहाँ उन्होंने इसरो के प्रक्षेपण यान कार्यक्रम के डिजाइन और विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका जीएसएलवी कार्यक्रम को पुनर्जीवित करने में भी प्रमुख योगदान रहा है।

अपने लगन और मेहनत से काम करते हुए डॉ सिवान 2011 में जेएसएलवी परियोजना के निदेशक बने। वर्ष 2014 में इन्हें ISRO की इकाई तरल प्रणोदन (liquid propulsion) प्रणाली केंद्र के निदेशक बने।

आगे चलकर वे 2014 में विक्रम सार भाई स्पेस केंद्र (VSSC)  के निदेशक बने।

इसरो के चेयरमेन के पद पर नियुक्ति

15 जनवरी 2018 उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण दिवस आया जब उनकी नियुक्ति इसरो के चेयरमेन के पद पर हुई। उनका कार्यकाल 2021 में समाप्त हो रहा था लेकिन भारत सरकार ने उनके योगदान को देखते हुए जनवरी 2022 तक उनके कार्यकाल को बढ़ा दिया।  

योगदान

अपने कैरियर में डॉ सिवान ने कई उपलब्धियां हासिल की। डॉ सिवान को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में काम आने वाली क्रायोजेनिक इंजन के विकास में महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

यहाँ सबसे पहले उन्होंने पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV ) से संबंधित प्रोजेक्ट पर काम किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए लॉन्च वाहनों के डिजाइन और उसके विकास पर कार्य किया।

उन्हें 6D प्रक्षेपवक्र सिमुलेशन सॉफ्टवेयर SITARA के मुख्य वास्तुकार माना जाता है।

उपलब्धि

उपग्रह का शतक

जिस प्रकार भारत के प्रख्यात वैज्ञानिक ए पी जे अबुल कलाम को भारत का मिसाइल मेन कहलाता है। उसी तरह डॉ के सिवम की पहचान भारत में रॉकेट मेन के रूप में है। भारत 15 फरवरी 2017 में एक साथ 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित कर एक विश्व कृतिमान स्थापित किया।

2018 में भी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र ने पीएसएलवी सी-4 के जरिए एक साथ 31 उपग्रह प्रक्षेपन किया था। इसमें भारत के 3 उपग्रह तथा  अन्य 6 देशों के 28 उपग्रह शामिल थे। इसरो द्वारा इस उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में डॉ सिवान की अहम भूमिका रही।

मिशन चंद्रयान 2

उनके मार्गदर्शन में भारत नें चंद्रयान 2 लॉन्च कर इतिहास रच डाला। समय था 15 जुलाई 2019, इसी दिन चंद्रयान 2 लांच किया जाना निश्चित था। लेकिन कुछ तकनीकी खराबी के कारण इसे रोकना पड़ा।

डॉ सिवन नें अपने एक उच्चस्तरीय टीम की मदद से बहुत ही कम समय में इसे ठीक कर दिया। भारत का ‘मिशन चंद्रयान 2’ डॉ सिवान के अगुआई में 22 जुलाई 2019 को लॉन्च किया गया।

‘चंद्रयान 2’ अपने मिशन की तरफ तेजी से बढ़ रहा था। पूरा देशभर के लोग अपने टेलेविजन पर लाइव देख रहे थे। उसे बक्त भारत के प्रधान मंत्री मोदी जी भी इसरो में ही मौजूद थे।

सभी लोग उस पल का गवाह बनने जा रहे थे। सब लोग टकटकी लगा कर देख रहे थे। लेकिन अचानक ‘चंद्रयान 2’ के विक्रम लेंडर का चाँद की सतह पर पहुचने से ठीक पहले अपने लक्ष्य से भटक गया

लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया और दुबारा संपर्क स्थापित नहीं हो सका। चारों तरफ सन्नाटा पसर गया। वह वह क्षण इतना भावुक था की शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।

अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. सिवन की जीवनी - K Sivan Biography in Hindi jivani
अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. सिवन की जीवनी – K Sivan Biography in Hindi jivani

समस्त देशवासी  सहित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में मौजूद लोग निराश हो गए। इस बक्त इसरो के चेयरमेन डॉ के सिवन के आँसु रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

ऐसे भावुक क्षणों में वहाँ मौजूद भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें गले से लगा लिया। उन्होंने उनकी पीठ थपथपाते हुए निराशा दूर कर हौसला बनाए रखने को कहा।

पीएम मोदी ने कहा “हमें आशा नहीं खोना चाहिए, जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। आप सभी ने जो किया है वह कोई छोटी बात नहीं है।“

भारत का ‘चंद्रयान 2’ मिशन असफल हो गया था। लेकिन भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ाए कदम को दुनियाँ ने सराहना की दृष्टि से देखा। दुनियाँभर के लोगों ने भारत के वैज्ञानिक प्रयास का लोहा माना।

सम्मान व पुरस्कार

डॉ सिवान को भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में अहम योगदान के लिए कई सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

वर्ष 1999 – डॉ. विक्रम साराभाई शोध पुरस्कार 

वर्ष 2007 – इसरो(ISRO) मेरिट पुरस्कार  

वर्ष 2011 – डॉ. बिरेन रॉय अंतरिक्ष विज्ञान पुरस्कार

वर्ष 2013 – MIIT एलुमनी एसोसिएशन, चेन्नई द्वारा विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार

वर्ष 2014 – चेन्नई के एक विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टर ऑफ़ साइंस की उपाधि

वर्ष 2017 – भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर द्वारा विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार

वर्ष 2018 – तिलक स्मारक ट्रस्ट, पुणे से लोकमान्य तिलक पुरस्कार

       कोच्चि के हिंदू आर्थिक मंच द्वारा ‘नव युग चाणक्य पुरस्कार’

वर्ष 2019 – तमिलनाडु सरकार द्वारा डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पुरस्कार

           पंजाब विश्वविद्यालय द्वारा ‘विज्ञान रत्न पुरस्कार’

वर्ष 2020 – आईईईई (IEEE) द्वारा साइमन रामो मेडल( Simon Ramo Medal),

           इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉटिकल फेडरेशन (IAF) द्वारा एमिल मेमोरियल अवार्ड,

           इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स से वॉन कर्मन अवार्ड(Von Karman Award ),

इसके साथ ही डॉ. के सिवन इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग (INAE), एरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (AESI), सिस्टम्स सोसाइटी ऑफ इंडिया (SSI),

इंडियन सिस्टम्स सोसाइटी फॉर विज्ञान और इंजीनियरिंग (ISSE), इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार संस्थान इंजीनियर्स (IETE),भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के फ़ेलो (सदस्य) हैं।

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