अरुंधति रॉय जीवनी | Biography Of Arundhati Roy in Hindi jivani

अरुंधति रॉय जीवनी - Biography Of Arundhati Roy in Hindi

अरुंधति रॉय जीवनी – Biography Of Arundhati Roy in Hindi

अरुंधति रॉय कौन है?

अरुंधति राय भारत की जानी मानी अंग्रेजी साहित्य की लेखिका हैं। उनका पूरा नाम सुज़ेना अरुंधति राय थी। उन्हें “द गॉड ऑफ़ स्मॉल थिंग्स”  नामक पुस्तक की रचना के लिए विश्व प्रसिदधि मिली। इस पुस्तक के लिए उन्हें साहित्य के सबसे बड़े सम्मान बुकर पुरस्कार प्रदान किया गया।

अरुंधति राय अंग्रेजी भाषा की सुप्रसिद्ध लेखिका नहीं बल्कि प्रसिद्ध समाजसेवी भी हैं। नर्मदा बचाओ आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भाग लिया। इस आंदोलन के फलस्वरूप उनकी एक अलग पहचान बनी। जीवन के सुरुआती दिनों में उन्होंने की कई फिल्मों में अभिनय भी की।

वे भारत के परमाणु कार्यक्रम और कश्मीर पर अपने विवादास्पद बयानों के कारण आलोचना की शिकार बनी और सुर्खियों में रही। अगर आप गूगल पर निम्नलिखित के वारें में सर्च कर रहें हैं तो यह लेख आपकी मदद कर सकता है।

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अरुंधति रॉय जीवनी – Biography Of Arundhati Roy in Hindi

आईए इस लेख में अरुंधति राय जीवनी, साहित्यतिक और सामाजिक योगदान के बारें में विस्तार से जानते हैं।

अरुंधति राय का जीवन परिचय संक्षेप में – Arundhati Roy Biography in Hindi

अरुंधति रॉय के जन्म – 24 नवम्बर 1961
माता पिता का नाम – पिता राजीव रॉय तथा माता का नाम मेरी रॉय
पति का नाम – प्रदीप कृष्ण
प्रसिद्ध उपन्यास – ”द गॉड ऑफ स्माल थिंग”
सम्मान – मैन बुकर पुरस्कार

अरुंधति राय का प्रारम्भिक जीवन

समाजसेवी और अंग्रेजी की सुप्रसिद्ध लेखिका अरुंधति राय का जन्म 24 नवम्बर 1961 को मेघालय की राजधानी शिलांग में हुआ था। अरुंधती रॉय के पिता का नाम  राजीव रॉय तथा माता का नाम मेरी रॉय था। उनके पिता बंगाली हिन्दू थे और उनकी माता ईसाई थी।

कहा जाता है की अरुंधति राय पर खासकर माता पिता का गहरा असर रहा। कहते हैं की वचपन में ही उनकी माता-पिता का तलाक हो गया। इस कारण उन्हें अपने मां के साथ केरल में रहना पड़ा वहीं उनका प्रारम्भिक जीवन बीता।

अरुंधति राय की शिक्षा दीक्षा

इस प्रकार अरुंधति राय अपने माँ के पास ही केरल में पली-बढ़ी। उनकी आरंभिक शिक्षा केरल के कोट्टायम के एक स्कूल से हुई। उसके बाद उनका नामांकन तमिलनाडु राज्य के निलगिरी स्थित एक इंग्लिश स्कूल में हुई।

अपनी प्रारम्भिक पढ़ाई पूरी करने के बाद अरुंधति रॉय मात्र 17 साल की उम्र में अपने घर को छोड़कर दिल्ली चली आयी। यहाँ आकार उन्हें अपने खर्चे चलाने के लिए खाली बोतलें चुनकर बेचना पड़ा था। इस बात का खुलासा उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान की। दिल्ली में बाद में उन्होंने आर्किटेक्ट की पढ़ाई पूरी की।

पारिवारिक जीवन

अरुंधति रॉय के पति का नाम जेरार्ड दा कुन्हा था। उनसे अलग होने के बाद उन्होंने दूसरी शादी की। उनके दूसरे पति का नाम प्रदीप कृष्ण है। अरुंधति रॉय जाने माने मीडिया पर्सनालिटी प्रन्नोय अरुंधति की बहन है। प्रन्नोय अरुंधति प्रमुख मीडिया समूह NDTV के प्रमुख हैं।

लेखिका अरुंधति का करियर

अपने पढ़ाई पूरी करने के बाद कहा जाता है की अरुंधति राय ने अपने कैरियर की शुरुआत फिल्मों मे अभिनय के साथ की। उन्होंने मैसी साहब नामक फिल्म में लीड रोल भी की। फिर धीरे धीरे उनका रुझान लेखन की तरफ हो गया। इसके बाद वे लेखन कार्य में रुचि लेने लगीं और आगे चलकर कई फिल्मों के लिए पटकथाएं लिखीं।

अंग्रेजी साहित्य में योगदान

अरुंधति राय ने अंग्रेजी की कई रचनाए लिखी। उनके द्वारा लिखित रचनाएं लोगों को खूब पसंद आए। अपने रचना के कारण वे बहुत ही कम समय में ही काफी प्रसिद्ध हासिल कर ली। उनकी प्रसिद्ध रचना “द गॉड ऑफ़ स्मॉल थिंग्स” रही।

उनकी यह रचना इतना लोकप्रिय हुआ की रातों-रात वे प्रसिद्ध की शिखर पर पहुँच गई। उन्हें इस रचना के लिए ‘बुकर सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

अरुंधति रॉय की पुस्तक

अरुंधति राय की किताब में उनका सबसे प्रसिद्ध उपन्यास के नाम इस प्रकार हैं।

  • इन विच एनी गिव्स इट दोज़ वंस (1989),
  • इलेक्ट्रिक मून (1992)
  • गॉड ऑफ स्माल थिंग्स

अरुंधति रॉय की पहली उपन्यास

भारत की सुप्रसिद्ध लेखिका अरुंधति रॉय का पहला उपन्यास ‘द गॉड ऑफ़ स्मॉल थिंग्स’ प्रकाशित हुआ था। इस पुस्तक के लिए उन्हें बुकर पुरस्कार प्राप्त हुआ था।

फिल्मों में योगदान

इन्हें बचपन से लिखने का शौक था। उन्होंने कई फिल्मों के लिये पटकथा भी लिखीं। उनके द्वारा व्हिच ऐनी गिव्स इट दोज वन्स और इलेक्ट्रिक मून के लिए लिखी गई पटकथा बहुत अच्छी रही। उन्हें अभिनय का भी बेहद शौक था।

उन्होंने ‘मैसी साहब’ नामक फिल्म में लीड रोल की। इस फिल्म में उन्होंने गाँव की एक भोली-भाली लड़की की भूमिका निभाई थी

सामाजिक योगदान

अरुंधति रॉय का नाम भारत के केवल एक मशहूर लेखिका के रूप में ही नहीं बल्कि एक प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी ली जाती है। अरुंधती राय ने नर्मदा बचाओ आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।

जब नर्मदा नदी पर बाँध निर्माण का कार्य चल रहा था तब उन्होंने इसका पुरजोर बिरोध किया। इस आंदोलन के कारण उनकी पहचान एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में हुई। उन्होंने अत्याचारों के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई।

सम्मान व पुरस्कार

अरुंधति रॉय लेखिका को उनके मुखर रचना के कारण उन्हें 2002 में लंनन कल्चरल फ्रीडम अवार्ड मिला। इसके अलावा उन्हें सिडनी पीस प्राइज और साहित्य अकादमी सम्मान से भी सम्मानित किया गया।

उनके प्रसिद्ध रचना “द गॉड ऑफ़ स्मॉल थिंग्स के लिए विश्व प्रसिद्ध बुकर पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। इस पुरस्कार के अलाबा उन्हें वर्ष 2006 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

विवादों के घेरे में

अरुंधति रॉय एक प्रसिद्ध लेखिका के साथ साथ मुखर आलोचक भी रही। उन्होंने भारत के द्वारा उठाए गए परमाणु हथियार कार्यकर्म की आलोचना भी की। उन्होंने द इंड ऑफ इमेजिनेशन नामक अपने पुस्तक के द्वारा भारत के परमाणु हथियार कार्यकर्म की निंदा की।

अरुंधति रॉय ने अमेरिका की नई-साम्राज्यवादी नीति की भी आलोचना की। इन चीजों के आलोचना के कारण वे कई बार विवादों के घेरे में भी रहीं। इसके अलावा उन्होंने दस्यु सुंदरी फूलन देवी के जीवन पर बनी फिल्म पर भी फिल्म निर्माता की कड़ी आलोचना की थी।

अरुंधति रॉय और यासीन मलिक

अरुंधति रॉय कश्मीर पर दिए गए अपने विवादित बयान के कारण भी सुर्खियों में रही। उन्हें यासीन मलिक के महिमामंडन के कारण आलोचना सहन पड़ा था।

साथ ही भारत के प्रसिद्ध लेखिका और समाज सेवी अरुंधति रॉय को गांधी जी पर आपत्तिजनक देने के कारण भी आलोचना का शिकार होना पड़ा था। एक बार उन्होंने गोरखपुर फिल्म महोत्सव के दौरान गांधी जी को कॉर्पोरेट घरानों के पहले पैरोकार कहा था। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ

अरुंधति रॉय कहां पली-बढ़ी?

भारत की प्रसिद्ध लेखिका अरुंधति रॉय केरल में अपने माता जी के पास पली-बढ़ी।

अरुंधति रॉय अभी कहां रह रही है?

अरुंधति रॉय अपने पति फिल्म निर्मात प्रदीप किशन के साथ दिल्ली में रह रही हैं।

अरुंधति रॉय ने किस काम के लिए बुकर पुरस्कार जीता था?

अरुंधति रॉय ने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स” के लिए बुकर पुरस्कार जीता था। अरुंधति राय को मैन बुकर पुरस्कार वर्ष 1997 में दिया गया?


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बाहरी कड़ियाँ (External links)


अरुंधति राय – विकिपीडिया


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