गणितज्ञ नीना गुप्ता की जीवनी – mathematician Neena Gupta Biography in Hindi

गणितज्ञ नीना गुप्ता (dr neena gupta) भारत की प्रसिद्ध वैज्ञानिक व शिक्षाविद हैं। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से belongs करने वाली नीना गुप्ता ने गणित की एक ऐसी  प्रॉब्लम का हल ढूंढ निकाल जिसका हल पिछले 70 सालों से कोई नहीं कर पाया था।

मैथ्स जीनियस के रूप में उन्होंने गणित की दुनिया में एक वेमिसाल कार्य किया है। अपने उत्कृष्ट कार्यों से गणितज्ञ नीना गुप्ता ने यह साबित कर दिया की लड़कियां भी लड़कों से कम नहीं है।

उन्हें कम्यूटेटिव बीजगणित और बीजगणितीय ज्यामिति में उत्कृष्ठ कार्य के लिए जाना जाता है। 2021 में प्रो नीना गुप्ता को विश्व का प्रसिद्ध रामानुजन पुरस्कार प्रदान किया गया।

Ramanujan Prize जीत कर नीना गुप्ता गणितज्ञ ने भारत का मान बढ़ाया है। प्रो नीना गुप्ता रामानुजन पुरस्कार पाने वाली चौथी भारतीय हैं।

यह पुरस्कार गणित के महान जादूगर श्री निवास रामानुजन के सम्मान में हर साल विकासशील देशों के वैज्ञानिक को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रदान किया जाता है।

इससे पहले उन्हें 2019 में देश का प्रसिद्ध सम्मान शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से भी अलंकृत किया गया था। प्रो नीना गुप्ता सबसे कम उम्र में शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार पाने वाली वैज्ञानिक हैं।

वर्तमान में डॉ गुप्ता भारतीय सांख्यिकी संस्थान कोलकता के सांख्यिकी और गणित संकाय में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यशील हैं।

गणितज्ञ नीना गुप्ता की जीवनी - mathematician Neena Gupta Biography in Hindi
गणितज्ञ नीना गुप्ता की जीवनी – mathematician Neena Gupta Biography in Hindi

नीना गुप्ता उन लोगों के लिए एक मिसाल हैं जो बेटियों को उच्च शिक्षा देने से कतराते हैं। आइए इस लेख में गणितज्ञ नीना गुप्ता की जीवनी (mathematician Neena Gupta Biography in Hindi ) संक्षेप में जानते हैं।

नीना गुप्ता गणितज्ञ का जीवन परिचय – Neena Gupta Biography in Hindi language

जन्म व प्रारंभिक जीवन

डॉ नीना गुप्ता का जन्म 24 नवंबर 1984 को कोलकता में हुआ था। उनके माता का नाम ज्ञानलता गुप्ता थी। उनकी माँ बहुत ही विदूसी महिला थी। बचपन में गणित के क्षेत्र मे रुचि जगाने में उनकी माँ का बहुत बड़ा हाथ रहा।

डॉ नीना गुप्ता के पिता भी अपने बेटी की शिक्षा के प्रति बहुत ही जागरूक थे। उन्होंने बेटा और बेटी में फर्क कीये बिना नीना गुप्ता को उच्च शिक्षा के लिए हमेशा प्रोत्साहित करते रहे।

नीना गुप्ता की गणित की ललक इतनी थी की वे घंटों गणित के जटिल प्रश्नों को हल करने में लगे रहते। नीना गुप्ता की शादी विशाल साराओगी के साथ संपन हुआ। विवाह के बाद भी उनके पति ने उनके अनुसंधान कार्य में साथ दिया।

शिक्षा

नीना गुप्ता खालसा मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की थी। उसके बाद  नीना गुप्ता ने बेथ्यून कॉलेज(Bethune College, Kolkata) में प्रवेश लिया।

जहाँ से उन्होंने गणित में उच्च अंकों के साथ वर्ष 2006 में में स्नातक की परीक्षा पास की। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक में पहला स्थान प्राप्त किया।

उसके बाद 2008 में उन्होंने भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) कलकता से गणित में मास्टर डिग्री प्राप्त की। प्रो अमर्त्य कुमार दत्ता के मार्गदर्शन में गणित के (Algebraic Geometry )पर शोध करते हुए सन 2011 में उन्होंने डॉक्टरेट (पीएचडी)की उपाधि हासिल की।

कैरियर

अपनी उच्च शिक्षा प्राप्ति के बाद नीना गुप्ता visiting scientis के रूप में भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) से जुड़ गई। इसके बाद उन्होंने मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च(TIFR) में काम की।

बाद में वे भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई)कलकता में वापस जॉइन कर ली। वे सन 2014 तक इस संस्थान में associate professor का दर्जा प्राप्त की। सन 2014 उनके जीवन का सबसे यादगार वर्ष रहा।

जब उन्होंने वर्षों से अनसुलझे पड़े गणित के प्रॉब्लेम को उन्होंने हल कर दिया।

गणित में योगदान

नीना गुप्ता गणित में जीनियस हैं। गणित का एक प्रॉब्लम जो ज़रिस्की कैंसेलेशन कॉन्जैक्चर (Zariski Cancellation Conjecture) के नाम से जाना जाता है। करीब 7 दशकों से भी अधिक समय से इस मैथ्स की गुत्थी को गणितज्ञ सुलझाने में लगे थे।

लेकिन नीना गुप्ता को उसमें सफलता मिली और उन्होंने इसे solve कर दिखाया। इस कार्य से उनकी विश्व व्यापी पहचान मिली। नीना गुप्ता अपनी सफलता का सारा श्रेय अपने पिता को देती हैं।

जब dr गुप्ता ने The Zarinski Cancellation Problem को solve कर दिखाया। गणित का विषय हमेशा से ही एक रोमांचक और प्रतिस्पर्धी क्षेत्र है।

गणित के कई अनसुलझे प्रॉब्लेम हमेशा से ही creative and innovative techniques को allow करता रहा। जिसे समस्या के समाधान के द्वारा प्रसिद्धि अर्जित की जा सकती है।

ऐसे ही गणित के एक प्रॉब्लेम का नाम The Zarinski Cancellation Problem है। सर्वप्रथम इस प्रॉब्लेम को गणितज्ञ जारिस्की ने सन 1949 में Paris Colloquium में उठाया था।

इस प्रॉब्लेम को solve करने की 21वीं सदी की शुरुआत से ही कई प्रख्यात गणितज्ञों ने खूब कोशिस की। लेकिन उन्हें सफलता हाथ नहीं लगी।

लेकिन इस प्रॉब्लेम को भारत के गणितज्ञ नीना गुप्ता ने सन 2014 में solve कर सबको विस्मित कर किया। उन्होंने इस कार्य से अपने अद्भुत प्रतिभा का लोहा मनवाया और विश्व में भारत को गौरान्वित करने का महान कार्य किया।

पुरस्कार और सम्मान

गणित में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ नीना गुप्ता को अनेकों सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आइये Indian Mathematician Neena Gupta को प्रदान कीये गए पुरस्कार के बारें में जानते हैं।

  • वर्ष 2021 – प्रसिद्ध रामानुजन पुरस्कार से सम्मानि
  • वर्ष 2021 – भारतीय विज्ञान अकादमी के फेलो नामित
  • वर्ष 2019 – शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार
  • वर्ष 2017 – गणित में बिरला विज्ञान पुरस्कार
  • वर्ष 2015- भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा स्वर्ण जयंती फैलोशिप पुरस्कार,
  • वर्ष 2014 – एके अग्रवाल पुरस्कार (इंडियन मैथमैटिकल सोसाइटी द्वारा)
  • वर्ष 2014 – द रामानुजन पुरस्कार (यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास द्वारा)
  •  वर्ष 2014 – भारत सरकार द्वारा स्वर्णजयंती फैलोशिप से सम्मानित
  • वर्ष 2014 – भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी द्वारा ‘युवा वैज्ञानिक पुरस्कार’
  • वर्ष 2013 – इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा फ़ेलो चुना जाना
  • वर्ष 2013 – TIFR एलुमनाई एसोसिएशन द्वारा सरस्वती कौसिक मेडल
  • वर्ष 2012 – Inspire फैकल्टी फेलोशिप अवार्ड
  • वर्ष 2008 – वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद द्वारा श्यामा प्रसाद मुखर्जी फैलोशिप
  • वर्ष 2008 – आईएसआई द्वारा पीसी पनेसर गोल्ड मेडल से सम्मानित
  • वर्ष 2006 – में बेथ्यून कॉलेज से अपने छह पुरस्कार अर्जित किए

इसके साथ ही उन्हें पीसी चंद्र पुरस्कार, स्नातकों में सर्वोच्च अंक प्राप्ति के लिए सुषमा बसु मेमोरियल पदक, गणित स्नातकों में प्रथम स्थान आने पर शांतिलता बसु पदक प्रदान किया गया।

इसके अलावा उन्हें बीएससी में प्रथम स्थान की प्राप्ति पर जीसी और प्रतिमा दास पदक, मोस्ट प्रॉमिसिंग स्टूडेंट के लिए नलिनी दास मेडल से भी सम्मानित किया गया।

नीना गुप्ता गणितज्ञ – शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार पाने वाली सबसे कम उम्र के वैज्ञानिक  

डॉ नीना गुप्ता (dr neena gupta) को वर्ष 2019 भारत का प्रतिष्ठित शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार प्रदान किया गया। मात्र 35 वर्ष की आयु में प्रतिष्ठित शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार प्राप्त करने वाली सबसे कम उम्र के वैज्ञानिक हैं।

इसके पहले सन 1977 में 36 वर्ष की उम्र में यह पुरस्कार प्रसिद्ध वैज्ञानिक MS Raghunathan को मिल था। शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार प्राप्त करने वाली महिला गणितज्ञ की बात की जाय तो, नीना गुप्ता तीसरी महिला गणितज्ञ हैं।

जिन्हें इस सम्मान से नवाजा गया। इसके पहले गणित के क्षेत्र में यह सम्मान सन 1987 में आर परिमाला और सन 2004 ईस्वी में आर सुजाता को मिला था।

नीना गुप्ता बायोग्राफी इन हिंदी – conclusion

भारतीय गणितज्ञ नीना गुप्ता आज सफलता की उचाई पर पहुच चूंकि हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि लड़कियां हर क्षेत्र में कम नहीं है। भारत के प्रसिद्ध महिला गणितज्ञ शकुंतला देवी के बाद जो खालीपन नजर आ रहा था।

उसे नीना गुप ने अपने विश्व प्रसिद्ध उत्कृष्ट कार्य से भर दिया। आज वे गणित के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल कर चूंकि हैं।

डॉ नीना गुप्ता कौन है?

डॉ नीना गुप्ता भारत के एक प्रसिद्ध गणितज्ञ है। वर्तमान में वे भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI), कोलकाता के गणित के प्रोफेसर हैं।

प्रो नीना गुप्ता क्यों प्रसिद्ध है?

भारत के Neena Gupta (mathematician) ने गणित के 70 साल से अनसुलझे प्रॉब्लम ज़रिस्की कैंसेलेशन कॉन्जैक्चर (Zariski Cancellation Conjecture) को solve करके दुनियाँ को अचंभित कर दिया।

भारतीय गणितज्ञ नीना गुप्ता को 2019 में कौन सा प्रसिद्ध पुरस्कार मिला?

गणित में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें मात्र 35 वर्ष की उम्र में 2019 में भारत का विज्ञान के क्षेत्र में सबसे बड़ा सम्मान माने जाने वाला शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार प्रदान किया गया।

नीना गुप्ता सबसे कम उम्र में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार पाने वाली वैज्ञानिक बनी कैसे?

क्योंकि सन 1977 में यह पुरस्कार प्रसिद्ध वैज्ञानिक MS Raghunathan को 36 वर्ष की उम्र में मिला था। जबकि नीना गुप्ता को यह पुरस्कार 35 वर्ष की उम्र में प्राप्त हुआ।

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आपको गणितज्ञ नीना गुप्ता की जीवनी (Mathematician Neena Gupta Biography in Hindi ) कैसी लगी अपने सुझाव से जरूर अवगत करायें।

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