फणीश्वरनाथ रेणु का जीवन परिचय | Biography of Phanishwar Nath Renu in Hindi

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फणीश्वरनाथ रेणु कौन हैं।

फणीश्वरनाथ रेणु हिंदी साहित्य के आंचलिक लेखक, उपन्यासकार और कथाकार हैं। उन्होंने अपनी  रचनाओं में आंचलिक शब्दावली और मुहावरों का भावपूर्ण प्रयोग किया है।

जिसमें गाँव के जीवन और परिवेश का बड़े ही मनोरम तरीके से चित्रण किया है। उन्होंने मैला आँचल और परिकथा के रचना के द्वारा साहित्य जगत में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

उनकी कहानी मैला आँचल लोगों को बहुत पसंद आया। इस उपन्यास की कहानी के ऊपर टीवी सीरियल भी बन चूंकि है। उनके प्रसिद्ध कहानी संग्रह ठुमरी, अगिनखोर, आदिम रात्रि की महक और मारे गए गुलफाम पर फ़िल्म भी बन चुकी है।

उनकी रचना शैली और भाषा संवेदनशील और भावपूर्ण ग्रामीण परिवेश पर आधारित है। उनका प्रसिद्ध उपन्यास मैला आँचल हिंदी साहित्य का प्रथम आंचलिक उपन्यास माना जाता है।

कहा जाता है की उन्होंने मुंशी प्रेमचंद्र के विरासत को नई पहचान दी। इनकी लेखन शैली को देखर लोग उन्हें आजादी के बाद का प्रेमचंद्र भी कहते थे। उनकी उपन्यास मैला आँचल की तुलना प्रेमचंद्र के प्रसिद्ध उपन्यास गोदान से की जाती है।

सामाजिक पृष्ट भूमि पर आधारित उनके इस उपन्यास में ग्रामीण बिहार, पिछड़े और वंचितों के जीवन को बड़े ही भावपूर्ण तरीके से दर्शाया गया था।

आईये फणीश्वरनाथ रेणु की जीवनी शीर्षक वाले इस लेख में फणीश्वरनाथ रेणु का व्यक्तित्व एवं कृतित्व तथा उनकी रचनायें संक्षेप में जानते हैं।

फणीश्वरनाथ रेणु का जीवन परिचय | Biography of Phanishwar Nath Renu in Hindi

फणीश्वरनाथ रेणु की जीवनी व संक्षिप्त परिचय – Biography of Phanishwar Nath Renu in Hindi

पूरा नाम – फणीश्वरनाथ रेणु
जन्म तिथि – 4 मार्च, 1921
जन्म स्थान – अररिया फारबिसगंज बिहार
पिता का नाम – शिलानाथ
प्रसिद्धि – उपन्यासकार, लेखक
निधन – 11 अप्रैल 1977
सम्मान – पद्मश्री

प्रारम्भिक जीवन – about Phanishwar nath renu in Hindi

फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म 04 मार्च 1921 ईस्वी में बिहार राज्य के अररिया जिले के फरवीसगंज के पास हुआ था। फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म स्थान औराही हिंगना गाँव है।

फणीश्वरनाथ रेणु के पिता का नाम शिलानाथ मण्डल था। उनके पिता कांग्रेस के सक्रिय सदस्य थे। इसका प्रभाव बाद में इनपर भी पड़ा। उनका परिवार के सम्पन्न किसान था।

पारिवारिक जीवन

कहा जाता है की उनकी तीन शादियाँ हुई थी। फणीश्वरनाथ रेणु की पत्नी का नाम रेखा, पद्मा और लतिका थी। उनकी पहली शादी रेखा के साथ हुई थी।

कहा जाता है की रेखा की लकवाग्रस्त होकर निधन होने बाद उन्होंने दूसरी शादी पद्मा के साथ 1950 में हुआ था। उसके कुछ वर्षों के बाद अपने बीमारी के इलाज के दौरान लतिका के संपर्क में आए।

कहा जाता है की उन्होंने अपनी पत्नी को बिना कुछ बताए चुपचाप पटना में लतिका से शादी कर ली। लेकिन उनकी पत्नी पद्मा जी ने उनका विरोध किए बिना उम्र भर उनका साथ देती रही।

उनके दूसरे पत्नी से प्राप्त पुत्र का नाम पद्म पराग राय वेणु है। जो फरवीसगंज से विधायक भी रह चुके हैं।

शिक्षा दीक्षा

फणीश्वर नाथ रेणु की प्रारम्भिक शिक्षा अररिया और फारबिसगंज से पूरी हुई। उसके बाद उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा नेपाल के विराट नगर के आदर्श विध्यालय से सम्पन्न हुई।

आगे चलकर उनका नामांकन कासी हिन्दू विश्व विद्यालय में हुई जहाँ से उन्होंने इन्टर की परीक्षा पास की। चूंकि रेणु जी के पिता एक स्वतंरता सेनानी थे। फलतः आजादी का पाठ उन्हें अपने घर पर ही विरासत में मिला था।

आजादी की लड़ाई में सक्रिय योगदान

वे गांधी जी और जयप्रकास नारायण से बहुत ही प्रभावित थे। फलतः वे इन्टर के बाद स्वतंरता आंदोलन में कूद पड़े। वे बिहार सोशलिस्ट पार्टी से भी जुड़े।

1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने के कारण वे गिरफ्तार कर लिए गए। उन्हें तीन वर्षों तक बंदीगृह में गुजरना पड़ा। इन्होंने नेपाल के राजशाही के खिलाफ आंदोलन में भी भाग लिया। 

उन्होंने जेपी आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया और उन्होंने सरकार द्वारा दमन के विरोध में पद्मश्री का त्याग दिया था।

फणीश्वर नाथ रेणु का साहित्य में स्थान

हिन्दी साहित्य में योगदान की बात की जाय तो फणीश्वर नाथ रेणु का नाम आंचलिक कथाकारों में अग्रणी है। प्रेमचंद्र के बाद इन्हें सबसे सफल उपन्यासकारों के रूप में देखा जाता है।

इनके साहित्यिक कृतियाँ मैला आँचल उपन्यास को प्रेमचंद्र के गोदान से भी लोगों ने तुलना की। हिन्दी साहित्य में उन्हें प्रथम कथा शिल्पी के रूप में जाना जाता है।

फणीश्वरनाथ रेणु का साहित्यिक परिचय

उन्होंने लेखन कार्य की शुरुआत किशोरावस्था में ही शुरू कर दिया था। उनके प्रथम कहानी ‘बटबाबा’ का 1944 में ‘साप्ताहिक पत्रिका विश्वमित्र’ में प्रकाशित हुआ था।

अपनी लेखनी से फणीश्वरनाथ रेणु ने हिन्दी साहित्य के हर आयाम को छुआ। उन्होंने उपन्यास, कहानी, कथा-संग्रह, रिपोतार्ज, संस्मरण के द्वारा अपनी प्रतिभा का अद्भुत परिचय दिया।

उन्होंने अपनी रचना में आंचलिक शब्दों का प्रयोग कर ग्रामीण परिवेश के बारें में यथास्थिति दर्शाने की कोशिस की है। उन्होंने हिंदी साहित्य में आंचलिक उपन्यासकार के रूप में अपने आप को प्रतिष्ठित किया।

उनकी बहुचर्चित आंचलिक उपन्यास मैला आँचल ने उन्हें एक सर्वाधिक लोकप्रिय कथाकर और उपन्यास कर की श्रेणी में लाकर खड़ा किया। उनकी अंतिम कहानी ‘भित्तिचित्र की मयूरी’ है जिसे उन्होंने 1972 में लिखी थी।

फणीश्वरनाथ रेणु की रचनाएँ

फणीश्वरनाथ रेणु एक अच्छे लेखक थे। उन्होंने कई कथा कहानियों और उपन्यास की रचना की।

उनके प्रसिद्ध उपन्यास

  • मैला आंचल
  • परती परिकथा
  • जूलूस
  • दीर्घतपा
  • कितने चौराहे
  • कलंक मुक्ति
  • पलटू बाबू रोड
  • कथा-संग्रह
  • ठुमरी,1959
  • एक आदिम रात्रि की महक,1967
  • अग्निखोर,1973
  • एक श्रावणी दोपहर की धूप,1984
  • अच्छे आदमी,1986
  • रिपोर्ताज
  • ऋणजल-धनजल
  • नेपाली क्रांतिकथा
  • वनतुलसी की गंध
  • श्रुत अश्रुत पूर्वे
  • फणीश्वरनाथ रेणु की प्रसिद्ध कहानी
  • मारे गये गुलफाम (तीसरी कसम)
  • एक आदिम रात्रि की महक
  • लाल पान की बेगम
  • पंचलाइट
  • तबे एकला चलो रे
  • ठेस
  • पहलवान की ढोलक
  • रसप्रिया

फणीश्वरनाथ रेणु की भाषा शैली

फणीश्वरनाथ नाथ रेणु ने अपनी रचना में खड़ी बोली के साथ क्षेत्रीय भाषा(आंचलिक ) के शब्दों की अधिकता दिखती है। फणीश्वरनाथ रेणु की रचना शैली वर्णात्मक, नाटकीय और विवरणात्मक है।

उन्होंने बड़े ही सरल और प्रभावपूर्ण तरीके से अपनी रचना की अभिव्यक्ति की। उन्होंने अपनी कहानी में मुहावरों, तद्भव, तदसम, विदेसज शब्दों का प्रयोग बड़े ही रोचक और भावपूर्ण ढंग से किया है।

फणीश्वरनाथ रेणु की साहित्यिक विशेषताएँ

उनकी रचना में शब्दों के चुनाव और उनकी भावपूर्ण अभिव्यक्ति पाठक के दिल को छु जाती है। उन्होंने अपनी रचना में ग्रामीण को अधिक जगह दी। उन्होंने अपने प्रसिद्ध उपन्यास मैला आँचल से अपार लोकप्रियता अर्जित की।

कुछ लोगों ने इसकी तुलना प्रेमचंद्र के प्रसिद्ध उपन्यास गोदान से भी की। वहीं कुछ लोगों ने इनकी रचनाओं पर सवाल भी खड़े किए। लेकिन पाठकों ने इन्हें रातों रात बुलंदियों के मुकाम पर खड़ा कर दिया।

उनकी कहानियों और उपन्यास में आंचलिक जीवन के हर धुन, हर ताल, हर लय को शब्दों में भावपूर्ण तरीके से अभिव्यक्त किया गया है। जो पाठकों पर एक जादुई असर छोड़ता है।

फ़िल्म ‘तीसरी क़सम’ और टीवी धारावाहिक 

उनके प्रसिद्ध उपन्यास मैला आँचल पर टीवी सीरियल का भी निर्माण हुआ। इस धारावाहिक को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इनका प्रमुख कृति मारे गए गुलफाम कहानी पर आधारित तीसरी कसम नाम फिल्म भी बनी, जो सुपर हिट रही।

इस फिल्म के निर्माता गीतकार शैलेन्द्र थे, जिसे बासु भट्टाचार्य जी ने निर्देशित किया है। इस फिल्म में राजकपुर और वहीदा रहमान ने मुख्य किरदार निभाया है। फिल्म तीसरी कसम मिल की पत्थर साबित हुई।

उनकी अन्य कहानियों जैसे ठुमरी, अगिनखोर, आदिम रात्रि की महक पर भी फिल्म बन चूंकि है। उनकी लघु कहानी “पंचलाइट” (पेट्रोमैक्स) की कहानी पर एक टीवी लघु फिल्म बनाया गया।

वर्ष 2017 में उनकी इसी कहानी पंचलाइट पर बॉलीवुड फिल्म का भी निर्माण हुआ था।

फणीश्वरनाथ रेणु का निधन

हिन्दी साहित्य के आंचलिक उपन्यासकार और कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु का 11 अप्रेल 1977 को पटना में निधन हो गया। जीवन के अंतिम समय तक वे साहित्य सृजन में लगे रहे।

फणीश्वर नाथ रेणु ने अपने आंचलिक उपन्यास की शैली के माध्यम से समकालीन ग्रामीण भारत की आवाज को उठाने का काम किया। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से आंचलिक आवाज को हिंदी साहित्य के मुख्यधारा से जोड़ा।

आज वे हमारे बीच नहीं है लेकिन हिन्दी के आंचलिक कथाकार को हिन्दी जगत हमेशा याद रखेगी। 

सम्मान व पुरस्कार

रेणु जी को हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1970 में देश का प्रसिद्ध नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

उन्होंने इंदिरा जी द्वारा लगाए गए आपातकाल का बिरोध किया। वे जेपी आंदोलन में कूद कर सक्रिय रूप से भाग लिया और सरकार का दिया हुआ सम्मान आपातकाल के बिरोध में लौटा दिया।

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गाँव से शहरों की और पलायन का चित्रण फणीश्वरनाथ रेणु के किस कहानी मे मिलता है

उन्हें जितनी प्रसिद्धि उपन्यासों से मिली, उतनी ही प्रसिद्धि उन्हें कहानियों से भी मिली। उनके कहानी में गाँव से शहरों की और पलायन का चित्रण बड़े ही मार्मिक ढंग से वर्णित है।

फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म कब और कहां हुआ था

फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म 4 मार्च 1921 को वर्तमान अररिया जिले के औराही हिंगना नामक स्थान में हुआ था।

फणीश्वरनाथ रेणु के किसी एक उपन्यास का नाम लिखिए।

मैला आँचल,

बाहरी कड़ियाँ (external links)

फणीश्वर नाथ “रेणु” – विकिपीडिया
फणीश्‍वरनाथ रेणु जीवन परिचय (Phanishwar Nath ‘Renu’)

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