डॉ हरिवंश राय बच्चन का जीवन परिचय | Harivansh rai Bachchan biography in Hindi

डॉ हरिवंश राय बच्चन का जीवन परिचय, Harivansh rai Bachchan biography in Hindi

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डॉ. हरिवंश राय बच्चन कौन थे?

डॉ हरिवंश राय बच्चन हिन्दी साहित्य के लोकप्रिय कवि में अग्रीणी माने जाते हैं। वे सदी के महानायक अमिताभ बच्चन जी के पिता थे। उन्होंने हिन्दी साहित्य के गध्य और काव्य रचना दोनों क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ते हुए हिन्दी साहित्य में उच्च स्थान प्राप्त किया।

उन्होंने अपने जीवन काल में कई उपलब्धियाँ को प्राप्त की। उनके उल्लेखनीय योगदान हेतु भारत सरकार ने उन्हें देश का बड़ा नागरिक सम्मान पदम भूषण प्रदान किया। इसके अलावा उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और सरस्वती पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

हरिवंश राय बच्चन जी की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं ‘मधुशाला’ ने उन्हें हिन्दी साहित्य के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि बना दिया। उनकी भाषा साहित्यिक होते हुए भी आम जन की है। भाषा को साहित्यिक रखते हुए बड़े ही सरल और सुबोध तरीके से काव्य की अभिव्यक्ति उनकी विशेषता है।

18 जनवरी 2003 मुंबई हरिवंश राय बच्चन का साँस की बीमारी के कारण मुंबई में निधन हो गया। हिन्दी साहित्य में अविस्मरणीय योगदान के लिए हरिवंश राय बच्चन को हमेशा याद किया जायेगा।

डॉ हरिवंश राय बच्चन का जीवन परिचय | Harivansh rai Bachchan biography in Hindi

डॉ हरिवंश राय बच्चन का जीवन परिचय संक्षेप में – harivansh rai bachchan ka jivan parichay

Table of Contents

पूरा नाम – डॉ. हरिवंश राय बच्चन
जन्म तिथि 27 नवम्बर 1907
जन्म स्थान बापूपट्टी, प्रतापगढ़, उत्तरप्रदेश
पिता का नाम – प्रताप नारायण श्रीवास्तव
माता का नाम – सरस्वती देवी
पत्नी का नाम – श्यामा देवी(पहली पत्नी), तेजी बच्चन(दूसरी पत्नी)
बच्चे – सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, अभिताभ बच्चन
निधन– 18 जनवरी 2003 मुंबई
व्यवसाय – लेखक, कवि, साहित्यकार
सम्मान व पुरस्कार – पद्मभूषण, साहित्य अकादमी आदि
लेखन की शैली – हिंदी, छायावाद

महान कवि हरिवंश राय बच्चन की जीवनी – Harivansh rai Bachchan biography in Hindi

प्रारम्भिक जीवन

हिन्दी साहित्य के प्रख्यात लेखक हरिवंश राय बच्चन का जन्म 27 नवम्बर 1907 ईस्वी में भारत के उत्तरप्रदेशद राज्य में हुआ था। हरिवंश राय बच्चन का जन्म स्थान प्रयागराज पास गाँव बापूपट्टी है। तत्कालीन इलाहाबाद (प्रयागराज) में एक कायस्थ परिवार जन्मे हरिवंश राय बच्चन के पिता का नाम प्रताप नारायण श्रीवास्तव था।

इनके माता जी का नाम सरस्वती देवी थी। चूंकि हरिवंश राय बच्चन कायस्थ परिवार से आते थे तथा उनका सरनाम श्रीवास्तव था। लेकिन बचपन से ही उनके परिवार के लोग उन्हें बच्चन (शाब्दिक अर्थ ‘बच्चा’) कह कर संबोधित करते थे। यहीं बच्चन शब्द बाद में उनका सरनाम बन गया तथा आगे चलकर इसी नाम से वे प्रसिद्ध हुए। 

शिक्षा दीक्षा – education informatoion in Hindi

हरिवंश राय बच्चन ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा काशी और प्रयाग से उर्दू में ग्रहण की। उन्होंने कायास्त पाठशाला में उर्दू में पढ़ाई की जो लॉ की पढ़ाई के लिए पहला कदम था। उसके बाद उन्होंने सन 1938 ईस्वी में इलाहाबाद (वर्तमान नाम प्रयागराज) विश्वविध्यालय से अंग्रेजी में एम् ए किया।

अपनी एम् ए की परीक्षा पास करने के बाद वे इलाहाबाद यूनिवरसिटी में ही प्रवक्ता के पद पर अपनी सेवा देने लगे। वर्ष 1952 में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए वे इंगलेंड चले गए। इंगलेंड के कैम्ब्रिज यूनिवरसिटी में उन्होंने पी एच डी की डिग्री हासिल की।

उन्होंने इंगलेंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य के प्रसिद्ध विद्वान ‘डब्लू बी यीट्स’ की कविताओं पर शोध करते हुए डॉक्टरेट की उपाधि ग्रहण की।

कैरियर व उपलब्धियां

जैसे का हम जानते हैं की अंग्रेजी साहित्य में एम ए करने के बाद हरिवंश राय बच्चन प्रयागराज विश्व विध्यालय में प्रबक्त के रूप में नियुक्त हुए। उसके बाद वे पी एच डी के लिए इंगलेंड गए। इंगलेंड से पी एच डी करने के बाद दुबारा वे फिर से विश्व विध्यालय से जुड़ कर एक प्रोफेसर के रूप में सेवा देने लगे।

उन्होंने कुछ समय तक इलाहाबाद आकाशबाणी से भी जुड़े। आगे चलकर वे दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय में काम किया। आजादी के बाद वे वर्ष 1966 ईस्वी में राज्यसभा के सांसद चुने गए।

पारिवारिक जीवन – harivansh rai bachchan family

हरिवंश राय बच्चन की शादी 19 बर्ष की उम्र में 1926 में में हुई। हरिवंश राय बच्चन की पत्नी का नाम श्यामा बच्चन थी। शादी के बक्त श्यामा बच्चन की उम्र महज 14 साल की थी। लेकिन शादी के कुछ वर्षों के बाद उनकी पत्नी श्यामा बच्चन का बीमार पड़ गई।

श्यामा बच्चन को टीबी हो गया था। उस बक्त टीबी लाइलाज बीमारी मानी जाती थी। फलतः एक दिन 1936 ईस्वी में उनकी पत्नी श्यामा बच्चन का अचानक निधन हो गया। पत्नी के आकस्मिक निधन से हरिवंश राय बच्चन बहुत उदास हो गए। वे पत्नी की शोक में हमेशा डूबे रहने लगे।

वे काफी उदास और एकांत रहने लगे। कुछ वर्षों के बाद उनकी मुलाकात अपने एक मित्र के माध्यम से एक तेजी सूरी से हुई। तेजी सूरी एक पंजावन थी तथा रंगमंच और गायन से जुड़ी थी। इस प्रकार बच्चन साहब ने 24 जनवरी 1942 को दूसरी शादी कर ली।

उन्हें दो पुत्र रत्न प्राप्त हुआ। उनके बड़े बेटे का नाम अमिताभ बच्चन और छोटे बेटे का नाम अजिताभ बच्चन है। उनके बड़े वेटे आज वॉलीवूड में सदी के महानायक के रूप में प्रसिद्ध है। तथा उनके दूसरे वेटे अजिताभ बच्चन एक बिजनेस मैन हैं।

हरिवंश राय बच्चन का साहित्यिक परिचय

हरिवंश राय बच्चन, उत्तर छायावादी काल के आस्थावादी कवि थे। इनकी सबसे प्रसिद्ध काव्य रचना मधुशाला है। जिसे उन्होंने अपनी पहली पत्नी के निधन के बाद लिखा था। उनकी यह काव्य रचना बहुत ही लोकप्रिय हुई।

उन्होंने हिन्दी साहित्य में काव्य रचना के साथ-साथ कई आत्मकथा भी लिखी। इनकी प्रथम रचना ‘तेरा हार’ शीर्षक से सन 1932 ईस्वी में प्रकाशित हुई।

हरिवंश राय बच्चन का साहित्य में स्थान

हिंदी साहित्य जगत में हरिवंश राय बच्चन का स्थान सर्वोपरि है। उन्होंने अपनी गध्य और काव्य रचना के द्वारा हिन्दी साहित्य में अहम स्थान हासिल किया।  हरिवंश जी सर्वश्रेष्ठ रचनाओं  ‘मधुशाला’ ने उन्हें हिन्दी साहित्य में अमर कर दिया।

हरिवंश राय बच्चन का साहित्यिक योगदान

हरिवंश राय बच्चन की गिनती हिंदी साहित्य में हालावाद के प्रवर्तक एवं उत्तर छायावाद काल के प्रमुख कवियों में की जाती है। हरिवंश राय बच्चन ने अपनी दमदार लेखनी के द्वारा हिन्दी साहित्यिक में अहम योगदान दिया।

उन्होंने काव्य रचना और गद्य के क्षेत्र में लेखनी के माध्यम से अपने प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनकी प्रसिद्ध कृति मधुशाला हिन्दी साहित्य की सबसे प्रसिद्ध काव्य रचना में गिनी जाती है। उन्होंने फारसी कवि उमर ख्य्याम की कविताओं का हिंदी में अनुवाद किया जिसे युवा वर्ग द्वारा काफी पसंद किया गया।

हरिवंश राय बच्चन की प्रमुख रचनाएँ

हरिवंश राय बच्चन का कृतित्व की बात की जाय तो उन्होंने आत्मकथा, काव्य संग्रह आदि की रचना की। हरिवंश राय बच्चन की मुख्य-कृतियां इस प्रकार हैं : –

हरिवंश राय बच्चन काव्य संग्रह (famous Poem)

  • तेरा हार(1932)
  • मधुशाला(1935)
  • मधुबाला(1936)
  • मधुकलश(1937)
  • निशा निमन्त्रण(1938)
  • एकांत-संगीत(1939)
  • आकुल अंतर(1943)
  • सतरंगिनी(1945)
  • हलाहल, बंगाल का काल(1946)
  • खादी के फूल, सूत की माला(1948)
  • मिलन यामिनी(1950)
  • प्रणय पत्रिका(1955)
  • धार के इधर उधर(1957)
  • आरती और अंगारे, बुद्ध और नाचघर(1958)
  • त्रिभंगिमा(1961)
  • चार खेमे चौंसठ खूंटे(1962)
  • दो चट्टानें (1965)
  • बहुत दिन बीते(1967)
  • कटती प्रतिमाओं की आवाज(1968)
  • उभरते प्रतिमानों के रूप(1969)
  • जाल समेटा(1973)

हरिवंश राय बच्चन की आत्मकथा – harivansh rai bachchan books

  • नीड़ का निर्माण फिर
  • दासद्वार से सोपान तक
  • क्या भूलू क्या याद करू
  • बसेरे से दूर

हरिवंश द्वारा लिखित कुछ अन्य कृतियां-

  • सोपान
  • मैकबेथ
  • कवियों में सौम्य संत पन्त
  • आज के लोकप्रिय हिंदी कवी सुमित्रानंदन
  • उमर खय्याम की रुबाईया
  • अभिनव सोपान
  • आधुनिक कवि
  • जनगीत
  • बच्चन के साथ क्षण भर
  • चौसठ रुसी कविताएं
  • हैमलेट
  • टूटी छूटी कड़िया
  • पन्त के सौ पुत्र
  • डब्लू वी यीट्स एंड अकल्टिम
  • भाषा अपनी भाव पराये
  • प्रवास की डायरी
  • नेहरू राजनीतिक जीवन चरित्र

हरिवंश राय बच्चन की उपलब्धियाँ, सम्मान व पुरस्कार

अपने जीवन काल में हरिवंश राय बच्चन जी ने कई उपलब्धियाँ को हासिल किया। हिन्दी साहित्य जगत में हरिवंश राय बच्चन के उल्लेखनीय योगदान के लिए कई सम्मान व पुरस्कार प्राप्त हुए।

  • वर्ष 1976 – भारत सरकार द्वारा पदम भूषण
  • वर्ष 1968 – साहित्य अकादमी पुरस्कार (प्रमुख कृति “दो चट्टानें” के लिए)
  • वर्ष 1968 – सोवियत लेंड नेहरू पुरस्कार
  • वर्ष 168 – कमल पुरस्कार (एफरो एसियाई सम्मेलन )

साथ ही बिरला फाउंडेशन द्वारा उन्हें सरस्वती पुरस्कार उनकी प्रसिद्ध रचना ‘क्या भूलूँ क्या याद करूँ’ के लिए प्रदान किया गया।

हरिवंश राय बच्चन की काव्यगत विशेषताएँ

उन्होंने अपने काव्य रचना में प्रेम, संयोग वियोग, निराशा का भावपूर्ण चित्रन किया है। चूंकि वे उत्तर छायावादी काल के यथार्थवादी हालावादी कवि थे। हालावाद का अर्थ काव्य की उस प्रवृत्ति या धारा से है जिसमें हाला या मदिरा को केंद्र विंदु मानकर काव्यरचना हुई हो।

उनकी रचना मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश में हालावाद के दर्शन होते हैं। शब्दों का चयन, सहजता और संवेदनशीलता उनकी  काव्यगत विशेषताएँ हैं।

हरिवंश राय बच्चन की अंतिम कविता

इन्होंने अपने जीवन के अंतिम काल तक हिन्दी साहित्य के महती सेवा की। मधुशाला के रचना के द्वारा उन्होंने हालावाद रचनाकर्ता कवि कहलाये। हरिवंश राय बच्चन की अंतिम कविता ‘नई से नई-पुरानी से पुरानी’ शीर्षक से थी। जिसका प्रकाशन 1985 में हुआ।

हरिवंश राय बच्चन की भाषा-शैली:

बच्चन जी की रचना की भाषा साहित्यिक खड़ी बोली हिंदी थी। इन्होंने अपनी रचनाओं में शब्दों के चयन पर खास ध्यान रखा। इनकी सबसे लोकप्रिय रचना मधुशाला ने हिन्दी साहित्य में उन्हें अमर कर दिया।

शुद्ध साहित्यिक खड़ी बोली में रचित उनकी रचनाओं में संस्कृत की तत्सम, तद्भव के अलावा उर्दू, फारसी और अंग्रेजी शब्दों का भी प्रयोग मिलता है।

हरिवंश राय बच्चन का भाव पक्ष

हरिवंश राय बच्चन की गिनती सामाजिक चेतना की प्रख्यात कवि में होती है। उनकी रचनाओं में भाव पक्ष और कला पक्ष दोनों दृष्टिगोचर होते हैं। उन्होंने अपने काव्य में जहाँ प्रेम और सौंदर्य की की अनुभूति दिलाते हैं। वहीं उनके रचना में श्रृंगार रस के भी दर्शन होते हैं।

हरिवंश राय बच्चन की मृत्यु (Harivansh Rai Bachchan Death)

भारत के महान कवि व लेखक हरिवंश राय बच्चन अपने जीवन के अंतिम समय में साँस की बीमारी से पीड़ित हो गए। फलतः हरिवंश राय बच्चन जी का 18 जनवरी 2003 को मुंबई में निधन हो गया। आज वो हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी अमर काव्य रचना उनकी यादों को हमेशा ताजा करती रहेगी।

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FAQ

हरिवंश राय बच्चन के माता-पिता का नाम क्या है?

हरिवंश राय बच्चन के माता का नाम सरस्वती देवी और पिता का नाम प्रताप नारायण श्रीवास्तव था।

हरिवंश राय बच्चन को हालावाद कवि क्यों कहा जाता है?

क्योंकि उमर खैयाम की रुबाइयां से प्रेरित उनकी प्रसिद्ध काव्य रचना मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश में हालावाद के दर्शन होते हैं।

हरिवंश राय बच्चन का जन्म कब और कहां हुआ था?

हरिवंश राय बच्चन प्रयागराज के रहने वाले थे, उनका जन्म 27 नवम्बर 1907 में तत्कालीन इलाहाबाद (प्रयागराज) जिले के प्रतापगढ़ के पट्टी नामक स्थान में हुआ था। 

हरिवंश राय बच्चन की प्रमुख रचनाएं कौन कौन सी है?

उनकी प्रमुख कृतियाँ में तेरा हार, मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश, आत्म परिचय, निशा निमंत्रण, एकांत संगीत, आकुल अंतर, आदि शामिल हैं।

बच्चन जी की आत्मकथा की शैली कौन सी है?

उन्होंने कई आठमकथा की रचना की, जिसमें नीड़ का निर्माण फिर, दासद्वार से सोपान तक, क्या भूलू क्या याद करू, बसेरे से दूर आदि प्रमुख हैं। बच्चन जी की आत्मकथा की शैली में चित्रात्मक, भावात्मक, विचार प्रधान, वर्णनात्मक तथा सूत्रात्मक शैली की प्राथमिकता है।

हरिवंश राय बच्चन की कविता मधुशाला की कुछ पंक्तियाँ – harivansh rai bachchan poems in hindi

मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला, प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,

पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा, सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।

प्रियतम, तू मेरी हाला है, मैं तेरा प्यासा प्याला, अपने को मुझमें भरकर तू बनता है पीनेवाला,

मैं तुझको छक छलका करता, मस्त मुझे पी तू होता, एक दूसरे की हम दोनों आज परस्पर मधुशाला।

मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवला, ‘किस पथ से जाऊँ?’ असमंजस में है वह भोलाभाला,

अलग-अलग पथ बतलाते सब पर मैं यह बतलाता हूँ, ‘राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला।

हाथों में आने से पहले नाज़ दिखाएगा प्याला, अधरों पर आने से पहले अदा दिखाएगी हाला,

बहुतेरे इनकार करेगा साकी आने से पहले, पथिक, न घबरा जाना, पहले मान करेगी मधुशाला।

धर्मग्रन्थ सब जला चुकी है, जिसके अंतर की ज्वाला, मंदिर, मसजिद, गिरिजे, सब को तोड़ चुका जो मतवाला,

पंडित, मोमिन, पादिरयों के फंदों को जो काट चुका, कर सकती है आज उसी का स्वागत मेरी मधुशाला।

बड़े बड़े परिवार मिटें यों, एक न हो रोनेवाला, हो जाएँ सुनसान महल वे, जहाँ थिरकतीं सुरबाला,

राज्य उलट जाएँ, भूपों की भाग्य सुलक्ष्मी सो जाए, जमे रहेंगे पीनेवाले, जगा करेगी मधुशाला।

पथिक बना मैं घूम रहा हूँ, सभी जगह मिलती हाला, सभी जगह मिल जाता साकी, सभी जगह मिलता प्याला,

मुझे ठहरने का, हे मित्रों, कष्ट नहीं कुछ भी होता, मिले न मंदिर, मिले न मस्जिद, मिल जाती है मधुशाला।

मेरे अधरों पर हो अंतिम वस्तु न तुलसीदल प्याला, मेरी जीव्हा पर हो अंतिम वस्तु न गंगाजल हाला,

मेरे शव के पीछे चलने वालों याद इसे रखना, राम नाम है सत्य न कहना, कहना सच्ची मधुशाला।

मेरे शव पर वह रोये, हो जिसके आंसू में हाला, आह भरे वो, जो हो सुरिभत मदिरा पी कर मतवाला,

दे मुझको वो कान्धा जिनके पग मद डगमग होते हों, और जलूं उस ठौर जहां पर कभी रही हो मधुशाला।

हरिवंश राय बच्चन की कविता – जो बीत गई सो बात गई

जीवन में एक सितारा था, माना वह बेहद प्यारा था

वह डूब गया तो डूब गया, अम्बर के आनन को देखो

कितने इसके तारे टूटे, कितने इसके प्यारे छूटे

जो छूट गए फिर कहाँ मिले, पर बोलो टूटे तारों पर

कब अम्बर शोक मनाता है, जो बीत गई सो बात गई

जीवन में वह था एक कुसुम, थे उसपर नित्य निछावर तुम

वह सूख गया तो सूख गया, मधुवन की छाती को देखो

सूखी कितनी इसकी कलियाँ, मुर्झाई कितनी वल्लरियाँ

जो मुर्झाई फिर कहाँ खिली, पर बोलो सूखे फूलों पर

कब मधुवन शोर मचाता है, जो बीत गई सो बात गई

जीवन में मधु का प्याला था, तुमने तन मन दे डाला था

वह टूट गया तो टूट गया, मदिरालय का आँगन देखो

कितने प्याले हिल जाते हैं, गिर मिट्टी में मिल जाते हैं

जो गिरते हैं कब उठतें हैं, पर बोलो टूटे प्यालों पर

कब मदिरालय पछताता है, जो बीत गई सो बात गई

मृदु मिटटी के हैं बने हुए, मधु घट फूटा ही करते हैं

लघु जीवन लेकर आए हैं, प्याले टूटा ही करते हैं

फिर भी मदिरालय के अन्दर, मधु के घट हैं मधु प्याले हैं

जो मादकता के मारे हैं, वे मधु लूटा ही करते हैं

वह कच्चा पीने वाला है, जिसकी ममता घट प्यालों पर

जो सच्चे मधु से जला हुआ, कब रोता है चिल्लाता है

जो बीत गई सो बात गई,

हरिवंशराय बच्चन कवितायेँ – Harivansh Rai Bachchan Poems in Hindi

है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है की कुछ पंक्तियाँ

कल्पना के हाथ से कमनीय जो मंदिर बना था
भावना के हाथ ने जिसमें वितानों को तना था,

स्वप्न ने अपने करों से था जिसे रुचि से सँवारा
स्वर्ग के दुष्प्राप्य रंगों से, रसों से जो सना था,

ढह गया वह तो जुटाकर ईंट, पत्थर, कंकड़ों को
एक अपनी शांति की कुटिया बनाना कब मना है,
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है।।

बाहरी कड़ियाँ (External links)

हरिवंश राय बच्चन विकिपीडिया इन हिंदी

साहित्य अकादमी पुरस्कार 1968 हिन्दी

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