नागपूर का इतिहास व जानकारी – Information about Nagpur in Hindi

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नागपुर (Nagpur) महाराष्ट्र का प्रसिद्ध शहर नागपुर संतरों के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। इस शहर का इतिहास भी गौरवपूर्ण रहा है। नागपूर का इतिहास अपने में कई इतिहासिक विरासत को समाहित किए हुए है।

करीब 395 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला नागपूर महाराष्ट्र का एक ऐतिहासिक और सबसे बड़ा शहर है। नागपूर कभी प्राचीनकाल में विदर्भ राज्य का प्रसिद्ध नगर कहलाता था। वर्तमान में नागपूर शहर भारत के महाराष्ट्र राज्य की उपराजधानी है।

नागपूर का इतिहास व जानकारी | Information about Nagpur in Hindi
नागपूर का इतिहास व जानकारी ( Information about Nagpur in Hindi)

नागपूर को संतरे का शहर भी कहा जाता है। पर्यटन की दृष्टि से यह शहर महाराष्ट्र का प्रसिद्ध शहर माना जाता है। इस शहर में स्थित मंदिर, इतिहासिक इमारतें और झील देश के कोने-कोने से पर्यटक को अपनी तरफ खिचता है।

इतिहास के अनुसार नागपूर की स्थापना बख्त बुलंद शाह ने सन 1705 के आस-पास की थी। नागपूर में सभी धर्मों के लोग सोहार्दपूर्ण रूप से रहते हैं।

यहाँ पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संध (RSS) का मुख्यालय स्थित है। नागपूर में मार्बत (marbat festival ) फेस्टिवल्स एक परंपरागत त्योहार है जिसे यहाँ के लोग बहुत ही धूम-धाम से मनाते हैं। शहर में हर वर्ष नबम्बर में कालिदास फेस्टिवल्स मनाया जाता है।

मुंबई, पुणे के बाद यह महाराष्ट्र का तीसरा सबसे प्रसिद्ध और बड़ा शहर है। इस लेख में नागपूर का इतिहास, नागपूर को संतरे का शहर क्यों कहते है, भारत का ऑरेंज सिटी का नाम नागपूर क्यों पड़ा इन सब बातों का उत्तर जानेंगे।

नागपूर का इतिहास व संक्षिप्त जानकारी – Information about Nagpur in Hindi

पूरा नाम नागपूर
मुख्यालय नागपुर
नागपूर का क्षेत्रफल 3,821 वर्ग मील
नागपूर की जनसंख्या (2011 के अनुसार )4,653,171
सरकारी वेबसाईट http://nagpur.nic.in/
प्रमुख रेलवे स्टेशन नागपूर

नागपूर का इतिहास – Nagpur ka itihas

भारत के इस सुंदर शहर नागपूर का इतिहास पुराना है। इतिहासकारों के अनुसार नागपूर शहर की स्थापना 18 वीं शताब्दी में गोंड वंश के राजा द्वारा की गई थी। प्राचीन समय में नागपूर विदर्भ राज्य का अंग था।

कहते हैं की नागपूर की स्थापना 1703 में देवगढ़(छिंदवाड़ा ) के राजा ने की। जब भारत में अंग्रेजों आए उस समय यहाँ मराठा साम्राज्य के अंतर्गत रधु जी भोसले का राज्य था। कहते हैं की नागपुर के इतिहास में सबसे बड़ा मोड़ तब आया,

जब 1853 ईस्वी में राघोजी तृतीय के निधन के बाद नागपुर रियासत पर अंग्रेजो का आधिपत्य हो गया। तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी ने नागपूर को जबरन अंग्रेजी रियासत में मिला लिया।

इसे 1861 ईस्वी में मध्य प्रान्त का हिस्सा बना दिया गया। राज्य की सारी संपत्ति को नीलम कर दिया गया। भोसले राजा के द्वारा निर्मित भवन और किले देखे जा सकते हैं।

नागपूर का आधुनिक इतिहास

अंग्रेजों के समय यह मध्य प्रांत का हिस्सा था। बाद में इसे बरार का हिस्सा बना दिया था। 26 जनवरी 1947 को जब भारत आजाद हुआ तब यह मध्यप्रदेश राज्य की राजधनी बनी। उसके बाद यह बाम्बे राज्य का हिस्सा।

60 के दशक में जब भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन हुआ। तब नागपूर में मराठी भाषी की बहुलता के कारण 1960 में यह महाराष्ट्र का अभिन्न अंग बना।

नागपूर शहर के नाम के पीछे का इतिहास

कहा जाता है की यहाँ पर नाग सांप बहुत ही अधिक संख्या में पाया जाता था। इस कारण से ही इस शहर का नाम नागपूर रखा गया। दूसरी मान्यता यह भी है की नागपूर का नाम इस शहर में बहने वाली प्राचीन नाग नदी के कारण पड़ा।

इस शहर के बीचों बीच अंग्रेजों के द्वारा निर्मित एक बड़ा से पिलर है जो zero mile के नाम से जाना जाता है।

नागपूर का धार्मिक इतिहास

नागपूर धार्मिक दृष्टिकोण से भी भारत का सबसे महत्वपूर्ण शहर है। यहाँ बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को सामूहिक रूप से बौद्धधर्म को अपनाया था। यह स्थल नागपुर में दीक्षाभूमि के नाम से जाना जाता है।

नागपुर में जैन समुदाय के लोग बहुत अच्छी संख्या में रहते हैं। इस शहर में दर्जनों जैन मंदिर हैं जिसमें सेंगन जैन मंदिर लाडपुरा, किराना ओली जैन मंदिर, परवरपुरा जैन मंदिर और जूना ओली जैन मंदिर आदि प्रसिद्ध हैं।

नागपुर शहर से कुछ किमी दूरी पर एक पहाड़ी पर रामटेक नामक स्थल अवस्थित है। इस सुरम्य हिंदू समुदाय के धार्मिक स्थल को रामटेक कहा जाता है क्योंकि यहाँ भगवान श्री राम और माता सीता के पवित्र चरणों का स्पर्श हुआ था।

इसके अलावा नागपुर में श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर भगवान का प्रसिद्ध मंदिर भी स्थित है। इसके अलावा यहाँ कई प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर हैं। नागपुर के सबसे प्रसिद्ध मंदिर में टेकड़ी गणेश मंदिर है जिसके बारें में मान्यता है की यह स्वयंभू मंदिरों में से एक है।

भारत का ऑरेंज सिटी नागपूर

नागपुर अपने संतरे के लिए भी पूरे भारत में प्रसिद्ध है। यहाँ उपजने वाले संतरे में एक विशेष प्रकार का स्वाद व गुण होता है जो इस एक अलग पहचान दिलाती है। इन संतरों से कई तरह के पेय पदार्थ तैयार कर देश विदेश भेजे जाते हैं।

यही कारण है की नागपूर भारत का ऑरेंज सिटी के नाम से प्रसिद्ध है। नागपूर के आस-पास संतरे की भरपूर पैदावार होती है। यहाँ के उत्पादित नारंगी देश के कोने-कोने तक निर्यात किया जाता है।

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नागपूर के बारें में रोचक बातें – Interesting fact about Nagpur in Hindi

इस इतिहासिक शहर की स्थापना 18 वीं शताब्दी में गोंड राजा बख्त बुलंद ने की थी। नागपूर में हमारे भारत के संबिधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने हजारों लोगों के साथ बौद्ध धर्म को अपनाया था।

यहाँ की इतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता, झीलों और हरियाली मन को आनंदित करती है। यह शहर फूड लवर्स के लिए बेहद ही खास है। यहां के सुंदर संतरों के बगान में सैर का मजा लिया जा सकता है।

इसी शहर में प्रसिद्ध हिन्दू संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मुख्यालय स्थित है।

इस शहर के पास सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन नागपुर जंक्शन है। जहाँ देश के कोने कोने के लिए ट्रेनें मिलती हैं। साथ नैशनल हाई वे 6 और 7 इस शहर को पूरे देश से जोड़ती है।

नागपुर में हर वर्ष जनवरी के महीने में ऑरेंज फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। क्योंकि यह महिना संतरे की पैदावार का मौसम होता है। साथ ही यहाँ अक्टूबर के महीने में कालिदास उत्सव का भी आयोजन किया जाता है।

अंग्रेजों के समय में नागपुर मध्य भारत की एक रियासत कहलाता था। जो पेशवा बाजीराव प्रथम के समय रघुजी भोसले की राजधानी हुआ करती थी। बाद में अंग्रेजों ने जबरन अपने अधीन कर लिया। वर्तमान में भी इस शहर में भोसले वंश के समय का किला व दुर्ग मौजूद है।

नागपुर में घूमने की जगह

समुन्द्र तल से करीव 300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नागपूर की प्राकृतिक सुंदरता भी रमणीय है। यहाँ के जलवायु और हरियाली मन को मोह लेती है।

दीक्षाभूमि

नागपुर के पश्चिम भाग में दीक्षाभूमि नामक स्थल है। इस स्थल पर सांची के स्तूपनुमा एक इमारत बना हुआ है। जहाँ 5000 से ज्यादा बौद्ध भिक्षु की ठहरने की व्यवस्था है।

इस स्थान का संबंध भारत के संबिधान के निर्माता बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर से जोड़ कर देखा जाता है। यहीं पर बाबा साहब ने 14 अक्टूबर 1956 को हजारों दलितों के साथ बौद्ध धर्म को अपनाया।

नागरधन

नागपूर सिटी से थोड़ी दूरी पर नागरधन नामक के प्रागैतिहासिक नगर है। इस नगर का संस्थापक राजा नंदवर्धन को माना जाता है। इस स्थान पर भोंसलों द्वारा निर्मित एक पुराना भी किला है।

यहाँ के सेमीनरी पहाड़ी पर स्थित वलजी मंदिर भी देखने योग्य है। नागपूर में इस मंदिर के अलाबा श्री वेंकटेश मंदिर भी प्रसिद्ध है।

सीताबुल्डी फोर्ट (sitabuldi fort)

यह एक इतिहासिक स्थल है। इसका निर्माण मराठा-अंगरजो के युद्ध में शहीद हुए जवानों की याद में किया गया है। नागपूर शहर में कई सौ साल पुराना गुबलीगढ़ किला को भी देखा जा सकता है।

इसके अलाबा नागपूर के अन्य प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों में नागपूर के टेकड़ी विनायक मंदिर, रामटेक मंदिर , अमाबजारी झील, कस्तूरचंद पार्क और चिड़ियाघर भी देखने लायक जगह है।

नागपूर के लोग नवरात्रि, दिवाली, होली, गणपती महोत्सव, मुहर्रम और क्रिसमस बड़े ही हर्ष के साथ मनाते हैं। नागपूर रेलमार्ग, वायुमार्ग और सड़क मार्ग से देश के सभी भागों से जुड़ा हुआ है।

जानने योग्य बातें (FAQ)

नागपूर का पुराना नाम क्या है?

कहते हैं की नागपूर को पहले नारंगपुर के नाम से जाना जाता है। जब गोंड राजा ने नागपूर को नाग नदी के तट पर विकसित किया तब यह नागपूर के नाम से जाना गया।

नागपूर क्यों प्रसिद्ध है? (what is Nagpur famous for)

नारंगी की पैदावार अधिक होने के कारण नागपूर ऑरेंज सिटी का नाम से प्रसिद्ध है। साथ ही यह इतिहासिक किला, झीलों और मंदिरों के लिए भी काफी प्रसिद्ध है।

नागपूर का राजा कौन था?

नागपूर की स्थापना गोंड वंश के राजा बख्त बुलंद शाह ने की थी। इसे नागपूर का संस्थापक कहा जा सकता है।

नागपूर का नाम नागपूर कैसे पड़ा ?

कहते हैं की इसकी स्थापना नाग नदी के तट पर होने के कारण ही इसका नाम नागपूर पड़ा। दूसरी कवितंति के अनुसार यहाँ नाग सांप अधिक पाए जाने के करना ही संभवतः इसका नाम नागपूर पड़ा।

नागपुर किसकी राजधानी है ?

इस शहर की नीव गोंड राजा ने की थी। तत्पश्चात यह क्षेत्र राजा भोसले और मराठा साम्राज्य में सम्मिलित हुआ। मराठा के बाद यहाँ पर अंग्रेजों के शासनकल में मध्य प्रान्त की राजधानी बनी। भारत के आजादी के बाद यह मध्य प्रदेश राज्य की राजधानी बनी। लेकिन बाद में भाषा के आधार पर राज्यों के गठन के परिणामस्वरूप यह महाराष्ट्र का उपराजधानी बना।

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नागपुर – विकिपीडिया

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