मुंगेर का इतिहास और जिले की जानकारी | Information about Munger in Hindi

मुंगेर का इतिहास और जिले की जानकारी | Information about Munger in Hindi

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मुंगेर का इतिहास और जिले की जानकारी – Information about Munger in Hindi

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मुंगेर का नाम सिर्फ बिहार का ही नहीं बल्कि भारत के एतिहासिक शहर है। पतित पावन गंगा नदी के दक्षिणी तट पर वसा मुंगेर अपने अंदर कई इतिहासिक और धार्मिक विरासत अपने अंदर समेटे हुए है। मुंगेर का इतिहास अति प्राचीन माना जाता है।

त्रेता युग और द्वापर युग में भी मुंगेर का वर्णन मिलता है। महाभारत काल में भी मुंगेर का आस्तित्व रहा है। प्राचीनकाल से मुंगेर अंगदेश का प्रमुख नगर था। मुंगेर को जहाँ माता सीता से जोड़कर देखा जाता है।

मुंगेर का इतिहास और जिले की जानकारी | Information about Munger in Hindi
मुंगेर का इतिहास और जिले की जानकारी | Information about Munger in Hindi

वहीं मुंगेर का संबंध महाभारत के अंगराज कर्ण से भी माना जाता है। कहते हैं की मुंगेर के सीता कुंड में माता सीता ने अग्नि परीक्षा के बाद स्नान किया था। आज यह स्थल हिन्दू समुदाय के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है।

मुंगेर को मुदगल ऋषि का तपो स्थली भी माना जाता है। मीर कासिम से जुड़ा है मुंगेर किला का इतिहास, जब अंग्रेजों ने बंगाल पर चढ़ाई की तब बंगाल के अंतिम नबाब मीर कासिम ने मुंगेर में किला बनाकर यहीं अपनी राजधानी बनाई।

इसके साथ ही बिहार का मुंगेर योग के लिए भी दुनियाँ भर में प्रसिद्ध रहा है। आईये इस लेख में मुंगेर के इतिहास के बारें में विस्तार से जानने की कोसिस करते हैं।

मुंगेर के बारे में जानकारी

मुंगेर का क्षेत्रफल 1419.7 वर्ग किलो मीटर
मुंगेर की जनसंख्या13,67,765
मुंगेर में प्रखंड की संख्या 09
जिले की साक्षरता दर 76.87%
जिले में कुल गाँव 923
जिले की आधिकारिक वेबसाईट https://munger.nic.in/
मुंगेर का पुराना नाममुद्रलपुरी, मॉड-गिरि, मोदागिरि, मुद्रलगिरी आदि

मुंगेर का गौरवशाली इतिहास – Munger Ka Itihas In Hindi

मुंगेर का प्राचीन इतिहास से पता चलता है की इसका अस्तित्व भगवान राम और श्री कृष्ण के समय में भी था। प्राचीन काल में मुंगेर को मुद्रलपुरी के नाम से प्रसिद्ध था। कलांतर में यह मुद्रलगिरी से नाम से जाना गया और वर्तमान में यह मुंगेर के नाम से जाना जाता है।

गंगा नदी के पावन तट पर स्थित मुंगेर आस्था के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं। यहाँ के प्रमुख गंगा घाट जिसे कष्टहरणी घाट से नाम से पुकारा जाता है। इस घाट के बगल में गंगा के घारा के मध्य सीता चरण मंदिर स्थित है।  

मध्यकाल में मुंगेर का इतिहास

मुंगेर का जिक्र ह्यूयन सांग ने अपने यात्रा वृतांत में भी किया है। कहा जाता है की मुंगेर की स्थापना का श्रेय गुप्त बंश के राज्याओं को है। कलांतर में यह स्थल कभी बख्तियार खिलजी के अधिकार में भी रहा। यहाँ पर पुराने स्मारक और स्थलों को देखा जा सकता है।

आगे चलकर मुंगेर को बंगाल के अंतिम नबाब मीर कासिम ने अपनी राजधानी बनाई। मुंगेर में गंगा नदी के तट पर बंगाल के अंतिम नबाब मीर कासिम के द्वारा बनवाया गया किला स्थित है।

मुंगेर का आधुनिक इतिहास

कहा जाता है की अंग्रेजों के शासन काल मने 1812 के आसपास मुंगेर एक पृथक प्रशासनिक केंद्र बना। आजादी के बाद इसी शहर में मुंगेर जिला मुख्यालय भी स्थित है। पहले मुंगेर लक्खी सराय , खगरिया, बेगूसराय तक फैला था।

लेकिन बाद में यह मुंगेर से अलग जिला बन गया। मुंगेर आजादी के बाद से दिन-दूनी प्रगति के पथ पर अग्रसर है। यहाँ के जमालपुर में भारत के प्रसिद्ध रेल कारखाना हैं। आज मुंगेर से खगरिया के बीच गंगा नदी पर रेल पूल का निर्माण होने से मुंगेर का सीधा संबंध उतरी बिहार से हो गया है।

मुंगेर के किले का इतिहास

मुंगेर किला का इतिहास भी पुराना है। यह किला बिहार का ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। यह किला मीरकासिम का प्रसिद्ध किला के रूप में जाना जाता है। इस किले का निर्माण बंगाल के अंतिम नवाब मीर कासिम ने किया था।

कहते हैं की सन 1934 के अति विनाशकारी भूकम्प से यह किला ध्वस्त हो गया। लेकिन इस किले के अवशेष अभी भी देखे जा सकते हैं। चार द्वार वाला यह किला वास्तुकला की दृष्टि से बहुत ही सुंदर है।

हिन्दू और बौद्ध शैली में निर्मित इस किले के प्रमुख दरवाजा लाल दरवाजा के नाम से जाना जाता है। इस कीले में निर्मित सुरंग भी पर्यटक को बेहद आकर्षित करता है। कहते हैं की इस सुरंग का दूसरा रास्ता गंगा की तरफ खुलता है।

कहा जाता है की इसी सुरंग के रास्ते मीर कासिम ने अंग्रेजों से युद्ध के दौरन अपनी जान बचाई थी। यह सुरंग कितना लंबा है, कहाँ तक जाता है यह बात आज भी रहस्य बना हुआ है।

मुंगेर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल

जैसा की हम जानते हैं की मुंगेर भारत का एक प्रसिद्ध शहर है। जो अपने अंदर कई समृद्ध इतिहासिक और धार्मिक विरासत संजोये हुए है। आईये मुंगेर के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल के बारें में जानते हैं।

सीता कुंड

मुंगेर के सीता कुंड का संबंध माता सीता से जोड़ कर देखा जाता है। मुंगेर के इसी कुंड में माता सीता ने अग्नि परीक्षा के पश्चात स्नान किया था। इस कारण से हिन्दू समुदाय के लिए यह स्थल बड़ा ही पुण्य दायक समझा जाता है।

ऋषि कुंड

इस कुंड का अपना पौराणिक महत्व है। ऋषि कुंड का नाम प्रसिद्ध शृंग ऋषि के नाम पर रखा गया है। हर तीन साल बाद मलमास के अवसर पर राजगीर की तरह मुंगेर के ऋषि कुंड में अपार भीड़ जमा होती है। कहते हैं की इस अवसर पर ऋषि कुंड में स्नान से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

बिहार स्कूल ऑफ योगा

मुंगेर के गंगा नदी के किनारे स्थित बिहार स्कूल ऑफ योगा सैकड़ों वर्ष पुराना माना जाता है। जिसकी शाखा पूरे भारत में फैली हुई है। इस योग केंद्र पर देश विदेश से पर्यटक योग सीखने आते हैं। मुंगेर के इस योग स्कूल की गिनती भारत के सबसे पुराने योग स्कूल में की जाती है।

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मुंगेर स्थित प्रसिद्ध योगाश्रम

कष्ट हरणी घाट

ऐसी कविदंती है की इस घाट पर स्नान करने से सभी प्रकार के दुखों की समाप्ति होकर पुण्य की प्राप्ति होती है। इस कारण इस घाट पर किसी विशेष अवसर पर लाखों की संख्या में लोग गंगा स्नान करते हैं।

मुंगेर का किला

मुंगेर किला का निर्माण मीर कासिम ने किया था। यहाँ के दर्शिनीय स्थल में यह किला सबसे महत्वपूर्ण है। भारत के अन्य किलों की तरह ही मुंगेर का यह किला अपने अद्भुत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।

माँ चंडिका दरवार –

गंगा नदी के किनारे स्थित माँ चंडिका दरवार प्रसिद्ध शक्ति पीठों में से एक हैं। कहा जाता है की यहाँ पर माँ का बाईं आँख गिरी थी। हिन्दू समुदाय के लोगों के लिए 52 शक्ति पीठों में से यह स्थल नेत्र कष्ट हरने के लिए प्रसिद्ध माना गया है। इसके अलाबा यहाँ और भी कई दर्शनीय स्थल हैं।

  • मनपत्थर सीता चरण,
  • पीर शाह नफाह मकबरा,
  • गोयनका शिवालय मिर्ची तालाब,
  • श्रीकृष्ण वाटिका,
  • भीमबंध वन्यजीव अभयारण्य

मुंगेर कैसे पहुचे – How to reach Munger

बिहार का इतिहासिक स्थल मुंगेर देश के कोने कोने से सड़क और रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है। वायुमार्ग से भी मुंगेर पहुंचा जा सकता है। इसके निकटतम हवाई अड्डा पटना है। पटना से मुंगेर की दूरी 175 कि.मी. के करीब है। पटना से टैक्सी व बस के द्वारा भी मुंगेर आसानी से पहुंचा जा सकता है।

Munger का पुराना नाम क्या है?

Munger का पुराना नाम मुद्रलपुरी, मॉड-गिरि, मोदागिरि, मुद्रलगिरी था।

मुंगेर जिला से कौन कौन जिला अलग हुआ है?

आजादी के बाद बिहार का मुंगेर एक बहुत बड़ा जिला था। इस जिले का एरिया गंगा का उतरी और दक्षिणी दोनों तरफ फैला। कालांतर में मुंगेर से बेगूसराय, खगड़िया, लक्खीसराय, शेखपुरा और जमुई एक नये जिले के रूप में अलग हुआ।

मुंगेर क्यों प्रसिद्ध है?

मुंगेर भारत के एक ऐतिहासिक और धार्मिक नगर है। इसका संबंध रामायण और महाभारत काल से भी जोड़कर देखा जाता है। आज भी यहाँ कई धार्मिक और इतिहासिक स्थल इस बात का प्रमाण है।

मुंगेर किन-किन चीजों के लिए प्रसिद्ध है?

मुंगेर धार्मिक स्थल और इतिहासिक किले के अलावा बंदूक और सिगरेट फैक्ट्ररी के लिए भी जाना जाता है। यहाँ के धार्मिक स्थल और किले को देखने हजारों पर्यटक रोज आते हैं।

Q. मुंगेर का किला किसने बनवाया?

Ans. कुछ विद्वानों के अनुसार किले का अस्तित्व अति प्राचीन काल से था। लेकिन आधुनिक परिपेक्ष में कहा जाता है इस किले का निर्माण बंगाल के अंतिम नाबाव मीर कासिम से किया था। जिसे उन्होंने अपनी राजधानी बनाया।

Q. मुंगेर किस नदी के किनारे बसा है?

Ans. मुंगेर पतित पावन गंगा नदी के किनारे वसा हुआ है।

Q. मुंगेर कहां है?

Ans. मुंगेर पटना से करीब 175 किलो मीटर दूर भागलपुर का परोसी जिला है।

Q. मुंगेर में कितने प्रखंड है

Ans. मुंगेर में 3 अनुमंडल और 9 प्रखण्ड हैं।

आपको मुंगेर का इतिहास और जिले की जानकारी (Information about Munger in Hindi) जरूर अच्छी लगी होगी, अपने सुझाव से अवगत कराएं।

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बाहरी कड़ियाँ (External links)

मुंगेर, जिले की सरकारी वेबसाईट

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