2000 साल से भी अधिक पुराना है पटना का इतिहास | History Of Patna In Hindi

History Of Patna In Hindiपटना का इतिहास अत्यंत ही गौरवशाली रहा है। पटना पूर्वोत्तर भारत में गंगा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित एक प्राचीन शहर है। वर्तमान में यह बिहार की राजधानी है। पटना प्राचीन काल में पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था। इतिहास से पता चलता है की 2000 साल से भी अधिक पुराना है पटना का इतिहास।

यह शहर अतीत में कभी पाटलिपुत्र, कुसुमपुर, पुष्पपुर, अजीमबाद के नाम से भी जाना गया। कहा जाता है की इसकी स्थापना अजातशत्रु के उत्तराधिकारी ने राजगृह से अपनी राजधानी स्थानतारन के दौरण किया था। पटना भूमि है चन्द्रगुप्त मौर्य, अजातशत्रु, सम्राट अशोक, कौटिल्य, और आर्यभट्ट की।

यह भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद की इन लोगों ने सिर्फ इस नगर को ही नहीं वल्की पूरे भारतवर्ष को गौरान्वित किया। पटना लगभग 2500 साल पहले यह मौर्य बंश की राजधानी थी। जिसका साम्राज्य करीब पूरे भारत में फैला हुआ था।

मौर्य बंश के पतन के बाद यह गुप्त बंश की राजधनी बनी। तत्पश्चात शेरशाह ने पटना पर राज्य किया। फिर मुगल बादशाह का शासन रहा। उसके बाद अंग्रेजों की बारी आई तथा  उन्होंने पटना को अपना व्यपारिक राजधानी बनाया। यहॉं से अफीम चीन भेजा जाता था।

पर्यटन की दृष्टि से पटना का अपना विशेष स्थान है। अतीत काल के गौरवशाली इतिहास के अवशेष आज भी पटना में मौजूद हैं। भारत के स्वतंत्रा की लड़ाई में भी इस शहर का काफी योगदान रहा।

History Of Patna In Hindi - पटना का इतिहास
History Of Patna In Hindi – पटना का इतिहास

पटना के बारे में जानकारी – Information about patna in HIndi

पटना का पुराना नामपाटलिपुत्र, पाटलीग्राम, पुष्पपुर, कुसुमपुर
पटना की स्थापना 490 ईस्वी पूर्व
पटना की जनसंख्या5,838,465 (2011 के जनगणना के अनुसार )
लोकसभा सीट की संख्या 03

पटना का गौरवशाली इतिहास – History Of Patna In Hindi

प्राचीन काल से सांस्कृतिक तौर पर काफी समृद्ध बिहार के पटना की गिनती भारत के पुराने नगर में होती है। पटना का इतिहास 2000 साल से भी पुराना है। प्राचीनकाल से ही इस शहर का गौरवशाली इतिहास रहा है। कहा जाता है की इतना प्राचीन नगर विश्व में बहुत ही कम हैं।

प्राचीन काल मे पटना को पाटलिपुत्र के नाम से प्रसिद्ध था। इतिहासकारों के अनुसार अजातशत्रु के पुत्र उदयिन ने अपनी राजधानी को राजगृह से स्थानांतरित कर पाटलिपुत्र किया था। तीन ओर से नदियों से घिरे होने के कारण यह स्थल लिच्छवि गणराज्य के हमले की दृष्टि से बहुत ही सुरक्षित था।

बड़े में यहाँ हर्यंका, नंद, मौर्य, शुंग, गुप्त और पाल वंशों के शासकों ने अपनी राजधानी बनाकर शासन किया। यह आर्यभट्ट, पाणिनी, चाणक्य, वात्स्यायन और कालिदास सहित कई महान हस्तियों की जन्म व कर्म भूमि रही है।

मौर्य और गुप्त काल के समय पटना भारतीय उपमहाद्वीप की सत्ता, राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध था। मौर्य काल के समय जब सम्राट अशोक ने मगध साम्राज्य का अति विस्तार किया था। गुप्तकाल के समय पटना का नाम काफी प्रसिद्ध रहा।

गुप्त काल को भारतीय इतिहास में स्वर्ण युग के नाम से जाना जाता है। गुप्त वंश के समय में यहाँ यूनान के दूत मेगास्थनीज ने भारत की यात्रा की और चन्द्रगुप्त के दरवार में रहे था। उन्होंने अपनी पुस्तक इंडिका ने पटना का वर्णन किया। है।

प्रसिद्ध चीनी यात्री फाहियान और व्हेनसान ने भी अपनी यात्रा वर्णन में पटना के बारें में विस्तार से लिखा। लेकिन गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद पटना धीरे-धीरे अपना गौरव खोता गया। बाद में मुगलों और फिर शेरशाह का शासन रहा।

शेरशाह ने पटना को फिर से सवारने का काम किया। कलांतर में यहाँ पर अंगरजों का आधिपत्य रहा। अंग्रेजों ने पटना को व्यापार केंद्र के रूप में विकसित किया।

पटना का नाम कैसे पड़ा?

बिहार का यह ऐतिहासिक नगर कई नाम से जाना जाता रहा है। यह नगर कभी पाटलिग्राम, पाटलिपुत्र, पुष्पपुर, कुसुमपुर, अजीमाबाद से जाना जाता था लेकिन वर्तमान में यह पटना के नाम से प्रसिथ है। अजातशत्रु और सम्राट अशोक के समय पटना को पाटलीपुत्र के नाम से जाना जाता था।

मौर्य वंश के शासनकाल में जब यूनानी दार्शनिक मेगस्थनीज, चन्द्रगुप्त मौर्य के दरवार में आए थे। तब उन्होंने इस नगर को पालिबोथरा नाम से संबोधित किया था। चीनीयात्री फाहियान ने भी अपने यात्रा वृतांत में पटना को पालिनफू के नाम से जिक्र किया है।

यदपि कहा यह भी जाता है की भारत के इस प्राचीन नगर का नाम यहाँ स्थित शक्तिपीठ पटन देवी का नाम पर रखा गया है। वैसे प्राचीन नगर को पटना के रूप में शेरशाह सूरी ने फिर से आधुनिक रूप से बसाने का काम किया था। उन्हें ही पाटलिपुत्र का नाम बदलकर पटना रखने का श्रेय दिया जाता है।

पटना का मौजूदा नाम शेरशाह के शासन काल से ही प्रचलित है। कहते हैं की शेरशाह द्वारा इसका नाम ‘पैठना’ रखा गया था। जिसे बाद अंतिम हिंदू सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य द्वारा इसे पटना किया गया। हालांकि औरंगजेब के पोते प्रिंस अजीम-हम-शान को जब पटना का सूबेदार नियुक्त किया गया। तब उन्होंने पटना का नाम बदलकर अज़ीमाबाद किया था।

पटना के नाम के पीछे की कहानी

कुछ विद्वानों के अनुसार पटना का नाम संस्कृत के पत्तन से लिया गया है जिसका मतलब बंदरगाह से है। प्राचीन पटना, सोन और गंगा नदी के संगम पर अवस्थित गुलाब (पाटली के फूल) की खेती के लिए प्रसिद्ध था। इस कारण से इसका नाम पाटलिग्राम पड़ा।

इन गुलाब के फूलों का उपयोग इत्र और दवाई में कर बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता था। इस कारण यह स्थल प्रसिद्ध व्यपारिक केंद्र भी था।

इस नगर के नाम के पीछे एक लोककथाओं भी प्रचलित है। लोककथा के आधार पर राजा पत्रक को पटना का संस्थापक कहा जाता है। कहते हैं की उन्होंने अपनी रानी पाटलि के नाम पर इस नगर का निर्माण किया था। यही कारण है की पटना को प्राचीन समय में पाटलिग्राम या पाटलिपुत्र के नाम से जाना गया। 

पटना का मध्यकालीन इतिहास

पटना का जिक्र अकबर के दरवारी कवि अबुल फजल ने भी अपनी पुस्तक आइने-अकबरी में भी किया है। मुगल काल के दौरान यह नगर कागज, पत्थर, अफीम और शीशे के लिए औद्योगिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध था।  

मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा जब अपने पोते मुहम्मद अजीम को यहाँ का सूबेदार नियुक्त किया तब 1704 में पटना का नाम अजीमाबाद किया गया। अंग्रेजों के समय में पटना से अफीम चीन को निर्यात किया जाता है। सन 1912 में बंगाल के विभाजन के बाद जब अंग्रेजों ने बिहार को बंगाल प्रेसिडेंसी से अलग किया।

तब पटना बिहार का राजधानी कब बना। आजादी की लड़ाई में भी यहाँ के लोगों ने बढ़-चढ़कर सक्रिय रूप से भाग लिया। सन 1921 में आजादी की लड़ाई के दौरन डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने पटना में सदाकत आश्रम की स्थापना की थी। आजादी के बाद डॉ राजेन्द्र प्रसिद्ध देश के प्रथम राष्ट्रपति बने।

कई धर्मों की संगम स्थली रही है पटना

धार्मिक दृष्टिकोण से भी पटना का अपना अहम स्थान रहा है। पटना तथा उसके आसपास कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल मौजूद हैं। यह स्थल हिन्दू, मुस्लिम, बौद्ध, जैन, और सिख समुदाय के लिए बेहद ही खास है।

प्राचीन तीर्थ स्थल वैशाली, राजगीर, नालंदा, बोधगया और पावापुरी, मनेर पटना नगर के आस पास ही स्थित हैं। पटना सिख धर्म के लिए भी काफी महातपूर्ण है। क्योंकि सिखों के दसवें तथा अंतिम गुरु, गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज का जन्म पटना बिहार में ही हुआ था।

पटना स्थित हरमंदिर साहब के दर्शन हेतु लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं। पटना में प्राचीन शक्तिपीठ पाटन देवी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। जिसके नाम पर कहा जाता है की इस नगर का नाम पटना पड़ा। पटना में नवरात्रि के अवसर पर भी छटा देखते बनती है।

पटना जिले का इतिहास

गंगा और सोन नदी के तट पर बसा एतिहासिक नगर पटना बिहार राज्य की राजधानी है। पटना की भौगोलिक स्थिति की बात की जाय इस शहर के उत्तर तरफ गंगा अवस्थित है। पटना जिले का कुल क्षेत्रफल करीब 3202 वर्ग किलोमीटर है।

पटना की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार करीब 58.39 लाख थी। पटना जिले में साक्षरता दर 72.47% है। जिले में सबसे ज्यादा हिन्दू आबादी रहती है। पटना में सबसे अधिक मगही भाषा बोली जाती है। जिले में तीन लोक सभा क्षेत्र हैं।

जिसके अंतर्गत 14 विधानसभा सीटें आती हैं। पर्यटन की दृष्टिकोण से पटना बेहद खास है। पटना में घूमने की कई प्रसिद्ध जगह हैं। 

पटना में घूमने की जगह – places to see in Patna

अगम कुंआ

आगम कुआं जैसा की नाम से ही स्पष्ट है। कहा जाता है की यह कुआं अतल गहराई लिए हुए है। मौर्य वंश के महान शासक सम्राट अशोक के बारें में कहा जाता है की इस कुएं में उन्होंने अपने 100 भाई को कत्ल कर डालवा दिया था।

कुम्हरार पटना

प्राचीन पाटलिपुत्र के अवशेष पटना के कुम्हरार के पास ही खुदाई से प्राप्त हुआ है। यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन है।  

पटना साहिब

पटना साहिब या तख्त श्रीहरमंदिर साहब सिखों के दसवें और अंतिम गुरु, गोविन्द सिंह के जन्म स्थान के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पर गुरु गोविंद सिंह से जुड़ी कई चीजें मौजूद हैं।

गांधी मैदान पटना

पटना शहर के मध्य में स्थित गांधी मैदान पटना की पहचान बन चूंकि है। इतिहासिक गांधी मैदान ने न जाने कितनी जनसभाओं, सम्मेलनों, राजनीतिक रैलियों का गवाह रहा है।

सभ्यता द्वार

प्राचीन पटना के अतीत की याद को तरोताजा करती यह द्वारा पटना के गांधी मैदान के उत्तर में गंगा नदी के तट पर बनाया गया है। बलुआ पत्थर से निर्मित ‘सभ्यता द्वार’ मौर्य-शैली की वास्तुकला का नमूना है। 

पटना का तारामंडल- पटना के इंदिरा गांधी विज्ञान परिसर में स्थित तारामंडल यहाँ के दर्शिनीय स्थल में एक है। पटना का तारामंडल के बारें में कहा जाता है की यह एसिया का सबसे बड़ा तारामंडल है।

पटना का गोलघर

गोलघर का निर्माण अंग्रेजों ने सन 1770 में अकाल से निपटने के उद्देश्य से अनाज भंडारण के लिए किया था। कभी गोलघर पटना की पहचान होती थी। गोलघर पर चढ़कर पूरे पटना का नजारा देखा जा सकता है। लेकिन अव तो गोलघर से भी ऊंचे कई इमारतों का निर्माण हो चुका है। 

शहीद स्मारक

बिहार के पटना में स्थित शहीद स्मारक भारत की आजादी में शहीद हुए वीर सेनानी की याद दिलाती है।  बिहार विधानसभा के ठीक सामने स्थित इस स्मारक में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान शहीद हुए सात शहीदों की प्रतिमाएं हैं। जिन्होंने अपने वतन की आजादी के लिए अपना जान न्योछावर कर दिया।

महाबीर मंदिर पटना

पटना रेलवे जंक्शन के ठीक सामने करीब 100 मीटर की दूरी पर पटना का प्रसिद्ध महावीर मंदिर स्थित है। खास अवसरों पर यहाँ भक्तों की अपार भीड़ जमा होती है।

संजय गांधी जैविक उधान

पटना नगर में स्थित एक मात्र जैविक उधान जहाँ कई तरह के जानवर और पक्षी को देखा जा सकता है।

महात्मा गांधी सेतु

महात्मा गांधी सेतु के बारें में कहा जाता है की यह एसिया का सबसे लंबा सड़क पुल है। पटना का यह पुल गंगा नदी पर बना है जो पटना और हाजीपुर को जोड़ती है। इस सड़क पुल की लंबाई 6 किलोमीटर के करीब है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQ

पटना की स्थापना कब और किसने की?

पटना का प्राचीन काल में पतिलिपुत्र के नाम से जाना जाता है। इसकी स्थापना करीब 490 ईस्वी पूर्व माना जाता है। लेकिन आधुनिक पटना की स्थापना का श्रेय शेरशाह सूरी को दिया जाता है। उन्होंने ही पटना को फिर से बसाने का काम किया था।

बिहार का सबसे पुराना शहर कौन सा है?

बिहार का सबसे पुराना शहर पटना है। इस शहर की स्थानपन 490 ईस्वी पूर्व में गंगा और सोन नदी के संगम के पास हुआ था। इतना पुराना शहर विश्व में बहुत कम हैं।

पटना का सबसे पुराना नाम क्या था?

प्राचीन काल में पटना को कई नाम से जाना गया। पटना का सबसे पुराना नाम पाटलिपुत्र अथवा पटलीग्राम था। बाद में यह पुष्पपुर और कुसुमपुर के नाम से जाना गया।

लोग पटना को कुसुमपुर क्यों कहते थे?

कुसुम का मतलब फूल से होता है। कहते हैं की गंगा और सोन नदी के संगम पर बसे पाटलिपुत्र गुलावों की खेती और व्यापार के लिए प्रसिद्ध था। यहाँ गुलाब की खूब पैदावार होती थी। यही कारण रहा होगा की इसे कुसुमपुर और पुष्पपुर के भी कहा जाता है।

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