गोवा का इतिहास और संस्कृति – History of Goa in Hindi

गोवा का इतिहास और संस्कृति की जानकारी History of Goa in Hindi,

भारतीय प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर स्थित गोवा का इतिहास बड़ा ही रोचक है। एतिहासिक तथ्यों के आधार पर गोवा का इतिहास ईसा-पूर्व तीसरी शताब्दी की मानी जाती है। गोवा मनोरम झीलें, झरने, नदियाँ और अनुपम सागर-तटों का प्रदेश है।

भारत के पश्चिमी समुन्द्र तट बसा गोवा महाराष्ट्र और कर्नाटक से घिरा हुआ है। भारत का गोवा प्रदेश क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से सिक्किम के बाद देश का सबसे छोटा राज्य है। पर्यटन गोवा का मुख्य उधोग है। गोवा की गिनती भारत के समृद्ध राज्य में की जाती है।

गोवा की झीलें, प्रपात, सर्वोत्तम सागर-तट इसकी सुषमा को मंडित कर देती है। खूबसूरत सागर-तट के साथ-साथ प्रकृति ने इसे सुंदर पेड़ों, मनमोहक रंग-बिरंगे फूलों से भी सजाया है। गोवा का मनोरम सागर-तट(सी विच), झीलों, बाग-बगीचों के आकर्षण से मुग्ध होकर देशी-विदेशी सैलानि खिचे चले आते हैं।

गोवा का वर्णन त्रेता युग में भी मिलता है। गोवा पर मौर्य से लेकर कई राजवंशों से शासन किया। इस लेख में हम जानेंगे की गोवा का इतिहास क्या है। गोवा को आजादी के बाद भारत का हिस्सा बनने में 15 साल क्यों और कैसे लगे। क्या अंग्रेजों की तरह पूर्तगलियों ने गोवा को मुक्त कर दिया या भारत सरकार को करबाई करनी पड़ी।

गोवा का इतिहास और संस्कृति - HISTORY OF GOA IN HINDI
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जानिये गोवा का इतिहास विस्तारपूर्वक – History of Goa in Hindi

सुविधा के दृष्टिकोण से यहाँ गोवा के इतिहास को कई काल खंडों में बाँट कर प्रस्तुत किया गया है ताकि समझने में आसानी हो।

गोवा का पौराणिक इतिहास

गोवा करीव 3,813 वर्ग कि.मी. के क्षेत्र में फैला हुआ एक रमणीक स्थल है। गोवा का प्राचीन नाम गोमंतक भी है। भारत के पश्चिमी तट पर स्थित गोवा का इतिहास अति प्राचीन मानी गयी है। कहते हैं की एक बार भगवान् परशुराम ने सह्याद्रि के ऊँचे शिखर पर खड़े होकर समुद्र की ओर बाण चलाया था।

उन्होंने समुद्र को वहाँ तक दूर हट जाने का आदेश दिया। उनके द्वारा चलाया गया तीर जिस स्थान पर गिरा, वहाँ से समुन्द्र हट गया। वह पूरा स्थान कोंकण कहलाया और इसके दक्षिण का भाग को गोपपुरी कहा गया। यहीं गोपपुरी कलांतर में गोवा के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

मध्यकाल में गोवा का इतिहास

गोवा का इतिहास बताता है की भूतकाल में गोवा पर कई शासकों का आधिपत्य रहा। ईसा-पूर्व पहली शताब्‍दी में गोवा सातवाहन साम्राज्‍य का एक हिस्सा था। इतिहासकारों के अनुसार गोवा पर चन्द्रगुप्त मौर्य ने भी शासन किया और यह क्षेत्र मगध साम्राज्य के अधीन था।

उसके बाद मगध का शासन सम्राट अशोक के हाथ में आया और उस बक्त भी गोवा मगध का हिस्सा था। अशोक की मृत्यु के बाद जब मौर्य साम्राज्य का पतन हुआ। तब गोवा पर अन्य वंश का शासन स्थापित हुआ। यहाँ पर 580 से 750 ईस्वी तक चालुक्य राजाओं ने शासन किया।

उसके बाद 11 वीं शताब्दी में कदम्ब राजाओं का गोवा पर राज रहा। इस तरह गोवा का इतिहास परिवर्तन की दौर से गुजरता रहा। फिर सन 1312 ईस्वी में गोवा मुस्लिम शासकों के अधीन हो गया। सन 1370 ईस्वी में यह हरीहर प्रथम के अधीन हुआ।

सन 1470 ईस्वी में गोवा पर बहमनी सुल्तानों का राज्य कायम हो गया। उसके बाद गोवा पर आदिलशाह ने कब्जा कर लिया। आदिलशाह के बाद गोवा पर पूर्तगलियों ने कब्जा किया। 

गोवा पर पुर्तगाली का कब्जा

गोवा प्रदेश आकर में भले ही छोटा हो लेकिन गोवा का इतिहास प्राचीन और रोचक पुर्ण रहा है। आदिलशाह के बाद सन 1510 ईस्वी तक आते-आते गोवा पर पूर्तगलियों का अधिकार हो गया। काफी लंबे समय तक शासन कर पूर्तगलियों ने गोवा के इतिहास को एकदम बदल कर रख दिया।

पूर्तगलियों के समय से यह स्थल प्रसिद्ध व्यापारिक केंद्र में तब्दील हो गया। अपने मशाले के व्यापार को नियंत्रण में रखने के लिए पूर्तगलियों के लिए प्राकृतिक बंदरगाह गोवा एक आदर्श जगह साबित हुआ। गोवा पर पुर्तगालियों ने लगभग 450 वर्षों तक राज किया।

कहा जाता है की पुर्तगाली शासन के दौरान गोवा की तुलना लिस्बन से की जाती थी। उस दौर में समस्त भारत पर अंग्रेजों का शासन था लेकिन गोवा पर पुर्तगाली का ही कब्जा रहा। पूर्तगलियों के द्वारा ईसाई धर्म प्रचार हुआ। कई अद्भुत चर्च का निर्माण हुआ।

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सन 1947 के बाद का गोवा

क्या आप जानते हैं गोवा को भारत का हिस्सा बनने में 16 साल क्यों लग गए। आज हम आजादी के बाद वाली गोवा का इतिहास समझने और जानने की कोशिश करेंगे। जिससे इन प्रश्नों का उत्तर मिल सके।

हमारे अनेकों स्वतंत्रता सेनानी के बलिदान और अनवरत प्रयास से 15 अगस्त 1947 को अंग्रेज भारत छोड़कर चले गये। लेकिन स्वतंत्रा प्राप्ति के बाद भी गोवा पर पूर्तगलियों का शासन बना रहा।

अंग्रेज चले गये लेकिन पूर्तगलियों ने गोवा को अपना उपनिवेश बनाये रखा वे खाली करने के पक्ष में नहीं थे। पुर्तगाली द्वारा भारत सरकार की बार-बार बातचीत की मांग को ठुकराया जा रहा था।

जब भारतीय फौज ने गोवा पर की करबाई

लेकिन सन 1961 ईस्वी में, तत्कालीन प्रधान मंत्री, नेहरू जी ने गोवा पर सशस्त्र बलों द्वारा करबाई का आदेश दिया। भारतीय सेना ने `ऑपरेशन विजय` के तहद गोवा पर करबाई शुरू कर दी। लगातार 36 घंटे तक गोवा पर कारवाई की गयी।

इसके कारवाई से घबराकर पुर्तगाली सेना ने बिना किसी शर्त के भारतीय सेना के सामने घुटने टेक दिये। इस प्रकार भारतीय फौज ने करबाई करते हुए 19 दिसंबर को गोवा को अपने अधिकार में कर लिया। तभी से 19 दिसंबर को हर साल गोवा मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है।

गोवा का आधुनिक इतिहास के बारे में

इस प्रकार भारत के आजादी के 16 वर्ष बाद गोवा, पुर्तगाली के शासन से मुक्त हुआ। अंततः इसे भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। 12 अगस्त 1987 में गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान करने के लिए सदन में विधेयक पास हुआ।

इस प्रकार गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ और पणजी को गोवा की राजधानी बनायी गयी। गोवा के पृथक राज्य के रूप में गठन के बाद से यह लगातार प्रगति कर रहा है। विशेष कर गोवा पर्यटन के क्षेत्र में बहुत ही तेजी से विकाश किया है।

गोवा का अनुपम सागर तट देशी और विदेशी सैलानियों का आकर्षण का केंद्र बन गया है। लाखों पर्यटक प्रतिवर्ष गोवा की सैर करने जाते हैं। नवंबर से लेकर मार्च तक वहाँ पर्यटक की भीड़ लगी रहती है।

गोवा की संस्कृति

अतल गहराई लिए अरब सागर के तट पर बसा गोवा अपने अनूठी संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पर पूर्तगलियों और फ़्रांसीसियों ने करीव 450 बर्ष तक राज किया है।

इस कारण गोवा की संस्कृति में ईसाई और हिन्दू धर्म सम्मिलित प्रभाव देखने को मिलता है। यहाँ के लोग पश्चिमी वेशभूसा में अधिक नजर आते हैं। दोस्तों गोवा का इतिहास और संस्कृति (HISTORY OF GOA IN HINDI )के संबंध में यह जानकारी आपको कैसी लगी। अपने सुझाव द्वारा जरूर अवगत करायें।

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