मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है, पढ़ें मकर संक्रांति पर 10 लाइन हिंदी में

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मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है, क्या है इसका इतिहास और पौराणिक महत्व – Makar Sankranti kyu Manaya jata hai

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मकर संक्रांति पर 10 लाइन हिंदी में

मकर संक्रांति नववर्ष के आगमन के बाद भारत में मनाया जाने वाला पहला त्योहार है। मकर संक्रांति का पर्व लौकिक के साथ-साथ शास्त्रीय भी है। इसी कारण जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तब मकर संक्रांति का पावन उत्सव मनाया जाता है।  2023 में मकर संक्रांति का उत्सव 15 जनवरी को मनाया जा रहा है।

यह एक तरफ जहाँ ऋषि पर्व है वहीं दूसरी तरफ यह कृषि पर्व भी है। इसमें कोई संशय नहीं है कि हमारा देश भारत त्योहारों का देश है। आस्था के महापर्व छठ की तरह ही मकर संक्राति का त्योहार भी भगवान सूर्य को समर्पित है।

देश के प्रमुख त्योहार में इसकी गिनती होती है। भारत के लोग ऋतुओं के  परिवर्तन  को बहुत ही उमंग और आस्था साथ मनाते हैं। इस दिन से, देश भर में सर्द हवाओं के बाद मौसम गर्म और सुखद होना शुरू हो जाता है।

पराणिक कथाओं और कहानी से मकर संक्रांति के पौराणिक इतिहास और महत्व का पता चलता है। मकर संक्रांति को समुंद मंथन के साथ ही जोड़कर देखा जाता है।

इन्हें भी पढ़ें – अपने दोस्तों को मकर संक्रांति 2023 का शानदार संदेश भेजें

जानिये मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है

क्योंकि इसी दिन देवताओं द्वारा दानव पर विजय प्राप्त हुआ और अमृत पाने में सफल हुए थे। चाहे धरती पर गंगा के अवतरण की बात हो अथवा गंगासागर में गंगा की मिलन की, यह सारी घटना मकर संक्रांति के दिन ही तो हुआ था।

मकर संक्रांति क्यों मनाया जाता है, क्या है मकर संक्रांति का महत्व इस बात का अंदाजा इन बातों से लगाया जा सकता है की वाणों की शैया पर महीनों से पड़े भीष्म पितामह ने अपने प्राण मकर संक्रांति के दिन ही त्यागा था।

Video – Makar Sankranti kyu Manaya jata hai

इसी दिन से कुम्भ मेले की भी शुरुआत होती है। इस प्रकार हम मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं इस लेख में विस्तार से वर्णन करने की कोशिस की गई है। कहते है कि इस पावन भूमि पर देवता भी जन्म लेने के लिए तरसते हैं।

इस दिन पवित्र नदियां में स्नान, दान और पितृ तर्पण का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति के दिन गंगासागर, प्रयागराज में लाखों लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं।

मकर संक्रांति ऐसा ही एक उत्सव है जो अंग्रेजी कैलंडर के अनुसार साल का पहला उत्सव माना जाता है। इस त्योहार को सम्पूर्ण भारत में अलग-अलग नामों और तरीके से मनाया जाता है।

आखिर क्यों मनाते हैं मकर संक्रांति 10 लाइन हिंदी में

इस त्योहार को कुछ खास पकवानों से भी जोड़ कर देखा जाता है। मकर संक्रांति को तिल व गुड़ की मिठाई बनाकर खाई जाती है। इस अवसर पर तिल और गुड़ के लड्डू, गजक, तिलकुट इत्यादि खूब बनाये और खाये जाते हैं।

कुछ राज्य में इस अवसर पर खिचड़ी व चुरा दही खाने का चलन है। मकर संक्रांति हर वर्ष 14 तारीख को ही मनाया जाता है। लेकिन काल गणना के अनुसार यह किसी वर्ष 15 तारीख को भी मनाया जा सकता है।

इस दिन पतंग उड़ाने का भी प्रचलन है। इस अवसर पर भारत के गुजरात राज्य में अंतर्राष्ट्रीय पतंग उत्सव का आयोजन किया जाता है। जिसमें दुनियाँ भर के पतंगवाज भाग लेते हैं।

इस लेख में मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है क्या है मकर संक्रांति का इतिहास और पौराणिक महत्व, विस्तार से जानते हैं। हमे आशा है मकर संक्रांति पर लिखा गया यह लेख आपको जरूर पसंद आएगा। तो चलिए सबसे पहले हम मकर संक्रांति का अर्थ समझते हैं।

हम मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं जानिये इसका अर्थ

मकर संक्रांति का क्या अर्थ है सूर्य का मकर राशि में संक्रमण यानि  प्रवेश करना। ज्योतिषीय रूप से, मकर का अर्थ ‘मकर’ राशि और ‘संक्रांति ‘ का आशय परिवर्तन से है।

सूर्य का एक राशि से दूसरे राशि में प्रवेश करने की क्रिया ही संक्रांति कहलाता है। बैज्ञानिक भाषा में इसे ‘विंटर सोलस्टाइस‘ (Winter Solstice) के नाम से भी जाना जाता हैं।

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है
मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है

यह दिन हिंदू धर्म में किसी मंगल कार्य के शुरुआत के लिए सबसे शुभ दिन माना गया है। जब सूर्य अपनी वार्षिक घूर्णन गति के दौरान धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में संक्रमण करती है।

तब इसे हिन्दू पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति कहते हैं। इसीलिए इस संक्रांति को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। संक्रांति का चक्र हर महीने जनवरी से दिसम्बर तक चलते रहता है।

साल भर में सूर्य की कुल 12 संक्रांतियों में सिर्फ चार संक्रांति मेष, तुला, कर्क और मकर राशी कि संक्रांति ही सबसे महत्वपूर्ण मानी गई है। 

मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही क्यों मनाई जाती है

भारत में हर त्यौहार कि कुछ खास पहचान है। मकर संक्रांति भी उन खास त्योहारों में आता है जिनकी अपनी अलग पहचान है। यह भारत का एक मात्र त्यौहार है जिसकी तिथि हर वर्ष पहले से निर्धारित होती है। 

क्योंकि यह त्योहार पूरी तरह से सूर्य की घूर्णन गति पर निर्भर करती है तथा उसी के अनुसार इसकी तिथि निर्धारित होती है। प्रतिवर्ष सूर्य का मकर राशि में प्रवेश कुछ मिनट के देरी से होता है।

इसलिए इसका समय थोड़ा थोड़ा आगे बढ़ता रहता है। फलतः एक निश्चित समय अंतराल के बाद इस त्योहार की तिथि एक दिन आगे बढ़ जाती है। इसीलिए यह किसी-किसी वर्ष 14 जनवरी के बदले 15 जनबरी को मनाया जाता है।

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है वैज्ञानिक कारण

सूर्य 6 माह दक्षिणायन और 6 माह उत्तरायण में रहता है। सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश के साथ ही धीरे-धीरे सर्दी कम होने लगती है। इस दिन से रातें छोटी व दिन तिल-तिल कर बड़े होने लगते हैं जिस कारण मौसम में बदलाव शुरू हो जाता है।

इस दिन से वातबरण के तापमान में धीरे धीरे बढ़ोतरी शुरू हो जाती है। प्राणियों में नई ऊर्जा का संचार शुरू हो जाता है। इस दौरान लोग पवित्र नदियों में स्नान के साथ ढोल नगारे, गायन, नृत्य,और पतंग बाजी  जैसे विभिन्न क्रिया कलापों के द्वारा खूब आनंद लेते हैं।

मकर संक्रांति का अध्यात्मिक महत्व 10 लाइन हिंदी में

मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व तो है ही लेकिन इसका आध्यात्मिक महत्व भी कम नहीं है। इसका अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है, की इस दिन से ही देवताओं की दिन की शुरुआत मानी जाती है।

तभी तो मकर संक्रांति का दिन किसी मंगल कार्यों के आरंभ करने के लिए सर्बोत्तम माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन ही महाभारत में भीष्म पितामह ने स्वेच्छा से अपना प्राण त्यागा था।

इसी दिन हुआ था गंगा का घरती पर अवतरण, महाराजा भगीरथ ने कठोर तपस्या के वल पर इसी दिन गंगा को धरती पर उतारा पर उतरा था। कुम्भ मेले की शुरुआत मकर संक्रांति के दिन से होती है।

इस दिन गंगासागर में इस दिन विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। जहां लोगों स्नान और दान पुण्य करते हैं।

मकर संक्रांति से जुड़ी भगवान सूर्य और शनि की कहानी

इस पर्व को पिता और पुत्र के मधुर संबंध से भी जोड़ कर देखा जाता है। कहते हैं की इस दिन सूर्य देव ने वर्षों की नाराजगी त्याग कर अपने पुत्र शनि से मिले थे। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार सूर्य देव अपने पुत्र शनि से किसी कारण से बहुत नाराज हो गए थे।

लेकिन मकर संक्रांति के दिन उन्होंने अपनी नाराजगी त्याग कर पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर गए थे। शनि देव ने अपने पिता को पास आए देख बहुत खुश हुए। उन्होंने अपने पिता सूर्य देव कि काले तिल से पूजा की।

भगवान सूर्य भी अपने पुत्र से खुश होकर उनका दूसरा घर मकर प्रदान किया। इसी इस दिन चूँकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी बने। तभी से इस दिन का महत्व बढ़ गया और यह खास दिन मकर संक्रान्ति के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

किसानों के लिए कृषि पर्व है 10 लाइन हिंदी में

चूँकि भारत एक कृषि प्रधान देश है। इसीलिए इस  त्यौहार को फसल से भी जोड़ कर देखा जाता है। मकर संक्रांति तब मनाई जाती है जब खरीफ फसल के कटाई के बाद खेत में रबी की फसल लहराने लगती है।

मकर संक्रांति का महत्व किसानों से बेहतर कौन जान सकता है। तभी तो यह त्यौहार फसलों और किसानों का त्योहार के नाम से भी जाना जाता है। इस त्योहार के दौरान किसानों में खास  प्रसन्नता और उत्साह देखने को मिलता है।

कुछ स्थानों पर इस दिन किसान अपने बैलों को सजा कर उसकी पूजा करते है। क्योंकि बैल हमेशा से उनके कृषि कार्य में सहायक रहा है। साथ ही वे खरीफ कि अच्छी पैदावार के लिए भगवान को धन्यवाद देते हैं तथा आने वाली रबी की अच्छी उपज की कामना करते हैं।

मकर संक्रांति की पूजा विधि 10 लाइन हिंदी में

मकर संक्रांति के दिन क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए इसके बारें में थोड़ा जानते हैं। मकर संक्रांति किसी भी शुभ कार्य के आरंभ करने का दिन होता है। इस दिन स्त्रियां पवित्र स्नान के बाद भगवान भास्कर की कर अपने सुहाग की रक्षा की कामना करती हैं।

वहीं बड़े बुजुर्ग इस पर्व को अध्यात्म से जोड़कर देखते हुए पवित्र स्नान के बाद जन्म जन्मांतर के बंधन से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। क्योंकि इस दिन स्नान, दान, तर्पण आदि जैसे कार्यों के लिए काफी महत्पूर्ण माना गया है।

• इस दिन सूर्योदय से एक या दो घंटे पहले जग जाना चाहिए। स्नान के पश्चात  जल और फूलों के साथ उगते सूर्य देव की पूजा करने के लिए तैयार रहें।

सूर्य देव  के उदय हो जाने पर गायत्री मंत्र का जाप करते हुए हाथ जोड़कर प्रार्थना करें। इस प्रकार सूर्य से बुद्धि और ज्ञान की प्रार्थना करें।

• तिल और गुड़ के लड्डू तथा अन्य मिठाई तैयार करें। इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मिल बाँट कर ग्रहण करें।

• इसके साथ ही मकर संक्रांति के दिन जरूरतमंदों को उपयोगी वस्तुएं दानकर पुण्य अर्जित करें।

मकर संक्रांति को देश के अलग-अलग भागों में कैसे मनाते हैं ?

भारत के अन्य राज्यों में भी यह त्यौहार अलग-अलग नामों के साथ मानते हैं। भारत के किसी राज्य में यह बीहू, कहीं पोंगल, कहीं संक्रांत तो कही खिचड़ी पर्व के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं भारत के विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति क्यों और कैसे मनाया जाता है।

उत्तरप्रदेश : उत्तर प्रदेश में इस त्योहार को खिचड़ी पर्व के नाम से जाना जाता है। इस दिन खिचड़ी खाने और दान करने कि परम्परा है। मकर संक्रांति के दिन पवित्र गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है।

इस कारण से उत्तर प्रदेश में इस पर्व को दान के पर्व के नाम से भी जानते हैं। इस दिन से प्रयागराज में गंगा जमुना और सरस्वती के संगम पर विशाल माघ मेले का आयोजन होता है।

बिहार में मकर संक्रांति – विहार एवं झारखण्ड में इस त्यौहार को सकरांत के नाम से जाना जाता है। विहार व् झारखण्ड के लोग सुबह गंगा जैसी पाबन नदियों में डुबकी लगाकर इस त्यौहार की शुरुआत करते है।

तत्पश्चात सूर्य की आराधना करते है। इस दिन यहाँ के लोग स्नान के बाद दही चुरा व् तिल की मिठाई का सेवन करते हैं। कुछ जगह पर लोग इसे खिचड़ी पर्व के नाम से पुकारते है और इस दिन खिचड़ी का सेवन करते है।

पश्चिम बंगाल – पश्चिम बंगाल में इस त्यौहार को पौष संक्रांति या पौष पर्व के नाम से जाना जाता है। पौष पर्व पर भी खास व्यंजन तैयार किए जाते हैं, जैसे पुली पिट्ठा, खीर पुली पिट्ठा आदि।

इस त्यौहार के मौके पर पवित्र स्नान के पश्चात तिल दान करने की प्रथा है। पश्चिम बंगाल के 24 दक्षिण परगना जिले में सागर द्वीप अबस्थित है। इसी स्थल पर गंगा नदी सागर में मिलती है।

जिस कारण यह स्थान गंगासागर के नाम से प्रसिद्ध है। हर वर्ष मकर संक्रांति के दिन देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु गंगासागर में स्नान करते है। ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगासागर में स्नान से मोक्ष का मार्ग सुगम होता है।

पंजाब और हरियाणा : पंजाब और हरियाणा में मकर संक्रांति को माघी के नाम जानते हैं। मकर संक्रांति के ठीक एक दिन पहले यहाँ ‘लोहिड़ी’ मनाया जाता है। लोहड़ी के शाम को सूर्यास्त के बाद घर के बाहर लकड़ी जमा कर उसमें आग लगाया जाता है।

गुजरात : मकर संक्रांति के दिन सूर्य की गति दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर आरंभ होती है। इसीलिये गुजरात में मकर संक्रांति को उत्तरायण नाम से जाना जाता है। गुजरात के लोगों के लिए मकर संक्रांति का दिन बेहद शुभ माना जाता है।

इस दिन बड़ों के साथ बच्चों में भी काफी खास उत्साह देखने को मिलता है। बच्चे इस दिन बेरोक-टोक मौज-मस्ती करते हुए पतंगबाजी का मजा लेते है।

महाराष्ट्र में मकर संक्रांति : महाराष्ट्र में इस के दिन महिलाएं आपस में तिल और गुड़ बांटते हुए “तिल गुड़ ध्या आणि गोड़ गोड़ बोला” बोलती हैं। जिसका अर्थ होता है तिल गुड़ लो और गुड़ की तरह मीठा बोलो, ऐसा इसीलिए किया जाता है

ताकि संबंधों में मधुरता बनी रहे। इसके साथ महाराष्‍ट्र में इस दिन खास तरह का हलवा खाने और बांटने की परंपरा है।
इसके आलावा महाराष्ट्र में मकर संक्रांति के दिन सभी विवाहित महिलाएँ अपनी पहली संक्रान्ति पर कपास, तेल, नमक, गुड़, तिल, रोली आदि चीजें अन्य सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं।

तमिलनाडु में मकर संक्रांति : दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में इस त्यौहार को पोंगल के नाम से जाना जाता है। सूर्य देव को अन्न और समृद्धि प्रदान करेने वाला देवता माना गया है।

अच्छी फसल के लिए सूर्य देवता के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए यह त्यौहार चार दिन तक मनाया जाता है। हर दिन पोंगल के अलग अलग नाम होते हैं।

पहला दिन – भोगी पोंगल –जो देवराज इन्द्र को समर्पित हैं,

दूसरा दिन – सूर्य पोंगल – इस पोंगल के दिन महिलायें खुले आँगन में मिट्टी के बर्तन में एक विशेष प्रकार की खीर तैयार करती हैं। उसके बाद उस खीर को सूर्य देव को चढ़ाकर, प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

तीसरा दिन -मट्टू पोंगल – यहाँ के मान्यता के अनुसार भगवान भोले शंकर के बैल का नाम मट्टू है। जिसे भोले शंकर ने मानव कल्याण के लिए धरती पर भेजे हैं। इस दिन बैलों को खूब सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है।

चौथा दिन – कन्या पोंगल – इस दिन घर खूब को सजाया जाता है. घर के मुख्य द्वार पर महिलायें मनमोहक रंगोली बनती हैं। तमिलनाडु में इस दिन जालु कट्टु का खेल का भी आयोजन किया जाता है।

यह काफी प्रसिद्ध खेल है जिसमें इंसानों को बैलों के साथ लड़ाया जाता है। यह बहुत ही साहस पूर्ण और जोखिम भरा खेल है। जिसका इतिहास लगभग 2000 साल पुराना है।

विदेशों में मकर संक्रांति का त्यौहार

भारत कि तरह दुनियॉं के कुछ अन्य देशों में भी मकर संक्रांति है। भारत के पड़ोसी देशों में भी मकर संक्रांति का त्यौहार बहुत धूम धाम से मनाया जाता है। आइये एक नजर डालते हैं।

नेपाल – हिमालय के तराई में बसा नेपाल में भी यह अलग अलग रीति-रिवाजों द्वारा बहुत ही भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया जाता है। नेपाल में मकर संक्रांति को माघे-संक्रान्ति या माघी के नाम से जानते है।

नेपाल में विशेषकर थारू समुदाय के लोगों में Makar sankranti ka importance सबसे अधिक है। थारू समुदाय के लोगों का यह सबसे प्रमुख त्यैाहार है। यहाँ भी मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष महत्त्व है।

नेपाल में इस त्यौहार को फसलों एवं किसानों के साथ जोड़ कर देखा जाता है। इस दिन किसान अपनी अच्छी फसल के लिये सूर्य देव को धन्यवाद देते है।

पाकिस्तान – यहाँ के सिंध प्रांत में मकर संक्रांति के त्यौहार को ‘तिरमूरी’ या उत्तरायण के नाम से जाना जाता है। क्योंकि इसी दिन से सूर्य की उत्तरायण गति प्रारम्भ होती है। इस दिन लोग अपनी शादी शुदा पुत्री के घर शगुन के रूप में तिल का बना लड्डू भेजते हैं।

बंगलादेश – यहाँ के लोग इस त्यौहार को पौष संक्रांति के नाम से जानते है। इस त्यौहार के दिन लोग स्नान के बाद तिल का दान करते हैं।

श्रीलंका – में मकर संक्रांति त्यौहार को तमिलनाडु के तरह पोंगल के नाम से मनाया जाता है। भारत के लोग भले ही दुनियाँ के जिस देश में बस गए हों अपनी संस्कृति और परंपरा को संभाले हुए हैं।

इस प्रकार दुनियॉं के अन्य देशों में भी प्रवासी भारतीय के द्वारा मकर संक्रांति बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है।

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मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है

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मकर संक्राति का क्या अर्थ है?

मकर का आशय मकर राशी से है और संक्रांति का मतलब संक्रमण अर्थात प्रवेश करना होता है। इस प्रकार संक्रांति का अर्थ सूर्य का मकर राशी में गमन से है।

मकर संक्रांति पर्व का क्या महत्व है?

मकर संक्रांति के अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान, दान व तर्पण का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति के महत्व इस बात से चलता है की इच्छा मृत्यु का वर प्राप्त भीष्म पितामह ने इसी दिन ही अपना प्राण त्यागा।

मकर संक्रांति में किसकी पूजा होती है?

मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान कर भगवान भास्कर की पूजा की जाती है।

14 जनवरी को मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं?

इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करती है जो शुभ माना जाता है। यह दिन किसी विशेष कार्य की सुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है।

आपको मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है, इसका इतिहास और महत्व से जुड़ी जानकारी जरूर अच्छी लगी होगी। अपने कमेंट्स से अवगत कराएं।

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Amit

Amit

मैं अमित कुमार, “Hindi info world” वेबसाइट के सह-संस्थापक और लेखक हूँ। मैं एक स्नातकोत्तर हूँ. मुझे बहुमूल्य जानकारी लिखना और साझा करना पसंद है। आपका हमारी वेबसाइट https://nikhilbharat.com पर स्वागत है।

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