गणपति बप्पा मोरिया जयकारे में जानिये ‘मोरिया’ शब्द का राज

गणपति बप्पा मोरिया जयकारे में जानिये ‘मोरिया’ शब्द का राज, कौन थे मोरया

भगवान गणपती का जन्मोत्सव गणेश चतुर्थी का अवसर हो या गणेश विसर्जन का, चारों तरफ एक ही जयकारा सुनाई पड़ता है गणपति बप्पा मोरिया, मंगळमूर्ती मोरया, पुढ़च्यावर्षी लवकरया।

यद्यपि महाराष्ट्र के बाहर के बहुत ही कम लोगों को इसका अर्थ पता है। गणपती उत्सव के दौरण जो जयकारा लगाया जाता है गणपति बप्पा मोरिया, मंगळमूर्ती मोरया, पुढ़च्यावर्षी लवकरया’ इसका

मतलब होता है- हे गणनायक हे मंगलकारी बप्पा (पिता), अगली बार जल्दी वापस आना। इस जयकारे में मोरया शब्द कहाँ से आया। कौन थे मोरया और क्या है इस जयकारे का इतिहास, आज हम जानेंगे।

गणपती महोत्सव के दौरान हरेक गणपति भक्त की जुबां पर यह ganpati bappa morya जयकारा होता है। हम जानेंगे की पुणे के पास के चिंचवाड़ा गांव से निकलकर यह जयकारा कैसे आज पूरे भारत में प्रसिद्ध हो गया।

GANPATI BAPPA MORYA IN HINDI- गणपति बप्पा मोरिया में क्या है ‘मोरिया’ शब्द का रहस्य

ganpati bappa morya गणपति बप्पा मोरिया
ganpati bappa morya गणपति बप्पा मोरिया / Image by Darpan Joshi from Pixabay

गणेश महोत्सव के अवसर पर गणपति बप्पा मोरिया (ganpati bappa morya) का जयकारा लगाया जाता  है। लेकिन क्या आप जानते हैं की गणपति बप्पा के नाम के साथ मोरया शव्द क्यों लगाया जाता है। इस जयकारे की शुरुआत कैसे और कव हुई।

गणेश महोत्सव के अवसर पर गणपति बप्पा मोरिया का जयकारा क्यों लगाते हैं। इस बात से हर आदमी अवगत नहीं है। गणपति बप्पा के नाम के साथ मोरया शव्द कव और कैसे जुड़ा।

इसे से पहले हम ganpati bappa morya का मतलव समझते हैं।

गणपती बप्पा मोरया का शाब्दिक अर्थ – ganpati bappa morya meaning

गणपति बप्पा मोरिया इसमे तीन शव्द हैं।  पहला गणपती, दूसरा बप्पा और तीसरा मोरया। पहले हम गणपती का मतलब जानते हैं

गणपती

जैसा की हम जानते हैं की गणपती, भगवान गणेश का ही दूसरा नाम है। गणपती संस्कृत के दो शव्द गण और पति से मिलकर बना है। गण का मतलव लोग है और पति का मतलव मालिक से है।

इस प्रकार गणपती का मतलब होता है समस्त प्राणी का स्वामी अर्थात सब के मालिक। यही कारण है की उन्हें गणपती के नाम से जाना जाता है।  

दूसरी मान्यता है की जब माता पार्वती ने बालक गणेश को द्वारपाल के रूप में महल के द्वार पर नियुक्त किया था। तब माता के आज्ञा का पालन कर उन्होंने शिव जी के गणों को अंदर आने से रोक दिया।

उन्होंने शिव के सारे गणों को परास्त कर दिया था। जैसे सेना का प्रमुख सेनापति होता है उसी तरह भगवान शिव ने उन्हें गणों का प्रमुख बनाया जिससे उनका नाम गणपती हुआ।

बप्पा-Bappa का अर्थ

बप्पा का मतलब पिता या मालिक से है। क्योंकि वे सारे जगत के पिता अर्थात मालिक हैं। इसीलिए उन्हें आदरस्वरूप Bappa(पिता)  कहकर संबोधित किया जाता है।

मोरया का मतलब

भगवान गणपती के नाम के साथ मोरया शब्द कैसे जुड़ा, इसके पीछे एक रोचक कहानी है। ये कहानी है भगवान गणपती के एक भक्त मोरया गोसावी की। जिसकी भक्ति के कारण ने सदा-सदा के लिए उनका नाम गणपती के साथ जुड़ गया।

गणपती बप्पा के नाम के साथ भक्त ‘मोरया’ का नाम कैसे जुड़ा?

गणपति बप्पा मोरिया, मंगल मूर्ति मोरिया के जयकारे में लिया जाता है भगवान गणपती के परम भक्त का नाम जानिये विस्तार से।

कहते हैं की मोरया गोसावी भगवान गणपती के परम भक्त और सच्चे उपासक थे। संत मोरया का जन्म महाराष्ट्र में पूना से सटे, चिंचवाड़ा नामक गांव में हुआ था। संत मोरया गोसावी रोज सच्चे मन से गणपती बप्पा की पूजा करते थे।

उन्होंने गणेश मंदिर के पास ही समाधि ली थी।  भगवान गणपती के सच्चे उपासक होने के कारण मोरया गोसावी का नाम सदा के लिए गणपती बप्पा के नाम के साथ जुड़ गया।

कहते हैं की भक्त और भगवान के अट्टू संबंध को दर्शाने के लिए भी भक्त मोरया का नाम भगवान के नाम से जोड़ दिया गया। कारण जो भी रहा हो लेकिन भक्त मोरया का नाम भगवान के नाम से जुड़ कर सदा के लिए अमर हो गया।

संत मोरया गोसावी की पूरी कहानी

ये कथा है भगवान और उनके एक परम भक्त की, जिसकी भक्ति और आस्था ने एक अमिट कहानी लिख दि। जिस कारण उनका नाम गणपती के साथ हमेशा-हमेशा के लिए जुड़ गया।

भक्त मोरया और उनसे जुड़े भगवान गणपती की कहानी बहुत ही पुरानी है। जहां भक्‍त की परम भक्ति और अपार आस्था के फलस्वरूप भगवान के साथ हमेशा के लिय जुड़ गया उनके भक्त का नाम।

कहते हैं की पुराने समय की बात है, 15 वीं शतावदी के दौरण भगवान गणपती के एक परम भक्त हुए जिसका नाम मोरया गोसावी था। उनका जन्म महाराष्ट्र के पुणे शहर से करीब 20 किमी दूर चिंचवाड़ नामक गांव में हुआ था।

बचपन से ही वे भगवान गणपती के परम भक्त थे। हर साल वे गणेश चतुर्थी का उत्सव पर पैदल ही चलकर मोरगांव भगवान गणपती के पूजा के लिए जाते थे। जैसे जैसे उनकी उम्र बढ़ने लगी उनका भक्ति और विश्वास बढ़ता गया।

जब वे बूढ़े हो गये और बढ़ती उम्र के कारण अब मोरगांव अपने इष्ट का दर्शन के लिए नहीं जा पाते थे। वे लचार और निराश रहने लगे। लेकिन भगवान की भक्ति नहीं छोड़ी।

वे अपने जीते जी भगवान गणपती के दर्शन करना चाहते थे। कहते हैं की भगवान तो भक्त वात्सल्य होते हैं और वे अपने भक्तों के इच्छा को जरूर पूरा करते हैं।

जब गणपति बप्पा मोरिया ने दिए अपने परम भक्त को दर्शन

भगवान गणपती ने अपने भक्त मोरया गोसावी की आस्था और भक्ति से खुश होकर उन्हें सपने में दर्शन दिए। उन्होंने ने मोरया गोसावी से कहा की जब तुम सुबह कुंड में स्नान करोगे उसी बक्त मैं तुम्हें किसी ने किसी रूप में दर्शन दूंगा।

कहते हैं की अगले दिन जब मोरया गोसावी पास के कुंड में स्नान कर रहे थे। तब जैसे ही वे स्नान के लिए कुंड में डुबकी लगाई और बाहर निकने उनके हाथ में भगवान गणेश की प्रतिमा थी।

भक्त मोरया गोसावी को रात के सपने की बात समझते देर नहीं लगी। वे अपने इष्ट देव के दर्शन पाकर अपने आप को धन्य समझा और उस मूर्ति को पास के मंदिर में रखकर दिन रात पूजा करने लगे।

जैसे-जैसे मृत्यु का समय निकट आने लगा उनकी भक्ति प्रकाढ़ होती गयी। लोगों को विश्वास हो गया की वर्तमान में मोरया गोसावी से बड़ा को गणपती बप्पा का भक्त नहीं है।

धीरे-धीरे उनका नाम और यश चारों ओर फैलने लगा। दूर -दूर से लोग मोरया गोसावी के आशीर्वाद और दर्शन के लिए आने लगे। जब लोग उनसे आशीर्वाद लेते तब वे लोगों को आशीर्वाद वचन में मंगल मूर्ति कहते।

इस प्रकार जो भी लोग मोरया गोसावी के दर्शन के लिए आते वे गणपती के साथ भक्त मोरया का नाम जोड़ कर जयकारा लगते। इस प्रकार भक्त मोरया गोसावी का नाम गणपती के नाम से जुड़ गया।

इस प्रकार यह जयकारा पुणे के पास के एक गाँव से निकलकर महाराष्ट्र सहित पूरे भारत में फैल कर प्रसिद्ध हो गया। लोगों की मान्यता है की गणपती बप्पा के नाम के साथ उनके परम भक्त मोरया का नाम लेने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं।

मोरया गोसावी की समाधि

जब मोरया गोसावी की मृत्यु हुई तब उसी मंदिर के पास मोरया गोसावी की समाधि बनाई गई। जब लोग मोरया गोसावी मंदिर में भगवान गणपती के पूजा के लिए लिए जाते हैं तब उनके परम भक्त मोरया गोसावी के समाधि को नमन करना नहीं भूलते।

जिस मंदिर में मोरया गोसावी गणपती की मूर्ति को स्थापित कर पूजा करते थे वह आज गोसावी मंदिर के नाम से जाना जाता है। जहाँ हजोरों लोग प्रतिदिन गणपती बप्पा की पूजा करने के लिए आते हैं।

इसके आलबा भक्त वहाँ मोरया गोसावी के समाधि के साथ उनके सात वंशज की समाधि का भी दर्शन करते हैं।

गोसावी मंदिर मंदिर में साल में दो बार विशेष पूजा का आयोजन

गोसावी मंदिर में भगवान गणपती की अद्भुत मूर्ति विराजमान है। इसके आलबा भक्त वहाँ मोरया गोसावी के समाधि के साथ उनके सात वंशज की समाधि का भी दर्शन करते हैं।

कहते हैं की मोरया गोसावी मंदिर में साल में दो बार विशेष उत्सव का आयोजन की जाता है। पहला उत्सव यहाँ भादों के महीने में मनाया जाता है। जिसमें देखने देश भर से लोग पुणे के पास चिंचवाड़ गाँव आते हैं।

दूसरा उत्सव माध के महीने में आयोजित किया जाता है। इस उत्सव दौरान मोरया गोसावी मंदिर से पालकी निकाली जाती है। लोग पालकी के साथ गणपति बप्पा मोरिया के जयकारा के साथ मोरगाँव के गणपती मंदिर तक जाती है।

GANPATI BAPPA MORYA IN HINDI- गणपति बप्पा मोरिया
ganpati bappa morya गणपति बप्पा मोरिया / Image by Sachin GHATMALE from Pixabay

गणपति बप्पा मोरिया, मंगल मूर्ति मोरिया – Ganesh chaturthi

गणेश चतुर्थी ( Ganesh Chaturthi in Hindi ) के अवसर पर यहाँ की रौनक देखते ही बनती है। कहते हैं की भगवान गणपती का जन्म, भाद्र मास के शुक्ल पक्ष, चतुर्थी को मध्यान  काल में हुआ था।

इसीलिए प्रतिवर्ष भाद्र मास के चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान चारों तरफ से एक ही आवाज आती है गणपति बप्पा मोरिया मंगल मूर्ति मोरया ।

यह उत्सव अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी के प्रतिमा विसर्जन से साथ समाप्त हो जाता है। गणेश विसर्जन के समय मुंबई में खास रौनक होती है। सभी लोग गणपति बप्पा मोरिया का जयकारा के साथ प्रतिमा का विसर्जन करते हैं।

दोस्तों गणपति बप्पा मोरिया शीर्षक वाला यह लेख में आपको जरूर पसंद आया होगा। अपने कमेंट्स से अवगत करायें।

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