Rajkumari Amrit Kaur 11 popular fact -अमृत कौर की जीवनी

RAJKUMARI AMRIT KAUR  -अमृत कौर
RAJKUMARI AMRIT KAUR -अमृत कौर

Rajkumari Amrit Kaur 11 popular fact -अमृत कौर की जीवनी

राजकुमारी अमृत कौर की गिनती एक प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और प्रखर राजनेता के रूप में की जाती है। भारत के आजादी के वाद वे देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राजकुमारी अमृत कौर उन चुनिंदा महिलाओं में शामिल हैं जिन्हें टाइम मैगजीन ने दुनिया की 100 ताकतवर महिलाओं के सूची में सम्मिलित किया है।

टाइम मैगजीन ने पिछली सदी को नई पहचान  के लिए श्रीमती इंदिरा गांधी तथा राजकुमारी अमृत कौर को विश्व की उन 100 ताकतवर महिलाओं की सूची में सम्मिलित किया है।

टाइम ने राजकुमारी अमृत कौर (Rajkumari Amrit Kaur )को वर्ष 1947 की ‘वुमन ऑफ द ईयर’ के लिए चयनित किया है। Rajkumari Amrit Kaur एक महान सामाज सेविका, स्वतंत्रता सेनानी और अत्यंत ही विदूसी महिला थीं।

महान Women freedom fighters of India राजकुमारी अमृत कौर गांधी को उनके योगदान के लिए सदा याद किये जायेंगे। दोस्तों तो आइए आज  हम आपको इस लेख के माध्यम से राजकुमारी अमृत कौर की जीवनी – Rajkumari Amrit Kaur Biography Hindi के बारे में विस्तार से बताने जा रहें हैं।

राजकुमारी अमृत कौर संक्षित जीवन परिचय Rajkumari Amrit Kaur

  • जन्म वर्ष – 2 फरवरी 1889
  • जन्म स्थान – उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ
  • माता पिता – पिता हरनाम सिंह तथा माँ का नाम रानी हरनाम सिंह
  • निधन – 2 अक्टूबर 1964

राजकुमारी कौर का जन्म – Birth of Rajkumari Amrit Kaur

राजकुमारी अमृत कौर पंजाव राज्य के कपूरथला के शाही परिवार में पैदा हुई थी। उनके पिता नाम राजा हरनाम सिंह तथा माँ का नाम रानी हरनाम सिंह थीं।

उनका जन्म 2 फरवरी 1889 ईस्वी को उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ शहर में हुआ था। राजकुमारी अमृत कौर सात भाइयों के बीच इकलौती बहन थी।

राजकुमारी के परिवारवालों ने उनके जन्म से पूर्व ही ईसाई धर्म अपना लिया था। उनकी प्रारम्भिक शिक्षादीक्षा ब्रिटेन के शेरबोर्न नामक स्कूल में हुई।

उन्होंने आगे की पढ़ाई लंदन और ऑक्सफर्ड विश्वविध्यालय से की। जहॉं से उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की। अपने पढ़ाई के दौरान उन्हें दुनिया को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिला।

राजकुमारी अमृत कौर का देश के लिए योगदान

लंदन में उच्च शिक्षा प्राप्ति के वाद 1909 में वह कपूरथला अपने घर वापिस लौटीं। 1919 में जालियाँ बाल बाद हत्याकांड से वे बहुत ही मर्माहत थी।

उन्होंने गुलामी की जंजीरों में जकड़े भारत वर्ष के लोगों में व्याप्त कु्प्रथाओं के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। उन्होंने बाल विवाह और पर्दा प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाई।

अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद जब वे भारत लौटी तो आजादी के आंदोलन में कूद पड़ी। राजकुमारी अमृत कौर गांधी जी से बहुत ही प्रभावित थीं। जैसा की हम जानते हैं की वह एक राज घराने में पैदा हुई थी।

वह यदि चाहतीं तो पूरे शानो शौकत के साथ राजसी जीवन निवार्ह कर सकती थीं। लेकिन उन्होंने अपने सारे सुख का त्यागकर देश और देशवासियों के लिए सोचा। इस प्रकार उन्होंने भारत के आजादी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।

उन्होंने एक समाज सुधारक के तौर पर भी महत्वपूर्ण कार्य किया। गांधी जी से प्रभावित होकर उन्होंने सभी सुख-सुविधा का त्याग कर महिला अधिकारों के लिए वे सतत प्रयत्नशील रही।

इसके लिए उन्होंने सन 1926 ईस्वी में ऑल इंडिया महिला कांफ्रेंस की स्थापना की। कहते हैं की लगातार 16 वर्षों तक वे गांधी जी की सचिव रहीं। उनका नाम महात्मा गाँधी के सबसे करीबी लोगों में लिया जाता है।

यह भी कहा जाता है की गांधी जी अकसर अपने पत्र में राजकुमारी अमृत कौर को ‘मेरी प्यारी बेवकूफ’ और ‘बागी’  बुलाते थे और अंत में खुद को तानाशाह भी बुलाते थे।

महात्मा गांधी से प्रेरित होने के कारण उन्होंने 12 मार्च 1930 के दांडी मार्च में भाग लिया जो ‘नमक आंदोलन’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

नमक आंदोलन’ और ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में सक्रिय रूप से भागीदारी के कारण उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया। सन 1934 में राजकुमारी अमृत कौर महात्मा गांधी के आश्रम में सन्यासियों जैसा जीवन व्यतीत करने लगी।

राजकुमारी अमृत कौर का राजनीतिक सफरRajkumari Amrit Kaur political career

आजादी के बाद उन्हें भारत की पहली महिला कैबिनेट मंत्री बनाया गया। पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के नेतृत्व वाली सरकार के द्वारा गठित पहले मंत्रिमंडल में वे सम्मिलित थीं। उन्होंने अपना प्रथम आमसभा चुनाव हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा सीट से लड़ी।

आजाद भारत की प्रथम केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री बनने का सौभाग्य अमृत कौर को मिला। इस प्रकार राजकुमारी कौर 10 वर्षों तक भारत की स्वास्थ्य मंत्री के पद पर तैनात रहीं। वर्ष 1950 से लेकर 1964 ईस्वी तक वे ‘लीग ऑफ रेडक्रास सोसाइटी’ की उपाध्यक्ष के पद पर भी विराजमान रहीं।

‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान'(AIMMS) की स्थापना में उनका बहुमूल्य योगदान दिया। नई दिल्ली में AIMMS की स्थापना का श्रेय इन्हें ही जाता है। इन्होंने जर्मनी और न्यूज़ीलैंड जैसे कई देशों से वित्तीय सहायता प्राप्त कर ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’ की स्थापना की थी।

इसके अलावा राजकुमारी अमृत कौर को खेलों से भी बड़ा ही लगाव था। Rajkumari Amrit Kaur ने भारत में खेल के उत्थान के लिए ‘नेशनल स्पोर्ट्स क्लब ऑव इंडिया’ की स्थापना की।

राजकुमारी का निधन – Death of Rajkumari Amrit Kaur

2 अक्टूबर 1964 को इस महान विदूसी की मृत्यु हो गयी।

राजकुमारी अमृत कौर से जुड़े कुछ रोचक फैक्ट्स

  1. देश के बच्चों को अधिक शसक्त और अनुशासित करने के उद्देश्य से उन्होंने स्कूली स्तर से ही खेलों की शुरूआत पर बल दिया। इसके लिए उन्होंने ‘नेशनल स्पोर्ट्स क्लब ऑफ इंडिया’ की नींव रखकर बच्चों को खेल के प्रति आकर्षित किया।
  2. राजकुमारी अमृत कौर (Rajkumari Amrit Kaur ) की उच्च शिक्षा ब्रिटेन में हुई, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद वे 1909 में भारत वापस लौटीं.
  3. वे सन 1954 ईस्वी में लंदन में आयोजित यूनेस्को की बैठक में सम्मिलित होने वाले भारतीय प्रतिनिधि मंडल दल की प्रमुख थी।
  4. अमृत कौर (Rajkumari Amrit Kaur )सन 1947 से लेकर सन 1957 ईस्वी तक वह भारत सरकार में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री के पद पर रहीं।
  5. खेलों से लगाव होने के कारण उन्होंने नेशनल स्पोर्ट्स क्लब ऑफ इंडिया की स्थापना और इसकी अध्यक्ष भी रहीं।
  6. उनका सबसे पसंदीदा खेल टेनिस था। कई बार उन्होंने टेनिस चैम्पियनशिप भी जीती।
  7. उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। दिल्ली में AIIMS की स्थापना उनके प्रयास का ही नतीजा है।  इस वृहद अस्पताल के स्थापना के लिए उन्हें  न्यूज़ीलैंड और जर्मनी से आर्थिक मदद मिली थी।
  8. इसके अलावा भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनका कई व्यापक योगदान रहा। उन्होंने ‘टयूबरक्लोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ की स्थापना की। उन्होंने मद्रास(बर्तमान में चेन्नई ) में सेंट्रल लेप्रोसी टीचिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट की नींव रखी।
  9. वे “लीग ऑफ रेड क्रास सोसायटीज” के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की उपाध्यक्ष और “सेंट जोंस एम्बुलेंस एसोसिएशन” की कार्यकारिणी की अध्यक्ष रहीं।
  10. रेड क्रास के लिए उनके द्वारा किए गए सराहनीय कार्यों के लिए उन्हें कई देशों ने सम्मानित किया। सन 1950 ईस्वी में वर्ल्ड हैल्थ असेम्बली का अध्यक्ष चुनी जाने वाली वह पहली एशियाई महिला बनी।
  11. सन 1961 में अमृत कौर को समाज सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए ‘रेने सा मेमोरियल अवार्ड’ प्रदान किया गया। वे इंडियन रेड क्रास की संस्थापक थी तथा सन 1950 ईस्वी से जीवनपर्यंत इसका अध्यक्ष रहीं। 

दोस्तों, राजकुमारी अमृत कौर की जीवनी (Rajkumari Amrit Kaur )  का यह लेख आपको कैसा लगा, अपने सुझाव से जरूर अवगत करायें। http://nikhilbharat.com/?p=2081

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