भारत रत्न वैज्ञानिक सी एन आर राव की जीवनी (Biography of C N R Rao in Hindi)

सी॰ एन॰ आर॰ राव भारत के प्रसिद्ध रसायन विज्ञानी थे। उन्हें घन-अवस्था और संरचनात्मक रसायन विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए जाना जाता है। सी॰ एन॰ आर॰ राव का पूरा नाम चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव है।

वे भारत सरकार में प्रधान मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के प्रमुख भी रहे। भारत के इस महान रसायनज्ञ को विश्व के कई विश्वविद्यालयों द्वारा 50 से भी ज्यादा मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त हुई।

उनके दर्जनों पुस्तक और सकड़ों शोधपत्र प्रकाशित हुए। विज्ञान में अहम योगदान देकर उन्होंने देश के विकास में हाथ बँटाया। प्रोफेसर सी एन आर राव ‘सॉलिड स्टेट और मैटेरियल केमिस्ट्री‘ के विशेषज्ञ माने जाते हैं।

इस प्रकार उन्होंने एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक के रूप में अपने कार्यों से देश को गौरान्वित किया। भारत सरकार ने डॉ0 चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव (Dr. Chintamani Nagesh Ramchandra Rao) को 2013 में ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया।

इस प्रकार वे भारत रत्न पाने वाले देश के तीसरे वैज्ञानिक हैं।  उनसे पहले यह सम्मान केवल सी वी रमण और ए पी जे अब्दुल कलाम साहब को ही मिला है। चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव को कर्नाटक सरकार ने राज्य के सबसे बड़े सम्मान ‘कर्नाटक रत्न’ की उपाधि प्रदान की।

सी एन आर राव की जीवनी | BIOGRAPHY OF C N R RAO IN HINDI
सी एन आर राव (C N R RAO IN HINDI)

सी एन आर राव का जीवन परिचय (BIOGRAPHY OF C N R RAO IN HINDI)

जन्म व माता पिता

महान भारतीय वैज्ञानिक सी. एन. आर. राव का जन्म 30 जून 1934 को बंगलौर में हुआ था। कन्नड़ परिवार में पैदा हुए चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव के पिता का नाम हनुमंत नागेश राव था। इनकी माताजी का नाम नागम्मा नागेश राव थी।

डॉ0 चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव (Dr. Chintamani Nagesh Ramchandra Rao) अपने माता पिता के इकलौते थे। बचपन से राव साहब पढ़ने लिखने में काफी तेज थे तथा विज्ञान के प्रति उनकी गहरी रुचि थी। वे बड़े होकर वैज्ञानिक बनना चाहते थे।

शिक्षा-दीक्षा और प्रारंभिक जीवन

उनकी प्रारम्भिक शिक्षा अपने पैतृक नगर में ही हुई। उसके बाद उन्होंने में मैसूर विश्वविद्यालय से 1951 में स्नातक की परीक्षा पास की। स्नातक के बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में दाखिला लिया।

यहाँ उन्होंने 1953 में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। उसके बाद उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए। अमेरिका के पुरड्यू विश्‍वविद्यालय (Purdue University) में उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो एच.सी. ब्राउन के निर्देशन में स्‍पेक्‍ट्रोस्‍कोपी में अनुसंधान किया।

इस प्रकार उन्होंने स्‍पेक्‍ट्रोस्‍कोपी पर शोध कार्य करते हुए सन 1958 में पी-एच0डी0 की डिग्री प्राप्त की।

पारिवारिक जीवन

डॉ0 चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव (Dr. Chintamani Nagesh Ramchandra Rao) सन 1960 में वैवाहिक बंधन में बंध गए। उनकी पत्नी का नाम इंदुमति राव है। उन्हें एक पुत्र और एक पुत्री है।

उनके वेटे का नाम संजय है, जो शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं। उनकी पुत्री का नाम सुचित्रा है, जिनकी शादी प्रसिद्ध वैज्ञानिक के. एम. गणेश के साथ हुआ है।

कैरियर

भारत रत्‍न डॉ. सी. एन. आर. राव (CNR Rao) अमेरिका से पी एच डी करने के बाद स्वदेश वापस आ गए। भारत आकार उन्होंने 1959 में बेंगलुरु के आईआईएससी में एक लेक्चरर के रूप में अपने कैरीयर की शुरुआत की।

इसके बाद वे आईआईटी कानपुर चले गए। उनकी शोधयात्रा का प्रारंभ 1963 में इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नालॉजी, कानपुर (Indian Institute of Technology Kanpur) से एक फैकल्‍टी मेम्‍बर के रूप में शुरू हुई।

उसके बाद वे आईआईटी, खड़गपुर चले गए जहाँ उन्होंने 1975 तक काम कीये। यहाँ उन्होंने रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष के पद को संभाला। आईआईटी, खड़गपुर छोड़ने के बाद वे 1976 में ‘इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस’ बंगलुरु से जुड़ गए।

इस इंस्टीट्यूट के अंतर्गत ‘सॉलिड स्टेट एंड स्ट्रक्चरल केमिस्ट्री यूनिट’ स्थापित करने का श्रेय प्रो राव को जाता है। प्रो राव करीब 10 साल तक (1984-94) इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस’ के निदेशक के पद पर आसीन रहे।

वे ‘जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय’ में भी प्रोफेसर के रूप में कार्य किया।  

प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष

प्रो राव केवल एक महान रसायन विज्ञानी ही नहीं बल्कि एक उच्च कोटी के नीति निर्देशक भी हैं। उनका देश में वैज्ञानिक नीतियों के निर्धारण में अहम योगदान रहा। वे भारत सरकार में दो बार प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष रहे।

योगदान

उनका नाम सॉलिड स्टेट और मैटीरियल केमिस्ट्री के क्षेत्र में अहम योगदान के लिए विश्व के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों की सूची में शामिल है। राव साहब ने पदार्थ के गुणों और उनकी आणविक संरचना के बीच बुनियादी समझ विकसित करने में अहम रोल अदा की।

उन्हें विजिटिंग प्रोफ़ेसर के रूप में दुनियाँ के कई विश्वविद्यालयों में सेवा देने का मौका मिला। वे ऑक्सफ़ोर्ड, कैलिफ़ोर्निया, कैम्ब्रिज, सैंटा बारबरा और परड्यू विश्वविद्यालयों के विजिटिंग प्रोफ़ेसर रहे।

सन 1989 में ‘जवाहरलाल नेहरू सेंटर फ़ॉर एडवांस्ड साइंटिफ़िक रिसर्च सेंटर’ बेंगलुरु की स्थापना उन्ही की प्रयास की देन है। प्रो एन॰ आर॰ राव द्वारा ‘सॉलिड स्‍टेट केमिस्‍ट्री’ (Solid State Chemistry) पर कीये गए शोधकार्य ने उन्हें विश्व प्रसिद्ध बना दिया।

उन्‍होंने स्‍पेक्‍ट्रम से संबंधित उन्‍नत उपकरणों के द्वारा ठोस पदार्थों की भीतरी संरचनाओं पर गहन अध्ययन किया। साथ ही उन्होंने पदार्थ के आंतरिक स्तर पर होने वाली प्रक्रियाओं को समझा।

अबतक उन्होंने अपने जीवनकाल में ‘सॉलिड स्टेट’ और ‘मटेरियल कैमिस्ट्री‘  से संबंधित 45 पुस्तकों की रचना कर चुके हैं। साथ ही केमिस्‍ट्री के ऊपर उनके 1500 से भी ज्यादा शोधपत्र का प्रकाशन हो चुका है।

सम्मान व पुरस्कार

रसायन विज्ञान में उनके अहम योगदान को विश्वभर की विज्ञान संस्थानों ने उनकी प्रतिभा को सराहा। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने अपने सम्मान और पुरस्कारों से उन्हें पुरस्कृत किया।

प्रो राव को मिले सम्मान व पुरस्कार की लिस्ट बहुत लंबी है। उनके कुछ प्रमुख सम्मान व पुरस्कार की संक्षित जानकारी इस प्रकार है।

  • वर्ष 1961 – मैसूर विश्वविद्यालय ने प्रो राव को डी एस॰ सी॰ की उपाधि प्रदान की।
  • वर्ष 1964 – इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज का सदस्य चुना जाना।
  • वर्ष 1967 – ‘फैराडे सोसाइटी ऑफ इंग्लैंड’ द्वारा मार्लो मेडल प्राप्त हुआ।
  • वर्ष 1968 – प्रो0 राव को शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार प्रदान किया गया।  
  • वर्ष 1974 – भारत सरकार द्वारा नागरिक सम्मान पद्म श्री प्रदान किया गया।
  • वर्ष 1975 – उन्हें सी. वी. रमन पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • वर्ष 1980 – एस. एन. बोस मेडल से सम्मानित
  • वर्ष 1981 – रॉयल सोसायटी ऑफ़ केमिस्ट्री मेडल से नवाजे गए।
  • वर्ष 1985 – भारत सरकार द्वारा दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण।
  • वर्ष 1988 – जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार मिला।
  • वर्ष 1989 – मेघनाथ साहा मेडल से सम्मानित। 
  • वर्ष 1988 – यूनेस्को द्वारा आइंस्टीन मेडल से सम्मानित।
  • वर्ष 1999 – भारतीय विज्ञान कांग्रेस के शताब्दी पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • वर्ष 2000 – रायल सोसाइटी ने ह्युजेस पदक से मनोनीत किया।
  • वर्ष 2000 – भारत रत्न प्रोफेसर सी.एन.आर. राव को ‘अंतरराष्ट्रीय एनी पुरस्कार(International Eni Award)
  • वर्ष 2004 – भारतीय विज्ञान पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रथम भारतीय वैज्ञानिक।
  • वर्ष 2005 – डेन डेविड पुरस्कार से सम्मानित हुए।
  • वर्ष 2008 – उन्हें अब्दुससलाम मेडल प्राप्त हुआ।
  • वर्ष 2009 – रूस के ऑर्डर ऑफ़ फ़्रेंडशिप से सम्मानित हुए।
  • वर्ष 2010 – विलमहम वॉन होंफमैन मेडल प्राप्त हुए।
  • वर्ष 2011 – अरनेस्टो साइंस पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • वर्ष 2013 – भारत रत्न’ से सम्मानित तीसरे भारतीय वैज्ञानिक

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