Ramdhari Singh Dinkar In Hindi रामधारी सिंह दिनकर जीवनी

Ramdhari Singh Dinkar In Hindi रामधारी सिंह दिनकर जीवनी

रामधारी सिंह दिनकर वीर रस के महान कवि थे। उनकी कविता ऐसी थी जिनको सुनकर सोई हुई हृदय में भी देशभक्ति की भावना हिलोरें लेने लगती थी। रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी रचना से वीर रस की काव्य को एक नई उचाई प्रदान की।

Ramdhari Singh Dinkar In Hindi रामधारी सिंह दिनकर जीवनी
रामधारी सिंह दिनकर जीवनी Ramdhari Singh Dinkar In Hindi

आज भी उनकी वीर रस की रचना को सुनकर मन रोमांचित हो उठता है। आजादी की लड़ाई में उन्होंने अपने वीर रास के काव्य के द्वारा क्रांति की अग्नि को तब तक जलाए रखा, जब तक 15 अगस्त 1947 को हमारा भारत देश आजाद नहीं हो गया।

उनकी कविता को विद्वान से लेकर सधारण जन भी खूब पसंद करते थे। उनकी कविता जन-जन में लोकप्रिय था और हर तपके के लोगों के द्वारा पूरे भारत में पसंद किया गया। इस कारण से उन्हें राष्टकवि का दर्जा प्राप्त हुआ।

उन्होंने परतंत्र भारत में ही नहीं बल्कि आजादी के बाद भी, भारत और चीन के युद्ध के समय अपनी कविता से राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का काम किया था। रामधारी सिंह दिनकर गुलाम भारत में अपनी वीर रस के कविता के कारण विद्रोही कवि के रूप में जाने जाते थे।

वे गांधीजी से अत्यंत ही प्रभावित थे। दिनकर जी ने अपनी कविता के माध्यम से देश में क्रांतिकारी आंदोलन को स्वर देने का काम दिया। अपनी कविता के माध्यम से आजादी की लड़ाई में उन्होंने जो योगदान दिया उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

आइये Ramdhari Singh Dinkar In Hindi के शीर्षक वाले इस लेख के द्वारा दिनकर जी की जीवनी के वारें में विस्तारपूर्वक जानते हैं।

रामधारी सिंह दिनकर संक्षिप्त जीवनी –  Ramdhari Singh Dinkar biography in Hindi

  • पूरा नाम  – राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर
  • जन्म वर्ष – 23 सितम्‍बर 1908
  • जन्म स्थान – ग्राम-सिमरिया, जिला- बेगूसराय, बिहार
  • माता पिता – माता मनरूप देवी और पिता का नाम रवि सिंह
  • शिक्षा दीक्षा – प्राथमिक शिक्षा गाँव में और स्नातक पटना से
  • सम्मान – साहित्य अकादमी, ज्ञानपीठ पुरस्कार
  • निधन – 24 अप्रेल 1974
  • प्रमुख रचना – रश्मिरथी, कुरुक्षेत्र, उर्वसी, रेणुका, हुंकार आदि

रामधारी सिंह दिनकर जी का सम्पूर्ण जीवन परिचय

रामधारी सिंह दिनकर हिन्दी साहित्य के महान लेखक थे। जिनकी ख्याति आजादी से पहले एक विद्रोही कवि के रूप में थी। भारत की आजादी के बाद वे राष्ट्रकवि कहलाये। आइये आज हम उन महान विभूति के जीविनी को फिर से याद करते हैं।

दिनकर जी का जन्म व बचपन

भारत के राष्टकवि के रूप में प्रसिद्ध रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितम्‍बर 1908 को बिहार में   बेगूसराय जिले के सिमरिया नामक गाँव में हुआ था। उनके माता का नाम मनरूप देवी और पिता का नाम रवि सिंह था।

उनके पिता एक सधारण किसान थे। उनका बचपन खेतों, खलिहानों और बगीचों में बीता। जब वे मात्र दो-तीन वर्ष के थे तभी उनके पिता का अचानक निधन हो गया। इस प्रकार बचपन में ही उनके सर से पिता का साया उठ गया।

उनकी माँ ने उनका लालन-पालन कठिनाई पूर्वक लेकिन बड़े ही जतन से किया। दिनकर जी वास्तविक जीवन की कठोरता को बहुत ही नजदीक से अनुभव किया था।

दिनकर जी की शिक्षा दीक्षा

रामधारी सिंह दिनकर जी की आरंभिक शिक्षा गाँव के प्राथमिक विधालय में ही हुई थी। उसक बाद उन्होंने मोकामाघाट स्थित हाईस्कूल से सन 1928 ईस्वी में मेट्रिक की परीक्षा पास की। तत्पश्चात वे आगे की पढ़ाई के लिए वे पटना चले गये।

पटना विश्वविध्यालय से उन्होंने सन 1932 ईस्वी में इतिहास विषय में बी.ए.ऑनर्स की परीक्षा उत्तीर्ण किया। पढ़ाई के दौरान ही इनके मन-मस्तिसक में देश प्रेम की भावना जागृत हो गयी थी। इसी दौरान उनकी शादी हो गयी और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।

आरंभिक जीवन

रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar ) का आरंभिक जीवन कुछ इस प्रकार रहा। अपना स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे एक स्कूल में अध्यापक के पद पर नियुक्त हुए। उसके बाद वे सन 1934 ईस्वी में बिहार सरकार के सेवा में सब-रजिस्टार के पद पर नियुक्त हुए।

इस पद पर उन्होंने लगभग 9 साल तक रहे। इस 9 साल में कहा जाता है की उनका 22 बार स्थानतरण हुआ। आजादी के बाद वे मुजफ्फरपुर कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष के पद पर आसीन हुए। सन 1950 ईस्वी से लेकर सन 1952 ईस्वी तक वे इस पद पर रहे।

वे सन 1952 ईस्वी में राजसभा के सदस्य के रूप में चुने गये और दिल्ली आ गये। सन 1952 ईस्वी से सन 1964 ईस्वी तक 12 वर्षों तक वे राजसभा के सदस्य के रूप में देश की सेवा की।

बाद में वे सन 1964ईस्वी से लेकर सन 1965 ईस्वी तक एक साल के लिए भागलपुर विश्वविध्यालय के उपकुलपति बनाये गये। सन 1965 ईस्वी में वे पुनः दिल्ली लौग आए। वे सन 1965 ईस्वी से सन 1971 ईस्वी तक भारत सरकार के हिन्दी सलाहकार के रूप में काम किया।

सम्मान व पुरस्कारRamdhari Singh Dinkar in Hindi

रामधारी धारी सिंह दिनकर को उनकी सर्वश्रेष्ठ रचना कुरुक्षेत्र के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार ने सम्मानित किया। सन 1959 ईस्वी में उनकी रचना “संस्कृति के चार अध्याय” के लिए उन्हें साहित्य अकादमी के सम्मान से नवाजा गया।

सन 1959 में ही भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने उन्हने पदम विभूषण से विभूषित किया। भारत के राष्ट्रपति जाकिर हुसैन जब भागलपुर विश्व विध्यालय के कुलपति थे तब उन्होंने दिनकर जी को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया था।

इसक साथ ही राजस्थान विध्यापीठ ने उन्हें साहित्य चूड़ामणि के सम्मान से भी सम्मानित किया। उनकी सर्वश्रेष्ट रचना उर्वसी के लिए भारत के साहित्य के क्षेत्र में सबसे बड़े सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

उनके बारें में हरिवंश राय बच्चन जी ने कहा कि, दिनकर जी को एक नहीं बल्कि  पद्य, गद्य, भाषा और हिन्दी-सेवा के लिये अलग-अलग ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलनी चाहिये। वे लगातार तीन बार राजसभा से सांसद चुने गये।

भारत सरकार ने उन्हें राष्टकवि की पदवी प्रदान की। बर्ष 1999 ईस्वी में भारत सरकार ने उनके सम्मान में उनके नाम पर डाक टिकट जारी किया था।

Ramdhari Singh Dinkar In Hindi रामधारी सिंह दिनकर जीवनी

दिनकर जी की रचनायें –

रामधारी सिंह दिनकर की प्रथम तीन काव्य-संग्रह ‘रेणुका’, ‘हुंकार’ और ‘रसवन्ती’ प्रमुख हैं। ये काव्य-संग्रह उनके आरम्भिक आत्ममंथन के समय की रचनाएँ हैं। इन काव्य संग्रहों के अलावा दिनकर जी ने अनेक प्रबन्ध काव्यों की भी रचना की है, जिनमें ‘कुरुक्षेत्र’, ‘रश्मिरथी’ और ‘उर्वशी’ का नाम प्रमुख हैं।

दिनकर जी की कवितायें – Ramdhari Singh dinkar poems in Hindi

रामधारी सिंह “दिनकर” जी की प्रमुख कविता संग्रह में निम्नलिखित कविता प्रमुख हैं। उनके पहला काव्य संग्रह विजय संदेश सन 1928 ईस्वी मे प्रकाशित हुआ था। आइये जानते हैं उनके प्रमुख काव्य संग्रह के नाम :-

विजय संदेश (1928), रेणुका  (1935), हुंकार  (1938), रसवन्ती  (1939), द्वन्द्वगीत  (1940), कुरुक्षेत्र  (1946), धूपछाँह (1946), सामधेनी  (1947),बापू  (1947), इतिहास के आँसू  (1951), धूप और धुआँ  (1951), रश्मिरथी (1954), दिल्ली (1954), नील कुसुम (1955), नये सुभाषित1957), सीपी और शंख (1957), चक्रवाल (1956)

दिनकर जी की बाल कविताएँ : – Ramdhari Singh Dinkar in Hindi

रामधारी सिंह दिनकर जी की बाल कविताओं में चांद का कुर्ता, नमन करूँ मैं, सूरज का ब्याह, चूहे की दिल्ली-यात्रा, मिर्च का मज़ा आदि प्रमुख हैं। विस्तृत रूप में जानने के लिए hi.wikipedia.org

दिनकर जी की गद्य रचना

रामधारी सिंह दिनकर की गद्य रचना में प्रमुख हैं

टूटी की ओर (1946), चित्तोड़ का साका (1948), अर्धनारीश्वर (1952), रेती के फूल (1954), भारत की सांस्कृतिक कहानी (1955), हमारी सांस्कृतिक एकता (1955), उजली आग (1956), संस्कृति के चार अध्याय (1956), देश-विदेश (1957), वेणु वन (1958), काव्य की भूमिका (1958), वट-पीपल (1961), मेरी यात्राएँ (1971), भारतीय एकता (1971), विवाह की मुसीबतें 1973

रामधारी सिंह दिनकर का निधन Ramdhari Singh Dinkar in Hindi

भारत के महान हस्ती राष्ट्रकवि के रूप में विख्यात रामधारी सिंह दिनकर जी का 24 अप्रेल 1974 को निधन हो गया। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं लेकिन हिन्दू साहित्य में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। दोस्तों यह लेख आपको कैसा लगा अपने विचार से जरूर अवगत करायें।

इन्हें भी पढ़ें – सूरदास जी का जीवन परिचय – http://nikhilbharat.com/?p=2195

Leave a Comment