रजिया सुल्तान का इतिहास, प्रेम कहानी | Razia Sultan History In Hindi

रजिया सुल्तान जीवन परिचय - Razia Sultan History In Hindi

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रजिया सुल्तान कौन थी (Razia sultan kaun thi)

रजिया सुल्तान दिल्ली (Razia Sultan ) की राजगद्दी पर बैठने वाली भारत की प्रथम महिला शासक थी। मध्यकालीन दौर में जब दिल्ली सल्तनत का बोलबाल था, औरतों का घर से निकलने की आजादी नहीं थी।

वेगमों को महल के अंदर ही सीमित रखा  जाता था। उस दौर में रजिया सुल्तान ने महल से बाहर निकलते हुए अपने देश की गद्दी पर विराजमान हुई थी। उसने अपने देश की बागडोर को भली भांति संभाला।

भारत के इतिहास में रज़िया सुल्तान का नाम एक कुशल प्रशासक के रूप में होती है। तेज और बुद्धिमान रजिया वेगम अपने आप को पुरुष से कम नहीं समझती थी। वह एक वीर योद्धा थी तथा उन्हें शस्त्र विध्या में महारत हासिल थी।

वह पुरुष शासक की तरह राज-दरबार जाती और शासन का नेतृत्व करती। दिल्ली की पहली महिला शासक रजिया सुल्तान का इतिहास पढ़ने से पता चलता है की 1236 ईस्वी से लेकर 1242 ईस्वी तक उसका शासनकाल रहा।

उसने दूसरे सुल्तान के वेगम की तरह अपने नाम के साथ सुलताना टाइटल नहीं रखा। बल्कि पुरुष वाला टाइटल ‘सुल्तान’ रखा और वे रजिया सुल्तान कहलाई। उन्होंने अन्य वेगम की तरह पर्दा प्रथा को भी नहीं अपनाया।

आइये इस लेख में दिल्ली की पहली महिला शासक रजिया सुल्तान किसकी बेटी थी, रजिया सुल्तान का इतिहास, रजिया सुल्तान की प्रेम कहानी आदि के बारें में बिस्तार से जानते हैं।

रजिया सुल्तान का इतिहास, प्रेम कहानी | Razia Sultan History In Hindi
ररजिया सुल्तान फिल्म (प्रतीकात्मक) Image credited to etrends

रजिया सुल्तान का इतिहास व संक्षिप्त जीवनी RAZIA SULTAN IN HINDI

पूरा नाम रजिया सुल्तान या रजिया सुल्ताना
जन्म वर्ष 1205 ईस्वी
मृत्यु 14 अक्टूबर 1240 ईस्वी
वंश गुलाम वंश
माता पिता का नाम माता कुतुब वेगम और पिता इलतुमिस
शासन कालसन 1236 ईस्वी से 1240 ईस्वी तक

रजिया सुल्तान किसकी बेटी थी

दिल्ली की गद्दी पर बैठने वाली भारत की पहली महिला शासिकारजिया सुल्तान गुलाम वंश की थी। रजिया सुल्तान के पिता का नाम शम्स-उद-दीन इलतुमीस (Iltutmish) था। रजिया ने दिल्ली पर 3 साल सा ज्यादा समय तक राज किया।

पहली महिला शासिका रजिया सुल्तान का इतिहासRAZIA SULTAN HISTORY IN HINDI

रजिया के अंदर एक कुशल प्रशासक का गुण और राजकाज में पहले से रुचि थी। इसी कारण से इलतुमीस ने अपने मरने के पहले अपनी बेटी रजिया सुल्तान को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था।

क्योंकि इलतुमीस को अपने वेटे से ज्यादा अपनी बेटी रजिया सुल्तान पर भरोसा था। लेकिन इनतुमिस की मृत्यु के बाद दिल्ली सल्तनत के मंत्रियों ने एक महिला को राज्य का उत्तराधिकारी बनाना अपने शान के खिलाफ समझा।

इस कारण रजिया के सौतेले भाई  रक्नुद्दीन फ़िरोज़ शाह को दिल्ली की गद्दी पर बिठाया गया। रक्नुद्दीन फ़िरोज़ हमेशा शराव के नशे धुत रहने वाला विलासपूर्ण जीवन जीने का आदि था।

उन्हें राज्य काज में ज्यादा दिलचसपी नहीं थी। इस कारण प्रतिदिन जनता में नाराजगी बढ़ने लगी। रुकनुदीन फिरोज के शासन के मात्र 6 माह अंदर ही जनता उनसे नाखूश हो गयी।

उनके लचर शासन व्यवस्था को लेकर जनता में विद्रोह का माहौल खड़ा हो गया। अंततः सन 1236 ईस्वी में रुकनुदीन फिरोज की हत्या कर दी गयी।

इधर रजिया को जब गद्दी नहीं मिली, तब वह जनता के बीच जाकर अपने पक्ष में माहौल बनाने लगी। दिल्ली के गद्दी पर बैठने से पहले रजिया ने बहुत ही कुशलता से दिल्ली की जनता को अपने पक्ष में कर लिया था।

फलतः रुकनुदीन फिरोज की हत्या के बाद दिल्ली की गद्दी पर रजिया सुल्तान आसीन होकर राजकाज संभालने लगी। अपने कुशल नेतृत्व क्षमता के कारण माना जा रहा था की वे दिल्ली सल्तनत की सबसे सफल शासक साबित होंगी।

रजिया सुल्तान पुरुषों की तरह वेश धारण करती और खुले दरबार में राज-काज का नेतृत्व करती। लेकिन कुछ कारणों से वे षड्यन्त्र का शिकार हो गयी जिस कारण वे अपने सफल मुकाम तक नहीं पहुच पायी।

रजिया सुल्तान सन 1236 ईस्वी से लेकर सन 1240 ईस्वी तक दिल्ली के तख्त पर विराजमान रही। इस दौरान उन्होंने विकास के कई काम किए।

रजिया सुल्तान की उपलब्धि – Razia sultana ke karya in hindi language

भले ही रजिया सुल्तान ने करीब साढ़े तीन वर्ष शासन किया। लेकिन इतनी कम समय वर्ष तक सत्ता संभालने के बावजूद भी उन्होंने अपने राज्य में कई उल्लेखनीय कार्य किए।

उन्होंने बड़ी ही कुशलतापूर्वक अपने राज्य का नेतृत्व करते हुए कानून व्यवस्था को दुरुस्त किया। यातायात को सुगम बनाने के लिए सड़के बनवाई। पेयजल के लिए जगह-जगह कुएं खुदवाए।

उसने अपने राज्य में स्कूलों, पुस्तकालयों का निर्माण कराया। इसके साथ उन्होंने अपने राज्य में कला और संस्कृति को भी बढ़ावा दिया।

तभी तो कुछ इतिहासकर मानते हैं की अगर तुर्क उनका साथ दिया होता और उनसे विद्रोह नहीं करता। तब रजिया सुलतान का नाम दिल्ली सल्तनत के सबसे कुशल और ताकतवर शासक में सुमार होती।

रजिया सुल्तान का इतिहास, प्रेम कहानी | Razia Sultan History In Hindi
रजिया सुल्तान जीवन परिचय – Razia Sultan History In Hindi (Representative Image credited to etrends )

रजिया सुल्तान की प्रेम कहानी

इतिहास में रजिया सुल्तान की प्रेम कहानी की भी चर्चा की जाती है। कहा जाता है की रजिया का प्रेमी था याकूत ? जिसे रजिया सुल्तान प्यार करती थी।

याकूत रजिया सुल्तान को घुड़सवारी सिखाता था । इस दौरान दोनों की नजदिकियाँ बढ़ गयी। धीरे धीरे रजिया सुल्तान की प्रेम कहानी की बात फैल गई। कहते हैं की बाद में रजिया सुल्तान की शादी याकूत से हुई थी।

लेकिन कुछ इंतिहासकार याकूत को रजिया सुल्तान का प्रेमी नहीं बल्कि विश्वासपात्र मानते हैं। जो हमेशा साये की तरह रजिया के साथ रहता था।

शक्तिशाली तुर्क लड़ाकों का गुट जो चहालग़नी के नाम से जाना जाता था। रजिया से नाराज़ हो गया क्योंकि रजिया याकूत से प्रेम करती थी।

रजिया सुल्तान के पतन के कारण 

इतिहासकर रजिया सुल्तान के असफलता के कारण को तीन मुख्य वजह मानते हैं। पहला पुरुष प्रधान देश में एक महिला का गद्दी पर आसीन होना और दूसरा गैर तुर्की याकूत से रजिया का प्रेम और तीसरा तुर्की सरदारों का विरोध।

तुर्की सरदारों ने रजिया सुल्तान का विरोध क्यों किया

रजिया के अंदर वे सारे गुण मौजूद थे जो एक राजा में होना चाहिए। लेकिन तुर्की सरदारों ने रजिया सुल्तान का विरोध क्यों किया। क्योंकि कुछ तुर्क लड़ाके को रजिया का एक महिला होकर राजगद्दी पर आसीन होना पसंद नहीं था।

कहते हैं की एक महिला के आगे नतमस्तक होना वे अपने शान के खिलाफ समझते थे।

रजिया सुल्तान के शासनकाल की प्रमुख घटनाएं

दूसरी तरफ गुलाम याकूत के साथ उसकी प्रेम प्रसंग को लेकर भी तुर्क उनके शत्रु बन गए। क्योंकि रजिया बेगम का प्रेमी ‘याकूत’ तुर्क नहीं था। रजिया सुल्तान के पास उसकी नजदीकियों को देखकर तुर्क जलने लगे और विद्रोह कर बैठे।

इस प्रकार तुर्क विद्रोही रजिया सुल्तान को दिल्ली सल्तनत की गद्दी से बेदखल करने की योजना बनाने लगे। तुर्क विद्रोही में अल्तूनिया का नाम प्रमुख था।

सर्वप्रथम अल्तुनिया ने रजिया सुल्तान की सत्ता को अस्वीकार कर किया। फलतः रजिया सुल्तान और अल्तुनिया के बीच जंग हुआ। इस जंग में रजिया का प्रेमी याकूत मारा गया और रजिया को बंदी बना लिया गया।

एक शर्त के तहद अल्तुनिया और रजिया के बीच समझौता हुआ। इधर दिल्ली के राज गद्दी को रजिया के भाई बहराम ने जबरन अधिकार कर लिया। रजिया ने अल्तुनिया के साथ मिलकर अपने राज्य को वापस पाने के लिए जंग किया। इस जंग में रजिया की हार हुई।

रजिया सुल्तान की मृत्यु कैसे हुई – Death of Razia Sultan

कुछ विद्वानों के अनुसार बहराम से लड़ाई तथा रजिया सुल्तान की मृत्यु के मध्य एक महिने का अंतर था। इतिहासकार इस एक महिने को भूल वश उल्लेख नहीं कर पाए। फलतः लड़ाई के ठीक बाद उसकी मृत्यु समझ लिया गया।

जबकि कुछ इतिहासकार का कहना है की अल्तुनिया के साथ लड़ाई में हारने के बाद याकूत और रजिया सुल्तान राजपूताना की तरफ भाग गये। लेकिन रजिया और उनके साथी याकूत को राजस्थान के टोंक में घेर लिया गया, जहाँ उनकी मृत्यु हो गयी।

जानें रजिया सुल्तान का मकबरा कहां है Razia sultan Tomb in HIndi

दिल्ली के गद्दी पर बैठने बाली पहली और आखरी महिला शासक रजिया सुल्तान के कब्र का दावा तीन अलग-अलग स्थान पर किया जाता रहा है। रजिया सुल्तान(Razia Sultan ) की कब्र को लेकर इतिहासकारों में मतांतर है।

रजिया की मजार को कुछ इतिहासकर कैथल, कुछ दिल्ली और कुछ विद्वान राजस्थान के टोंक में बताते हैं। रजिया सुल्तान की कब्र के तीनों स्थान के दावे में इतिहासकर अपने अपने तर्क देते हैं।

इन तीनों जगहों के निरीक्षण से इन मजारों पर अरबी फारसी में रजिया के नाम लिखे होने के संकेत पाये जाते हैं। लेकिन इस बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलता जिससे साबित हो सके की यह कब्र वास्तव में रजिया सुल्तान का ही है।

कहते हैं की टोंक, राजस्थान में रजिया सुल्तान और उसके विश्वासपात्र याकूत की मजार के कुछ ठोस प्रमाण मिले हैं। जिस कब्र पर फारसीभाषा में ’सल्तने हिंद रजियाह’ उकरित किया हुआ है।

उस मजार के पास ही एक दूसरी छोटी मजार स्थित है। कयास लगाया जाता है की यह मजार याकूत की हो सकती है। उपयुक्त मजार की विशालता, बनावट और उस पर उकेरी गयी शव्द के कारण इसे रजिया सुल्तान की मजार कहा जाता है।

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रजिया सुल्तान के असफलता के कारण

दिल्ली की बागडोर संभालने वाली रज़िया सुल्तान के शासनकाल कुछ ही साल तक रहा। लेकिन जबतक वे सत्तारूढ़ रही शासन की बागडोर को भलीभाँति संभाला। रज़िया सुल्तान में शासक के वे सभी गुण थे।

जो उन्हें अपने पिता से विरासत में प्राप्त हुआ था। लेकिन कहते हैं की रजिया का महिला होना इन गुणों पर भारी था।  अत: उसके शासन का पतन उसकी व्यकतिगत असफलता नहीं कही जा सकती है। रजिया सुल्तान के कहानी के ऊपर movie और सीरियल भी बनी है।

F.A.Q

रजिया सुल्तान किसकी पुत्री थी ?

रजिया सुल्तान दिल्ली के शासक शम्स-उद-दीन इलतुमीस (Iltutmish) की पुत्री थी। रजिया को उनके पिता ने अपना उतराधिकारी घोषित किया था।

रजिया सुल्तान किस वंश की थी ?

रजिया सुल्तान के पिता शम्स-उद-दीन इलतुमीस गुलाम वंश से थे। रजिया उनकी बेटी थी।

रजिया सुल्तान को किस वर्ष गद्दी से हटाया गया?

तुर्कों ने विद्रोह कर 1240 में रजिया सुल्तान को गद्दी से हटा दिया।

रजिया सुल्तान ने कितने वर्ष तक सत्ता संभाली?

रजिया सुल्तान ने साढ़े तीन वर्ष तक शासन किया था।

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