मोहम्मद गौरी की मृत्यु कैसे हुई, पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को कैसे मारा Muhammad Ghori (death history) biography in Hindi

मोहम्मद गौरी की मृत्यु कैसे हुई, पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को कैसे मारा Muhammad Ghori

मोहम्मद गौरी की मृत्यु कैसे हुई, पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को कैसे मारा, (जीवनी, जन्म तारीख व स्थान, शासन, इतिहास, आक्रमण ) (Muhammad of Ghor Biography, history, death, dynasty, family, date of birth, birth place, religion, history)

मुहम्मद गोरी साम्राज्य का सुल्तान था इसका पूरा नाम मुइज़ एद-दीन मुहम्मद था, जो गोर के मुहम्मद के नाम से भी इतिहास में जाना जाता है। इन्होंने भारत पर अनेकों बार आक्रमण किया।

भारतीय उपमहाद्वीप में मुस्लिम शासन स्थापित करने का श्रेय मुहम्मद गोरी को ही दिया जाता है,मुहम्मद गोरी को एक शक्तिशाली और महत्वाकांक्षी शासक के रूप में याद किया जाता है।

उन्होंने सैन्य विजय के माध्यम से अपने साम्राज्य का विस्तार किया। मुहम्मद गोरी एक तुर्क शासक था जो ग़ौर, वर्तमान अफगानिस्तान का रहने वाला था। उन्होंने 12वीं शताब्दी में घुरिद वंश की स्थापना की थी।

भारत में उन्हें अपने सैन्य अभियानों के लिए जाना जाता है। उन्होंने करीब भारत पर 18 बार आक्रमण किया उनका पहला हमला 1191 में राजस्थान के हिंदू राजपूत राज्य पर हुआ था। मुहम्मद गोरी पृथ्वीराज के हाथों करीब 17 बार हारा था।

मोहम्मद गौरी की मृत्यु कैसे हुई, पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को कैसे मारा Muhammad Ghori
मोहम्मद गौरी की मृत्यु कैसे हुई, पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को कैसे मारा Muhammad Ghori

लेकिन अंत में उन्होंने जयचंद्र के सहयोग से पृथ्वीराज को हराने में सफल रहा। उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीपीय क्षेत्रों पर 1206 ईस्वी तक शासन किया। बाद में उन्होंने अपनी जीते हुए भूभाग को कुतुब उद्दीन एबेक को सौंपकर वापस गजनी चला गया।

मोहम्मद गौरी का जीवन परिचय Muhammad Ghori biography in Hindi

मुहम्मद गोरी का जन्म वर्तमान अफगानिस्तान के घोर क्षेत्र में हुआ था। उस बक्त यह क्षेत्र गजनवी साम्राज्य का एक हिस्सा था। उनके जन्म तिथि को लेकर इतिहासकार एकमत नहीं है।

लेकिन माना जाता है उनका 1160 के दशक में हुआ था। पहेल वह तुर्किक घुरिद कबीले का एक सदस्य था। बाद में उन्होंने खुद को इस क्षेत्र में एक शक्ति के रूप में अपने को स्थापित किया।

कहा जाता है की गौरी ने अपने पिता की मृत्यु के बाद घुरिद कबीले का कमान संभाला। उन्होंने गजनवी साम्राज्य और अन्य पड़ोसी राज्यों के खिलाफ आने अभियान की शुरुआत की।

उन्होंने ख़्वारज़्मियन साम्राज्य और सेल्जुक तुर्कों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। फलतः उन्होंने ईरान और इराक के कुछ हिस्सों पर अपना आधिपत्य जमाया।

वर्ष 1180 के दशक में गोरी ने अपना ध्यान भारतीय उपमहाद्वीप की ओर लगाया।

मोहम्मद गौरी का इतिहास Muhammad ghori history

उनका पहला हमला 1191 में राजस्थान के हिंदू राजपूत राजा के विरुद्ध था। उनका यह हमला भारतीय उपमहाद्वीप पर पहला मुस्लिम हमला माना जाता है।

इस हमले के बाद भारत में मुस्लिम शासन की शुरुआत मानी जाती है। इस हमले के बात उनका वर्तमान पाकिस्तान और उत्तरी भारत के कुछ भागों पर अधिकार हो गया।

घिरे धीरे उनका साम्राज्य का विस्तार भारतीय उपमहाद्वीप में सिंधु नदी से लेकर गंगा नदी तक हो गया। मुहम्मद गोरी ने 1192 ईस्वी में तराइन की दूसरी लड़ाई जो अजमेर और दिल्ली के राजपूत साम्राज्य के शासक पृथ्वीराज चौहान के बीच हुआ था।

इस लड़ाई में उन्होंने चौहान को हराया था और भारत में मुस्लिम शासन के दरवाजे खोल दिए। इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान को बंदी बना लिया गया और बाद में गोरी द्वारा मार डाला गया।

गोरी के पत्नियाँ और बच्चे के बारे में सटीक जानकारी नहीं मिलती है। गोरी की मृत्यु 1206 में मानी जाती है। उनके बाद उसके भाई ने गद्दी संभाला। लेकिन तब तक मुगलवंश का उदय हो चुका था।

फलतः घुरिद राजवंश को मुगलों जैसे अन्य मुस्लिम राजवंशों द्वारा खत्म कर दिया गया।

मोहम्मद गौरी के भारत पर आक्रमण के कारण

मोहम्मद गौरी का आक्रमण का उद्देश्य मोहमद गजनी के समान ही था। वे भारत के अपार धन को प्राप्त करना चाहते थे। इसी कारण से उन्होंने भारत पर आक्रमण कीया और स्थायी शासन स्थापित करने का प्रयास कीया।

मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान का युद्ध

मुहम्मद गोरी ने अपने भारत अभियान के क्रम में पाकिस्तान होते हुए भटिंडा तक चले आए। उसने दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान केपास संदेश भेजा की या तो पृथ्वीराज चौहान इस्लाम धर्म कबूल कर घुरिद शासन को स्वीकार कर लें,

अथवा परिणाम के लिए तैयार रहें। लेकिन पृथ्वीराज चौहान ने उनकी शर्त को खारिज कर पंजाब की तरफ कूच करने का आदेश दिया। इस दोनों की सेना के बीच तराइन के मैदान में जमकर लड़ाई हुई।

पृथ्वीराज चौहान की विशाल सेना के सामने गौरी की सेना से टिक न सकी। फलतः गौरी को हार का मुख देखना पद और घायल अवस्था में अपनी जान बचा कर भाग गए।

इस प्रकार तराइन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान ने विजय की पताका लहराई। मोहम्मद गोरी ने भारत पर कई आक्रमण किया। कहा जाता है की पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गोरी को करीब 17 बार युद्ध में हराया था।

लेकिन तराईन के द्वितीय युद्ध गौरी ने राजा जयचंद्र से हाथ मिला लिया। हालांकि बाद में उन्होंने जयचंद्र को भी धोखा दे दिया और उन्हें जान से मार दिया। गौरी ने जयचंद्र के साथ मिलकर पृथ्वीराज पर हमला कर दिया।

पृथ्वी राज ने इस बार कई राजपूत राजाओं से मदद का संदेश भेजा। लेकिन तराईन के मैदान में दोनों सेना के बीच भयंकर युद्ध हुआ। चूंकि गौरी को पृथ्वीराज के सेना का कुछ गुप्त राज का पता चल चुका था।

फलतः इसका लाभ उठाते हुए उन्होंने युद्ध में पृथ्वीराज चौहान को हरा दिया और पृथ्वीराज को पकड़ कर बंदी बना लिया गया। इस प्रकार पृथ्वीराज चौहान की हार के साथ ही भारत में मुस्लिम शासन की शरुआत हो गई।

मोहम्मद गौरी की मृत्यु कैसे हुई Muhammad ghori death


अफ़गान के शासक मुहम्मद गौरी की मृत्यु 1206 ईस्वी में हुई थी। मुहम्मद गौरी की मृत्यु कैसे और किस परिस्थितियाँ में हुई इसकी सटीक जानकारी नहीं मिलती। लेकिन कुछ विवरणों के अनुसार वह तुर्कमेनिस्तान में ख़्वारज़्मियन साम्राज्य के खिलाफ लड़ते हुए मारा गया था।

उनके बारे में दूसरी कविदंती यह है की भारत में एक अभियान से लौटते समय उनके अपने सैनिकों ने उन्हें मार दिया था। उनकी मृत्यु के बाद मंगोलों का उदय और घुरिद वंश का पतन हो गया।

पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को कैसे मारा

उनके मृत्यु के बारें में तीसरी बात यह भी कही जाती है की उन्होंने जब पृथ्वीराज चौहान को बंदी बनाकर कैद कर रखा था। तब एक दिन पृथ्वीराज चौहान ने अपने दोस्त चंद्रवरदई की मदद से मुहमद गौरी की हत्या कर दी थी।

कहते हैं की जब गौरी, पृथ्वीराज चौहान को बंदी बनाकर अपने देश गजनी ले गए। तब दिनों के बाद उनके परम मित्र और दरबारी कवि चंदबरदाई गजनी गए।

गजनी में उन्होंने मोहम्मद गौरी को पृथ्वीराज के अद्भुत विद्या शब्द भेदी के बारें में बताया। चंदबरदाई की बात मानकर गौरी ने पृथ्वीराज चौहान की इस कला को देखना चाहा।

फलतः पृथ्वीराज को गजनी के दरवार में लाया गया। पृथ्वीराज चौहान को अंधा कर दिया गया था। लेकिन उन्होंने अपने मित्र चंदबरदाई को उनकी आवाज से पहचान लिया। चंदबरदाई ने अपनी सारी बातें पृथ्वीराज चौहान को समझा दिया था।

उन्होंने कविता की पंकित के माध्यम से बताया की मोहम्मद गौरी किधर और कितनी ऊंचाई पर बैठा हुआ है। बस मौका का इंतजार था। पृथ्वी राज को जब गौरी ने बर्तन के आवाज पर निशाना लगाने का आदेश दिया।

तब उन्होंने मोहम्मद गौरी के आवाज से उसकी दूरी और दिशा का अंदाज कर लिया। उन्होंने बिना किसी देरी के अपना तीर मुहम्मद गौरी की तरफ छोड़ दिया। तीर छूटते ही सीधे गौरी के गले में लगी और मोहम्मद गोरी वहीं मारा गया। बाद में पृथ्वीराज चौहान की भी मृत्यु हो गई।

इन्हें भी पढ़ें – धरती के वीर योद्धा पृथ्वीराज चौहान के मृत्यु कैसे हुई

मोहम्मद गौरी से सम्बंधित प्रश्न (FAQ)

Q- मोहम्मद गौरी को किसने और कब मारा?

Ans- इस बात सटीक प्रमाण नहीं मिलता की गौरी को पृथ्वीराज चौहान ने मारा था अथवा उन्हें उनकी सैनिकों ने ही हत्या कर दी थी।

Q-पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच कितने युद्ध हुए?

Ans- पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच करीब 18 बार युद्ध हुए थे।

Q-मोहम्मद गौरी भारत पर कितनी बार आक्रमण किया?

Ans- मोहम्मद गौरी भारत पर 18 बार आक्रमण किया, जिसमें तराईन का युद्ध सबसे प्रसिद्ध है।

Q-मोहम्मद गौरी को सबसे पहले किसने पराजित किया?

Ans- महम्मद गौरी ने 1178 ई. में जब गुजरात पर किया तब उनका सामना मूलराज द्वितीय से हुआ। उन्होंने गौरी को आबू पर्वत की तराई में हराया था। फलतः मोहम्मद गौरी को सबसे पहला पराजय भारत के मूलराज द्वितीय का हाथों में हुई।

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मोहम्मद गौरी किस वंश का शासक था
मोहम्मद गौरी कौन था


मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान १५०

मोहम्मद गौरी का जन्म कहाँ हुआ था
मोहम्मद गौरी का सेनापति कौन था
मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान का युद्ध

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