सोमनाथ मंदिर को तोड़ने और लूटने वाले महमूद गजनवी की मृत्यु कैसे हुई। Mahmud Ghaznavi in Hindi

सोमनाथ मंदिर को तोड़ने और लूटने वाले महमूद गजनवी की मृत्यु कैसे हुई। Mahmud Ghaznavi in Hindi

Facebook
WhatsApp
Telegram

अगर आप महमूद गजनवी कौन था, महमूद गजनवी की मृत्यु कैसे हुई, महमूद गजनवी की मृत्यु कब हुई, महमूद गजनवी को किसने मारा था आदि सहित उनकी जीवनी के बारें में जानना चाहते हैं तो यह लेख मददगार हो सकता है।

भारत के लुटेरा के नाम से प्रसिद्ध महमूद गजनवी गजनी अफगानिस्तान का रहने वाला था। उसका साम्राज्य ईरान, अफगनिसथान, पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत तक फैला था।

गज़नवी वंश का शासक सुल्तान महमूद गजनवी तुर्क मूल का था। वह एक सुन्नी मुसलमान था तथा पूर्व तक सुन्नी इस्लामी साम्राज्य स्थापित करने में वह सफल रहा। भारत में उन्होंने 17 बार आक्रमण कर यहाँ हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया।

महमूद गजनवी की मृत्यु कैसे हुई।  Mahmud Ghaznavi in Hindi
महमूद गजनवी की मृत्यु कैसे हुई। Mahmud Ghaznavi in Hindi

उन्होंने राजा-राजवारों के खजानों के अलावा मंदिर को भी नहीं छोडा। गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर पूजा कर रहे हजारों लोगों को मौत के नींद सुला दिया।

उन्होंने सोमनाथ मंदिर को तोड़कर शिवलिंग को तोड़ डाला। मंदिर को गिरा कर उनसे कीमती समान निकाल का अपने साथ ले गया। कहा जाता है की सोमनाथ मंदिर के लूट से उन्हें सबसे अधिक धन की प्राप्ति हुई थी।

लेकिन अंत समय में उनकी मौत बड़ी ही दर्दनाक तरीके से हुए और मरते मरते उन्हें अपनी गलती का एहसास हो गया। आइये इस लेख में जानते हैं की इस क्रूर आक्रमणकारी महमूद गजनवी को किसने मारा था। इसकी मृत्यु कैसे और कब हुई विस्तार से।

महमूद गजनवी का जीवन परिचय

महमूद गज़नवी का जन्म 1 नवम्बर 971 ई को वर्तमान अफ़गानिस्तान के गज़नी में हुआ था। महमूद गजनवी के पिता का नाम सुबुक्तगीन गजनवी वंश का था। सुबुक्तगीन के समय में भी गज़नी का खूब विस्तार हुआ।

सुबुक्तगीन के निधन के बाद महमूद गज़नवी मात्र 27 साल मई उम्र में गद्दी पर बैठा। उसने सुल्तान और यामीन उल मिल्लत की उपाधियाँ धारण की थीं।

उसका साम्राज्य उत्तर में आमू दरिया, पूरब में सिन्धु नदी और दक्षिण में अरब सागर तक विस्तृत था। उन्होंने अपने साम्राज्य के विस्तार हेतु धन की जरूरत पूरी करने के लिए उन्होंने भारत पर आक्रमण कर लूटने की योजना बनाई। 

उस बक्त भारत काफी समृद्ध था और सोने की चिड़ियाँ कहलाती थी। उन्होंने बगदाद के खलीफा के आदेश पर भारत पर प्रत्येक वर्ष चढ़ाई कर लूटने का प्रण किया और भारत पर एक नहीं 17 बार आक्रमण कर खूब लूटा।

महमूद गजनवी के बारें में

पूरा नाम – महमूद गज़नवी
जन्म – 1 नोवेम्बर  971
जन्मस्थान – ग़ज़नी, अफगानिस्तान
पिता का नाम सुबुक्तगीन – सुलतान सुबुक तिगिन
वंश – गजनवी
भारत पर आक्रमण – 17 बार
उपाधि – सुल्तान
महमूद गजनवी के दरबारी कवि – फिरदौसी
शासनकाल – 997 से 1030 तक
मृत्यु – 1030 मलेरिया से  

महमूद गजनवी का इतिहास

महमूद गजनवी का शासन काल 997 से लेकर 1030 ईस्वी तक माना जाता है। उनका साम्राज्य उत्तर में आमू दरिया से लेकर पूर्व में सिन्धु नदी तक और दक्षिण में अरब सागर तक फैला हुआ था।

सुल्तान की उपाधि धारण करने वाला वह पहला शासक माना जाता है। महमूद ग़ज़नी के समय में उनके साम्राज्य का विस्तार बहुत दूर तक था।

अल उत्बी द्वारा अरबी भाषा लिखित तारीख ए यामिनी में महमूद गज़नवी के पिता सुबुक्तगीन तथा उनके आरंभिक इतिहास का जिक्र मिलता है।

भारत का मध्यकालीन इतिहास से पता चलता है की सम्राट हर्षवर्धन, पुलकेशिन और राजा दाहिर के बाद भारत की तस्वीर तेजी से बदलने लगा।

इन सम्राटों के पतन के बाद भारत पर अरब और तुर्कों के हमले बढ़ने लगे। इसी क्रम में महमूद गजनवी का भारत पर आक्रमण हुआ।

महमूद गजनवी के आक्रमण का इतिहास

जिसने भारत पर 17 बार आक्रामण किये और यहाँ से ढेर सारे सोने चांदी हीरे जवाहरात लूट कर अपने देख ले गए। भारत पर महमूद गजनवी का प्रथम आक्रमण 1001 में हुआ था। उसके बाद उसने प्रतिवर्ष भारत पर आक्रमण किया।

हर आक्रमण में उन्होंने कत्लेआम मचाये। लोगों को काट मार कर अकूत संपत्ति अपने देश गजनी लूट कर ले गये। महमूद गजनवी का भारत पर अंतिम आक्रमण 1027 में हुआ। यह उनका 17 वां आक्रमण था।

इस दौरान उन्होंने पंजाब को अपने राज्य में सम्मिलित कर लिया साथ ही लाहौर का परिवर्तित कर महमूदपुर कर दिया था।

महमूद गजनवी के इन आक्रमणों के कारण भारत के राजवंश की आपसी कलह और दुर्बलता की पोल खुल गई। जिसने आने वाले समय के लिए मुस्लिम आक्रमण हेतु भारत का दरवाजा खोल दिया।

महमूद गजनवी का सोमनाथ पर आक्रमण

महमूद गजनवी का सबसे बड़ा आक्रमण 1026 ईस्वी में गुजरात में काठियावाड़ के पास सोमनाथ मंदिर पर था। गुजरात के पश्चिमी सीमा पर समुन्द्र तट के किनारे सोमनाथ महादेव का प्राचीन मंदिर अवस्थित है।

इस मंदिर का वर्णन स्कंद पुराण में भी मिलता है। 12 ज्योतिर्लिंग में एक गुजरात का यह मंदिर अपनी अपार संपत्ति के लिए विश्व प्रसिद्ध था। जिस वक्त गजनवी का आक्रमण हुआ उस समय काठियावाड़ के शासक चालुक्य वंश के भीम प्रथम थे।

उन्होंने गजनवी से मुकाबला करने के वजाय भाग खड़ा हुआ। कहा जाता है की जिस बक्त गजनवी ने इस मंदिर पर आक्रमण किया था उस बक्त हजारों भक्त मंदिर परिसर में मौजूद थे।

इस दौरान उन्होंने मंदिर के शिवलिंग को खंडित कर डाला। मंदिर को ध्वस्त कर उसमें से कीमती समान निकाल अपने साथ ले गया। उन्होंने हज़ारों पुजारी को मौत के घाट उतार दिया गया।

भारत के इतिहास में इस नरसंहार को कभी भुलाया नहीं जा सकता। मंदिर को तोड़कर उसमें लगे सोना, चांदी हीरे जवाहरात आदि कीमती रत्न वो तो लूट कर ले गये। लेकिन इस मंदिर पर आक्रमण और लूट के बाद वह ज्यादा वर्षों तक जीवित नहीं रहे।

महमूद गजनवी की कहानी

महमूद गजनवी हजारों आदमी का कत्ल कर भारत से संपत्ति लूट-लूट कर अपने खजाने भर दिए थे। लेकिन कहते हैं की महमूद गजनवी को मृत्यु के ठीक पहले अपनी गलती का एहसास हो गया।

जब उनकी मृत्यु निकट आई तब वे अपने दरवारी को बोले की मुझे उस खजाने के पास ले चलो जिसे मैंने दूर देश से लूटकर लाखों लोगों का कत्ल कर जमा किए थे।

तब महमूद गजनवी को उस खजाने के पास ले जाय जाता है जिसे देखकर उन्हें अपनी गलती का अहसास होता है।

जब मृत्यु के पहले फुट-फुट कर रोया था सुल्तान

जब गजनवी को सोने, चांदी, हीरा जवाहरात से भरे खजाने के पास ले जाय जाता है। तब वे खजाने में पड़े कीमती रत्न, सोने, चांदी, हीरा और जवाहरात को देखकर फुटफुट कर रोने लगते हैं। उन्हें अपनी गलती का अहसास हो चला था।

उसने कहा ये कीमती रत्न, सोने, चांदी, हीरा और जवाहरात जिसे मैंने  लोगों के खून बहाकर भारत से लूट कर लाया वह अव मेरे की काम के हैं। मैंने लूटकर अच्छा नहीं किया।

अगर लोगों की भलाई के लिए मैं काम करता, लोगों के बीच प्रेम पूर्ण रब का संदेश फैलता तब मेरे मरने के बाद भी लोग मेरा नाम लेते। आने वाला इतिहास मुझे लुटेरा कहकर गाली देगा।

महमूद गजनवी की मृत्यु कैसे हुई Mahmood Gajanavi Ki Mrityu

सोमनाथ पर आक्रमण के बाद मुस्किल से तीन वर्ष और वे जिंदा रहे। वे भारत पर अपने अंतिम आक्रमण के बाद मानसिक और असाध्य रोग के शिकार हो गए।

बाद में मलेरिया से पीड़ित हो गए इस प्रकार महमूद गजनवी की मृत्यु 30 अप्रेल 1030 को मलेरिया और असाध्य रोग के कारण हो गई।

उन्हें अपने दुष्कर्मों को याद कर घोर मानसिक संताप था। कहा जाता है की अपने मृत्यु के ठीक पूर्व वे अपने सिपाही के सहायता से अपने उस अपार खजाने के पास ले जाए गए। जिसे देखकर वे फुट-फुट रोने लगे।

F.A.Q

महमूद गजनवी किस वंश का था?

महमूद गजनवी, गज़नवी वंश का एक महत्वपूर्ण शासक माना जाता है।

महमूद गजनवी ने सोमनाथ पर आक्रमण कब किया?

महमूद गजनवी का अंतिम आक्रमण सोमनाथ था। सोमनाथ पर उन्होंने 1026 में आक्रमण किया।

महमूद गजनवी के समय कन्नौज का शासक कौन था?

महमूद गजनवी के आक्रमण के समय कन्नौज का शासक राज्यपाल था।

महमूद गजनवी कौन था उसने भारत में आकर क्या किया

महमूद गजनवी वर्तमान अफगानिस्तान के गजनी का शासक था। उन्होंने भारत पर 17 पर चढ़ाई की। भारत आकार उन्होंने इसे जी भर का लूटा और नरसंहार किया।

बाहरी कड़ियाँ

17 बार भारत को लूटने वाले महमूद गजनवी की हुई थी ऐसी दर्दनाक मौत

Amit

Amit

मैं अमित कुमार, “Hindi info world” वेबसाइट के सह-संस्थापक और लेखक हूँ। मैं एक स्नातकोत्तर हूँ. मुझे बहुमूल्य जानकारी लिखना और साझा करना पसंद है। आपका हमारी वेबसाइट https://nikhilbharat.com पर स्वागत है।

Leave a comment

Trending Posts