अनिल काकोडकर की जीवनी – dr anil kakodkar information in hindi

डॉ. अनिल काकोडकर (dr anil kakodkar ) का नाम भारत के प्रख्यात परमाणु ऊर्जा वैज्ञानिक और यांत्रिक अभियंता हैं। उन्होंने ‘भारत के ‘परमाणु ऊर्जा आयोग‘ के अध्यक्ष पद तथा भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव के पद सुशोभित किया।

इस पद पर आसीन होने से पूर्व डॉ. अनिल काकोडकर करीब 4 साल तक (सन 1996 से 2000) ‘भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर‘ के डायरेक्टर भी रह चुके हैं। जिसका स्थापना के समय नाम 1957 में ट्राम्बे परमाणु ऊर्जा केंद्र था। जिसे 1967 में डा. होमी जहाँगीर भाभा की याद में परिवर्तित कर ‘भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर, किया गया।

1974 और 1998 के भारत द्वारा परमाणु परीक्षण के समय वे इस टीम के प्रमुख सदस्य के रूप में शामिल थे। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में देश को आत्म-निर्भर बनाने की दिशा में उठाए गए उनके उत्कृष्ट कदम अत्यंत ही सराहनीय रहे हैं।

अनिल काकोडकर की जीवनी | DR ANIL KAKODKAR INFORMATION IN HINDI
अनिल काकोडकर की जीवनी (Dr anil kakodkar information in hindi )

परमाणु वैज्ञानिक अनिल काकोदकर सन 2015 में उस बक्त भी सुर्खियों में आए था। जब उन्होंने किसी कारण बस नाराज होकर IIT बंबई के संचालन मंडल के अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा दे दिया था। आईए इस लेख में Anil Kakodkar ki jivani के बारें में विस्तार से समझते हैं ।

अनिल ककोडकर की जीवनी – Information about Anil Kakodkar in Hindi

पूरा नाम अनिल ककोडकर (In English – Anil Kakodkar)
अनिल ककोडकर का जन्म 11 नवंबर, 1943
जन्म स्थान मध्य प्रदेश के बरवानी गाँव
प्रसिद्ध एक प्रसिद्ध भौतिक वैज्ञानिक के रूप में
माता पिता का माता -कमला काकोडकर, पिता -पी. काकोडकर
पत्नी का नाम Suyasha Kakodkar

अनिल काकोडकर का जीवन परिचय – BIOGRAPHY OF ANIL KAKODKAR IN HINDI

प्रारम्भिक जीवन  

प्रख्यात परमाणु ऊर्जा वैज्ञानिक अनिल काकोडकर का जन्म 11 नवंबर, 1943 को भारत के मध्यप्रदेश राज्य में बरवानी गाँव में हुआ था।

एक मराठा परिवार में जन्मे डॉ काकोडकर के पिता का नाम श्री पी. काकोडकर तथा माता का नाम कमला काकोडकर था। उनके माता पिता ने भारत की आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर भाग लिया था।

पारिवारिक जीवन पत्नी और बच्चे –  anil kakodkar wife

प्रो अनिल ककोडकर की पत्नी का नाम Suyasha Kakodkar है।

शिक्षा दीक्षा – Anil kakodkar education

प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक प्रो काकोडकर बचपन से ही पढ़ने लिखने भी काफी तेज दिमाग के थे। डॉ काकोडकर  की प्रारम्भिक शिक्षा अपने ही पैतृक गाँव बरावानी में सम्पन्न हुई।

उसके बाद उन्होंने खरगौन के एक स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की। उसके बाद वे मुंबई चले आए यहाँ उन्होंने सन 1963 ईस्वी में बॉम्बे विश्वविद्यालय से BE (मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ) की डिग्री प्राप्त की।

करियर – The Early Life Of Anil Kakodkar In Hindi

मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद वे 1964 में भाभा एटोमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट (BARC) से जुड़ गए। कुछ वर्षों तक भाभा एटोमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट (BARC) में काम करने के बाद वे इंगलेंग चले गए।

इंगलेंड के नॉटिंघम विश्वविद्यालय से सन 1969 में उन्होंने प्रायोगिक गुरुत्व विश्लेषण(Experimental Stress Analysis) में M. Sc किया। उनके शोध से संबंधित 250 से अधिक वैज्ञानिक पत्र और रिपोर्टें प्रकासित हो चुकी हैं।

वर्ष 1996 में वे भाभा एटोमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट (BARC) के निदेशक बने। होमी भाभा के बाद डॉ काकोडकर ने बीएआरसी के सबसे कम उम्र के निदेशक बनने का गौरव प्राप्त किया।

इनके अलावा डॉ अनिल ककोडर निम्न संस्थानों के सदस्य और अध्यक्ष भी रहे।

  • सदस्य, ओएनजीसी ऊर्जा केंद्र
  • सदस्य, भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग 
  • सदस्य, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अकादमी
  • भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड के निदेशक
  • सदस्य, वीजेटीआई, मुंबई के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स
  • अध्यक्ष, राजीव गांधी विज्ञान और प्रौद्योगिकी आयोग
  • अध्यक्ष, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे के निदेशक मंडल

शांतिपूर्ण तरीके से परमाणु परीक्षण में योगदान – anil kakodkar pokhran

भारत ने दो बार राजस्थान के पोखरण में शांतिपूर्ण परमाणु परीक्षण किया। इस शांतिपूर्ण परमाणु  के बाद भारत विश्व में परमाणु ऊर्जा संपन्न देशों की सूची में सम्मिलित हो गया।

इस परमाणु परीक्षण में dr. anil kakodkar का भी अहम योगदान रहा। क्योंकि इस परीक्षण को अंजाम देने वाली प्रमुख वैज्ञानिक दल में वे भी सम्मिलित थे।

भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास में योगदान – anil kakodkar invention

भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास में डॉ काकोडकर का योगदान सराहनीय रहा है। भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के उन्नति में उन्होंने कई उत्कृष्ट कदम उठाये।

हमेशा से ही वे अपने देश भारत में परमाणु ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के पैरोकार रहे हैं। यही कारण रहा की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद भी उन्होंने भारी जल संयंत्र के लिए विभिन्न प्रणालियों विकसित की।

बंद पड़े कलपक्कम और रावतभाटा स्थित परमाणु रिएक्टरों को पुनर्जीवित करने में उनका बड़ा हाथ रहा। उन्होंने भारत में परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए ईंधन के रूप में देश में ही प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थोरियम के उपयोग पर जोड़ दिया।

रक्षा के क्षेत्र में खासकर परमाणु पनडुब्बी के पावरपैक तकनीक के प्रदर्शन में भी उनका योगदान माना जाता है। साथ ही ध्रुव रिएक्टर के डिजाइन और उसके निर्माण में भी डॉ अनिल काकोडकर का प्रमुख भूमिका रही। 

साथ ही भारतीय रेलवे में सुरक्षा में सुधार के लिए उनकी अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई थी। इस समिति ने भारतीय रेलवे में सुरक्षा में सुधार के लिए सरकार के सामने कई व्यापक सिफारिशें पेश की हैं।

सम्मान व पुरस्कार

प्रसिद्ध (न्यूक्लियर) वैज्ञानिक अनिल काकोदकर को भारत सरकार ने देश के लिए महती योगदान के लिए देश के सबसे बड़े नागरिक समान से सम्मानित किया।

वैज्ञानिक अनिल काकोदकर को भारत सरकार ने वर्ष 1998 में पद्मश्री, वर्ष 1999 में पद्म भूषण और वर्ष  2009 को पद्म विभूषण से विभूषित किया। उन्हें 2019 में डॉ़ मोहन धारिया राष्ट्र निर्माण पुरस्कार से भी पुरस्कृत किया गया।

परमाणु ऊर्जा वैज्ञानिक के रूप में देश के लिए अद्वितीय योगदान के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें सन 2011-12 का ‘अमर शहीद चन्दशेखर आजाद राष्ट्रीय सम्मान‘ के लिए उन्हें चुना था।

अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद राष्ट्रीय सम्मान में दो लाख की राशी के साथ प्रशस्ति पत्र प्रदान कीये जाते हैं। साथ ही वे भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी और महाराष्ट्र विज्ञान अकादमी के फेलो(सदस्य) हैं।

भारत के प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक डा. अनिल काकोडकर को महाराष्ट्र सरकार ने 2011 में महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार से अलंकृत किया। इनसे पहले यह पुरस्कार लता मंगेशकर, पुल देशपांडे, सुनिल गावस्कर, डा विजय भटकर, सचिन तेंडुलकर के अलावा

बाबा आमटे, रघुनाथ माशेलकर, पंडित भीमसेन जोशी, रतन टाटा, राक पाटील, मंगेश पाडगांवकर, नानासाहब धर्माधिकारी और डा. जयंत नारलीकर आदि प्रमुख हस्तियों को प्रदान किया जा चुका है।

साथ ही dr anil kakodkar Goa राज्य के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार Gomant Vibhushan Award से भी सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें गोवा सरकार द्वारा सन 2020 में प्रदान किया गया।

अंत में

डॉ काकोडकर ने अपने सम्पूर्ण जीवन भारत में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास के लिए समर्पित है। उनके ध्यान हमेसा भारतीय कार्यक्रम की आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु परमाणु रिएक्टर प्रणालियों के आत्मनिर्भर विकास पर केंद्रित रहा है।

वर्तमान में वे एआईसीटीई के प्रतिष्ठित चेयर प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। Scientist biography की इस कड़ी में अनिल काकोडकर की जीवनी ( dr anil kakodkar information in hindi ) जरूर अच्छी लगी होगी। अपने कमेंट्स से अवगत करायें।


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