‘शिशिर कुमार मित्रा की जीवनी‘( BIOGRAPHY OF SISIR KUMAR MITRA IN HINDI )

आयन मंडल के विशेषज्ञ शिशिर कुमार मित्रा (S.K. MITRA ) भारत के जाने माने वैज्ञानिक थे। वैज्ञानिक शिशिर कुमार मित्रा को भारत में ‘रेडियो विज्ञान के जनक’ के रूप में भी जाना जाता है।

अपने शोध के वल पर उन्होंने आयन मंडल के कई रहस्यों पर से प्रदा उठाया। आयन मंडल के अध्ययन के द्वारा उन्होंने जो राज खोले उससे समूचे विश्व आश्चर्य चकित हो रह गया। आयनमंडल की ऊंचाई वायुमंडल में करीब 60 किमी से लेकर कई हजार किलोमीटर तक है।

उन्होंने आयनमंडल पर मौलिक अध्ययन के द्वारा दुनियाँ को पहली बार बताया की आयनमंडल की वायु आयनित होती हैं। इस आयनित वायु का लंबी दूरी के रेडियो संचार में एक प्रमुख भूमिका होती है।

उन्होंने बताया की आयन मंडल का रेडियो संचार में अहम योगदान है। इस आयन मंडल के कारण ही रेडियो तरंगें पृथ्वी के तरफ परावर्तित होती है। जिससे रेडियो प्रसारण सुदूर इलाकों तक संभव हो पाता है।

मित्रा साहब का भारत में रेडियो प्रसारण में अहम योगदान माना जाता है। उन्हें आयन मंडल के बारे में किये गये महत्वपूर्ण खोज के लिए सम्पूर्ण विश्व में जाना जाता है। एक खगोल वैज्ञानिक के रूप में उनका नाम बड़े ही आदर के साथ लिया जाता है।

BIOGRAPHY OF SISIR KUMAR MITRA IN HINDI
BIOGRAPHY OF SISIR KUMAR MITRA IN HINDI

भारत द्वारा छोड़े गये उपग्रह चंद्रयान 2 द्वारा भेजी गयी तस्वीर में चांद के कुछ crater का इन्ही के नाम पर ‘मित्र क्रेटर’ रखा गया। आईए शिशिर कुमार मित्रा की जीवनी (Sisir Kumar Mitra, Indian Physicist ) के बारें में विस्तार से जानते हैं।

वैज्ञानिक शिशिर कुमार मित्रा की जीवनी (BIOGRAPHY OF SISIR KUMAR MITRA IN HINDI )

पूरा नामशिशिर कुमार मित्रा (Sisir Kumar Mitra)
जन्म24 अक्टूबर 1890 (कोननगर, बंगाल)
पत्नीलीलावती विस्वास
पेशावैज्ञानिक
सम्मानपदम भूषण, फ़ेलो ऑफ द रॉयल सोसाइटी
मृत्यु13 अगस्त 1963 कोलकाता भारत
प्रसिद्ध पुस्तक‘द अपर एटमोस्फीयर’

शिशिर कुमार मित्रा के बारें में (Sisir Kumar Mitra, Indian physicist )

सिसिर कुमार मित्रा का प्रारम्भिक जीवन

सिसिर कुमार मित्रा का जन्म 24 अक्तूबर 1890 ईस्वी में कलकत्ता में हुआ था। उनके पिता का नाम जॉय कृष्णा मित्रा एक शिक्षक थे। सिसिर कुमार मित्रा अपने तीन भाई बहनों में सबसे छोटे थे।

कहा जाता है की सिसिर कुमार मित्रा जी के पिता ने अपने परिवार के मर्जी के खिलाफ शरद कुमारी नामक लड़की से शादी की थी। इस कारण मित्रा जी के दादा जी ने उनके पिता जॉय कृष्णा मित्रा को पैतृक संपत्ति से बेदखल कर घर से निकाल दिया था ।

घर से निकले जाने के बाद कुछ दिन अपने ससुराल में रहे। इसी दौरान उनकी माता शरद कुमारी जी ने अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर ली। उनकी माता जी की भागलपुर के लेडी डफरिन मेडिकल अस्पताल में नियुक्ति हो गई।

फलतः मित्रा साहब के पिता अपने पूरे परिवार सहित बिहार के भागलपुर में रहने लगे। यहीं पर जॉयकृष्ण को भी नगरपालिका में लिपिक की नौकरी मिल गई।

शिक्षा दीक्षा

इस प्रकार सिसिर कुमार मित्रा की प्रारम्भिक शिक्षा बिहार के भागलपुर में हुई। जिला स्कूल भागलपुर से प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उनका दाखिला टी.एन.बी कॉलेज, भागलपुर, जहां से उन्होंने एफए परीक्षा उत्तीर्ण की।

मित्रा साहब बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में काफी कुशाग्र बुद्धि के थे। साइंस के प्रति बाल्यकाल से ही उनका गहरा लगाव था। मित्रा साहब ने कलकत्ता विश्वाविदयालय के प्रेसीउेंसी कॉलेज से ग्रैजूइट की डिग्री प्राप्त की। विद्यार्थी जीवन से ही वे महान वैज्ञानिक ज्योति वसु और पी.सी. रे से बहुत ही प्रभावित थे।

कहा जाता है की जब जगदीश चन्द्र बसु ने रेडियो तरंगों के बारे में जानकारी दी थी। तब उन्हें दूरसंचार व्यवस्थाओं में इसकी उपयोगिता की अपार संभवनायें नजर आई। फलतः वे जी जान से अपने अनुसंधान में  जुट गये।

उन्हें दुनियाँ के महान वैज्ञानिक मैरी क्यूरी, कैमिल गटन तथा चार्ल्स फैब्री के साथ भी काम करने का सौभाग्य मिला।

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आयन मंडल के बारे में दुनियाँ को अहम जानकारी

 आयन मंडल के विशेषज्ञ मित्रा साहब ने वायुमंडल के इस महत्वपूर्ण परत के बारे में कई राज खोले। मित्रा साहब ने दुनियाँ को सबसे पहले बताया की वायुमंडल के सबसे ऊपरी परत में आयनित कणों की प्रचुर मात्रा है।

अपने इस खोज को उन्होंने सत्यापित कर दुनियाँ को आश्चर्य चकित कर दिया। अपने अध्ययन से उन्होंने अवगत कराया की आयन मंडल कई परतों से मिलकर बना हुआ है। इन परतों को ‘डी. ई. एफ.’ परतों के नाम से जाना जाता है।

वायुमंडल में इन परतों की ऊँचाई अलग-अलग हो सकती है। इसी परतों के कारण ही रेडियो तरंगों को परावर्तन संभव हो पाता है। उन्होंने बताया की रेडियो संचार व्यवस्थाओं का सुचारु रूप से संचालन के लिए आयन मंडल का बहुत महत्व है।

इसी कारण से रेडियो प्रसारण संभव हो पाता है। आयन मंडल के ‘ई और एफ’ परत के बारे में अहम जानकारी उपलब्ध करने के अतिरिक्त उन्होंने वायुमंडल के कई अन्य राज से भी अवगत कराया।

रात में आकाश का रंग धूल जैसा काला दिखने के राज से पर्दा उठाया

उन्होंने अपने अनुसंधान में बताया की रात में आकाश का रंग धूल जैसा काला क्यों दिखाई देता है। उन्होंने दुनियाँ को बताया की आसमान का रंग रात में काला नहीं होता है। बल्कि आसमान का रंग धूल जैसा काला होता है।

इसके पीछे उन्होंने वायुमंडल के ‘एफ. परत’ में उपस्थित आयनों को कारण माना। उन्होंने अपने अध्ययन में बताया की वायुमंडल के एफ. परत में उपस्थित आयनों से कुछ रोशनी उत्पन्न होती है। जिसे आकाश की प्रतिदीप्ति कहा जा सकता है।

इस के कारण ही रात में आकाश का रंग धूल जैसा काला दिखता है। मित्रा साहब ने दुनियाँ को सबसे पहले अवगत कराया की आयन मंडल की ई. परत सूर्य की पराबैंगनी किरणों द्वारा ही उत्पन्न होती हैं।

इसके पहले आयन मंडल की ई. परत का बनना वैज्ञानिकों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई थी। उनके इस आविष्कार के फलस्वरूप समस्त विश्व में उनका नाम प्रसिद्ध हो गया।

एस.के. मित्रा (S.K. MITRA) द्वारा लिखित पुस्तक

मित्रा साहब ने अपने अनुसंधान को ‘द अपर एटमोस्फीयर’ (The upper atmosphere )नामक पुस्तक में लिपिबद्ध किया। उनका यह ग्रंथ सन् 1947 ईस्वी में प्रकाशित हुआ। इस पुस्तक को सारी दुनिया में सराहा गया।

वर्तमान काल में भी उनके इस पुस्तक को आयन मंडल पर अध्ययन के लिए एक प्रसिद्ध ग्रंथ के रूप में अपनाया जाता है। उन्होंने दुनियाँ में भारत का नाम गौरान्वित करने का कार्य किया।

सम्मान व पुरस्कार

आयन मंडल के बारे में अहम जानकारी प्रदान करने के कारण मित्रा साहब को कई सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें सन् 1958 ईस्वी में  लंदन के रॉयल सोसाइटी द्वारा अपना फ़ेलो (सदस्य) मनोनीत किया गया।

सन 1970 ईस्वी में अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय यूनियन द्वारा उनके नाम पर चांद के कुछ क्रेटर का नाम रखा गया। सन 1962 में भारत सरकार ने उन्हें पदमभूषण से सम्मानित किया।

जानिये, क्या है चंद्रयान 2 की तस्वीरों में दिख रहे मित्रा क्रेटर

इस महान वैज्ञानिक के सम्मान में भारत सरकार ने चंद्रयान 2 के समय चाँद के कुछ क्रेटर का नाम मित्रा क्रेटर रखा। क्रेटर, ग्रह और उपग्रह के ऊपर दिखने वाले उन हिस्सों को कहते हैं।

जिसका निर्माण संभवतः किसी विस्फोट के कारण हुआ होगा। ऐसा बैज्ञानिक के द्वारा अनुमान लगाया जाता है। यह क्रेटर चांद की सतह पर तश्तरीनुमा अंडाकार गड्ढे की तरह दिखाई पड़ता है।

महान विज्ञानिक एस.के. मित्रा का निधन

महान वैज्ञानिक एस के मित्रा (Sisir Kumar Mitra ) का 73 वर्ष की उम्र में 13 अगस्त 1963 में निधन हो गया। मित्रा साहब प्रथम भारतीय हुए जिन्होंने रेडियो विज्ञान में स्नातकोत्तर शिक्षा एवं अनुसंधान की शुरुआत की थी।

विज्ञान में योगदान के लिए Sisir Kumar Mitra को हमेशा याद किया जायेगा। शिशिर कुमार मित्रा की जीवनी‘(BIOGRAPHY OF SISIR KUMAR MITRA IN HINDI) आपको जरूर अच्छी लगी होगी।

शिशिर कुमार मित्रा कौन थे?

शिशिर कुमार मित्रा भारत मे महान वैज्ञानिक थे। उन्हें भारत में रेडियो विज्ञान के जनक के रूप में जाना जाता है।

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