नाहरगढ़ किला जयपुर का इतिहास और रहस्य | Nahargarh fort Jaipur history in Hindi

नाहरगढ़ किला जयपुर का इतिहास - Nahargarh fort Jaipur history in Hindi

नाहरगढ़ किला जयपुर का इतिहास और रहस्य | Nahargarh fort Jaipur history in Hindi

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राजस्थान के अधिकतर राजाओं ने बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा हेतु अपने राज्य में भव्य किलों का निर्माण करवाया। साथ ही उनके द्वारा निर्मित किला राजाओं के आन-बान और शान को प्रदर्शित करता है। ऐसे ही किले में से एक जयपुर के नाहरगढ़ किला का नाम आता है।

नाहरगढ़ किला राजस्थान राज्य की राजधानी गुलावी शहर जयपुर की शान है। जयपुर के इतिहास में यह किला अहम स्थान रखता है। अरावली पर्वतमाला के पहाड़ी पर अवस्थित यह किला आमेर राजा की राजधानी हुआ करती थी।

इतिहासकारों के अनुसार नाहरगढ़ किले का निर्माण सवाई राजा जयसिंह द्वितीय ने करवाया था। इस किले का निर्माण सवाई राजा जयसिंह द्वितीय ने आमेर की सुरक्षा हेतु बनवाया गया था।

नाहरगढ़ किले की प्रसिद्धी का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता की यहाँ लाखों पर्यटक हर वर्ष देखने आते हैं। यह जयपुर के तीन प्रसिद्ध किलों में से एक है।

नाहरगढ़ किला जयपुर का इतिहास - Nahargarh fort Jaipur history in Hindi
नाहरगढ़ किला जयपुर का इतिहास – Nahargarh fort Jaipur history in Hindi

यहाँ कई हिन्दी फिल्मों को भी फिलमाया जा चुका है। जयपुर का यह प्रसिद्ध किला यहाँ के समृद्ध इतिहास का साक्षी है। अरावली की ऊँची पहाड़ी पर स्थित नाहरगढ़ किले से जयपुर शहर का सुंदर नजारा दिखाई पड़ता है।

1857 के क्रांति के समय यह किला अंग्रेजों के आश्रय स्थल के रूप में भी प्रयोग किया गया था। आईये नाहरगढ़ किला जयपुर का इतिहास और उसकी जानकारी विस्तार से जानते हैं।

नाहरगढ़ किला के बारे में – Brief information about Nahargarh fort Jaipur in Hindi

किले का नाम नाहरगढ़ किला जयपुर राजस्थान
निर्माणकर्ता सवाई राजा जयसिंह द्वितीय
निर्माण वर्ष 1734
नाहरगढ़ किले का उपनाम सुदर्शनगढ़
किले का पता कृष्णा नगर( ब्रह्मपुरी), जयपुर, राजस्थान

नाहरगढ़ किला जयपुर का इतिहास –

नहारगढ़ किले के इतिहास से पता चलता है की प्राचीन काल में यह किला सुदर्शनगढ़ के नाम से जाना जाता था। कहा जाता है की भगवान श्री कृष्ण के सुदर्शन के नाम पर ही इस को सुदर्शन गढ़ नाम दिया गया था। जिसे बाद में नाहरगढ़ कर दिया गया।

नाहर का अर्थ शेर से भी लगाया जाता है। कहा जाता है की इस क्षेत्र में शेर की अधिकता के कारण ही इस किले को नाहरगढ़ रखा गया। लेकिन इसके संबंध में कई और भी कविदंती प्रसिद्ध हैं जिसकी चर्चा बाद में की जाएगी।

नाहरगढ़ किले का निर्माण

नाहरगढ़ किला जयपुर का निर्माण यहाँ के तत्कालीन राजा सवाई राजा जयसिंह द्वितीय ने अरावली की पहाड़ी पर करवाया था। उन्होंने इस किले का निर्माण आमेर की सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनवाया।

सवाई राजा जयसिंह द्वितीय ने इस किले को 1734 में बनवाया। जयपुर शहर से करीब 19 किमी दूर नाहरगढ़ किला, आमेर की राजधानी भी रही। यह किला जयगढ़ और आमेर के किले के साथ मिलाकर जयपुर सिटी को अभेद सुरक्षा प्रदान करता था।

बनावट और संरचना

स्थापत्य कला का सुंदर नमूना इस किले परिसर में सुदर्शन भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर आकर्षण का केंद्र है। भगवान कृष्ण के नाम पर ही इस किले का दूसरा नाम सुदर्शन गढ़ भी है।

जयपुर का यह किला चारों तरफ ऊँची अभेद दीवार से घिरा होने का कारण सबसे सुरक्षित किला माना जाता था। यही कारण रहा है की इस किले पर कोई भी शासक कभी आक्रमण नहीं किया।

अरावली पहाड़ी पर स्थित यह किला देखने में अद्भुत और भव्य है। विशाल बूजों और खूबसूरत महलों से युक्त इस विशाल किले की कई महल और इमारत देखने योग्य है। इस किले परिसर में राजा सवाई राम सिंह ने अपने नौ रानियों के लिए सुंदर महल का बनवाया।

यह महल नाहरगढ़ के नौ महल के नाम जाना जाता है। महल के आलीशान द्वार, खिड़कियों और दीवार भित्तिचित्रों से सजे हैं। अतीत की यादों को समेटे यह किला वर्षों से शान के साथ खड़ा है।

किले के सबसे खूबसूरत महल,माधवेन्द्र महल के ठीक सामने बनी बावड़ी पर्यटक को बेहद आकर्षित करती है। इसके अलावा किले के अंदर स्थित हवा मंदिर, महाराज माधों सिंह का अतिथि गृह सहित कई अन्य स्थान भी दर्शनीय हैं।

नाहरगढ़ दुर्ग के उपनाम – nahargarh fort jaipur in hindi

नाहरगढ़ दुर्ग के कई उपनाम हैं। आने निर्माणकाल में सुदर्शनगढ़ के नाम से प्रसिद्ध इस किले के उपनाम में ‘जयपुर का मुकुट मणी अथवा नौ महलो वाला दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है।

नाहरगढ़ किले का रहस्य

कहा जाता है की जब इस किले का पुनर्निर्माण हो रहा था। तब एक दिन में जितना निर्माण कार्य होता था अगले दिन सब कुछ घवस्त मिलता है। अगले दिन नए सिरे से काम की शरुआत करनी पड़ती है।

क्योंकि कहते हैं की राजस्थान के इस किले में भूतों का बसेर हो गया था। कहा जाता था की वहाँ किसी ‘आत्मा का खौफ’ है। आत्मा के खौफ के डर से मजदूर भी भाग जाते था। कहा जाता है की इस स्थल पर नाहर सिंह भोमिया की आत्मा भटकती थी।

जिस कारण से निर्माणकार्य में बार-बार बाधा उत्पन्न हो रही थी। फलतः नाहर सिंह भोमिया की स्मृति में वहाँ उनका एक स्थल बनाया गया। इस प्रकार इस किले को उनके ही नाम पर नाहरगढ़ दुर्ग रखा गया।

नाहरगढ़ किला भूतिया कहानी

जैसा की हम जानते हैं की इस किले को सवाई राजा मान सिंह ने 1734 में बनवाया था। लेकिन दशक बाद इस किले को भूतिया किला कहा जाने लगा। लोगों का मानना था की राजा का भूत वास करता है। हालांकि इस किले में रात में रुकना मना है।

नाहरगढ़ किले के बारें में जानिये वेब स्टोरी के माध्यम से – Web Stories Nahargadh fort

नाहरगढ़ फोर्ट घूमने का सही टाइमिंग – nahargarh fort jaipur timings

यह किला 10 बजे दिन से लेकर शाम को 5 बजे तक खुला रहता है। राजस्थान में प्रचंड गर्मी पड़ती है इस कारण से नाहरगढ़ किला घूमने का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से फरवरी तक का हो सकता है। इस दौरान यहाँ का मौसम पर्यटन के अनुकूल रहता है।

राजस्थान के इस किले को देखने लाखों पर्यटक प्रतिवर्ष जयपुर पहुचते हैं। यहाँ के खूबसूरत नजारे के साथ साथ सैलानी नाहरगढ़ किले में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कर अपने यात्रा को यादगार बनाना चाहते हैं।

टिकट शुल्क – nahargarh fort ticket price

इस किले में घूमने के लिए भारत के आम जन के लिए टिकट शुल्क 50 रुपया, स्टूडेंट के लिए 25 रुपया और विदेशी नागरिक के लिए 200 रखा गया है। टाइमिंग और शुल्क की ताजा जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाईट पर चेक किया जा सकता है।

नाहरगढ़ किला के बारे में रोचक जानकारी

नाहरगढ़ किला गुलावी नगरी जयपुर के तीन प्रसिद्ध किला, आमेर, जयगढ़ और नहारगढ़ में से एक है। इसकी गिनती जयपुर के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल में होती है।

स्थापत्य कला का सुंदर नमूना नाहरगढ़ किले में सुदर्शन भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर दर्शनीय है। इस किले के निर्माण बाद इसका नाम सुदर्शनगढ़ रखा गया।

कुछ अद्भुत घटनाओं के कारण इस किले का सुदर्शनगढ़ से बदलकर नहारसिंह भोमया के नाम पर नाहरगढ़ कर दिया गया। नहारसिंह भोमया का स्मारक इस किले में आज भी मौजदू है।

जयपुर शहर से करीब 15 किमी दूर उत्तर अरावली पहाड़ी की 700 फिट ऊँची चोटी पर स्थित इस किले का निर्माण आमेर की सुरक्षा हेतु हुआ था।

विशाल बूजों और खूबसूरत महलों वाले इस किले का निर्माण जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा सन 1734 में ईस्वी किया गया था।

किले के अंदर स्थित हवा मंदिर, महाराज माधों सिंह का अतिथि गृह, नौ नौ रानियों हेतु निर्मित नौ पासवान महल  देखने योग्य है।

नाहरगढ़ किले परिसर में माधवेन्द्र महल के ठीक सामने एक बावड़ी बनी है। जिसकी अनुपम खूबसूरती पर्यटक के लिए खास आकर्षण का केंद्र है।

पर्यटन की दृष्टि से खूबसूरत इस दुर्ग में कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। जिसमें हिन्दी फिल्म ‘रंद दे बसंती’ और जोधा-अकबर जैसी हिन्दी फिल्मों के नाम शामिल हैं।

इस किले के पास स्थित राजस्थान राज्य का पहला जैविक उधान भी पर्यटक का आकर्षण का केंद्र है। यहाँ सूर्यास्त का सुन्दर नजारा बड़ा ही मनमोहक दिखाई पड़ता है।

साथ ही किले के प्राचीर से जयपुर शहर का भव्य दृश्य दिखाई पड़ता है। रात के समय में तो किले के प्राचीर से जयपुर शहर का खूबसूरत नजारा और भी सुंदर लगता है।

F.A.Q

नाहरगढ़ किला कहां स्थित है?

नाहरगढ़ किला राजस्थान की राजधानी गुलाबी शहर जयपुर से 15 किमी दूर अरावली पहाड़ी पर स्थित है।

नाहरगढ़ किले का निर्माण किसने करवाया?

नाहरगढ़ किले का निर्माण 1734 में जयपुर के संस्थापक सवाई राजा जयसिंह द्वितीय करवाया था।

सुदर्शन गढ़ किस किले का दूसरा नाम है?

राजस्थान के जयपुर के पास स्थित सुदर्शन गढ़ किले का दूसरा नाम नहारगढ़ किला है।

नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क विकिपीडिया (Nahargarh biological park)

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