ज्ञानपीठ पुरस्कार साहित्य के क्षेत्र में सबसे बड़ा सम्मान – Gyanpeeth Award

भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय साहित्य के क्षेत्र में प्रदान किये जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार कहलाता है. यह पुरस्कार हर वर्ष भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा साहित्य के क्षेत्र में अमूल्य योगदान के लिए प्रदान दिया जाता है।

साहित्य के  सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार के तहद  11 लाख रुपये की राशि के आलावा  प्रशस्तिपत्र jnanapeeta prashasti तथा देवी सरस्वती की कांस्य प्रतिमा प्रदान की जाती है. इस पुरस्कार की शुरुआत 1965 ईस्वी में हुई थी।

प्रथम ज्ञानपीठ पुरस्कार (Gyanpeeth Award )मलयालम लेखक जी शंकर कुरुप को 1965 में प्रदान किया गया था. तब से यह  पुरस्कार प्रति वर्ष  दिया जाता है. अब तक  ५० से ज्यादा साहित्यकार इस पुरस्कार से सम्मानित किये जा चुके हैं.

जैसा का हम जानते हैं की इस पुरस्कार की स्थापना सन 1961 ईस्वी में हुई थी। भारतीय ज्ञानपीठ न्यास इस पुरस्कार के अंतर्गत भारत के संविधान में सम्मिलित 22 भारतीय भाषाओँ में रचना करने वाले लेखकों को सम्मानित किया जाता है।

प्रारंभ में इस पुरस्कार में अंग्रेजी भाषा को सम्मिलित नहीं किया गया था लेकिन 49वें ज्ञानपीठ पुरस्कार के बाद इस भाषा को भी ज्ञानपीठ पुरस्कार (gyanpith puraskar ) के लिए सम्मिलित किया गया।

 ज्ञानपीठ पुरस्कार चयन प्रक्रिया – Gyanpeeth Award

ज्ञानपीठ पुरस्कार की चयन की प्रक्रिया बेहद ही जटिल है और कई महीनों के बाद विजेता के बारें में निर्णय लिया जाता है। विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों के प्रस्ताव आने के बाद निर्णायक मंडल द्वारा जाँच की जाती है।

निर्णायक मंडल को किसी भी साहित्यकार के नाम पर विचार करने की स्वतंत्रता है। अगर किसी लेखक को एक बार यह पुरस्कार मिल चुका हैं तो उसे अगले 3 साल तक दुबारा उनके नाम पर विचार नहीं किया जाता है।

अट्ठाइसवें ज्ञानपीठ पुरस्कार (Gyanpeeth Award ) के नियम में किए गए संशोधन के आधार पर पुरस्कार वर्ष को छोड़कर पिछले 20 साल में प्रकाशित कृतियों के आधार पर साहित्यकार का मूल्यांकन किया जाता है।

‘भाषा परामर्श समिति’ के गहन चिंतन और पर्यालोचन के बाद ही पुरस्कार के लिए साहित्यकार के नाम का अंतिम चयन होता है। भारतीय ज्ञानपीठ के न्यास मंडल का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं होता

कांस्य की सरस्वती प्रतिमा

Jnanpith Gyanpeeth Award
Jnanpith Gyanpeeth Award

ज्ञानपीठ पुरस्कार में एक कांस्य प्रतिमा की मूर्ति जी जाती है। इस कांस्य मूर्ति की अनुकृती थार स्थित मालवा के सरस्वती मंदिर से ली गयी है। यह प्रतिमा लंदन के एक ब्रिटिश मायूजियम में स्थित है।

इस प्रतिमा के पीछे बने प्रभामंडल में बने तीन रश्मिपुंज भारत के प्राचीनतम जैन तोरण द्वारा को निरूपित करती है। माँ सरस्वती के हाथ में कमंडल, पुस्तक, कमल और अक्षमाला, ज्ञान तथा आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि के प्रतीक हैं।

सन 1965 ईस्वी में जब इस पुरस्कार की शुरुआत हुई थी। उस वक्त नकद राशी के रूप में 1 लाख रुपये प्रदान किए जाते थे। लेकिन इस राशि को बढ़ाकर 11 लाख रुपये कर दिया गया।

पहले यह पुरस्कार लेखक को उनकी किसी खास रचना के लिए प्रदान किया जाता था। लेकिन वर्ष 1982 में इसे साहित्य के क्षेत्र में सम्पूर्ण योगदान के लिए प्रदान किए जाने लगा।

ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले विभिन्य भाषाओं के साहित्यकारों के नाम

हिन्दी साहित्यकार को ज्ञानपीठ – Gyanpeeth Award in Hindi

अब तक जिन हिन्दी साहित्यकारों को ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है। उनके नाम इस प्रकार हैं। सुमित्रानंदन पंत, रामधारी सिंह दिनकर, सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय, महादेवी वर्मा, नरेश मेहता, निर्मल वर्मा,  कुंवर नारायण, केदारनाथ सिंह, अमरकान्त , श्रीलाल शुक्ल, कृष्णा सोबती ।

मलयालम साहित्यकार

ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले मलयालम साहित्यकार के नाम – जी शंकर कुरुप, एस.के. पोट्टेकट, तक्षी शिवशंकरा पिल्लई, एमटी वासुदेव नायर, ओएनवी कुरुप और अक्कीतम अच्युतन नंबूदिरी हैं।

बँगला साहित्यकार – gyan peeth award

ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले बँगला साहित्यकार के नाम : – ताराशंकर बंधोपाध्याय, विष्णु डे, आशापूर्णा देवी, सुभाष मुखोपाध्याय और महाश्वेता देवी हैं।

ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले कन्नड साहित्यकार

इस पुरस्कार पाने वाले कन्नड़ साहित्यकार के नाम केवी पुत्तपा, दत्तात्रेय रामचंद्र बेन्द्रे, के. शिवराम कारंत, मस्ती वेंकटेश अयंगर, वी.के.गोकक, गिरीश कर्नाड, यूआर अनंतमूर्ति और चन्द्रशेखर कम्बार हैं।

ज्ञान पीठ पाने वाले उर्दू साहित्यकार के नाम

ज्ञान पीठ पाने वाले उर्दू साहित्यकार में फिराक गोरखपुरी, कुर्तुल एन. हैदर, अली सरदार जाफरी, अखलाक मुहम्मद खान शहरयार का नाम आता है।

तेलगू व तमिल साहित्यकार

ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले तेलगू साहित्यकार में विश्वनाथ सत्यनारायण, डॉ. सी नारायण रेड्डी, रावुरी भारद्वाज के नाम हैं। तमिल साहित्यकार जिन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया उनके नाम पी.वी. अकिलानंदम, दण्डपाणी जयकान्तन हैं।

उड़िया साहित्यकार

उड़िया साहित्यकार जिन्होंने ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त किये उनके नाम गोपीनाथ महान्ती, सच्चिदानंद राउतराय, सीताकांत महापात्र और प्रतिभा राय हैं।

मराठी साहित्यकार

ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले मराठी साहित्यकार में विश्वनाथ विष्णु सखा खांडेकर, विष्णु वामन शिरवाडकर कुसुमाग्रज, विंदा करंदीकर, भालचन्द्र नेमाड़े के नाम हैं।  

गुजराती व असमिया भाषा के साहित्यकार – Jnanpith Gyanpeeth Award

गुजराती साहित्यकार जिन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला उनके नाम उमाशंकर जोशी, पन्नालाल पटेल, राजेन्द्र केशवलाल शाह, रघुवीर चौधरी हैं। ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले असमिया भाषा के साहित्यकार के नाम बिरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य, इंदिरा गोस्वामी हैं।

पंजाबी, संस्कृत और कश्मीरी साहित्यकार

ज्ञानपीठ पाने वाले पंजाबी साहित्यकार में अमृता प्रीतम, गुरदयाल सिंह का नाम आता है। वहीं संस्कृत साहित्य के लिए सत्यव्रत शास्त्री को और कश्मीरी साहित्य के लिए रहमान राही को ज्ञानपीठ पुरस्कार से नबाजा गया।

ज्ञान पीठ पुरस्कार पाने वाले का लिस्ट – jnanpith award winners

  • पहला – जी शंकर कुरुप (मलयालम) सन 1965 ईस्वी
  • दूसरा – ताराशंकर बंधोपाध्याय (बांग्ला)                          सन 1966 ईस्वी
  • तीसरा – केवी पुत्तपा (कन्नड़) और उमाशंकर जोशी (गुजराती)        सन 1967 ईस्वी
  • चौथा – सुमित्रानंदन पंत (हिन्दी)                               सन 1968 ईस्वी
  • 5वां – फिराक गोरखपुरी (उर्दू)                                 सन 1969 ईस्वी
  • 6वां – विश्वनाथ सत्यनारायण (तेलुगु)                          सन 1970 ईस्वी
  • 7वां – विष्णु डे (बांग्ला)                                     सन 1971 ईस्वी
  • 8वां – रामधारी सिंह दिनकर (हिन्दी)                           सन 1972 ईस्वी
  • 9वां – डी आर बेन्द्रे (कन्नड़) और गोपीनाथ महान्ती (ओड़िया)       सन 1973 ईस्वी
  • 10वां – विष्णु सखा खांडेकर (मराठी)                           सन 1974 ईस्वी
  • 11वां – पी.वी. अकिलानंदम (तमिल)                           सन 1975 ईस्वी
  • 12वां – आशापूर्णा देवी (बांग्ला)                               सन 1976 ईस्वी
  • 13वां – के. शिवराम कारंत (कन्नड़)                           सन 1977 ईस्वी
  • 14वां – एच. एस. अज्ञेय (हिन्दी)                              सन 1978 ईस्वी
  • 15वां – बिरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य (असमिया)                      सन 1979 ईस्वी
  • 16वां – एस.के. पोट्टेकट  (मलयालम)                          सन 1980 ईस्वी
  • 17वां – अमृता प्रीतम (पंजाबी)                                सन 1981 ईस्वी
  • 18वां – महादेवी वर्मा (हिन्दी)                                 सन 1982 ईस्वी
  • 19वां – मस्ती वेंकटेश अयंगर (कन्नड़)                         सन 1983 ईस्वी
  • 20वां – तक्षी शिवशंकरा पिल्लई (मलयालम)                      सन 1983 ईस्वी
  • 21वां – पन्नालाल पटेल (गुजराती)                             सन 1985 ईस्वी
  • 22वां – सच्चिदानंद राउतराय (ओड़िया)                         सन 1986 ईस्वी
  • 23वां – विष्णु वामन शिरवाडकर कुसुमाग्रज (मराठी)               सन 1987 ईस्वी
  • 24वां – डॉ. सी नारायण रेड्डी (तेलुगु)                          सन 1988 ईस्वी
  • 25वां – कुर्तुल एन. हैदर (उर्दू)                                सन 1989 ईस्वी
  • 26वां – वी.के.गोकक (कन्नड़)                                सन 1990 ईस्वी
  • 27वां – सुभाष मुखोपाध्याय (बांग्ला)                           सन 1991 ईस्वी
  • 28वां – नरेश मेहता (हिन्दी)                                 सन 1992 ईस्वी
  • 29वां – सीताकांत महापात्र (ओड़िया)                           सन 1993 ईस्वी
  • 30वां – यूआर अनंतमूर्ति (कन्नड़)                             सन 1994 ईस्वी
  • 31वां – एमटी वासुदेव नायर (मलयालम)                        सन 1995 ईस्वी
  • 32वां – महाश्वेता देवी (बांग्ला)                                सन 1996 ईस्वी
  • 33वां – अली सरदार जाफरी (उर्दू)                             सन 1997 ईस्वी
  • 34वां – गिरीश कर्नाड (कन्नड़)                                सन 1998 ईस्वी
  • 35वां – निर्मल वर्मा (हिन्दी) और गुरदयाल सिंह (पंजाबी)           सन 1999 ईस्वी
  • 36वां – इंदिरा गोस्वामी (असमिया)                            सन 2000 ईस्वी
  • 37वां) – राजेन्द्र केशवलाल शाह (गुजराती)                      सन 2001 ईस्वी
  • 38वां – दण्डपाणी जयकान्तन (तमिल)                          सन 2002 ईस्वी
  • 39वां – विंदा करंदीकर (मराठी)                               सन 2003 ईस्वी
  • 40वां – रहमान राही (कश्मीरी)                                सन 2004 ईस्वी
  • 41वां – कुंवर नारायण (हिन्दी)                                सन 2005 ईस्वी
  • 42वां – रवीन्द्र केलकर (कोंकणी) और सत्यव्रत शास्त्री (संस्कृत)      सन 2006 ईस्वी
  • 43वां – ओएनवी कुरुप (मलयालम)                            सन 2007 ईस्वी
  • 44वां – अखलाक मुहम्मद खान शहरयार (उर्दू)                   सन 2008 ईस्वी
  • 45वां – अमरकान्त व श्रीलाल शुक्ल (हिन्दी)                     सन 2009 ईस्वी
  • 46वां – चन्द्रशेखर कम्बार (कन्नड)                            सन 2010 ईस्वी
  • 47वां – प्रतिभा राय (ओड़िया)                                 सन 2011 ईस्वी
  • 48वां – रावुरी भारद्वाज (तेलुगू)                               सन 2012 ईस्वी
  • 49वां – केदारनाथ सिंह, अमरकान्त व श्रीलाल शुक्लसन            सन 2013 ईस्वी
  • 50वां – भालचन्द्र नेमाड़े (मराठी)                              सन 2014 ईस्वी
  • 51वां – रघुवीर चौधरी (गुजराती)                              सन 2015 ईस्वी
  • 52वां – शंख घोष (बांग्ला) सन 2016 ईस्वी
  • 53वां – कृष्ण सोवती (हिन्दी) सन 2017 ईस्वी
  • 54वां – अमिताभ घोष (अंग्रेजी) सन 2018 ईस्वी
  • 55वां – अक्कीतम अच्युतन नंबूदिरी(मलयालम ) सन 2019 ईस्वी

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