आर्यभट्ट का जीवन परिचय और गणित में योगदान 2023 – Aryabhatt ka jivan parichay

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आर्यभट्ट केवल एक खगोलशास्त्री ही नहीं बल्कि महान गणितज्ञ भी थे। भारत में आधुनिक काल में जैसे महान गणितज्ञ रामानुजन का नाम लिया जाता है। ठीक उसी तरह पौराणिक भारत में आर्यभट्ट का बहुत बड़ा नाम था।

आर्यभट्ट ने सर्वप्रथम दुनियाँ को शून्य (0) का ज्ञान दिया। इस महान् खगोलशास्त्री के सम्मान में भारत सरकर ने अपना पहला उपग्रह का नाम ‘आर्यभट्ट उपग्रह‘ रखा था। जिसे सन 1975 में छोड़ा गया था। आईये इस महान गणितज्ञ के बारें में विस्तार से जानते हैं।

आर्यभट्ट का जीवन परिचय और गणित में योगदान

आर्यभट्ट कौन थेWho is Aryabhatta in Hindi

आर्यभट्ट भारत के महान खगोलज्ञ, ज्योतिषशास्त्री और गणितज्ञ थे जिसने दुनियाँ को शून्य का ज्ञान दिया। आर्यभट्ट का जीवन परिचय और गणित में उनके योगदान से पता चलता है की भले ही आज निकोलस कोपरनिकस को सौरमंडल का खोजकर्ता माना जाता है।

लेकिन आज से करीव 1500 साल पहले भारत के महान खगोलज्ञ आर्यभट्ट ने सौरमंडल के राज पर से पर्दा उठाया था। उन्होंने दुनियाँ को पहली बार बताया की पृथ्वी गोल है और वह अपनी धुरी पर चारों ओर घूमती है।

आर्यभट्ट का जीवन परिचय – Aryabhatta Biography in Hindi
आर्यभट्ट का जीवन परिचय – Aryabhatta Biography in Hindi

सबसे पहले उन्होंने ही बताया था की पृथ्वी के घूर्णन के कारण ही दिन और रात होते है। आर्यभट्ट का मानना था की ब्रह्मांड का केंद्र विंदु पृथ्वी है।

इन्हीं कारणों से आर्यभट्ट को प्राचीन भारतीय विज्ञान का सबसे चमकीला सितारा कहा जाता है। चलिए इस लेख में Aryabhatt ka jivan parichay aur unke yogdan के बारें में जानते हैं।

महान गणितज्ञ आर्यभट्ट का जीवन परिचय – Aryabhatta biography in Hindi

नाम आर्यभट्ट (in English – Aryabhatta)
प्रसिद्धि शून्य के अविस्कार के कारण
आर्यभट्ट का जन्म476 ईस्वी
आर्यभट्ट का जन्म स्थानज्ञात नहीं
आर्यभट्ट की शिक्षानालंदा विश्व विध्यालय, बिहार
आर्यभट्ट की पत्नी का नामज्ञात नहीं
आर्यभट्ट के माता पिता का नामजानकारी उबलब्ध नहीं

आर्यभट्ट का जीवन परिचय और गणित में योगदान

महान खगोलशास्त्री आर्यभट्ट का जन्म स्थान को लेकर इतिहासकारों के बीच मतांतर पाया जाता है। कुछ विद्वानों के अनुसार आर्यभट्ट का जन्म 476 ईस्वी में हुआ था

इनका जन्म स्थान वर्तमान में महाराष्ट्र में अवस्थित नर्मदा और गोदावरी नदी के मध्य का अश्मक नामक देश में माना जाता है। वहीं कुछ विद्वान का मानना है की आर्यभट्ट का जन्म पटना विहार में हुआ था। पटना का पुराना नाम पाटलीपुत्र था।

आर्यभट्ट के जन्म के समय पाटलीपुत्र को कुसुमपुर के नाम से जाना जाता था। इसी कुसुमपुर में आर्यभट्ट का जन्म माना जाता है। वर्तमान में यह बिहार राज्य की राजधानी है।

अक्सर पूछे जाते हैं की आर्यभट्ट की माता का नाम क्या है। उनकी पत्नी का नाम क्या थी। तो हम जानकारी के लिए बता दें की उनकी माता का नाम और पत्नी के बारें में को सटीक जानकारी नहीं मिलती है।

आर्यभट्ट की शिक्षा – दीक्षा

जैसे उनके जन्म स्थान को लेकर इतिहासकारों में एक मत नहीं है। उसी तरह उनकी शिक्षा को लेकर भी विद्वानों में मतांतर है। कहा जाता है की आर्यभट्ट शिक्षा प्राप्ति के लिए पाटलिपुत्र गये।

आर्यभट्ट ने अपनी शिक्षा मगध साम्राज्य के प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय से प्राप्त की। उस बक्त बिहार का यह विश्वविध्यालय विश्व प्रसिद्ध शिक्षा का केंद्र था।

उस बक्त नालंदा विश्वविद्यालय की गिनती विश्व के सबसे बड़े शिक्षा केन्द्रों में की जाती थी। यहीं से ज्ञान प्राप्त कर आर्यभट्ट प्रख्यात गणितज्ञ, खगोलशास्त्री और ज्योतिषशास्त्री बने। आर्यभट्ट गुप्त साम्राज्य के राजा चन्द्रगुप्त द्वितीय के दरबार में रहते थे।

खगोल विज्ञान में आर्यभट्ट का योगदान

आर्यभट्ट ने पहली बार समझाया की धरती गोल है। आर्यभट्ट प्रथम खगोलशास्त्री थे जिन्होंने विश्व को पृथ्वी के गोल होने की जानकारी दी। उन्होंने बताया था की पृथिवी को अपने अक्ष पर घूमने के कारण ही दिन और रात होते हैं।

आर्यभट्ट ने विश्व को बताया था की घरती अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करने में लगभग 24 घंटे का समय लगाती है। पहले यह माना जाता था की ग्रह  और तारे गतिशील हैं और पृथ्वी अपने जगह पर स्थिर है।

आर्यभट्ट का जीवन परिचय – Aryabhatta Biography in Hindi
आर्यभट्ट का जीवन परिचय और खगोल विज्ञान में योगदान

लेकिन बाद में उन्होंने बताया की धरती गतिशील है। जैसे की हम जब ट्रेन या बस में सफर करते हैं तब हमें वाहर झाँकने पर पेड़ पौधे और मकान भागते दिखाई देते हैं। लेकिन असल में ट्रेन या बस चल रही होती है।

उसी तरह सूरज पूर्व में उगकर पश्चिम में नहीं आ जाते हैं। बल्कि धरती के घूर्णन के कारण ही ऐसा भ्रम प्रतीत होता है।

घरती की घूर्णन अवधि का सटीक ज्ञान  

आर्यभट्ट ने बताया की चंद्रमा का रंग असल में काला है। चंद्रमा का अपना प्रकाश नहीं होता है। बल्कि वह सूर्य के प्रकाश के प्राबर्तन के कारण ही चमकीला दिखाई पड़ता है। आज से हजारों साल पहले जब विज्ञान उतना उन्नत नहीं था।

आर्यभट्ट ने धरती की घूर्णन गति की अवधि की सटीक जानकारी प्रदान की। उन्होंने विश्व को बताया की धरती अपने धुरी पर एक चक्कर पूरा करने में 24 घंटे नहीं बल्कि 23 घंटे, 56 मिनट और 1 सेकंड का समय लगाती है।

उन्होंने दुनियाँ को इस बात से भी अवगत कराया की घरती सूर्य का एक चक्कर लगाने में 1 वर्ष अर्थात लगभग 365 दिन, 6 घंटे और 30 मिनट का समय लगाती है।

चांद का रंग काला

आर्यभट्ट ने अपने खोज से इस निष्कर्ष पर पहुंचे की चन्द्रमा काले रंग की है। साथ ही इन्होंने दुनियाँ को बताया की चाँद में अपना प्रकाश नहीं होता बल्कि वह सूर्य के रोशनी के कारण चमकीला दिखाई पड़ता है।

सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण

उन्हें सूर्य और चन्द्र ग्रहण के बारें में भी जानकारी थी। उन्होंने सूर्य और चन्द्र ग्रहण के बारें में फैली गलत धारणा पर से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया की ग्रहण पृथ्वी, चन्द्रमा और सूर्य को एक ही सीध में होने के कारण लगते हैं। 

आर्यभट्ट का जीवन परिचय – Aryabhatta Biography in Hindi
आर्यभट्ट ने सबसे पहले सूर्य और चंद्र ग्रहण लगने का कारण बताया था

उन्होंने बताया की ग्रहण के दौरान अंधेरा का होने परछाई के कारण होता है। आर्यभट्ट मानते थे की पृथ्वी ब्रह्माण्ड का केन्द्र हो सकता है।

यदपि बाद में उनके इस धारणा को स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने दुनियाँ को ग्रह और उपग्रह के बारें में कई अहम जानकारी प्रदान की।

महान गणितज्ञ आर्यभट्ट का जीवन परिचय और गणित में योगदान

आर्यभट्ट प्राचीन भारत के सिर्फ खगोल विज्ञानी ही नहीं बल्कि अपने समय के एक प्रख्यात गणितज्ञ भी थे। आर्यभट्ट का गणित में योगदान उल्लेखनीय रहा है। गणित के क्षेत्र में उनका योगदान खगोलविज्ञान की तरह ही महत्वपूर्ण हैं।

भारतीय गणितज्ञ रामानुजन की तरह आर्यभट्ट ने गणित के वर्गमूल, घनमूल, ज्यामिति और मेन्सुरेशन के बारें में उन्होंने अहम जानकारी प्रदान की। आर्यभट्ट का जीवन परिचय और उनका गणित में योगदान

साथ ही इन्होंने द्विघात समीकरण, टेबल ऑफ sines की विवेचना की है जिसका उपयोग गणित के क्षेत्र में वृहद पैमाने पर किया जाता है।

दुनियाँ को शून्य का ज्ञान – discovery of zero by aryabhatta in hindi

आर्यभट्ट का जीवन परिचय – Aryabhatta Biography in Hindi
आर्यभट्ट का जीवन परिचय – ARYABHATTA BIOGRAPHY IN HINDI

भारत के महान सपूत भारतीय गणितज्ञ आर्यभट्ट ने Zero Ki Khoj की थी। सबसे पहले उन्होंने ही दुनियाँ को शून्य का ज्ञान दिया। शून्य के आविष्कार के फलस्वरूप गणितीय गणना में आसानी हुई। उन्होंने बड़ी-बड़ी संख्याओं को शब्दों में लिखने का अहम तरीका से भी अवगत कराया।

पाई का सटीक मान की खोज   

आर्यभट्ट ने सबसे पहले दुनियाँ को पाई का सटीक मान 3.1416 बताया था। आर्यभट्ट ने π के मान को दशमलव के तीन अंकों तक सही अनुमानित किया था, उनका यह अनुमान उनके अपने समय का सबसे सटीक अनुमान था।

उन्हें पहला गणितज्ञ माना जाता है। जिन्होंने एक तालिकाएँ बनाईं जो बाद में Sines तालिकाओं के नाम से गणित के दुनियाँ में प्रसिद्ध हुआ।

आर्यभट्ट द्वारा लिखित प्रसिद्ध ग्रंथ

कहा जाता है की महान खगोलशास्त्री आर्यभट्ट ने ज्योतिष, गणित और खगोल विज्ञान के संबंधित अनेक रचनायें की। उनकी प्रमुख रचनायें का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार हैं।

आर्यभटीय – नालंदा विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद आर्यभट्ट ने ‘आर्यभटिया‘ नामक ग्रन्थ की रचना की। ‘आर्यभटिया को अपने समय का सबसे प्रसिद्ध ग्रन्थ माना जाता था।

आर्यभटिया में उन्होंने गणित के साथ-साथ ज्योतिष विज्ञान के कई पहलुओं के बारें में जिक्र किया है। आर्यभट्ट के शिष्य भाषकर प्रथम ने इस रचना को अश्मक तंत्र के नाम से संबोधित किया।

चार पदों (गितिकापद, गणितपद, कालक्रिया पद और गोलपद) में विभक्त यह वृहद ग्रंथ 108 छंदों/श्लोकों का समायोजन है।   प्राचीन समय में गुप्त वंश के बुद्धगुप्त ने इस ग्रन्थ को एक प्रसिद्ध ग्रन्थ के रूप में मान्यता प्रदान की थी।

आर्यभट्ट सिद्धांत – आर्यभटिया नामक ग्रंथ के बाद इन्होंने एक अन्य ग्रन्थ ‘आर्यभट्ट सिद्धांत’ की रचना की। इस ग्रंथ में ज्योतिष विज्ञान की गणनाओं के बारें में विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया। इनकी इस पुस्तक में कई खगोलीय उपकरण का भी वर्णन मिलता है।

इस उपकरण में शंकु यंत्र, छाया यंत्र, कोण मापी उपकरण आदि का वर्णन मिलता है। इस पुस्तक में आर्यभट्ट द्वारा दिये गए आँकड़े का आज भी देश में पंचांग तैयार करने में मदद लिया जाता है। कहा जाता ही उनकी इस रचना में सूर्य सिद्धांत का प्रयोग मिलता है।

सम्मान व पुरस्कार

खगोलविज्ञान, गणित और ज्योतिषशास्त्र में उनके अहम योगदानों को हमेशा याद रखा जायेगा। भारत के इस महान खगोलशास्त्री के सम्मान में भारत सरकार ने देश के पहले उपग्रह का नाम आर्यभट्ट रखा था।

भारत के ऐसे महान् गणितज्ञ और ज्योतिषी को आने वाली पीढ़ी कभी नहीं भुल सकेंगी। जिस प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय से आर्यभट्ट ने शिक्षा ग्रहण की, बाद में उसी नालंदा विश्वविद्यालय का उन्हें प्रमुख नियुक्त किया था।

आर्यभट्ट के सम्मान में

भारत के इस महान गणितज्ञ आर्यभट्ट के सम्मान में भारत सरकार ने प्रथम उपग्रह का नाम आर्यभट्ट रखा। इस उपग्रह आर्यभट्ट को सन् 1973 ईस्वी में रूस के द्वारा अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया गया। करीव 400 कि. ग्रा. के बजन वाली यह उपग्रह मार्च 1981 तक पृथ्वी की कक्षा मे परिभ्रमण करता रहा था।

आर्यभट्ट की मृत्यु  

आर्यभट्ट की मृत्यु कब और कहाँ हुई इसको लेकर भी विद्वान एक मत नहीं हैं। लेकिन कुछ विद्वान के अनुसार उनकी मृत्यु 550 ईस्वी में हुआ था।

कहा जाता है की कभी-कभी भारत की धरती ऐसे महान सपूतों को जन्म देती है जो अपने कार्यों के द्वारा एक अमीट छाप छोड़ देते हैं। आर्यभट्ट भारत की धरती पर जन्मे ऐसे ही महान सपूत थे जिन्होंने अपने कार्यों से भारतवर्ष को गौरान्वित किया। 

इन्हें भी पढ़ें : टॉप 25 भारतीय गणितज्ञ का जीवन परिचय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (F.A.Q)

  1. प्रश्न –आर्यभट्ट ने गणित में क्या योगदान दिया?

    उत्तर – आर्यभट्ट ने ‘पाई’ (p) की मान निर्धारित किया। साथ ही उन्होंने द्विघात समीकरण, शून्य के सिद्धांत के आविष्कार, बीजगणित, रेखागणित और त्रिकोणमिति में अहम योगदान दिया।

  2. प्रश्न –आर्यभट्ट का जन्म कौन से युग में हुआ था?

    उत्तर – आर्यभट्ट का जन्म 476 ईस्वी पूर्व कुसुमपुर (पाटलिपुत्र) अर्थात आधुनिक पटना में हुआ था।

  3. प्रश्न –आर्यभट्ट ने कौन से ग्रंथ की रचना की?

    उत्तर – आर्यभट्ट ने आर्यभटिया और ‘आर्यभट्ट सिद्धांत‘ नामक ग्रंथ की रचना की। आर्यभटिय जहाँ गणित से संबंधित है वहीं आर्यभट्ट सिद्धांत सिद्धांत ज्योतिष और खगोल विज्ञान पर आधारित है।

  4. प्रश्न –आर्यभट्ट ने खगोल विज्ञान में क्या योगदान दिया?

    उत्तर – आर्यभट्ट प्राचीन भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे। साथ ही उन्होंने सौर मंडल से संबंधित अहम जानकारी प्रदान की।

  5. प्रश्न – आर्यभट्ट किसके दरबार में थे?

    उत्तरआर्यभट्‍ट  गणित और खगोलशास्त्र के प्रकांड विद्वान थे। वे महाराजा चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के दरबार के जाने माने राजनीतिज्ञ विद्वानों में से एक थे

  6. प्रश्न-आर्यभट्ट का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?

    उत्तर – महान खगोलशास्त्री और गणितज्ञ आर्यभट्ट का जन्म 476 ईस्वी पूर्व कुसुमपुर(पटना का प्राचीन नाम) में हुआ था।

अंत में (conclusion)

इस लेख में आर्यभट्ट का व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों का विवेचन किया गया है। भारतीय गणितज्ञ की जीवनी की इस शृंखला में आर्यभट्ट का जीवन परिचय हिंदी में जरूर अच्छा लगा होगा।

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