वैज्ञानिक प्रो देवेंद्र लाल की जीवनी | Biography of Devendra Lal in Hindi

प्रो. देवेंद्र लाल भारत के एक प्रसिद्ध कॉस्मिक रे भौतिक विज्ञानी तथा खगोल शास्त्री थे। भारत में वाराणसी में जन्मे प्रो. देवेंद्र लाल ने पृथ्वी और ग्रह वैज्ञानिक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई।

उन्हें चन्द्रमा से प्राप्त चट्टानों की उल्काओं तथा समुद्र की तलहटी से प्राप्त प्रदार्थो पर गहन शोध के लिए जाना जाता है। उन्होंने पृथ्वी और ग्रह विज्ञान के विविध क्षेत्रों में अपना शोध किया।

उनकी सबसे महत्त्वपूर्ण खोज कास्मिक किरणों की तीव्रता से संबंधित है। उन्होंने अपने अनुसंधान से यह सिद्ध किया की कॉस्मिक किरण की तीव्रता आज भी वहीं है जो करोड़ों वर्ष पहले थी।

प्रो. देवेन्द्र लाल अहमदाबाद स्थित ‘भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला’ के फेलो रहे। बाद में अमेरिका चले गये वहाँ कैलिफोर्निया विश्वविधालय में जीवन के अंत समय तक प्रोफेसर रहे।

प्रो देवेन्द्र लाल का जीवन परिचय शीर्षक वाले इस लेख में हम उनके प्रारंभी जीवन, शिक्षा, करियर, विज्ञान में उनक योगदान, सम्मान और पुरस्कार के बारें में विस्तार से जानेंगे।

वैज्ञानिक प्रो देवेंद्र लाल की जीवनी – Biography of Devendra Lal in Hindi

प्रारम्भिक जीवन  –

प्रसिद्ध वैज्ञानिक देवेन्द्र लाल का जन्म वाराणसी उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनकी आरंभिक शिक्षा अपने शहर बनारस में हुई। अपनी माध्यमिक शिक्षा हरिश्चंद्र हाईस्कूल से करने के बाद इंटर्मीडिएट उन्होंने Queens college से पूरी की।

उसके बाद उनका प्रवेश बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में हुआ। यहाँ से उन्होंने सन 1947 में भौतिक विज्ञान में स्नातक की तथा 1949 में एमएससी की डिग्री हासिल की।

उसके बाद वे PhD करने के लिए शोध छात्र के रूप में ‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR)‘ मुंबई से जुड़ गए। उन्होंने यहाँ प्रो बर्नार्ड पीटर्स के नेतृत्व में कॉस्मिक किरण के गुणों पर शोधकार्य किया।

उल्कापिंडों और चंद्रमा के नमूनों में संग्रहीत पदार्थ के साथ ब्रह्मांडीय किरणों के अंतःक्रियाओं के हस्ताक्षर के उनके गहन अध्ययन ने कई ग्रहों, सौर मंडल और खगोल भौतिकी प्रक्रियाओं पर नया ज्ञान प्रदान किया।

पारिवारिक जीवन

सन 1955 में प्रो देवेन्द्र लाल ने अपने सहयोगी सुश्री अरुणा के साथ वैवाहिक बंधन में बंध गए। श्रीमती अरुणा अपने पति प्रो. लाल को उनके शोधकार्यों में हर संभव मदद करती।

कैरीयर

भारतीय परमाणु भौतिक विज्ञानी प्रो देवेंद्र लाल बॉम्बे में ‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च‘ में एक छात्र के रूप अपना करियर की शुरुआत की थी। लेकिन सन 1972 का साल उनके कैरीयर के लिए सबसे महत्वपूर्ण साल रहा।

इस वर्ष इनकी नियुक्ति भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), अहमदाबाद में प्रो. विक्रम साराभाई के स्थान पर निदेशक के पद पर हुई। इस पद पर रहते हुए उन्होंने अपने कर्तव्य का पूरी तत्परता के साथ निर्वहन किया।

इन दौरान उन्होंने पृथ्वी, खगोल और ग्रह विज्ञान के क्षेत्र में कई नए कार्यक्रमों का श्रीगणेश किया। प्रो. देवेन्द्र लाल पृथ्वी और ग्रह विज्ञान के क्षेत्र में विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा हेतु कई कदम उठाए।

इसी क्रम में उन्होंने TIFR में पहली ‘नेशनल रेडियोकार्बन प्रयोगशाला‘ की स्थापना भी की। राजस्थान के माउंट आबू में स्थित ‘इन्फ्रा-रेड खगोलीय वेधशाला‘ की स्थापना का श्रेय प्रो देवेन्द्र लाल को ही जाता है।

वे सन 1972 से 1983 तक ‘भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद’ के निदेशक रहे। उसके बाद उन्होंने सन 1983 में अपनी सेवा से त्यागपत्र दे दिये।

प्रो देवेंद्र लाल 1983 से 1987 ईस्वी के दौरान इंटरनेशनल ‘यूनियन ऑफ जियोडेसी एंड जियोफिजिक्स” (IUGG) के अध्यक्ष रहे। उसके बाद वे अमेरिका चले गए।

जहाँ “स्क्रिप्स इंस्टीट्यूशन ऑफ ओशनोग्राफी”, सैन डिएगो, कैलिफोर्निया (अमेरिका) में सन 1987 से 2012 तक पूर्णकालिक प्रोफेसर के रूप में कार्य किया।

सम्मान व पुरस्कार

प्रो. देवेन्द्र लाल को उनके शोध व योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान और पुरस्कार मिले। उन्हें कई संस्थानों ने अपना फ़ेलो बनाया।

  • फ़ेलो(सदस्य), भारतीय भूभौतिकीय संघ (1936),
  • फ़ेलो(सदस्य), भारतीय विज्ञान अकादमी(1964),
  • फ़ेलो(सदस्य), भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी(1971)
  • फ़ेलो(सदस्य), रॉयल सोसाइटी लंदन (1979),
  • फ़ेलो(सदस्य), थर्ड वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसेज के संस्थापक (1983), 
  • मानद फ़ेलो(सदस्य), जियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया(1992),
  • फ़ेलो(सदस्य), अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ साइंस (1997)।

उनके पुरस्कार की बात की जाय तो उन्हें निम्नलिखित पुरस्कार मिले:-

  • सन 1965 भारतीय भूभौतिकीय संघ द्वारा उन्हें मेडल प्रदान किया गया।
  • सन 1967 में उन्हें विज्ञान में योगदान के लिए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार मिला।
  • सन 1997 ईस्वी में जियोकेमिकल सोसायटी द्वारा उन्हें गोल्डस्मिथ मेडल प्रदान किया गया।
  • उन्हें बर्ष (1996-97) का सर सी.वी. रमन जन्म शताब्दी पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • विज्ञान में अहम योगदान हेतु भारत सरकार ने उन्हें सन 1971 में “पद्मश्री” प्रदान किया।
  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने उन्हें मानद डीएससी की उपाधि प्रदान की।
  • सन 1986 में उन्हें पंडित जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार प्रदान किया गया।

प्रो देवेंद्र लाल मेमोरियल मेडल (DEVENDRA LAL MEDAL)

इस पदक की स्थापना इसी भूभौतिकीविद् प्रोफेसर देवेंद्र लाल के स्मृति में प्रदान किया जाता है। अमेरिका द्वारा यह पुरस्कार पृथ्वी और अंतरिक्ष विज्ञान में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।

वैज्ञानिक प्रो देवेंद्र लाल की जीवनी | BIOGRAPHY OF DEVENDRA LAL IN HINDI

प्रो देवेन्द्र लाल का निधन (Death of Devendra Lal)

प्रो देवेन्द्र लाल का निधन 01 दिसंबर 2012 को अमेरिका के सैन डिएगो के ला जोला(in La Jolla, San Diego) में हुआ था। वे 83 वर्ष तक जीवित रहते हुए विज्ञान की सेवा कर भारत को गौरान्वित किया।

इस प्रकार वैज्ञानिक प्रो देवेंद्र लाल की जीवनी ( BIOGRAPHY OF DEVENDRA LAL IN HINDI ) में हमने देखा की वे अद्भुत प्रतिभा के धनी थे।

उनके निधन से विश्व ने एक महान पृथ्वी और ग्रह वैज्ञानिक, बहुमुखी शिक्षक और संरक्षक खो दिया। लेकिन उनके योगदान हमेशा प्रेरणा स्रोत बनी रहेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल – F.A.Q

प्रो देवेंद्र लाल द्वारा लिखित पुस्तक के नाम है? (Books written by scientist Devendra Lal )

1. ‘The Production Rate of Natural Tritium’, 2. ‘Production of 10 Be and 26 Al by cosmic rays in terrestrial quartz in situ and implications for erosion rates’, 3. ‘Cosmic ray production rates of 10Be and 26Al in quartz from glacially polished rocks‘.


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