Dr APJ Abdul kalam ka jeevan parichay | डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम जीवन परिचय

Dr APJ Abdul kalam ka jeevan parichay
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डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम की गिनती भारत के महान वैज्ञानिक के रूप में होती है। उनके आगुआई में भारत ने मिसाइल के क्षेत्र में ऊंचाई को छुआ। Dr APJ Abdul kalam ka jeevan paricha शीर्षक वाले इस लेख में हम Dr. APJ Abdul Kalam Biography, शिक्षा, करियर, जीवन परिचय, पुरस्कार, नेटवर्थ, किताबें के बारें में जानेंगे।

Contents
डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम Dr APJ Abdul kalam ka jeevan parichayडॉ ए पी जे अब्दुल कलाम का जीवन परिचय – A.P.J. Abdul Kalam Biography in HindiDr. APJ Abdul Kalam Biography, प्रारम्भिक जीवन शिक्षा, करियर, पुरस्कार, किताबेंप्रारम्भिक जीवनअब्दुल कलाम की शिक्षा (Dr APJ Abdul Kalam Education)डॉ एपीजे अब्दुल कलाम करियरअब्दुल कलाम के बारें में खास बातेंलेखन के प्रति भी गहरी रुचिअब्दुल कलाम की पुस्तकें (A.P.J. Abdul Kalam Books)एपीजे अब्दुल कलाम का विज्ञान में योगदानएपीजे अब्दुल कलाम का परमाणु परीक्षण में भूमिकाएपीजे अब्दुल कलाम की मिसाइल के नामडॉ अब्दुल कलाम का राष्ट्रपति तक का सफरएपीजे अब्दुल कलाम की मृत्यु (A.P.J. abdul kalam death )ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम पुरस्कार एपीजे अब्दुल कलाम विचारF.A.Q – डॉ० एपीजे अब्दुल कलाम जीवन परिचय से जुड़े कुछ प्रश्नप्रश्न- एपीजे अब्दुल कलाम की जीवनी का क्या नाम है?प्रश्न- डा कलाम क्या बनना चाहते थे?प्रश्न- एपीजे अब्दुल कलाम ने क्या आविष्कार किया था?प्रश्न- भारत का मिसाइल मैन किसे कहा जाता है ?प्रश्न- भारत के 11 वें और प्रथम वैज्ञानिक राष्ट्रपति कौन है?प्रश्न- एपीजे अब्दुल कलाम की मृत्यु कब हुई ?

डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम वैज्ञानिक के रूप में कार्ये करते हुए कई स्वदेशी मिसाइलों को विकसित और सफल परीक्षण किया। उनके प्रयास और निर्देशन में भारत ने मिसाइल और नाभकीय क्षेत्र में कई अहम मुकाम को हासिल किया।

इस कारण वे भारत में मिसाइल प्रोग्राम के जनक और भारत के मिसाइल मैन के नाम से प्रसिद्ध हुए। भारत ने 11 और 13 मई, 1998 को राजस्थान के पोरखरण में उन्ही की उपस्थिति में पांच परमाणु परीक्षण किये थे।

डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम Dr APJ Abdul kalam ka jeevan parichay

डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम जीवन परिचय से पता चलता है की निर्धनता कभी भी सफलता के आड़े नहीं आती। उन्होंने एक निर्धन परिवार में जन्म लेने के बावजूद मिसाइल में से लेकर देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति तक पहुंचे।

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वे मिसाइल मेन के रूप में जितनी शोहरत हासिल की उतनी ही शोहरत उन्हें राष्ट्रपति बनने के बाद मिली। देश के सर्वोच्च पद पर आसीन होकर उन्होंने जनता के हित का इतना ध्यान रखा की वे ‘जनता के राष्ट्रपति‘ कहलाये।

कहते हैं की कलाम साहब शुरू से स्वावलंबी जीवन पसन्द था। बचपन में घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वे अखबार बेचकर अपने पढ़ाई का खर्च और पिता की आर्थिक स्थिति को सुधारने में मदद किया करते थे।

उस बक्त शायद ही किसी ने सोचा होगा की फुटपाथ पर अखबार बेचने वाला लड़का एक दिन विश्व का महान वैज्ञानिक और भारत का राष्ट्रपति बनेगा। लेकिन अपनी कड़ी मेहनत व लगन से वे अपने कर्तव्य-पथ पर आगे बढ़ते रहे।

कलाम साहब जीवन भर अविवाहित रहे लेकिन बच्चों से उन्हें बहुत ही लगाव था। उन्हें भारतीय संगीत के साथ काव्यरचना और लेखन में भी गहरी रुचि थी। उनका सारा जीवन देश की सेवा में समर्पित रहा।

उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया। इससे पहले उन्हें 1981 में पद्म भूषण और 1990 में पद्मा विभूषण से सम्मानित किया गया था।

एपीजे अब्दुल कलाम का शिक्षा में योगदान को भी भुलाया नहीं जा सकता। छात्रों के बीच शिक्षा को बढ़ावा देने के कारण उनके जन्म दिवस 15 अक्टूबर को ‘विश्व छात्र दिवस‘ के रूप में मनाई जाती है।

डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम का जीवन परिचय – A.P.J. Abdul Kalam Biography in Hindi

पूरा नाम -अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम
प्रचलित नाम – डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
नाम इंग्लिश में– Avul Pakir Jainulabdeen Abdul Kalam
जन्म (Date of Birth)-15 अक्टूबर 1931
जन्म स्थान (Birth Place)– धनुषकोडी, रामेश्वरम, तमिलनाडु, भारत
पिता का नाम (Father’s Name) – जैनुलाब्दीन
माता का नाम (Mother’s Name) – असीम्मा
पत्नी व बच्चे – आजीवन अविवाहित रहे
राष्ट्रीयता (Nationality)– भारतीय
कार्यक्षेत्र – वैज्ञानिक, लेखक, प्रोफेसर
प्रसिद्धि – मिसाइल मेन और राष्ट्रपति के रूप में
शौक – वीणा वादन, लेखन और शोध
राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल – 25 जुलाई 2022 से 25 जुलाई 2007 तक
मृत्यु की तिथि (Death)– 27 जुलाई 2015,
निधन का स्थान – शिलांग, मेघालय, भारत,

Dr. APJ Abdul Kalam Biography, प्रारम्भिक जीवन शिक्षा, करियर, पुरस्कार, किताबें

प्रारम्भिक जीवन

एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा नाम ‘डॉ. अब्दुल पाकिर जैनुलअब्दीन अब्दुल कलाम’ है। इनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 ईस्वी में तमिलनाडु के रामेश्वरम् के पास धनुषकोडी में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था।

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के पिता का नाम जैनुलाबदीन (Jainulabdeen)  था। इनके पिता एक मछुआरों का काम करते थे और अन्य मछुआरों को अपनी नाव भाड़े पर देने का भी काम किया करते थे। अब्दुल कलाम की माता का नाम अशिअम्मा थी।

मछुआरों का काम करना ही यही उनके परिवार के आय का मुख्य स्रोत था। लेकिन कलाम जी के पिता अनपढ़ होने के बावजूद भी उच्च विचार रखने वाले इंसान थे। उनकी घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी फिर भी वे अपने बच्चों को उच्च शिक्षा देने के पक्षधर थे।

डॉ अब्दुल कलाम कुल पांच भाई-बहन थे, अपने भाई बहन में सबसे छोटे थे। जब उन्होंने होश संभाला तब परिवार की गरीबी को देखकर परिवार का आर्थिक मदद करना शुरू किया। फलतः परिवार की मदद करने के लिए उन्होंने छोटी सी उम्र में ही अखबार बेचने का काम शुरू कर दिया था।

व्यक्तिगत जीवन

डॉ. ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम जीवन भर शादी नहीं की। उन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवन को देश की सेवा में समर्पित कर दिया।

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अब्दुल कलाम की शिक्षा (Dr APJ Abdul Kalam Education)

कहा जाता है की स्कूल के दिनों में सामान्य छात्र ही थे। लेकिन कुछ कर गुजरने का जज्बा तथा नई चीजों को सीखने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। इसके लिए वे अखवार बेचने के अलावा घंटों पढ़ाई किया करते थे।

कलाम साहब को बचपन में गणित गहरी रुचि थी। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा रामेश्वरम् के पास रामनाथपुरम् में हुई। अब्दुल कलाम जीवनी पढ़ने से लगता है की उनके अंदर कुछ कर गुजरने की तमन्ना बचपन से ही थी।

चूंकि उस समय बिजली के अभाव होता था। इस कारण वे दीपक की रोशनी में कई घंटे अपनी पढ़ाई करते थे। बचपन से ही वे मेहनती और स्वावलंबी थे इस कारण उन्होंने गरीबी को कभी भी अपने पढ़ाई में बाधक नहीं बनने दिया।

अपने पढ़ाई का खर्चा और परिवार की मदद के लिए वे सुबह रामेश्वरम् के बस अड्डे और रेलवे स्टेशन पर जाकर अखबार बेचने का काम करते थे। हाईस्कूल पास करने के बाद उनका नामांकरण तिरुचिरापल्ली के जोसफ कॉलेज में हुई।

तिरुचिरापल्ली के जोसफ कॉलेज से उन्होंने विज्ञान विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की। तत्पश्चात उनका नामांकन मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में हुआ। यहाँ से उन्होंने सन् 1957 में ईस्वी में ऐरोनॉटिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में डी.एम.आई.टी. की डिग्री हासिल की।

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डॉ एपीजे अब्दुल कलाम करियर

डॉ कलाम भारतीय वायू सेना में पायलट बनाना चाहते थे। लेकिन कहा जाता है की वे मेरिट लिस्ट में 9 वें स्थान पर थे जबकी रिक्त पद कुल आठ थे। इस कारण से उनका वायु सेना में चयन नहीं हो सका।

फलतः उन्होंने अपनी कैरियर की सुरुआत सन् 1958 में रक्षा-अनुसन्धान एवं विकास संगठन (DRDO) से की। रक्षा-अनुसन्धान एवं विकास संगठन में एक वैज्ञानिक के रूप में उन्होंने अपने काम से सबको प्रभावित किया।

आगे चलकर वर्ष 1963 ईस्वी में उनका चयन भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) में हो गया। भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन में उन्हें एस. एल. वी.-3 के परियोजना निदेशक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई।

उनका सोच था की देश की प्रगीत स्वदेशी तकनीक के बिना संभव नहीं है। इसके लिए उन्होंने कई देशी तकनीक को विकसित करने पर काम किया। इस प्रकार उन्होंने देश के अंदर कई अन्तरिक्ष परियोजनाओं के लिए स्वदेशी पारुप तैयार करने में अहम योगदान दिया।

उनकी संरक्षण में देशी तकनीक से विकसित कई मिसाइलों का सफल परीक्षण किया गया। एपीजे अब्दुल कलाम की मिसाइल के नाम पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश, नाग और अग्नि था, जो उनके कार्यकाल में सफल परीक्षण हुआ।

अब्दुल कलाम के बारें में खास बातें

डॉ. कलाम का जन्म एक मछुआरे मुस्लिम परिवार में होने के बावजूद उन्हें शाकाहारी भोजन करते थे। उनका भारत के सभ्यता और संस्कृति से गहरी लगाव था। उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत में भी गहरी रुचि थी।

कलाम साहब भारतीय आदर्शों व मूल्यों के प्रति सदैव आस्थावान रहे। वे सभी धर्मों में समभाव रखते थे और किसी से भेद-भाव नहीं रखते। मुस्लिम होने के बावजूद भी कुरान के अलावा उनकी प्रिय पुस्तक श्रीमद्भगवद्गीता था।

बच्चों से उन्हें इतना गहरा लगाव था की राष्ट्रपति बनने के बाद भी स्कूली बच्चों को अक्सर राष्ट्रपती भवन में बुलाकर मुलाकात किया करते थे। उनका सपना था की विश्व में, भारत की गिनती एक उन्नत और सबल राष्ट्र के रूप में हो।

अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने जीवनप्रयत्न काम किया और भारत को एक परमाणु सम्पन्न राष्ट की श्रेणि में लाकर खड़ा कर दिया। देश के लिए डॉ कलाम के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

लेखन के प्रति भी गहरी रुचि

डॉ अब्दुल कलाम साहब का मातृभाषा तमिल के प्रति विशेष लगाव था। लेकिन अन्य भारतीय भाषाओं के प्रति भी उनका उतना ही आदर था। वे एक वैज्ञानिक ही नहीं बल्कि एक अच्छे कवि भी थे।

काव्यरचना में भी कलाम साहब की रुचि इतनी गहरी थी की उन्होंने कई तमिल कविताएँ की रचना भी की। इसके अलावा अब्दुल कलाम जी ने कई पुस्तकें लिखी। “विंग्स ऑफ फायर” डॉ अब्दुल कलाम की आत्मकथा है।

उनकी आत्मकथा फ्रेंच और चीनी भाषा सहित विश्व के 13 भाषाओं में छपी थी। अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने करीब 25 किताबें लिखी। डॉ अब्दुल कलाम द्वारा लिखित कुछ प्रमुख पुस्तकों की सूची (List of Books written By Abdul Kalam) इस प्रकार हैं।

अब्दुल कलाम की पुस्तकें (A.P.J. Abdul Kalam Books)

  • वर्ष 1998 – इंडिया 2020: ए विजन फॉर द न्यू मिलेनियम(India vision: A Vision for the New Millennium),
  • वर्ष 1999 – विंग्स ऑफ फायर: एक आत्मकथा (Wings of Fire: An Autobiography), 
  • वर्ष 2002- इगनाइटेड माइंड्स: अनलीजिंग द पॉवर विदिन इंडिया(Unleasing the Power Within India),
  • वर्ष 2004 – ए बायोग्राफी इन वर्स एंड कलर्स(The Luminous Sparks: A Biography in Verse and Colours),
  • वर्ष 2005- मिशन ऑफ इंडिया: ए विजन ऑफ इंडियन यूथ (Mission of India: A Vision of Indian Youth) 
  • वर्ष 2013- माई जर्नी: ट्रांसफॉर्मिंग ड्रीम्स इन्टू एक्शंस(My Journey: Transforming Dreams into Actions),

एपीजे अब्दुल कलाम का विज्ञान में योगदान

ए. पी जे अब्दुल कलाम का रक्षा विज्ञान के क्षेत्र में उनका खोज और अनुसंधान काफी सराहनीय रहा। अब्दुल कलाम साहब सन 1958 ईस्वी से लेकर सन 1963 ईस्वी तक इसरो(ISRO) में वैज्ञानिक पद पर कार्यरत रहे।

तत्पश्चात वे सन् 1963 ईस्वी से लेकर सन 1982 ईस्वी तक डिफेन्स रिसर्च एण्ड डेवलपमैन्ट लैबोरेटरी(DRDO), हैदराबाद के डाईरेक्टर के पद पर रहे। आगे चलकर वे भारत सरकार के रक्षा-मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार बने।  

भारत के नाभिकीय कार्यक्रमों में भी उनका अहम योगदान रहा। देश को मिसाइल के क्षेत्र मे उन्नत बनाने में कलाम साहब का अद्वितीय योगदान रहा। उनके कार्यकाल में भारत ने मिसाइल के क्षेत्र में कई उपलब्धियों को हासिल किया।

एपीजे अब्दुल कलाम का परमाणु परीक्षण में भूमिका

वर्ष 1998 में जब भारत ने तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल विहारी वाजपेयी के कार्यकाल में पोखरण में परमाणु परिक्षण किया था। उसमें कलाम साहब की अहम भूमिका थी। उस दौरान उन्होंने लीड रोल निभाया था।

एपीजे अब्दुल कलाम की मिसाइल के नाम

मिसाइल टेक्नोलाजी के क्षेत्र में इनका कार्य अत्यंत ही सराहनीय रहा। उनके कार्यकाल में भारत ने स्वदेश में निर्मित अग्नि, पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल और नाग जैसे मिसाइलों का सफल परीक्षण किया।

देश को मिसाइलों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में उनका बहुत बड़ा हाथ रहा। मिसाइल के क्षेत्र में योगदान के कारण ही उन्हें भारत का मिसाइल मेन (missile man )के नाम से पुकारा जाता है। 

डॉ अब्दुल कलाम का राष्ट्रपति तक का सफर

वर्ष 2002 में जब भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री के. आर. नारायणन का कार्यकाल पूरा हो रहा था। तब डॉ. कलाम को भारत के राष्ट्रपति पद के लिए सुयोग्य उम्मीदवार के रूप में चुना गया। जिसका अधिकांश राजनीतिक पार्टियों ने समर्थन किया।

विपक्ष ने इनके विरुद्ध महान स्वतंरता सेनानी और आजाद हिन्द फौज की पहली महिला कैप्टन लक्ष्मी सहगल को अपना उमीदवार बनाया। लेकिन अब्दुल कलाम जे ने अपने प्रतिद्वंदी को भारी मतों से हराकर राष्ट्रपति का चुनाव जीता।

फलस्वरूप 25 जुलाई  सन 2002 को डॉ कलाम भारत के 12 वें राष्ट्रपति के रूप में सपथ ग्रहण किया। इस प्रकार देश के सर्वोच्च पद पर वर्ष 2002 से 2007 तक विराजमान रहे। जनहित का उन्होंने सबसे ज्यादा महत्व दिया और जनता का राष्ट्रपति के रूप में प्रसिद्ध हुए।

डॉ अब्दुल कलाम का नाम उन राष्ट्रपति की सूची में शामिल है जिन्हें राष्टपति बनने से पहले ही भारत रत्न मिल चुका था। हमारे देश के लिए यह बहुत ही गौरवपूर्ण बात है कि देश के सर्वोच्च पद पर मिसाइल मेन डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम विराजमान रहे।

देश के सभी वैज्ञानिक के साथ-साथ समस्त देशवासी का उनके ऊपर गर्व है। वर्ष 2007 में राष्ट्रपति के दायित्व से मुक्ति होने के बाद वे सक्रिय रूप से देश सेवा में लगे रहे। वे कई शैक्षणिक संस्थानों में मानद फेलो व विजिटर प्रोफेसर के रूप में अपना योगदान दे रहे थे।

डॉ कलाम साहब देश की युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहे। वे अंत समय तक देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत रहे है।

Dr APJ Abdul kalam ka jeevan parichay
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एपीजे अब्दुल कलाम की मृत्यु (A.P.J. abdul kalam death )

एपीजे अब्दुल कलाम की मृत्यु 84 वर्ष की उम्र में 27 जुलाई 2015 को मेघालय की राजधानी शिलांग में हृदय गति रुकने से हुआ। उन्होंने जीवन के आखिरी पल तक इस देश की सेवा करते हुए इस संसार से सदा के लिए प्रस्थान कर गये।

डॉ कलाम 27 जुलाई 2015 के दिन भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) शिलांग में छात्रों को संबोधित कर रहे थे। उसी क्रम में उन्हें सिने में तेज दर्द हुआ और वे वहीं बेहोश हो गए। उन्हें अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टरों ने कार्डियक अटैक की पुष्टि की।

डॉक्टर की टीम ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिस की लेकिन कहते हैं न की नियति को कुछ और ही मंजूर था। कार्डियक अटैक के कुछ घंटों के बाद ही वे दुनियाँ को अलविदा कह दिए।

उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव रामेश्वरम में किया गया जिसमें भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई गण्य मान्य व्यक्ति शामिल हुए।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि, 27 जुलाई को पूरे देश में उन्हें श्रद्धा और नमन के साथ याद किया जाता है। डॉ कलाम आज हमारे बीच नहीं रहे लेकिन वे हमेशा छात्रों और युवाओं के प्रेरणास्त्रोत बने रहेंगे।

ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम पुरस्कार 

डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम (Dr. A.P.J. ABDUL KALAM) ने दुनियाँ में भारत को मिसाइल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महती योगदान दिया। ये कई प्रसिद्ध संस्थाओं के उपाध्यक्ष (vice president ) और फैलो रहे।

कलाम साहब एरोनौटीकल सोसाइटी के वाइस प्रेसीडेन्ट के साथ-साथ इन्डियन एकेडेमी ऑफ साइंस, इन्डियन नेशनल एकेडेमी ऑफ इंजीनियरिंग आदि के फैलो (सदस्य) भी चुने गये। 

एपीजे अब्दुल कलाम को देश-विदेश के करीब 48 विश्वविद्यालयों और संस्थानों द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई है। संयुक्त राष्ट्रसंध ने शिक्षा को बढ़ावा देने के करना वर्ष 2010 मे उनके 79 वें जन्म दिवस के अवसर पर 25 अक्टूबर को ‘विश्व छात्र दिवस‘ के रूप में मनाने की घोषणा की।

उनके अहम योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार और सम्मान से अलंकृत किया गया। आइये एक नजर उनके अवॉर्ड और पुरस्कार पर डालते हैं।

  • भारत सरकार ने उन्हें सन् 1981 ईस्वी में पद्म भूषण तथा सन 1990 ईस्वी में पद्म विभूषण से सम्मानित किया।
  • डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम को सन 1997 ईस्वी में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से विभूषित किया गया।
  • सन् 2000 ईस्वी में विश्व-भारती का देशी कोटम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • उन्हें ओमप्रकाश भसीन पुरस्कार, डॉ. बिरेन राय स्पेस अवार्ड, नेशनल नेहरू अवार्ड आदि से सम्मानित किया गया।
  • वर्ष 1994 ईस्वी में डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम साहब को आर्यभट्ट पुरस्कार प्राप्त हुआ।
  • उन्हें 1994 में एरोनौटीकल सोसाइटी ऑफ इन्डिया सम्मान से भी अलंकृत किया गया।
  • वर्ष 1996 में उन्हें जी.एम. मोदी पुरस्कार और एच.के. फ्लोरिडा एवार्ड प्राप्त हुआ।

एपीजे अब्दुल कलाम विचार

अब्दुल कलाम के विचार सदा युवाओं को प्रेरित करते रहेंगे।

सपने वो नहीं होते जो हम रात में सोने के बाद देखते हैं। बल्कि हमारे सपने ऐसा होना चाहिए जो हमें सोने न दे।

अगर तुम सूरज की तरह चमकना चाहते हो तो पहले सूरज की तरह जलना सीखो”

विज्ञान मानवता के लिए एक खूबसूरत तोहफा है, हमें इसे बिगाड़ना नहीं चाहिए”

अपने मिशन में कामयाब होने के लिए, आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकचित्त निष्ठावान होना पड़ेगा।”

एक छात्र का सबसे महत्त्वपूर्ण गुण यह है कि वह हमेशा अपने अध्यापक से सवाल पूछे।”

“इंतजार करने वाले को उतना ही मिलता हैं, जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं।”

एपीजे अब्दुल कलाम

F.A.Qडॉ० एपीजे अब्दुल कलाम जीवन परिचय से जुड़े कुछ प्रश्न

  1. प्रश्न- एपीजे अब्दुल कलाम की जीवनी का क्या नाम है?

    उत्तर- एपीजे अब्दुल कलाम आत्मकथा का नाम “विंग्स ऑफ फायर(Wings of Fire)” है।

  2. प्रश्न- डा कलाम क्या बनना चाहते थे?

    उत्तर- कहा जाता है की डॉ कलाम साहब भारतीय वायुसेना में पायलट बनना चाहते थे।

  3. प्रश्न- एपीजे अब्दुल कलाम ने क्या आविष्कार किया था?

    उत्तर- एपीजे अब्दुल कलाम का स्वदेशी निर्मित मिसाइलें को विकसित करने में बडा योगदान माना जाता है।

  4. प्रश्न- भारत का मिसाइल मैन किसे कहा जाता है ?

    उत्तर: डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को परमाणु और मिसाइल क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के कारण ही उन्हें भारत का मिसाइल मैन कहा जाता है।

  5. प्रश्न- भारत के 11 वें और प्रथम वैज्ञानिक राष्ट्रपति कौन है?

    उत्तर- भारत के 11 वें और प्रथम वैज्ञानिक राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम है। उनके राष्ट्रपति पद का कार्यकाल 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक था।

  6. प्रश्न- एपीजे अब्दुल कलाम की मृत्यु कब हुई ?

    उत्तर- डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी का निधन 27 जुलाई 2015 को शाम के समय कार्डियक अटैक के कारण हुआ था।

आपको डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन परिचय हिंदी में जरूर अच्छा लगा होगा। अगर आप एपीजे अब्दुल कलाम निबंध हिंदी मे 10 लाइन लिखना चाहते हैं तो यह लेख उपयोगी हो सकता है।

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