वैज्ञानिक वी.एस. हुजूरबाजार | V. S. Huzurbazar Biography in Hindi

वैज्ञानिक वी.एस. हुजूरबाजार | HUZURBAZAR BIOGRAPHY IN HINDI

वैज्ञानिक वी.एस. हुजूरबाजार | V. S. Huzurbazar Biography in Hindi

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वैज्ञानिक वी.एस. हुजूरबाजार की जीवनी ( V. S. HUZURBAZAR BIOGRAPHY IN HINDI)

वी.एस. हुजूरबाजार भारत के प्रसिद्ध सांख्यिकीविद् थे। जिन्हें सांख्यिकी में विशेष योगदान के लिए जाना जाता है। उनका पूरा नाम वसंत शंकर हुजुरबाजार था। वी.एस. हुजूरबाजार पुणे विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभाग के प्रमुख रहे।

उन्होंने करीब 22 साल तक इस विश्वविद्यालय में अपना योगदान दिया। उसके बाद आप अमेरिका चले गए। जहाँ आपने डेनवर विश्वविद्यालय, कोलोराडो में प्रोफेसर के रूप में अपना योगदान दिया।

वैज्ञानिक वी.एस. हुजूरबाजार | HUZURBAZAR BIOGRAPHY IN HINDI
वैज्ञानिक वी.एस. हुजूरबाजार | HUZURBAZAR BIOGRAPHY IN HINDI

सांख्यिकी के क्षेत्र में उनके अहम योगदान को देखने हुए भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया। आईए इस लेख में हम प्रसिद्ध वैज्ञानिक वी.एस. हुजूरबाजार की जीवनी ( V. S. HUZURBAZAR BIOGRAPHY IN HINDI ) के वारें में संक्षेप में जानते हैं।

प्रसिद्ध वैज्ञानिक वी.एस. हुजूरबाजार का जीवन परिचय – Biography of VS Huzurbazar in HIndi)

प्रारम्भिक जीवन

वसंत शंकर हुजुरबाजार का जन्म 15 सितंबर 1919 को वर्तमान महाराष्ट्र राज्य के कोल्हापुर में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री शंकर अबाजी और माता का नाम श्रीमती गंगाबाई हुजुरबाजार था।

प्रो वसंत शंकर हुजुरबाजार अपने पाँच भाईबहन  में तीसरे नंबर पर थे। उनकी बड़ी की शादी प्रसिद्ध वैज्ञानिक वी वी नार्लीकर के साथ हुआ था।

शिक्षा

महान वैज्ञानिक हुजुरबाजार की प्रारम्भिक शिक्षा कोल्हापूर में ही हुई। उसके बाद हाई स्कूल की पढ़ाई उन्होंने कोल्हापुर के ही राजाराम हाई स्कूल से पूरी की। उन्होंने बी.एससी. की डिग्री उन्होंने बाम्बे (मुंबई) विश्वविद्यालय से प्राप्त किया।

तत्पश्चात एमएससी के लिए उन्होंने प्रसिद्ध बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से उन्होंने सन 1941 में सांख्यिकी में मास्टर डिग्री हासिल की।

BHU में अध्ययन के दौरान हुजुरबाजार साहब ने Rolle’s Theorem के ऊपर एक शोध पत्र लिखा था। उनका यह शोध बाद में प्रसिद्ध वैज्ञानिक वी वी नार्लीकर के टिप्पणियों के साथ बीएचयू के मैगजीन में प्रकाशित हुआ था।

उस बक्त second world वार चल रहा था। देश के अंदर सांख्यिकी में अनुसंधान के अवसर नहीं के बराबर थे। इस दौरेन विदेश जाकर उच्च शिक्षा ग्रहण करना मुस्किल थे।

फलतः उन्होंने स्नातकोत्तर के बाद कोल्हापुर के ही राजाराम कॉलेज में व्याख्याता के पद पर नियुक्त हो गए। यहाँ पर उन्होंने 1942 से 1946 तक सेवा की। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुजुरबाजार साहब उच्च शिक्षा के लिए लंदन चले गये।

यहाँ कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में सांख्यिकी पर शोध करते हुए प्रो हेरोल्ड जेफ्रीस के मार्गदर्शन में 1950 में पीएच.डी. प्राप्त किया।

कैरीयर

हजूरबाजर जी पीएच.डी. करने के बाद वे अपने देश वापस आ गये। यहाँ आकार उन्होंने कुछ समय के लिए गौहाटी विश्वविद्यालय में काम कीये। तत्पश्चात लखनऊ विश्वविद्यालय में भी उन्होंने अपना योगदान दिया।

इसके अलावा उन्होंने अर्थशास्त्र और सांख्यिकी ब्यूरो, बॉम्बे और लखनऊ विश्वविद्यालय में भी कुछ दिन काम किया।

तत्पश्चात सन 1953 में उन्होंने पूना विश्वविद्यालय से एक प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की। वे पुणे विश्वविद्यालय में सांख्यिकी विभाग के संस्थापक प्रमुख में से एक थे।

इस विश्वविद्यालय में करीव 22 साल अर्थात 1953 से 1976 तक अपना योगदान दिया। वे इस विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के पद को सुशोभित किया।

इसके पहले उन्होंने सन 1962 में कनाडा के आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी में भी दो साल तक visiting प्रोफेसर के रूप में योगदान दिया।

सन 1976 के बाद बाद डॉ हुजुरबाजार अमेरिका चले गए और वहीं वस गए। अमेरिका के कोलोराडो में स्थित डेनवर विश्वविद्यालय मे उन्होंने करीव 12 तक अतिथि प्रोफेसर के रूप में कार्य किया।

पारिवारिक जीवन

प्रो हुजुरबाजार की शादी 1960 में नागपूर में हुई थी। वसंत एस हुजुरबाजार की पत्नी का नाम प्रभावती गाडगिल थी। उन्हें स्नेहलता वी. हुजुरबाजार और अपर्णा वी. हुजुरबाजार नामक दो बेटियां हैं।

उनकी दोनों बेटी भी अमेरिका में उच्च पद पर आसीन प्रसिद्ध सांख्यिकीविद् हैं।

योगदान

वसंत एस हुजुरबाजार का सांख्यिकी के क्षेत्र में अहम योगदान माना जाता है। की। पुणे विश्वविद्यालय में सांख्यिकी विभाग की स्थापना में उनका अहम योगदान रहा। वे इस संकाय के 1976 तक प्रमुख भी बने रहे।

उनके द्वारा थ्योरी ऑफ़ प्रोबेबिलिटी पर लिखा शोध ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित किया गया। इसमें इसे ‘Huzurbazar’s Invariants‘.के नाम से जाना गया।

सम्मान व पुरस्कार

सांख्यिकी के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए वसंत एस हुजुरबाजार को कई सम्मान व पुरस्कार प्राप्त हए। प्रो हुजुरबाजार भारतीय विज्ञान अकादमी, बैंगलोर के फेलो भी चुने गये थे। साथ ही वे भारतीय विज्ञान कांग्रेस के सांख्यिकी अनुभाग के अध्यक्ष के पद पर भी रहे।

  • वर्ष 1957 – प्रो हुजुरबाजार को भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी ने अपना फेलो चुना।
  • वर्ष 1960 – कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा प्रतिष्ठित एडम्स पुरस्कार से सम्मानित
  • वर्ष 1974 – भारत सरकार द्वारा गणित में अहम योगदान के लिए ‘पद्म भूषण‘ सम्मान
  • वर्ष 1983 – अमेरिकन स्टैटिस्टिकल एसोसिएशन नें उन्हें अपना फ़ेलो (सदस्य) बनाया।

वसंत एस हुजुरबाजार का निधन

वैज्ञानिक वसंत एस हुजुरबाजार अंत समय में कैंसर की विमारी से ग्रसित हो गए थे। वसंत एस हुजुरबाजार 74 वर्ष की आयु में 15 नबम्बर 1991 को अमेरिका में निधन हो गया।

अपने 74 साल के लंबे कैरियर में उन्होंने असंख्य संस्थान और शोध छात्रों का मार्गदर्शन किया। भारत और विश्व का सांख्यिकीय समुदाय हमेशा उनके योगदान का आभारी रहेगा।

वसंत एस हुजुरबाजार कौन थे?

प्रो वसंत एस हुजुरबाजार भारतीय मूल के एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे?

वैज्ञानिक हुजुरबाजार का जन्म स्थान कहाँ है।

वैज्ञानिक हुजुरबाजार जी का जन्म स्थान भारत में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में है।

प्रो हुजुरबाजार का जन्म कब हुआ था।

डॉ हुजुरबाजार का जन्म 15 सितंबर 1919 को भारत के महाराष्ट्र राज्य के कोल्हापुर में हुआ था।

वैज्ञानिक हुजुरबाजार की मृत्यु कब हुई?

प्रो वसंत एस हुजुरबाजार का 74 वर्ष की आयु में 15 नबम्बर 1991 को अमेरिका में निधन हुआ।

हमें आशा है वैज्ञानिक वी.एस. हुजूरबाजार की जीवनी ( V. S. HUZURBAZAR BIOGRAPHY IN HINDI ) शीर्षक वाला यह लेख जरूर अच्छा लगा होगा। अपने कमेंट्स से अवगत करायें।


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