Patliputra History In Hindi | कुम्हरार पटना, जहाँ मिले प्राचीन नगर पाटलिपुत्र के अवशेष

Patliputra History In Hindi | कुम्हरार पटना, जहाँ मिले प्राचीन नगर पाटलिपुत्र के अवशेष

Facebook
WhatsApp
Telegram

कुम्हरार पटना, जहाँ मिले प्राचीन शहर पाटलिपुत्र के अवशेष Patliputra History In Hindi

पाटलिपुत्र के बारे में बताएं

वैसे तो वर्तमान पटना शहर के निर्माण का श्रेय शेरशाह सूरी को जाता है जिन्होंने मुगल बादशाह हुमायूँ को हराकर इस नगर को बसाया। लेकिन प्राचीन काल में यह पाटलीपुत्र के नाम से जाना जाता था। पटना के कुम्हरार में प्राचीन पाटलीपुत्र के अवशेष पाये गये हैं।

कुम्हरार पटना (पाटलिपुत्र) स्टेशन से महज 6 की मी की दूरी पर स्थित है। कहते हैं की इसी स्थान पार प्राचीन एतिहासिक स्थल पाटलीपुत्र मौजूद था। पुरातात्विदों ने खुदाई के पश्चात प्राचीन पाटलिपुत्र शहर के पुरातात्विक अवशेष ढूंढ निकाले हैं।

मध्यकाल में पाटलिपुत्र 1000 वर्ष पुराना था यह पुरातात्विक अनुसंधानो से पता चला। पुरातात्विक अनुसंधानो के आधार पर यह अनुमान लगाया जाता है की पाटलिपुत्र का इतिहास करीब 490 ईसा पूर्व से है।

पाटलिपुत्र (पटना) का इतिहास – Patliputra History In Hindi

भारत के प्रसिद्ध राज्य बिहार की राजधानी पटना को प्राचीनकाल में पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था। पवित्र पावन गंगा के दक्षिणी छोर पर स्थित पाटलिपुत्र का इतिहास करीब 2000 वर्ष पुराना है। पाटलीपुत्र की गिनीति प्राचीन काल से ही भारत के प्रमुख नगरों में की जाती है।

यह अवशेष आज भी मौर्य तथा गुप्त वंश के राजाओं के समृद्ध साम्राज्य की कहानी कहने के लिए पर्याप्त है। मौर्य कालीन प्राचीर के अवशेष, कुम्भरार के अलावा लोहानीपुर, संदलपुर बहादुरपुर और बुलंदीबाग़ में भी खुदाई के दौरान मिले हैं।

Patliputra History In Hindi - कुम्हरार Patna
मौर्य कालीन पिलर के अवशेष – Image credit – en.wikipedia.org

खुदाई के दौरान उस काल में निर्मित 80 स्‍तंभ वाले एक विशाल हॉल के होने के प्रमाण मिला है। इतिहासकार इसे अशोक के शासनकाल में निर्मित मानते हैं। कहा जाता है की इस हॉल का निर्माण संभवतः सभागार के रूप में हुआ होगा। जहाँ बौद्ध धर्म की तृतीय बौद्ध संगती का आयोजन किया गया था।

पाटलिपुत्र के नाम की कहानी – about history of Patliputra in Hindi

पाटलीपुत्र का इतिहास बहुत ही पुराना है। कहते हैं की एक राजा था जिसका नाम पुत्रक था। उसी राजा ने अपनी रानी पाटली के नाम पर इस नगर को आबाद किया और इसका नाम पाटलीपुत्र रखा। उसके बाद उदपी नामक राजा ने इसी के साथ एक और नगर बसाया जिसका नाम कुसुमपुर रखा गया।

कलांतर में दोनो नगर मिलाकर एक महानगर हो गया। जहॉं से आजतशत्रु, चन्द्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक ने अपने विशाल मगध साम्राज्य का संचालन किया। चन्द्रगुप्त मौर्य ने इस किले के चारों तरफ लकड़ी की प्राचीर(किले का बाहरी दीवार)का निर्माण किया।

इस प्राचीर के अंदर लकड़ी के ही सुंदर महल बनवाये गये। यूनानी राजदूत जब चन्द्रगुप्त के दरबार में आया था तब उन्होंने इस महल की अनुपम सुंदरता को देखकर आश्चर्य चकित रह गये थे।

कलांतर में सम्राट अशोक ने इस प्राचीर के अंदर पत्थर से एक विशाल महल का निर्माण कराया। इस महल को जब चीनी भ्रमणकारी फहयन देखकर दंग रह गये थे। महल को देखकर वे अचंभित रह गये की पत्थर से भी इतना सुंदर महल बनाया जा सकता है।

सबसे पहले अजातशत्रु ने बनाई थी अपनी राजधानी

इतिहासकारों के अनुसार सबसे पहले अजातशत्रु ने अपने राजधानी राजगृह से स्थानतारित कर पाटलीपुत्र में ही बसाया था। क्योंकि सामरिक दृष्टिकोण से पाटलीपुत्र राजगृह की तुलना में काफी सुरक्षित समझा गया।

अजातशत्रु के बाद पाटलीपुत्र, चन्द्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक की राजधानी रही। इन राजाओं ने पाटलिपुत्र से शासन का संचालन करते हुए अपने सीमाओं का विस्तार दक्षिण भारत से लेकर अफगानिस्तान तक किया।

इस प्रकार चन्द्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक अपने साम्राज्य का सम्पूर्ण विस्तार किया और अखंड भारत को एक मूर्त रूप दिया। कहते हैं की लगभग करीव 600 ईसा पूर्व पाटलीपुत्र बहुत ही समृद्ध शहर था।

पाटलिपुत्र का उल्लेख मेगास्थनीज द्वारा लिखी गयी प्रसिद्ध पुस्तक इंडिका में मिलता है। जब  यूनान के राजदूत के रूप में मेगास्थनीज, चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था।

मेगास्थनीज ने की थी नगर की तारीफ

मेगास्थनीज ने अपनी पुस्तक “इंडिका” में पाटलिपुत्र के लिए ‘पालीबोथ्रा‘ शब्द का प्रयोग किया है। उन्होंने अपनी पुस्तक में पाटलीपुत्र की संरचना और नगर व्यवस्था के बारें में भी जिक्र किया है।

तब यहाँ की राज्य व्ययवस्था और महल को देखकर बहुत खुश हुआ था। उन्होंने अपनी पुस्तक में पाटलीपुत्र का वर्णन करते हुए लिखा है की इस नगर का विस्तार गंगा के किनारे करीब 14 की मी तक फ़ैला था।

लकड़ी के विशाल प्राचीर और गहरी खाई से इस नगर को सुरक्षित किया गया था। उनके अनुसार पाटलीपुत्र समान्तर चतुर्भुज जैसा शहर था।

कुम्हरार पार्क पटना

वर्तमान में इस स्थान को एक पार्क का रूप दे दिया गया है। जिसमें एक संग्रहालय का का निर्माण किया गया हैं। इस संग्रहालय में खुदाई से प्राप्त चीजों को पर्यटक को देखने के लिए सुरक्षित रखा गया है।

संग्रहालय में सुरीक्षित हैं अवशेष

Patliputra History In Hindi - कुम्हरार Patna
प्राचीन शहर पटलीपुत्र के अवशेष / Image credit – en.wikipedia.org

इस संग्रहालय में खुदाई से प्राप्त ताम्बे के बर्तन, उस काल के आभूषण, सिक्के, मिट्टी के बर्तन, हाथी दांत से निर्मित सामान,  आदि संरक्षित हैं। हर बर्ष लाखों पर्यटक इस इतिहासिक स्थल को देखने पटना जाते हैं।

पाटलिपुत्र की विशेषताओं का वर्णन करें।

मौर्य वंश के शासनकाल में पाटलिपुत्र मगध साम्राज्य की राजधानी थी। जिसका विस्तार पूरे भारत में था। पाटलिपुत्र के सबसे महान शासक सम्राट अशोक कहलाये। जिन्होंने कलिंग की युद्ध के बाद बौद्ध धर्म को अपना लिया था।

FAQ

पाटलिपुत्र का इतिहास कितना पुराना है

गंगा के दक्षिणी छोर पर अवस्थित पाटलिपुत्र का इतिहास लगभग 2000 वर्ष प्राचीन माना जाता है। प्राचीन समय से ही पाटलीपुत्र की गिनती भारत के प्रमुख नगरों में होती है।

पाटलिपुत्र किस नदी के किनारे अवस्थित है?

भारत की प्राचीन नगर पाटलिपुत्र गंगा नदी के किनारे स्थित है।

पाटलीपुत्र किस साम्राज्य की राजधानी थी ?

प्राचीनकाल में पाटलिपुत्र मौर्य साम्राज्य के अधीन मगध की राजधानी थी।

पाटलिपुत्र वर्तमान में किस नाम से जाना जाता है?

पाटलिपुत्र को वर्तमान में पटना के नाम से जाना जाता है।

आपको Patliputra History In Hindi – कुम्हरार पटना के बारें में यह जानकारी जरूर अच्छी लगी होगी, अपने सुझाव से जरूर अवगत करायें।

इन्हें भी पढ़ें –


Leave a Comment

Trending Posts